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09/11/2022

अमौनी में संतोष भारती बाबा के पावन धरा का अनोखा दृश्य

09/11/2022

बम बम भोले

08/11/2022

अमौनी का मेला आज

07/11/2022

अमौनी का गोमती नदी घाट

02/11/2022

राम नगरी अयोध्या में पवित्र 14 कोसी परिक्रमा में आए हुए समस्त श्रद्धालुओं का टैलेंट अयोध्या हार्दिक स्वागत और अभिनंदन करता हैं।परिक्रमा के दौरान लोक संस्कृति के बिरहा गायन का आनंद

06/10/2022

शौकिया बिरहा

05/10/2022

अयोध्या जनपद के रुदौली तहसील अंतर्गत नवरा में मूर्ति विसर्जन के दौरान एक नाटक का नाचते हुए वीडियो वायरल

05/10/2022

डांस देखिए

01/10/2022
24/09/2022

बजरंग बाण और उसके तीव्र प्रभाव का कारण !

हनुमान जी कलयुग में सर्वाधिक जाग्रत देवता माने जाते हैं जो सप्त चिरंजीवी में से एक हैं,अर्थात जिनकी कभी मृत्यु नहीं हो सकती।इनके सम्बन्ध में अनेक किवदंतियां हैं और आधुनिक युग में भी इन्हें कहीं कहीं उपस्थित रूप से माना जाता है अथवा इनकी उपस्थिति समझी जाती है।इन्होने भगवान् राम की ही सहायता नहीं की अपितु अर्जुन और भीम की भी सहायता की।इन्हें रुद्रावतार भी कहा जाता है और एकमात्र यही हैं जो शनि ग्रह के प्रभाव को भी नियंत्रित कर सकते हैं।सामान्यतया जब भी हनुमान आराधना /उपासना की बात आती है,लोगों के दिमाग में हनुमान चालीसा और सुन्दरकाण्ड के पाठ की याद आती है।यह सबसे अधिक प्रचलित पाठ हैं जिनके प्रभाव भी दीखते हैं।हनुमान की कृपा प्राप्ति और उनके द्वारा कष्टों के निदान के लिए अनेक उपाय और पाठ इनके अतिरिक्त भी बनाए गए हैं जो भिन्न भिन्न समस्याओं में लोगों द्वारा प्रयोग होते हैं। इन्ही पाठों में दो पाठ ऐसे हैं जो अत्यधिक तीव्र प्रभावी हैं।यह पाठ बजरंग बाण और हनुमान बाहुक के हैं।

बजरंग बाण है तो हनुमान चालीसा जैसा ही पाठ किन्तु यह हनुमान चालीसा से अधिक प्रभावी है।शत्रु बाधा,तांत्रिक अभिचार,किया कराया,भूत-प्रेत, ग्रह दोष आदि के लिए यह बाण की तरह काम करता है।

इसीलिए इसका नाम बजरंग बाण है।बजरंग बाण चौपाइयों पर आधारित पाठ है किन्तु इसकी सफलता इसके शपथ में है।इसमें देवता को शपथ दी जाती है की वह पाठ कर्ता की समस्या दूर करे।यह शपथ की प्रक्रिया शाबर मंत्र जैसी है। जिसके कारण बजरंग बाण की क्रिया प्रणाली बिलकुल भिन्न हो जाती है।वास्तव में जब व्यक्ति शपथ देता है भगवान् को तो भगवान् शपथ के अधीन हो न हो,व्यक्ति जरुर गहरे से भगवान् से जुड़ जाता है और प्रबल आत्मविश्वास,आत्मबल उत्पन्न होता है कि अब तो समस्या जरुर हटेगी क्योंकि भगवान् को हमने शपथ दिया है।तीव्र आंतरिक आवेग उत्पन्न होता है और जितनी भी आंतरिक शक्ति होती है व्यक्ति की उस समस्या के पीछे लग जाती है, इस कारण सफलता बढ़ जाती है।कुछ ऐसा ही शाबर मन्त्रों के साथ होता है।इसके साथ ही पृथ्वी की सतह पर क्रियाशील अंग देवता और सहायक शक्तियाँ उस व्यक्ति के साथ जुड़ उसकी सहायता करने का प्रयत्न करती हैं।

