Educational Events
Educational and motivational stories publish on this page. our main target is provide good and moral knowledge through stories and moral characters.
अगर आईने नहीं बिक रहे हो तो मुखौटे बेचने का धंधा शुरू कर दो ऐसा चलेगा कि खुद के काम के लिए भी फुर्सत नहीं मिलेगी।
16/05/2026
मेले में डोही खरीदते लोग।
16/05/2026
उल्लू
Teaching is man making work.
14/05/2026
बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था
हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा....
फोटो क्रेडिट:- Prema Ram
14/05/2026
#पीलू/ #कोकड़. #थार_का_मेवा
पश्चिमी राजस्थान के थार के रेगिस्तान में जाल (जाळ)के पेड़ पाये जाते है।जाल के पेड़ पर छोटे-छोटे फल लगते है जिन्हें पीलू कहते है।पीलू को पकने के बाद बहुत स्वादिष्ट होता है साथ ही पीलू को छाया में सुखाकर संरक्षित भी किया जाता है जिसे बाद में खाते है,सूखे पीलू को कोकड़ कहा जाता है।इस क्षेत्र में जब बहुत तेज गर्मी पड़ती है व तेज लू चलती है तो पीलू बहुत रसीले बनते है।इस साल रेगिस्तान में बहुत ज्यादा गर्मी व लू चल रही है फलतः पीलू भी इस बार अच्छे आये हैं।पीलू खाना बहुत ही स्वास्थ्य वर्धक होता है।पीलू विटामिन सी व कार्बोहाइड्रेट से भरपुर होठे हैं यह अत्यधिक गर्मी से रक्षा करते है।लू के प्रभाव को कम करने में पीलू रामबाण औषधि मानी जाती है आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार इसका सेवन पेट की बीमारियों व पथरी से बचाव करने में भी सहायक है।पीलू खाने से न केवल शरीर मे पानी की पूर्ति होती है बल्कि लू लगने की संभावना भी कम हो जाती है।इसकी एक खास विशेषता यह भी है कि पीलू एक एक कर चूसते है तो जीभ व मुंह में छाले हो जाते जबकि आठ-दस पीलू साथ साथ खाने पर ऐसा नहीं होता।पीलू को #थार का मेवा भी कहा जाता है।मारवाड़ क्षेत्र में जाल के पेड़ हर गांव में नहीं पाये जाते तो गर्मियों की छुट्टियों के दौरान बच्चे पीलू लेने के लिए ननिहाल,बुआ,मौसी आदि रिश्तेदारों के घर पीलू लेने जाते रहते है।लोग अपने जिन रिश्तेदारों के वहां जाल के पेड़ नहीं हो उनके तोहफ़े के रूप में भी पीलू पहुंचाते है।कोकड़(सूखे पीलू)अक्सर तोहफ़े में भेजे जाते रहे हैं।थार के रेगिस्तान के लोगों में अपणायत(अपनापन) बहुत गहरा है पीलू लेने के लिए किसी के भी खेत की जाल पर जा सकते है कोई मनाही नहीं है।ननिहाल वगेरह पीलू लेने जाने पर वहां नाना के परिवार सहित उनके पड़ोस के बच्चे भी पीलू इक्कठे करने में मदद कर देते हैं।मेरे विद्यार्थी जीवन में गर्मियों की छुट्टियों में मैं पीलू लाने 35 किलोमीटर दूर ननिहाल सांजटा गांव जाता रहता था।वहां नानी के पास दो-तीन दिन पीलू इक्कठा करता व ले आता था नानी आलण (एक व्यंजन)बहुत अच्छा बनाती व मुझे प्यार से खिलाती थी।हालांकि नानी अब इस दुनियां में नहीं रही तो अब वो आलण जीमने को नहीं मिलता न अब पीलू लाने ननिहाल जाने की फुर्सत रहती है।हाँ मामा कभी कभार किसी के साथ पीलू भिजवा देते हमारे लिए।
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#पीलू #जाळ #थार_की_अपणायत
#पीलू_लाता_रिश्तों_में_प्रगाढ़ता
©
Moola Ram Machra
14/05/2026
"जैसी #करणी वैसी #भरणी" उस कहावत का अर्थ होता है जैसा कर्म करोगे वैसा फल पाओगे।लेकिन यहां फोटो में दिख रही भरणी घी भरने के काम आती है व करणी कारीगर के काम आती है इनका उस कहावत से कोई लेना देना नहीं है।
08/05/2026
जूंआड़े
बैल के पीछे हल जोतने में प्रयुक्त युक्ति।
07/05/2026
झेरना व थेबा.......
07/05/2026
वास्तु पुराने जमाने की।
05/05/2026
चित्रकारी.......
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