Bijendra Rai
स्वतंत्र विचारक ( आर्थिक , राजनैतिक , ऐत Nationalist
" कितना अजीब धुआँ हैं ,केवल पराली जले तो दिल्ली तक पहुंच जाता हैं। सारी फसल जल जाए तो तहसील तक नहीं पहुंच पाता हैं "।
05/11/2023
न्यूजीलैंड ने 2003 वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका को हराया।
न्यूजीलैंड ने 2007 वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका को हराया।
न्यूजीलैंड ने 2011 वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका को हराया।
न्यूजीलैंड ने 2015 वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका को हराया।
न्यूजीलैंड ने 2019 वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका को हराया।
2023 का वर्ल्ड कप शुरू हुआ। कायास लगाए जा रहे थे इस बार भी न्यूभीमलैंड आसानी से दक्षिण अफ्रीका को हरा देगी। सभी क्रिकेट पंडितो का कहना था अफ्रीकी टीम में कोटा सिस्टम हैं इस वजह से ये बार बार न्यूभीमलैंड से बुरी तरह मात खाती हैं या फिर सेमीफाइनल तक आते आते चोक कर जाती हैं।
लेकिन इस बार इतिहास बदलने वाला था क्योंकि इस बार अफ्रीकी टीम का सेनापति बन कर आया था यहां का मूलनिवासी बहुजन नायक ' तेंबा वावुमा ' ! इसकी अगुवाई में न्यू भीम लैंड की टीम को विश्व कप इतिहास में तीसरी सबसे बड़ी करारी शिकस्त मिली। नीचे तस्वीर में डेढ़ सौ रुपए वाली चादर ओढ़े दिख रहा महामानव कोई और नहीं बहुजन नायक तेंबा ववुमा हैं। सादगी की मिसाल हैं यह सख्स जो जीत कर भी विनम्र बना हुआ है।
04/11/2023
मेरी एक बात का जवाब अपने दिल पर हाथ रखकर दीजिये कि मोहम्मद शमी जो कि धर्म से मुसलमान हैं अगर उनकी जगह किसी हिन्दू बॉलर का उनकी पत्नी से तलाक हुआ रहता तो क्या मीडिया हर 5 विकेट लेने के बाद क्या उसी तरह हिन्दू बॉलर के पत्नी के पास पहुँच जाता जैसे हसीन जहाँ के पास पहुँच जाता है ताकि एक दिन की ख़ुशी भी शमी को न मिले?
दूसरा क्या दुबई वाया पाकिस्तान मैच फिक्सिंग कनेक्शन किसी हिन्दू क्रिकेटर पर उनकी पत्नी लगाती तो बीसीसीआई इसे पारिवारिक विवादित बयान मानकर पल्ला झाड़ लेता या शमी की तरह ही उसे खेलने से प्रतिबन्ध करता और उसे उसी तरह देशभक्ति साबित करने बोलता जैसे शमी को करना पड़ता है खासतौर पर पाकिस्तान के खिलाफ मैच पर?
तीसरा क्या गारंटी है कि जो लोग आज वर्ल्ड कप मैच में लगातार 3 मैचों में दो बार 5 विकेट और एक मैच में 4 विकेट सहित 14 विकेट लेने वाले शमी को किसी मैच में पिटने पर ट्रोल नहीं करेंगे खासतौर पर अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान जैसे देशों के खिलाफ अगर ज्यादा रन देकर विकेट न मिले तो?
चौथा शमी के साथ उनके बुरे वक़्त में कौन खड़ा मिला, अभी वाहवाही करने वाले देश के लोग, बीसीसीआई या सिर्फ विराट कोहली?
बीसीसीआई और क्रिकेट पंडित कहते हैं शमी को हम मौके दे रहें है. कोई भेदभाव नहीं हो रहा है तो यह जवाब कौन देगा वर्ल्ड कप का सबसे सफल गेंदबाज 4 मैच में बेंच पर क्यों बैठा था? उनके हाथ से पानी पीने की तलब क्यों लगी थी? दूसरों से दोगुनी मेहनत और 14 विकेट उखाड़ने के बावजूद यह यकीन क्यों नहीं होता कि टीम में अब जगह पक्की है शमी की?