जब आप देवता को मजबूर करने का प्रयत्न करते हैं तब आपको भी नियंत्रित रहना होता है अन्यथा देवता की ऊर्जा तीव्र प्रतिक्रिया कर सकती है।

यह पाठ गोस्वामी तुलसीदास के समय बनाया गया है जो यह प्रकट करता है की उस समय सामाजिक विक्षोभ की स्थिति में जब सामान्य पाठ, मंत्र आदि काम नहीं कर रहे थे तब शाबर मंत्र काम कर रहे थे,अतः यह उस पद्धति पर बनाया गया।शाबर मन्त्रों में तो किसी भी देवता को आन दी जा सकती है,शपथ दी जा सकती है।इसकी एक विशेष अलग कार्यप्रणाली होती है। इसी आधार पर हनुमान की शक्ति को अधिकतम पाने के लिए बजरंग बाण में शपथ का प्रयोग किया गया।यह पद्धति काम करती है और इसके अच्छे परिणाम भी मिलते हैं बस साधक खुद को नियंत्रित,संतुलित और एकाग्र रखे।जैसे की शाबर मन्त्रों में होता है की इनसे पृथ्वी की सतह पर क्रियाशील शक्तियाँ प्रभावित होती हैं वैसा ही बजरंग बाण में भी होता है की पृथ्वी की सतह पर क्रियाशील धनात्मक ऊर्जा से संचालित शक्तियाँ साधक की सहायता करने लगती हैं।

बजरंग बांण.....

ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले, बैरिहि मारू बज्र की कीले!!

भावार्थ.... हे हनुमंत - हे दुख भंजन - हे हठीले हनुमंत मुझ पर कृपा करो और मरे शत्रुओं को अपने वज्र से मारकर निस्तेज और निष्प्राण कर दो....

जय श्रीराम 🙏🏻🙏🏻
जय हनुमान 🙏🏻🙏🏻
जय गुरुदेव 🙏🏻🙏🏻
जय महाराज जी 🌹🌹

24/09/2022

#साधु_कौन होते हैं ? :-------

किसी विषय की साधना करने वाले व्यक्ति को , साधु कहा जाता है। प्राचीन काल में, कई व्यक्ति समाज से हट कर या कई बार समाज में ही रहकर, किसी विषय की साधना करते थे और उस विषय में विशिष्ट ज्ञान प्राप्त करते थे। विषय को साधने या उसकी साधना करने के कारण ही , उन्हें साधु कहा गया।
कई बार अच्छे और बुरे व्यक्ति में , फर्क करने के लिए भी, साधु शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसका कारण है कि, सकारात्मक साधना करने वाला व्यक्ति, हमेशा सरल, सीधा और लोगों की भलाई करने वाला होता है। आम बोलचाल में , साध का अर्थ सीधा और दुष्टता से हीन होता है। संस्कृत में , साधु शब्द से तात्पर्य है , सज्जन व्यक्ति। लघुसिद्धांत कौमुदी में , साधु का वर्णन करते हुए लिखा गया है कि , " साध्नोति परकार्यमिति साधु : " अर्थात, जो दूसरे का कार्य करे , वह साधु है। साधु का एक अर्थ, उत्तम भी होता है । ऐसे व्यक्ति, जिसने अपने छह विकार काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह और वासना का त्याग कर दिया हो,वह साधु कहलाता है।
साधु के लिए, यह भी कहा गया है "आत्मदशा साधे " अर्थात, संसार दशा से मुक्त होकर, आत्मदशा को साधने वाले, साधु कहलाते हैं। वर्तमान में , वैसे व्यक्ति , जो संन्यास दीक्षा लेकर गेरुआ वस्त्र धारण करते हैं और जिनका मूल उद्द्येश्य समाज का पथ प्रदर्शन करते हुए, धर्म के मार्ग पर चलते हुए, मोक्ष को प्राप्त करते हैं, साधु कहलाते हैं।

22/09/2022

भगवान श्रीराम को १४ वर्ष का वनवास हुआ तो उनकी पत्नी माँ सीता ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया।
परन्तु बचपन से ही बड़े भाई की सेवा मे रहने वाले लक्ष्मणजी कैसे रामजी से दूर हो जाते! माता सुमित्रा से तो उन्होंने आज्ञा ले ली थी, वन जाने की... परन्तु जब पत्नी उर्मिला के कक्ष की ओर बढ़ रहे थे तो सोच रहे थे कि माँ ने तो आज्ञा दे दी, परन्तु उर्मिला को कैसे समझाऊंगा? क्या कहूंगा !! यदि बिना बताए जाऊंगा तो रो-रोके जान दे देगी और यदि बताया तो साथ जाने की ज़िद्द करने लगेगी और कहेगी कि यदि सीताजी अपने पति के साथ जा सकती हैं तो मैं क्यों नहीं !!

