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गाज़ा के बच्चे ।
27/05/2026
Gaza Walo Ki Eid
27/05/2026
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के सबरहद गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बुर्का पहनकर पहुंची एक महिला कथित रूप से एक घर के कमरे में दाखिल हुई, जहां उसे संदिग्ध स्थिति में पकड़ा गया। इसके बाद गांव के लोगों ने उससे पूछताछ की।
बताया जा रहा है कि महिला ने अपना नाम मुस्कान और पति का नाम सुनील बताया। पूछताछ के दौरान महिला ने कहा, “लोग कहते हैं कि बुर्का पहनकर मांगो, बेइज्जती नहीं होती, इसलिए मांग रही हूं।”
स्थानीय लोगों ने महिला को पुलिस के हवाले कर दिया। हालांकि, जानकारी के अनुसार पुलिस ने पूछताछ के बाद महिला को छोड़ दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
26/05/2026
मैदान-ए-अरफ़ात में हज यात्री पूरी विनम्रता और इबादत के जज़्बे के साथ अल्लाह की बंदगी में मशगूल दिखाई दिए। इस दौरान कई जगहों पर एक-दूसरे की मदद, सहयोग और इंसानियत के खूबसूरत नज़ारे भी देखने को मिले। कोई किसी को सहारा देता दिखा, तो कोई थके हुए हाजियों की मदद करता नज़र आया। इबादत, भाईचारे और मोहब्बत से भरे इन दिल छू लेने वाले लम्हों ने हज के रूहानी माहौल को और भी खास बना दिया। तस्वीरों में देखिए कुछ खूबसूरत और दिल को छू लेने वाले मंज़र।
26/05/2026
‘रतलाम से लेकर मुंबई, बंगाल से लेकर यूपी तक,बक़रीद से पहले हर जगह से मुसलमानों को सताने की अनगिनत ख़बरें आ रही हैं।कहीं नेता नफ़रती बातें कर रहे हैं, कहीं भगवा संगठन जुलूस निकाल रहे हैं तो कहीं क़ानून के नाम पर पुलिस जेल भर रही है।
वीडियोज़ देखकर आंखें जल रही हैं,मन भारी हो रहा है.
आरफा खानम शेरवानी ( पत्रकार )
Khutba Hajj 2026 Urdu
ट्रेन में सफर कर रहे एक मुस्लिम बुजुर्ग काफी देर से भीड़ में खड़े थे, लेकिन कुछ तंदुरुस्त युवक सीट पर आराम से फैले बैठे रहे। तभी वहां मौजूद रेलवे पुलिसकर्मी संतोष की नजर बुजुर्ग पर पड़ी। उन्होंने बिना किसी बहस के युवकों को प्यार से थोड़ा खिसकाया और बुजुर्ग को इज्जत के साथ बैठने के लिए जगह दिलाई।
आज के दौर में ऐसी छोटी-छोटी इंसानियत ही समाज को खूबसूरत बनाती है, जहां वर्दी सिर्फ कानून नहीं बल्कि मानवता का फर्ज भी निभाती नजर आती है।
26/05/2026
रामपुर जिला कारागार में तंजीम फातिमा साहिबा ने अपने बेटे अब्दुल्लाह आजम से मुलाकात की। यह सिर्फ एक मुलाकात नहीं थी, बल्कि एक मां के दर्द, इंतजार और उम्मीद से भरा वह लम्हा था जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं।
मुलाकात के दौरान मां की आंखों में बेटे के लिए फिक्र साफ दिखाई दी। मुलाकात खत्म होने के बाद तंजीम फातिमा बिना कुछ कहे खामोशी के साथ लौट गईं, लेकिन उनकी खामोशी बहुत कुछ कह गई।
परिवार का कहना है कि मुश्किल हालात और लंबे संघर्ष ने पूरे परिवार की जिंदगी को प्रभावित किया है। वहीं समर्थकों को उम्मीद है कि सच और इंसाफ की लड़ाई एक दिन अपनी मंजिल तक जरूर पहुंचेगी।
26/05/2026
मां को जानवर कैसे घोषित किया जा सकता है शाहनवाज हुसैन बीजेपी नेता
26/05/2026
आज एशिया की सबसे बड़ी इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम देवबंद जाने और वहाँ के माहौल को करीब से देखने का अवसर मिला।