क्या इस देश के लोग शमी जैसे क्रिकेटर और इंसान को डीजर्व करता है. जिसे हमने साथ न देकर 3 बार आत्महत्या की कोशिश की ओर धकेला. शमी बाकी क्रिकेटर से अलग थलग रहता है. बार -बार आत्महत्या की कोशिश ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर की तरह है. उन्हें देश के लोगों से सिर्फ प्यार नहीं भरोसा चाहिए. हम अगर भरोसा करते तो ये दिन कभी नहीं आता.एक इन्टरव्यू में पत्रकार ने उनसे पूछा आपकी बीवी ये आरोप लगाती है कि आप देश को धोखा देते है इसमें कितनी सच्चाई है तब मोहम्मद शमी बोलते है कि अपने देश से धोखा करने से पहले मैं मरना पसन्द करूँगा.
सुना आपने अपने देश से धोखा करने से पहले मैं मरना पसंद करूंगा.
शमी शर्मिला सा है. अभी -अभी इंग्लिश सीखा है.कड़ी मेहनत,पिता के त्याग और दुआओं ने उसे अंतराष्ट्रीय क्रिकेटर बना दिया है.बाल ट्रांसप्लांट भी करवाया है. हैंडसम लग रहा है. प्लीज उसे जीने दीजिये, खुश रहने दीजिये. कपिल देव ने आज से दशकों पहले जो बीज बोया था शमी उसी बीज का एक बड़ा पौधा है. शमी लव यू ❤️
01/11/2023
उत्तर प्रदेश के अमरोहा के लोकल टूर्नामेंट में तौसीफ अली नाम के एक तेज गेंदबाज का बोलबाला था। तौसीफ तेज गेंदबाजी का शौक और हुनर दोनो रखते थे। लोग बाग सलाह भी देते कि क्लब में जाओ, ट्रेनिंग करो डोमेस्टिक में जा सकते हो। पर तौसीफ अली किसान परिवार से थे, डोमेस्टिक या नेशनल के लायक तैयारी के लिए न पैसे थे, ना ही उम्र बची थी। एक समय आया जब तौसीफ अली ने स्वीकार कर लिया कि शायद ये खेती किसानी ही उनका मुकद्दर है, प्रोफेशनल क्रिकेट के लिए देर हो चुकी है। तौसीफ अली भारतीय टीम के फास्ट बॉलर का सपना दिल में दफन करके अपनी आम जिंदगी में लौट आए। शादी हुई, खेती किसानी से परिवार पाला। पांच बेटे हुए, और सबके अंदर क्रिकेट को लेकर दीवानगी। तौसीफ अली को मालूम था कि उनसे कहा कहा गलती हुई थी, क्या क्या नही हुआ जिसकी वजह से उन्हें अपने सपने मारने पड़े। वो अपने बच्चो के साथ ऐसा कुछ नही होने देना चाहते थे। पंद्रह साल तक अपने बेटे को गेंदबाज बनने के लिए खुद ट्रेन करते रहे, अपने तजरबे अपनी गलतियों का निचोड़ उन्होंने अपने बेटे की राह में रख दिए। बेटे को बस चलना था और वो हासिल करना था जिसे हासिल करने की जद्दोजहद का मौका भी उसके अब्बू को हासिल नही हुआ था।
पंद्रह साल की उम्र तक बेटे को ट्रेन करने के बाद तौसीफ अली अपनी सारी जमा पूंजी इकट्ठा करके अपने बेटे को लेकर मुरादाबाद की एक क्रिकेट एकेडमी में कोच बदरुद्दीन के पास लेकर गए। कोच के सामने बेटे ने गेंद फेंकना शुरू किया तो बदरुद्दीन ने तुरंत उसे अपना शागिर्द कुबूल कर लिया। वो लड़का इस कदर मेहनती था कि उसने एक दिन भी ट्रेनिंग का नागा नही किया,मुरादाबाद में ट्रेनिंग के दौरान अगर कोई मैच खत्म होता तो वो लड़का पुरानी इस्तेमाल हुई गेंद मांगने खड़ा हो जाता, वजह पूछी गई तो बताया कि इन पुरानी गेंदों से मैं रिवर्स