यही सोच-विचार करके लक्ष्मणजी जैसे ही अपने कक्ष में पहुंचे तो देखा कि उर्मिलाजी आरती का थाल ले के खड़ी थी और बोली~ "आप मेरी चिंता छोड़ प्रभु की सेवा में वन को जाओ। मैं आपको नहीं रोकुगीं। मेरे कारण आपकी सेवा में कोई बाधा न आये, इसलिये साथ जाने की जिद्द भी नहीं करूंगी।"

लक्ष्मणजी को कहने में संकोच हो रहा था। परन्तु उनके कुछ कहने से पहले ही उर्मिलाजी ने उन्हें संकोच से बाहर निकाल दिया।

वास्तव में यही पत्नी का धर्म है। पति संकोच में पड़े, उससे पहले ही पत्नी उसके मन की बात जानकर उसे संकोच से बाहर कर दे!

पत्नी का इतना त्याग और प्रेम देखकर लक्ष्मणजी भी रो पड़े। उर्मिलाजी ने एक दीपक जलाया और विनती की कि मेरी इस आस को कभी बुझने नहीं देना।

लक्ष्मणजी तो चले गये परन्तु १४ वर्ष तक उर्मिलाजी ने एक तपस्विनी की भांति कठोर तप किया। वन में भैया-भाभी की सेवा में लक्ष्मणजी कभी सोये नहीं परन्तु उर्मिला ने भी अपने महलों के द्वार कभी बंद नहीं किये और सारी रात जाग-जागकर उस दीपक की लौ को बुझने नहीं दिया।

मेघनाथ से युद्ध करते हुए जब लक्ष्मण को शक्ति लग जाती है और हनुमानजी उनके लिये संजीवनी का पहाड़ ले के लौट रहे होते हैं, तो बीच में अयोध्या में भरतजी उन्हें राक्षस समझ कर बाण मारते हैं और हनुमानजी गिर जाते हैं। तब हनुमान जी सारा वृत्तांत सुनाते हैं कि सीताजी को रावण ले गया, लक्ष्मणजी मूर्छित हैं।

यह सुनते ही कौशल्याजी कहती हैं कि राम को कहना कि लक्ष्मण के बिना अयोध्या में पैर भी मत रखना। राम वन में ही रहे।

माता सुमित्रा कहती हैं कि राम से कहना कि कोई बात नहीं। अभी शत्रुघ्न है मैं उसे भेज दूंगी। मेरे दोनों पुत्र राम सेवा के लिये ही तो जन्मे हैं।

माताओं का प्रेम देखकर हनुमानजी की आँखों से अश्रुधारा बह रही थी। परन्तु जब उन्होंने उर्मिलाजी को देखा तो सोचने लगे कि यह क्यों एकदम शांत और प्रसन्न खड़ी हैं? क्या इन्हें अपनी पति के प्राणों की कोई चिंता नहीं?

हनुमानजी पूछते हैं- देवी! आपकी प्रसन्नता का कारण क्या है? आपके पति के प्राण संकट में हैं। सूर्य उदित होते ही सूर्य कुल का दीपक बुझ जायेगा। उर्मिलाजी का उत्तर सुनकर तीनों लोकों का कोई भी प्राणी उनकी वंदना किये बिना नहीं रह पाएगा।

वे बोली~ "मेरा दीपक संकट में नहीं है, वो बुझ ही नहीं सकता। रही सूर्योदय की बात तो आप चाहें तो कुछ दिन अयोध्या में विश्राम कर लीजिये, क्योंकि आपके वहां पहुंचे बिना सूर्य उदित हो ही नहीं सकता।