इस दौरान मौलाना अरशद मदनी साहब के दौलतखाने पर मुलाकात हुई। देश में चल रहे मौजूदा सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई। खास तौर पर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को लेकर मौलाना साहब द्वारा उठाई गई आवाज़ के लिए उनका धन्यवाद किया और इस सामाजिक सद्भाव और भाईचारे के मिशन में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का भरोसा दिया।
मौलाना साहब से मुलाकात बेहद सकारात्मक, सौहार्दपूर्ण और प्रेरणादायक रही।
उन्होंने जिस तरह देश में अमन, इंसानियत, आपसी सम्मान और संविधानिक मूल्यों की बात रखी, वह वास्तव में सराहनीय है।
इसके बाद दारुल उलूम देवबंद को नज़दीक से देखने और समझने का मौका मिला। अक्सर इस संस्था को लेकर जो झूठे आरोप लगाए जाते हैं कि यहाँ कट्टरता या आतंकवाद की शिक्षा दी जाती है, वह पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीतिक प्रोपेगेंडा है।
हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। यहाँ शिक्षा, अनुशासन, नैतिकता, इंसानियत, भाईचारा और देशप्रेम का माहौल देखने को मिला।
दारुल उलूम ने केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं दी, बल्कि भारत की आज़ादी की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस संस्था से जुड़े अनेक उलेमाओं ने अंग्रेज़ों के खिलाफ संघर्ष किया और देश की आज़ादी के लिए कुर्बानियाँ दीं।
सबसे ज्यादा खुशी उस समय हुई जब दारुल उलूम की लाइब्रेरी में हिंदू धर्मग्रंथ — मनुस्मृति, ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद आदि पुस्तकों को भी सम्मान के साथ रखा देखा।
यह इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि दारुल उलूम देवबंद नफरत नहीं, बल्कि आपसी सम्मान, धार्मिक सहिष्णुता और “सर्व धर्म समभाव” का संदेश देता है।
मैं अपने सभी हिंदू-मुस्लिम भाइयों से कहना चाहूँगा कि किसी भी संस्था के बारे में राय बनाने से पहले एक बार खुद वहाँ जाकर देखें, समझें और सच जानें।
सोशल मीडिया और राजनीति के जरिए फैलाए गए भ्रम से ऊपर उठकर सच्चाई को पहचानना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
दारुल उलूम देवबंद हमेशा से अमन, शिक्षा, इंसानियत और भाईचारे का केंद्र रहा है और आगे भी देश में एकता और सौहार्द को मजबूत करने का काम करता रहेगा।
हिंदू-मुस्लिम एकता ज़िंदाबाद 🇮🇳
आपसी भाईचारा ज़िंदाबाद 🤝
भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब अमर रहे ❤️
Harsh Chhikara ✍️✍️
26/05/2026
दिल्ली की तिहाड़ जेल के गेट नंबर-3 के बाहर रविवार को भावुक कर देने वाला मंजर देखने को मिला। राजनीतिक कैदी रहे खालिद सैफी और तस्लीम अहमद के परिवार वाले घंटों तपती गर्मी में उनकी रिहाई का इंतजार करते रहे। बेचैनी, उम्मीद और इंतजार के बीच चार घंटे तक परिजन जेल के बाहर खड़े रहे।
जैसे-जैसे समय बीतता गया, लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। आखिरकार जब 6 साल से ज्यादा वक्त जेल में बिताने के बाद खालिद सैफी और तस्लीम अहमद बाहर निकले तो माहौल भावुक हो गया। परिजनों और समर्थकों ने उन्हें गले लगाया।
दोनों को दिल्ली हिंसा और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। रिहाई के बाद समर्थकों ने इसे इंसाफ और संघर्ष की जीत बताया।
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