स्विंग की प्रैक्टिस करूंगा। बदरुद्दीन को पूरा यकीन था कि इस लड़के को अंडर 19 के ट्रायल में तो सिलेक्टर उठा ही लेंगे। इसी उम्मीद के साथ शमी ने ट्रायल दिया, सोच बदरुद्दीन के मुताबिक सिलेक्टर के पक्षपातपूर्ण रवैए के कारण शमी को मौका नहीं दिया गया। बदरुद्दीन से कहा गया कि अगले साल आइए इसे लेकर, लड़के में जान है, कब तक दूर रखेंगे सिलेक्टर इसे इंडियन कैप से। बदरुद्दीन दूर दर्शी आदमी थे, बोले इस लड़के का एक साल और दाव पर नही लगाना है, उन्होंने लड़के के पिता तौसीफ अली से बात की और कहा कि इसे आप कलकत्ता भेजिए। वहा क्लब खेलेगा तो आज नही कल स्टेट टीम में आ ही जायेगा। तौसीफ अली के पास ये जुआ खेलने की सिर्फ एक वजह थी अपने बेटे की काबिलियत और जुनून पर उनका भरोसा।
कलकत्ता आकर उस लड़के ने एक क्लब ज्वाइन कर लिया,पर स्टेट और नेशनल टीम का रास्ता दूर भी था और मुश्किल भी। जुनून के भरोसे वो बंगाल तो पहुंच गया, पर जुनून न तो पेट भरता है न सर पर छत रखता है।पर दुनिया में ऐसे लोगो की कमी नही जो जुनून और काबिलियत ही ढूढते है लोगो में,ऐसे ही एक शख्स थे देवव्रत दास, जो की उस वक्त बंगाल क्रिकेट के असिस्टेंट सेकेट्री की हैसियत पर थे। वो उस लड़के की काबिलियत से इतने इंप्रेस हुए कि कलकत्ता में बेघर उस लड़के को अपने साथ रहने के लिए रख लिया। फिर उन्होंने बंगाल के एक चयनकर्ता बनर्जी को उस लड़के की प्रतिभा पर नजर रखने को कहा।बनर्जी ने लड़के को गेंद फेंकते देखा और उसे बंगाल की अंडर 22 की टीम में सिलेक्ट कर लिया। देवदत्त दास से जब उस लड़के पर ऐसी मेहरबानी की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि "इस लड़के को रूपया पैसा नही चाहिए,इसे बस एक चीज नजर आती है वो है पिच के आखिर में गड़े हुए तीन स्टंप। स्टंप से गेंद की टकराने की आवाज उस लड़के को इतनी पसंद है कि उसके ज्यादातर विकेट बोल्ड आउट ही है।"
वहा से निकलकर उस लड़के ने मोहन बागान क्लब ज्वाइन किया, वहा ईडन गार्डन के नेट्स में उसने सौरव गांगुली को गेंदबाजी की। सौरव के साथ भी वही हुआ, जो अब तक हर उस इंसान के साथ हो रहा था जो उस लड़के को गेंद फेंकते हुए देख रहा था। गांगुली इंप्रेस हुए और फिर उनकी रिकमेंडेशन पर शमी को बंगाल की 2010–11 की रणजी टीम में चुन लिया गया। कुछ साल की मेहनत और जद्दोजहद के बाद 6 जनवरी 2013 के दिन पाकिस्तान के खिलाफ इस लड़के को इंडियन टीम की डेब्यू कैप दी गई। जिसे पहनने के बाद आज तक वो लड़का उस टोपी नंबर 195 का रुतबा दिन ब दिन बढ़ाए जा रहा है। हजारों दर्शको के बीच में, वो लड़का पूरे दम के साथ जब दौड़ना शुरू करता था तो उसके अंदर एक ही लालच रहता, किसी तरह गेंद स्टंप को लगे और वो टक का साउंड आए जिसे सुनकर ही इतने साल वो सांस लेता रहा है। जिंदगी की तमाम उतार चढ़ाव, मुश्किलों परेशानियों के बावजूद आज भी, अमरोहा के तेज गेंदबाज तौसीफ अली का बेटा मोहम्मद शमी, जर्सी नंबर 11 पहन कर जब रनअप पर दौड़ना शुरू करता है, तो उसके पीछे पीछे उसके अब्बू का सपना, कोच बदरुद्दीन की लगन, देवदत्त दास की इंसानियत सब कुछ साथ साथ चलता है दौड़ता है।
