YANTA
सत्य साहित्य संहिता
यह दुनिया एक डब्बा,
डब्बे में असंख्य जीव-जान !
अपना-अपना डब्बा भरते ,
सदियों से ढूँढ रहे भगवान !!
संस्कृत में लिखे सारे श्लोक और ग्रंथ जरूरी नहीं की ईश्वर की ही अभिव्यक्ति या आदेश हो , कुछ ग्रंथ तत्कालीन दुष्ट प्रवृत्तियों द्वारा भी रचित हैं! अतः अपने विचार शुद्ध रखें ईश्वर आपके साथ रहेगा , इसके लिए किसी के बन्धन में ना पड़ें!
तू समंदर है तो क्या ,
मैं भी कश्ती का निर्माता हूँ,
पार जाऊँगा तेरी क्षितिज को !
परीक्षा में उत्तीर्णता ,
यह पूर्णता तो नहीं ,
अक्षर साक्षर बनाते हैं,
अनुभवी नहीं!
नंबर देखूँ कि नाम जपूँ,
ये काउंटर-माला बाधा है,
संकोच होता है नाम लेने में,
मेरी माँ का नाम ही राधा है!
पवित्र भावना , निष्काम कामना , ईश्वर की हँसी, और श्रद्धा के दो उँगलियाँ!
छू गया जो चेहरे का पर्दा तो क्या ,
अरमाने- क़ुसूर नहीं ये , बस ख्वाहिशें- तसलियाँ!!
वो रास्ता था की क्या था , कि
ना कदम बढ़े मेरे , ना मैं रुका कहीं ,
और आख़िर में जो मिला ,
वो भी कुछ ना था , पर कुछ तो था !
गेंदे को गेंदे ही रहने दो,
और गुलाब को गुलाब !
यूँ कि भरे उपवन का ,
कोई, एक रंग नहीं होता !
सनातन सूर्य है, हिंदुत्व ग्रहों में वृहस्पति , और बाकी के पंथ - धर्म अनेकों ग्रह हैं, जो सूर्य की ही परिक्रमा करते हैं!
सकारात्मक सोच और कर्म
स्वर्ग की अनुभूति कराती है,
और नकारात्मकता नरक की ! इसी जीवन में इसी लोक पर !!
अज्ञानता और निर्धनता के बीच किसी समृद्ध और उदार व्यक्ति का होना, उसे देवता और महात्मा बना देता है!
ध्यान मन को धीरज धरे,
कार्य करे बुद्धि का मंचन !
जल से शुद्धि शरीर की,
अग्नि करे आत्मा को कंचन !!
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