Life Insurance
We Provide Life cover till life,after Life for Financial,Social Security on Very Tiny Investment Fro
We Provide Life cover till life,after Life for Financial,Social Security on Very Tiny Investment From Govt.Of India Own Co.Life Insurance Corporation
04/10/2025
कुछ लोगों को कल से दौरा पड़ा हुआ है कि आरएसएस के सौ साल होने पर भारत सरकार डाक टिकट और सिक्का कैसे जारी कर सकती है?
तो उनको ये बताना जरूरी है कि भारत सरकार मुहम्मद इकबाल पर डाक टिकट जारी कर चुकी है. वे पाकिस्तान के मूल संस्थापक हैं. जिन्ना को पाकिस्तान का ख्याल बाद में आया. पाकिस्तान ने उन पर दस से ज्यादा डाक टिकट जारी किए हैं. भारत सरकार ने भी उनकी शान में 1988 में राजीव गांधी के समय एक डाक टिकट जारी कर दिया.
कांग्रेस सरकार जिन्ना वाली मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद इस्माइल पर भी डाक टिकट जारी कर चुकी है. पाकिस्तान के लिए लंबी लड़ाई लड़ने के बाद वे कभी पाकिस्तान नहीं गए क्योंकि उनका बिजनेस यहीं भारत में था.
इसके अलावा मनमोहन सरकार ने हसरत मोहानी पर भी डाक टिकट जारी किया. मजेदार ये है कि पाकिस्तान ने हसरत मोहानी को "पाकिस्तान का संस्थापक" बताते हुए डाक टिकट जारी किया है.
सोनिया-मनमोहन सरकार ने दारूल उलूम देवबंद के मौलाना और जमाते इस्लामी के संस्थापक हुसैन अहमद मदनी की याद में 2012 को डाक टिकट जारी किया था.
वे भारत को तुर्की के खलीफा के मार्गदर्शन में इस्लामिक देश बनाने के रेशमी रुमाल आंदोलन के कारण गिरफ्तार किए गए थे. वे खिलाफत आंदोलन में ये कहकर आए कि ब्रिटेन ने भारत की हुकूमत मुसलमानों से छीनी है. वे भी भारत में रह गए.
वैसे तो नेहरू जी के समय में ही उनको पद्म भूषण दे दिया गया था.
तो हर सरकार की अपनी प्राथमिकता होती है कि किसका सम्मान करें. कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के नेताओं और पाकिस्तान के संस्थापको पर डाक टिकट जारी किया, वर्तमान सरकार ने आरएसएस के सौ साल होने पर.
हर पार्टी की सरकार अपने मूल समर्थकों का ख्याल रखती है.
वैसे इंदिरा गांधी ने विनायक दामोदर सावरकर की स्मृति में डाक टिकट जारी किया था. लेकिन वह दूसरी कांग्रेस थी.
18/08/2025
हिंदुओं के अंदर खतरे को भांप लेने की क्षमता एकदम शून्य है... तालिबान सिर पर आ चुका है और हिंदुओं को कोई होश नहीं है
- तालिबान की फोर्स में सबसे ज्यादा पश्तून नस्ल के लड़ाके हैं... पश्तून यानी पठान । अहमद शाह अब्दाली भी पश्तून ही था (आज के तालिबानियों का पूर्वज) 1761 में जब पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ तब उस युद्ध के बाद हजारों हिंदू महिलाओं को अफगानियों ने गुलाम बना लिया था । हर अफगानी कैंप में 10-10 हिंदू महिलाएं बंदी थीं जिनके दोनों हाथ ऊपर बांध दिए गए थे ताकी वो बलात्कार किए जाते वक्त प्रतिरोध ना कर सकें । (सोर्स- किताब-पानीपत, लेखक- विश्वास पाटिल)
- ये घटना इसलिए बताना जरूरी था कि अहमद शाह अब्दाली पानीपत की तीसरी लड़ाई में हावी नहीं हो पाता अगर उसकी सेना को यमुना पार करने का संकरा रास्ता किसी हिंदुस्तानी नहीं बताया होता । हिंदू दूरदर्शी नहीं होता है और हमेशा अपने नजदीकी और तुरंत मिलने वाले फायदे को देखता है । इस हिसाब से चंद सोने के सिक्कों के लिए किसी हिंदू ने ही अफगान हमलावर अहमद शाह अब्दाली को ये बता दिया था कि बाढ़ से उफनती यमुना को पार करने का पतला रास्ता कहां से है ?
