Tarunkumar
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अगर आज हिंदू चुप रहे और समर्थन नहीं किया, तो जज हिंदुओं के हित में फैसला देने से डरेंगे। मद्रास उच्च न्यायालय के जज जी.आर. स्वामीनाथन का समर्थन करो हिन्दूओ
12/12/2025
मंदिर की 28 बीघा जमीन पर कब्जा कर अब्दुल हफीज ने बनाया था 'आलीशान' मकान, पुलिस ने चला दिया बुलडोजर, देखें तस्वीरेंराजस्थान के झालावाड़ (Jhalawar) जिले में मंगलवार सुबह प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर (Bulldozer Action) श्रीनाथ जी मंदिर (Shrinathji Temple Nathdwara) की करीब 28 बीघा जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त करा लिया.इस जमीन का नाम 'श्रीकृष्ण वाटिका' है, जिस पर सालों से कुछ दबंग और आपराधिक लोगों ने कब्जा कर रखा था. वे इस करोड़ों की जमीन पर इमारत बनाकर आराम से रह रहे थे. लेकिन भारी पुलिसबल की मौजूदगी में आज उस इमारत को ध्वस्त कर दिया गया.
मंदिर कमेटी ने DM से की थी शिकायत
इस पूरे ऑपरेशन को जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ के कहने पर शुरू किया गया. श्रीनाथ जी मंदिर मंडल के बड़े अधिकारी ने कलेक्टर को एक चिट्ठी लिखी थी और उनसे मदद मांगी थी कि उनकी जमीन को खाली कराया जाए. चिट्ठी मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया. एसडीएम अभिषेक चारण ने इस टीम की कमान संभाली. उनके साथ राजस्व विभाग के कई अफसर, तहसीलदार और मंदिर मंडल के लोग भी शामिल थे.
Photo Credit: NDTV Reporter
100 से ज्यादा जवान मौके पर मौजूद
प्रशासन जानता था कि कब्जा करने वाले लोग सीधे-सादे नहीं हैं, बल्कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग हैं. इसलिए, वहां किसी भी तरह की गड़बड़ी या लड़ाई-झगड़े को रोकने के लिए भारी पुलिस बल बुलाया गया. मौके पर एडिशनल एसपी चिरंजी लाल मीणा, सीओ (सर्किल ऑफिसर) हर्षराज खरेड़ा, सीओ साइबर और ट्रैफिक समेत कई थानों के थानाधिकारी और 100 से ज्यादा पुलिस जवान मौजूद थे. पुलिस ने चारों तरफ घेरा बना लिया, ताकि कब्जा हटाने का काम शांति से और बिना किसी रुकावट के पूरा किया जा सके. पुलिस की इतनी बड़ी तैयारी देखकर, कब्जा करने वालों को ज्यादा विरोध करने की हिम्मत नहीं हुई.
Photo Credit: NDTV Reporter
ये जमीन 'क्राइम स्पॉट' क्यों बनी थी?
प्रशासन के मुताबिक, यह जमीन सिर्फ कब्जे में नहीं थी, बल्कि यह जगह बड़े-बड़े अपराधों को अंजाम देने का अड्डा बन चुकी थी. कब्जा करने वाले लोगों का रिकॉर्ड बहुत खराब है. इनमें अब्दुल हफीज मेन आदमी था, जो अब मर चुका है. लेकिन, उस पर 12 मुकदमे दर्ज थे. इन मुकदमों में चोरी, डकैती, आर्म्स एक्ट और NDPS एक्ट जैसे बेहद संगीन आरोप शामिल थे. दूसरा आरोपी अरबाज उर्फ शब्बीर है. इस पर भी 10 मुकदमे हैं, जिनमें मारपीट, जान से मारने की कोशिश, आर्म्स एक्ट और NDPS एक्ट के केस शामिल हैं. बाकी लोगों, जैसे सलमान और अब्दुल रशीद, पर भी NDPS और आर्म्स एक्ट के कई मुकदमे दर्ज हैं.
पुलिस का कहना है कि इन लोगों की वजह से यह पूरा इलाका असुरक्षित हो गया था. यह कार्रवाई करने से न केवल मंदिर की जमीन वापस मिली है, बल्कि इलाके में सुरक्षा और शांति भी वापस आई है.