आपने कहा कि प्रभु श्रीराम मेरे पति को अपनी गोद में लेकर बैठे हैं। जो योगेश्वर राम की गोदी में लेटा हो, काल उसे छू भी नहीं सकता। यह तो वो दोनों लीला कर रहे हैं। मेरे पति जब से वन गये हैं, तबसे सोये नहीं हैं। उन्होंने न सोने का प्रण लिया था। इसलिए वे थोड़ी देर विश्राम कर रहे हैं। और जब भगवान् की गोद मिल गयी तो थोड़ा विश्राम ज्यादा हो गया। वे उठ जायेंगे।

और शक्ति मेरे पति को लगी ही नहीं शक्ति तो रामजी को लगी है। मेरे पति की हर श्वास में राम हैं, हर धड़कन में राम, उनके रोम-रोम में राम हैं, उनके खून की बूंद-बूंद में राम हैं, और जब उनके शरीर और आत्मा में हैं ही सिर्फ राम, तो शक्ति रामजी को ही लगी, दर्द रामजी को ही हो रहा। इसलिये हनुमानजी आप निश्चिन्त होके जाएँ। सूर्य उदित नहीं होगा।"

वास्तव में सूर्य में भी इतनी ताकत नहीं थी कि लक्ष्मणजी के जागने से पहले वो उदित हो जाते! एक पतिव्रता तपस्विनी का तप उनके सामने खड़ा था। और मेघनाथ को भी लक्ष्मण जी ने नहीं, अयोध्या में बैठी एक तपस्विनी उर्मिला ने मारा।

राम राज्य की नींव जनक की बेटियां ही थीं... कभी सीता तो कभी उर्मिला। भगवान् राम ने तो केवल राम-राज्य का कलश स्थापित किया परन्तु वास्तव में राम-राज्य इन सबके प्रेम, त्याग, समपर्ण, बलिदान से ही आया,,
*।। जय~जय श्री राम ।।*
*।। हर~हर महादेव ।।*

22/09/2022

जय बाबा नीब करोरी महराज

19/09/2022

जय-जय श्री नीम करोली महाराज कोटि-कोटि सादर प्रणाम 🙌 सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी कीजिए प्रभु आपकी कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे प्रभु 🌹🙏
जय श्री हनुमान जी ~जय श्री राम🙏
जय श्री कैंची धाम की 🙏
राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम 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राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम 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18/09/2022

समाज के डर से कभी अपने फैसले मत बदलिये
क्योंकि समाज आपको सिर्फ और सिर्फ नसीहत देगा खाने के लिए रोटी नहीं।

18/09/2022

देवभूमि में नीम करौली ( कैंची धाम)) एक ऐसा पवित्र स्थान है जहां कोई भी मुराद लेकर जाए तो वह खाली हाथ नहीं लौटता। इस धाम में बाबा नीम करौली को भगवान हनुमान का अवतार माना जाता है।यह धाम चमत्कार और रहस्यों से भरा है जहां जाने मात्र से ही बिगड़ी तकदीर संवर जाती है।
जय बाबा #नीमकरौली

23/06/2022

बाबा नीब करोरी महराज की जय

01/04/2022

फैज़ाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान

31/03/2022

सरकार

31/03/2022

आपसी सौहार्द की सीख देते है त्योहार

30/03/2022

बड़ी मुश्किल भरा सिपहिया कोटवा मार्ग

30/03/2022

भाजपा कार्यकर्ता के पुत्र की पुलिसकर्मियों ने की पिटाई

30/03/2022

सड़क की हालत खराब

23/03/2022

झुमका......

21/03/2022

बेसहारा बच्चियों के मसीहा बने विधायक

20/03/2022

आज पोलियो ड्राप अवश्य पिलाएं

18/03/2022

बहुत मजा आ रहा जब कमेंट्स में Happy holi लिखने के बाद फोन की स्क्रीन पर गुलाल उड़ रहा,वो भी संगीत के साथ..