@ रेहान अहमद का दिल को छूता लेख
22/10/2023
पुराने चित्रों में चीखता हुआ इतिहास
जैसा की आप जानते ही हैं की अंग्रेज़ों को भारतीय शब्दों का उच्चारण में कठिनाई होती है अत: जब भारत में वे राज्य करने लगे तो बहुत से स्थानों का नाम उन्होंने सुविधानुसार बदल दिया । यहाँ , सुविधा का तात्पर्य उनकी जीभ की बनावट से था ।
अंग्रेज़ी भाषा में जब “ m” और “ b” एक साथ प्रयुक्त होते हैं तब अंग्रेज़ “ ब” का उच्चारण नहीं करते , हम भारतीय कर लेते हैं ।
जैसे dumb का उच्चारण अंग्रेज़ “ डम” और भारतीय “डम्ब “ के रूप में करता है । दूसरा उदाहरण Plumber का देख लीजिए । अंग्रेज इसे “प्लमर “ उच्चारित करता है और भारतीय “प्लम्बर “ ।
अब रिवर्स एन्जयरिंग समझिए । जैसे भारत के एक राज्य का नाम “ जम्बू काश्मीर “ था तो अंग्रेज़ी में जम्बू को Jambu लिखा गया पर अंग्रेज़ Jambu को जमू ही उच्चारित कर पाएगा , अपनी भाषा और अपनी जीभ की बनावट के अनुसार । हम भारतीय तो नक़लची होते ही हैं । वे जमू कहने लगे तो हमने भी जम्मू कर लिया ।
दो तीन सौ वर्षों के जितने भी अभिलेख प्राप्त होते हैं उसमें जम्बू काश्मीर और तिब्बत ( वही तिब्बत जिसे नेहरू ने चीन को दे दिया ) को एक साथ ही दर्शाया गया है
19/10/2023
एक ऐसा क्रांतिकारी भी था, जिसका प्लान अगर कामयाब हुआ होता, साथी ने गद्दारी नहीं की होती तो देश 32 साल पहले ही यानी 1915 में स्वतंत्र हो गया होता। जब भय में लोग घरों में भी सहम कर रहते थे, वो अकेला जहां अंग्रेजों को देखता, उन्हें पीट देता था, यह थे जतीन्द्रनाथ मुखर्जी जो साथियों के बीच बाघा जतिन के नाम से प्रसिद्ध थे।
जब उन्होंने अपने क्षेत्र में एक बिगड़ेल घोड़े को नियंत्रित किया तो वह अपनी बहादुरी के लिए आसपास मशहूर हो गये। पिता की मृत्यु के बाद उनकी परवरिश उनके ननिहाल में हुई।अपने मामा के साथ अक्सर उनका मिलना रविन्द्र नाथ टैगोर से होता था, जिसने उनके जीवन को बहुत प्रभावित किया। वो ध्रुव, प्रहलाद, हनुमान और राजा हरिश्चंद्र जैसे रोल नाटकों में करने लगे। इसी दौरान उन्होंने एक भारतीय का अपमान करने पर एक साथ चार अंग्रेजों को पीट दिया। अंग्रेज भी उनसे उलझने से बचने लगे।
कलकत्ता सेंट्रल कॉलेज में पढ़ने के दौरान वो स्वामी विवेकानंद के पास जाने लगे, जिनसे उन्हें भरोसा मिला कि स्वस्थ फौलादी शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है।
1899 में मुजफ्फरपुर में बैरिस्टर पिंगले के सेक्रेटरी बनकर पहुंचे, जो बैरिस्टर होने के साथ-साथ एक इतिहासकार भी था, जिसके साथ रहकर जतिन ने महसूस किया कि भारत की एक अपनी नेशनल आर्मी होनी चाहिए।
एक बार उनके गांव में एक तेंदुए का आतंक था, तो वो उसे जंगल में ढूंढने निकल पड़े, लेकिन सामना हो गया रॉयल बंगाल टाइगर से। जतिन ने उसको अपनी खुखरी से मार डाला। बंगाल सरकार ने एक समारोह में सम्मानित किया। तभी से उनका नाम बाघा जतिन पड़ा।
