Nice Thoughts
Always think better...
06/10/2025
अब what's aap छोड़ो स्वदेशी Arratai Use करो
Zoho Corporation के फाउंडर और Arattai ऐप के पीछे की सोच रखने वाले श्रीधर वेम्बु ने वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना भी कम लोग कर सकते थे।
उन्होंने अमेरिका की हाई-प्रोफाइल नौकरी छोड़कर भारत के गांव में रहकर एक ग्लोबल सॉफ्टवेयर कंपनी खड़ी कर दी। 🌍💻🇮🇳
👉 असली प्रेरणा तो यही है – सपना गांव से भी दुनिया तक पहुंच सकता है! 🌱🌟
06/10/2025
ज़ोहो के उला ब्राउज़र को एक मजबूत विकल्प कहा जा रहा है - और गूगल क्रोम से भी बेहतर - क्योंकि यह उपयोगकर्ता डेटा से समझौता किए बिना गोपनीयता, गति और उत्पादकता पर केंद्रित है। क्रोम के विपरीत, जो विज्ञापनों और एनालिटिक्स के लिए आपकी ऑनलाइन गतिविधि को ट्रैक करता है, उला उपयोगकर्ता डेटा को इकट्ठा, स्टोर या बेचता नहीं है। यह बिल्ट-इन एड ब्लॉकर, ट्रैकर सुरक्षा, और फिंगरप्रिंटिंग रोकथाम के साथ आता है, जिससे आपको अधिक सुरक्षित ब्राउजिंग अनुभव मिलता है। 🚀
Ulaa में कई ब्राउजिंग मोड भी हैं (काम, व्यक्तिगत, बच्चे, डेवलपर, आदि। ) गतिविधियों को अलग रखने और फोकस को बढ़ावा देने के लिए। यह क्रोम की तुलना में कम मेमोरी और बैटरी की खपत करता है, जिससे इसे डेस्कटॉप और मोबाइल दोनों पर तेज और चिकनी बनाता है। एक और प्रमुख प्लस: कोई गूगल पारिस्थितिकी तंत्र लॉक-इन नहीं - उला ने बुकमार्क, टैब और पासवर्ड को तीसरे पक्ष के साथ साझा किए बिना सिंक किया।
संक्षेप में, ज़ोहो उला को आपको नियंत्रण, गोपनीयता और प्रदर्शन देने के लिए डिज़ाइन किया गया है - वह सब कुछ जो क्रोम उपयोगकर्ता पूछ रहे हैं लेकिन कभी भी पूरी तरह से प्राप्त नहीं हुआ। 🔒🌐
06/10/2025
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी ज़िले के अघेरा गाँव की 17 वर्षीय पूजा पाल ने यह साबित कर दिया कि सच्ची प्रतिभा और मेहनत किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती। बिना बिजली और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं वाले घर में रहते हुए भी उन्होंने किसानों के लिए एक अनोखा धूल-रहित थ्रेशर (मसूर निकालने की मशीन) का आविष्कार किया। 🌾⚙️
यह मशीन खेतों में काम करते समय उड़ने वाली खतरनाक धूल को रोकती है, जिससे किसानों और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा होती है। पूजा को इसका विचार तब आया जब उन्होंने आठवीं कक्षा में देखा कि उनके स्कूल के पास चल रहे थ्रेशर से इतनी धूल उड़ रही थी कि बच्चों को सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। इसी समस्या को हल करने के लिए उन्होंने अपने विज्ञान शिक्षक राजीव श्रीवास्तव की मदद से मात्र 3,000 रुपये की लागत में यह मॉडल तैयार किया। 💡
इस मशीन में पानी की टंकी, पंखा और मेश लगाया गया है, जिससे धूल इकट्ठी हो जाती है और बाहर नहीं फैलती। इतना ही नहीं, पूजा के इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला और उन्होंने जापान के प्रतिष्ठित साकुरा साइंस हाई स्कूल कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। 🌍🇮🇳
पूजा की कहानी हमें यह याद दिलाती है कि संसाधनों की कमी कभी भी सच्चे जज़्बे को रोक नहीं सकती। ग्रामीण भारत की यह बेटी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो दिखाती है कि नवाचार और मेहनत से समाज में बड़ा बदलाव संभव है। ✨
01/04/2025
एक पत्नी ने अपने दिवंगत पति की कमीज़ को आठ वर्ष तक खूंटी पर लटका कर रखा। उसने उसे कभी वहां से नहीं उतारा। वह हमेशा उनकी जेब में पैसे रखती थी। जब भी उसके बच्चे पैसे मांगते, तो वह धीरे से कहती,
"अपने पिता की जेब से निकाल लो।"
वह ऐसा इसलिए करती थी ताकि उनके बच्चे उन्हें कभी न भूलें। यहाँ तक कि सबसे छोटे पलों में भी उनकी मौजूदगी हमेशा उनके जीवन में बनी रहे।
एक माँ प्यार, त्याग और अंतहीन भक्ति की पाठशाला होती है।
🙏❤️
#पिता #मां #पाठशाला #अहसास #सुकून #जेब
04/10/2024
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