12/12/2025
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12/12/2025
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12/12/2025
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पवन कल्याण ने बांटा अपने दिल का दर्द :
थिरुप्परनकुंद्रम भगवान मुरुगन के छह धामों में पहला माना जाता है। पहाड़ी पर दीप जलाने की परंपरा बहुत पुरानी है।
लेकिन अफ़सोस की बात है कि आज हिंदुओं को अपनी ही परंपराओं के लिए कोर्ट की मदद लेनी पड़ रही है।
और दुख तो ये है कि कानूनी लड़ाई जीतने के बाद भी अगर हम अपनी ही जगह पर एक साधारण, शांत अनुष्ठान नहीं कर सकते, तो फिर अपने ही देश में हमें न्याय कहाँ मिलेगा?”
“सच्चाई ये है कि दीपदान का हमारा अधिकार हाईकोर्ट ने दो बार माना—पहले सिंगल जज ने, फिर डिविज़न बेंच ने। यानी क़ानून हमारी तरफ था।
फिर भी, प्रैक्टिकली हमें पीछे हटना पड़ा। ये सोचना ही अजीब है कि कोई धार्मिक उत्सव एक हफ्ते बाद मनाया जा सकता है। कुछ चीज़ों का अपना ही समय होता है—जिन्हें बदला नहीं जा सकता।”
“लेकिन इस बार कार्तिगाई दीपम का वो पवित्र पल हमसे छिन गया। क्यों?
क्योंकि हिंदुओं को आसानी से इग्नोर किया जा सकता है—कभी सरकारें, कभी प्रशासन, कभी एनजीओ, कभी ‘बौद्धिक’ गैंग।
हर बार हिंदू ही एडजस्ट करते हैं।
हक़ मिल गया, पर अनुष्ठान खो गया।”
“इसीलिए अब वक्त आ गया है कि हम सिर्फ कोर्ट की जीत से ज़्यादा की मांग करें—हमें एक सनातन धर्म रक्षा बोर्ड चाहिए, जहाँ भक्त मिलकर अपने मंदिरों और परंपराओं का प्रबंधन कर सकें।”
“कुछ लोग खुलेआम हिंदू रीति-रिवाजों का मज़ाक उड़ाते हैं। क्या वे ऐसा किसी और धर्म के त्योहार पर करने की हिम्मत करते हैं?
क्या हमारे अधिकार (अनुच्छेद 25) सिर्फ कागज़ पर रह गए हैं?
क्या कोई अधिकारी हाईकोर्ट के फैसले को अपनी मर्ज़ी से पलट सकता है?”
“जो बात सबसे ज़्यादा चुभती है, वो ये कि प्रशासन बार-बार हिंदू मंदिरों और श्रद्धालुओं के खिलाफ़ खड़ा दिखता है—और कोई जवाबदेही भी नहीं होती।”
“हिंदुओं को भी बाकी धर्मों की तरह एकजुट होना पड़ेगा।
जब तक हम जाति, भाषा, क्षेत्र में बँटे रहेंगे, हमारी परंपराएँ हमेशा टारगेट होती रहेंगी।
अगर हम एक न्यूनतम साझा मुद्दे पर भी नहीं जुड़ पाए, तो धीरे-धीरे ये भावना खत्म हो जाएगी।”
“मेरी बस यही इच्छा है कि कश्मीर से कन्याकुमारी और कामाख्या से द्वारका तक हर हिंदू अपनी ही भूमि पर हो रहे अपमान को महसूस करे और उसके खिलाफ़ उठ खड़ा हो।
— पवन कल्याण
19/04/2025
भविष्य की तैयारियां देखो उनकी
पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया क्षेत्र में एक भी मुस्लिम
परिवार नहीं है, लेकिन फिर भी वहां सैकड़ों मुस्लिम
बच्चों के नाम पर जन्म प्रमाणपत्र जारी हो गये......?
झारखंड-बंगाल सीमा से सटा य संवेदनशील इलाका
है सुरक्षा के लिये
फर्जी जन्म प्रमाणपत्र के जरिए घुसपैठियों को भारत का नागरिक बनाना और फिर.. उन्हें वोटर कार्ड, आधार, पासपोर्ट दिलवाकर सैटल करना
भारत के साथ बहुत बड़ा षड्यंत्र हो रहा है कबाइली विपक्ष मिलकर भारत को कबाइली देश बनाने के लिए हर स्तर पर ताकत से प्लांनिग से भिड़े है।
भारत को सतर्क होना ही पड़ेगा ।
એક નંબર હો 🚩🚩🚩🚩🚩
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