1905 में प्रिंस आप वेल्स जब कलकत्ता आये, तो उनके काफिले की एक गाड़ी की छत पर कुछ अंग्रेज बैठे हुए थे, और उनके जूते खिड़कियों पर लटक रहे थे, गाड़ी में बैठी महिलाओं के बिलुकल मुंह पर। भड़क गए जतिन और उन्होंने अंग्रेजों से उतरने को कहा, लेकिन वो नहीं माने तो ऊपर चढ़ गए बाघा जतिन और एक-एक करके सबको पीट दिया। तब तक पीटा जब तक कि सारे नीचे नहीं गिर गए। लेकिन इस घटना से तीन बड़े काम हुए। अंग्रेजों के भारतीयों के व्यवहार के बारे में उनके शासकों के साथ-साथ दुनियां को भी पता चला, भारतीयों के मन से उनका खौफ निकला और बाघा जतिन के नाम के प्रति क्रांतिकारियों के मन में सम्मान और भी बढ़ गया।
तीन साल के लिए उनको दार्जीलिंग भेजा गया, जहां उन्होंने अनुशीलन समिति की एक शाखा बांधव समिति शुरू की। सिलीगुड़ी स्टेशन पर फिर अंग्रेजों के एक मिलिट्री ग्रुप से उनकी भिड़ंत हो गई। कैप्टन मर्फी की अगुवाई में अंग्रेजों ने जतिन से बदतमीजी की, तो जतिन ने अकेले उन आठों को जमकर मारा।
इसी बीच फोर्ट विलियम में तैनात जाट रेजीमेंट को भड़काने के आरोप में जतिन दा को गिरफ्तार कर लिया गया,उन दिनों फोर्ट विलियम से देश की सरकार चलती अंग्रेज सरकार बाघा जतिन, अरविंदो घोष, रास बिहारी बोस जैसे कई बंगाली क्रांतिकारियों से तंग आ गई थी।
चेक के ही रॉस हेडविक ने बाद में लिखा कि ‘इस प्लान में अगर इमेनुअल विक्टर वोस्का ना घुसता तो किसी ने भारत में गांधी का नाम तक ना सुना होता और राष्ट्रपिता बाघा जतिन को कहा जाता।
पुलिस को सुराग मिला कि जतिन और उसके साथी कप्टिपाड़ा गांव में हैं। जतिन के साथ मनोरंजन और चित्तप्रिया थे। वहां से वो निकल भागे, जतिन और उनके साथी जंगलों की तरफ भागे, अंग्रेजों ने जतिन पर भारी इनाम का ऐलान कर दिया, अब गांव वाले भी उन्हें ढूंढने लगे। इधर भारी मात्रा में जर्मन हथियार बरामद कर लिया गया। क्रांति फेल हो चुकी थी। सपना मिट्टी में मिल चुका था।
10 सितम्बर 1915 में इस महान सिपाही ने अस्पताल में ही अपने प्राण त्याग दिए।
महान क्रांतिकारी जतिन दास को विनम्र श्रद्धांजलि और कोटि-कोटि नमन।
#इतिहास
14/10/2023
यह है #अयोध्या के #भगवानदीन
#भगवानदीन कई लोगों के लिए सच में मसीहाई के पात्र हैं। 345 लोग आत्महत्या के लिए आए और नदी में छलांग लगा दी। भगवानदीन ने अपनी तैराकी कौशल से उन्हें बचा लिया।
भगवानदीन को कोई सैलरी नहीं मिलती। सरकारी गोताखोर का कार्ड बना तो कहा गया कि 500 रुपए महीना मिलेगा लेकिन आज तक नहीं मिला। इनके पास सुरक्षा उपकरण भी नहीं हैं। रहने को घर नहीं। लेकिन लोगों को बचाने की इच्छाशक्ति जबरदस्त है।
#भगवानदीन जैसे कर्मवीरों का उत्साहवर्धन सोशल मीडिया पर करना जरूरी है
यह असली हीरो हैं हमारे समाज के, देश के,
ऐसे नायकों को देश का सलाम
13/10/2023
?????