18/03/2022

बुरा न मानो होली है

04/03/2022

महान स्पिनर शेन वॉर्न का निधन हो गया, वह 52 साल के थे,उनके निधन से क्रिकेट जगत में शोक की लहर

04/03/2022

नमस्कार दोस्तों

07/06/2019

शिकारी के हमले से घायल

07/06/2019

जमानत अर्जी ख़ारिज

02/06/2019

समाज का नाम रोशन करने वाले सम्मानित

31/05/2019

भाजपा नेता सुरेन्द्र सिंह हत्या कांड का जामो पुलिस ने किया खुलासा

प्रभारी निरीक्षक थाना जामो अमेठी राजीव सिंह को मिली सफलता

अमेठी .... थाना जामो पुलिस द्वारा दिनांक 25/26.05.2019 को सुरेन्द्र सिंह की हत्या के अभियोग में वांछित अभियुक्त गिरफ्तार | जिसके कब्जे से 01 अदद तमंचा, 02 अदद खोखा कारतूस व 01 अदद जिन्दा कारतूस (आला क़त्ल) बरामद |

वादी नरेन्द्र बहादुर सिंह पुत्र शिवभवन सिंह नि0 अमर बोझा मजरे बरौलिया थाना जामो जनपद अमेठी द्वारा थाना जामो में दिनांक 26.05.2019 को दी गई तहरीर पर अपने भाई सुरेन्द्र प्रताप सिंह की हत्या के सम्बन्ध में मु०अ०स० 197/19 धारा 302,120बी भादवि बनाम वसीम व अन्य 05 नफर अभियुक्त पंजीकृत किया गया था | जिसमें शीघ्र गिरफ्तारी हेतु पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा राजीव सिंह प्रभारी निरीक्षक थाना जामो को कड़े निर्देश निर्गत किये गये थे | जिस क्रम में दिनांक 31.05.2019 को राजीव सिंह प्रभारी निरीक्षक थाना जामो मय हमराह तलाश वांछित अभियुक्त सालाहपुर तिराहे पर मौजूद थे । मुखबिर से सूचना मिली कि मुकदमा उपरोक्त का वांछित अभियुक्त वसीम मोटरसाइकिल से जगदीशपुर की तरफ से आ रहा है । कुछ देर बाद एक मोटरसाइकिल तेजी आती दिखाई पड़ी जिसे रोकने का प्रयास किया गया तो नहीं रुका । पीछा करने पर आर.एस. पब्लिक स्कूल मोड़ के पास टीले से टकराकर मोटरसाईकिल सहित गिर गया । पुलिस को आते देख जान से मारने की नियत से तमंचे से फायर करने लगा । जिसे घेर कर आवश्यक बल प्रयोग करते हुए समय लगभग 01.35 बजे रात्रि में पकड़ लिया गया । पूछने पर अपना नाम वसीम बताया । तलाशी से 01 अदद तमंचा, 02 अदद खोखा कारतूस व 01 अदद जिन्दा कारतूस बरामद हुआ | कड़ाई से पूछने पर अपने साथियों नसीम, अतुल सिंह उर्फ गोलू, रामचन्द्र बीडीसी व धर्मराज गुप्ता के साथ सुरेन्द्र सिंह की हत्या करना स्वीकार किया । पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही व बरामदगी का विवरण निम्न है-

गिरफ्तार अभियुक्त का नाम व पताः-
वसीम पुत्र मनसफ अली नि0 ग्राम बरौलिया थाना जामो जनपद अमेठी ।

बरामदगीः-
01 अदद तमंचा, 02 अदद खोखा कारतूस व 01 अदद जिन्दा कारतूस (आला क़त्ल) |

पुलिस द्वारा की गयी कार्यवाहीः-
1. मु०अ०स० 197/19 धारा 302,120बी,34 भादवि व 07 सीएलए एक्ट थाना जामो जनपद अमेठी |
2. मु0अ0स0 204/19 धारा 307 भादवि थाना जामो जनपद अमेठी ।
3. मु0अ0स0 205/19 धारा 03/25 भादवि थाना जामो जनपद अमेठी ।
4. पल्सर मोटरसाईकिल यूपी 44 यू 2302 (207 एमवी एक्ट में सीज) ।

गिरफ्तार करने वाली टीमः-
1. प्रभारी निरीक्षक राजीव सिंह थाना जामो जनपद अमेठी ।
2. का0 दीपचन्द य़ादव थाना जामो जनपद अमेठी ।
3. का0 सोमेश मौर्या थाना जामो जनपद अमेठी ।
4. का0 राघवेन्द्र सिंह थाना जामो जनपद अमेठी ।

31/05/2019

दियख लियव ई

23/05/2019

फैज़ाबाद लोकसभा से BJP के लल्लू सिंह अपने प्रतिद्वंदी सपा बसपा के गठबंधन के प्रत्याशी आनंद सेन यादव से 41060, वोट से आगे चल रहे हैं

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