07/10/2023
एक बार एक विमान का एक सफाईकर्मी सफाई कर रहा था .
विमान में उसके अलावा कोई नहीं था.सफाई के दौरान उसके हर्ष का ठिकाना ना रहा, जब उसने विमान के कॉकपिट में एक किताब देखी, जिसका शीर्षक था,
* मात्र एक दिन मे प्लेन उड़ाना कैसे सीखें *
उसकी बचपन की दबी इच्छा शायद आज पूरी होने वाली थी.
उसने पहला पृष्ठ खोला:
"इंजन स्टार्ट करने के लिए, लाल बटन दबाएं .."
उसने ऐसा ही किया, और हवाई जहाज का इंजन चालू हो गया ..
वह खुश हुअा और अगले पृष्ठ को खोला ...
"हवाई जहाज को चलाने के लिए, नीला बटन दबाएं .."
उसने ऐसा किया और विमान ने एक अद्भुत, अविश्वसनीय गति से आगे बढ़ना शुरू कर दिया ...
मगर वह तो उड़ना चाहता था उड़ना, इसलिए उसने तीसरा पृष्ठ खोला जिसमें कहा गया था:
*हवाई जहाज को उडा़ने के लिए, कृपया हरा बटन दबाए.*
उसने ऐसा किया और विमान उड़ने लगा। वह उत्साहित था ... !!
उड़ान भरने के 20 मिनट बाद, वह संतुष्ट था और अब उतरना चाहता था इसलिए उसने चौथे पेज पर जाने का फैसला किया ...
चौथे पेज मे लिखा था,
*आप विमान उड़ाने मे पारंगत हो चुके हैं. अब अगर आप यह भी सीखना चाहते हों कि किसी उड़ते विमान को उतारा कैसे जाए, तो कृपया किसी पास वाली पुस्तक की दुकान से इस किताब का द्वितीय पार्ट ( वॉल्यूम 2 ) खरीद लें!"
सीख :: जिसका काम उसी को साजे...* कभी भी पूरी जानकारी के बिना कोई पंगा नहीं लेना चाहिए .
🙏
समय देने के लिए आपका दिल से धन्यवाद ❤️
03/10/2023
जब बिजली ईजाद नहीं हुई और सीलिंग फैन वग़ैरह की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी तब "अंग्रेज़ बहादुर" खास टाइप का कपड़ा कमरे में लटका कर उसकी डोरी कमरे के बाहर ग़ुलामों के पैरों में बांध दिया करते थे और बारी-बारी दिन रात अपने पैरों को हिलाते रहना ग़ुलामों का काम होता था...इस बात का ख़ास़ ख़याल रखा जाता था कि ग़ुलाम कान से बहरे हों ताकि उनकी बातों को सुन ना सकें...
अंग्रेज़ों के ज़माने में ICS अधिकारी रहे "क़ुदरतुल्ला शहाब" अपनी किताब 'शहाब नामा' में लिखते हैं कि जब उन ग़ुलामों को नींद लगती तो अंग्रेज़ कमरे से निकल कर जूते पहनकर पेट पर वह़शियों की तरह वार करते थे जिससे गुलामों के पेट फटकर आतड़ियां तक बाहर आ जाती थीं और वह मर जाते थे...जुर्माने के तौर उस अंग्रेज़ से ब्रिटिश अदालत मात्र 2₹ वसूल करती थी...ना जेल ना ही कोई और सज़ा...
इन्हीं की औलादें आज हमें "इंसानियत का मंजन" बेचती हैं..😠
यह उसी वक़्त की एक नायाब तस्वीर है👇👇👇
02/10/2023
पूड़ी की तैयारी…..😂😂😂🙏🙏
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