-आज तालिबान पूरे ठाठ के साथ पूरी दम के साथ काबुल पर काबिज हो चुका है और लूटी हुई अमेरिकी राइफल हाथों में लिए हुए इन तालिबानी लड़ाकों का सबसे बड़ा सपना यही है कि काफिरों की सबसे बड़ी धरती हिंदुस्तान को किसी तरह दारुल इस्लाम बना दिया जाए । ये वही सपना है जो उसके पूर्वज अहमद शाह अब्दाली और नादिरशाह ने देखा था ।
- अब अब्दाली और नारिदशाह की विरासत संभालने वाले तालिबान पूरे अफगानिस्तान पर काबिज हो चुके हैं और उनके पास साढे सात हजार की पूरी अफगान फोर्स है जो कि अमेरिका ने तैयार की थी और उनके पास अमेरिका के अत्याधुनिक हथियार और लड़ाकू विमान तक हैं । ऐसी स्थिति में अब भारत के ऊपर एक बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है क्योंकि ये वो तालिबान है जिसको अपनी जिंदगी की कोई परवाह नहीं है क्योंकि उनके पास जन्नत की हूरों का ऑफर है जो उन्हें आसमानी किताब से मिला हुआ है । लेकिन हिंदुओं को अपनी जान की फिक्र ही नहीं है क्योंकि उनको आने वाले खतरे का कोई अंदेशा ही नहीं है ।
-माफ करना... कटु शब्द हैं लेकिन हिंदू खाने.... मल मूत्र त्याग करने... और यौन लिप्सा की पूर्ति को ही जीवन मान चुका है और इसीलिए उसे ये भी होश नहीं है कि जिस विचारधारा से तालिबान पैदा हुआ है वो देवबंदी विचारधारा का सबसे बड़ा मदरसा भारत के उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में है । जिसके देवबंद दारुल उलूम कहा जाता है ।
- हिंदुओं को ये भी नहीं पता है कि तालिबान की स्थापना करने वाला मुल्ला उमर साल 1994 में यहीं भारत के उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के देवबंद से पढाई करके अफगानिस्तान गया था और फिर वहां तालिबान की स्थापना की थी ।
- हम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद देते हैं जिन्होंने खतरे को भांपा और देवबंद में एटीएस को 2 हजार वर्ग मीटर की जमीन देकर एक कमांडों सेंटर बनाने की योजना तैयार की है ।
-हिंदू उस शुतुर्मुर्ग की तरह है जिसने अपनी गर्दन सेक्लुरिज्म और अहिंसा की रेत में छुपा ली है और उसे लग रहा है कि वो सुरक्षित हो गया है । आज हम लोग देख रहे हैं कि मीडिया में जो डिबेट्स हो रही हैं उसमें अमेरिका को कोसा जा रहा है । वो अमेरिका जिसने अफगानिस्तान में ना सिर्फ अपने 2 हजार जवानों का बलिदान किया बल्कि अपने 60 लाख करोड़ रुपए भी अफगानिस्तान में लगाए । जिसने तालिबान को 20 साल तक रोक कर रखा उसको पूरी दुनिया गाली दे रही है... गाली दो अमेरिका से कोई सहानुभूति नहीं है । लेकिन मीडिया की डिबेट्स में विषय ये होना चाहिए था कि भारत पर इसका असर क्या होगा ?
- लेकिन टीवी स्टूडियो में बैठने वाले एंकरों ने ना कुरान पढी है... ना शरीयत... ना हदीस... और ना ही उन्हें इतिहास की जानकारी है । उन्हें ये भी नहीं पता होगा कि पठानों ने कब कब और कितनी बार हिंदुस्तान पर हमला किया है । इन अनपढ एंकरों से और कोई उम्मीद भी नहीं की जा सकती है । डिबेट्स में जब कोई सेना अधिकारी कोई सही बात कहने की कोशिश भी करता है तो उसको चुप करा दिया जाता है । और उससे ये सवाल पूछा जाता है कि अब अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति क्या होगी ?
-टीवी डिबेट्स के अनपढ एंकर्स को शरीयत के बारे में कुछ नहीं पता है । वो फालतू में ही महिलाओं पर बहस कर रहे हैं । यहां हिंदुस्तान में कौन सा तालिबान हैं लेकिन यहां पर सारी मुस्लिम महिलाएं बुर्का पहनकर ही बाजार जाती हैं । मुख्य विषय बुर्का नहीं बल्कि भारत की सुरक्षा होनी चाहिए थी जिस पर एक बार भी किसी टीवी चैनल पर डिबेट नहीं हुई है ।
- जो समझदार हिंदू हैं वो अल्पसंख्यक हैं यानी उनकी संख्या बहुत कम है । उनसे मुझे कोई शिकायत नहीं है लेकिन अधिकांश
बाकी हिंदुओं से मैं ये कहना चाहूंगा कि कम से कम वोट सही पार्टी को देना ताकि अजित डोवल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने रहें क्योंकि कोई तो है जिसके पास खतरे को पहले से भांप लेने की क्षमता है ।
24/05/2025
RBI Board approves the transfer of ₹2,68,590.07 crore (approx 33 Billion Dollar) as surplus to the Central Government for the accounting year 2024-25.
चमचे - हाय हाय मोदी RBI के पैसे खा रहा है... RBI डूब जायेगी
यै है मोदी का जादू,जिनकी इमानदार,पारदर्शी,योजनाओ
का क्रियावनायन नियमानुसार ंभारत सरकार के द्धारा करनै पर भारतीय रिर्जव बैंक को वित्तीय वर्ष मै इतनी रकम की अतिरिक्त कमाई हुई जिसै भारत सरकार कै खाते मै स्थान्तरीत कर दिया,यै है ऐक चाय वालै का वित्तीय प्रबंध,जय हिंद!
निशिकांत दुबे पर अवमानना
केस चलाने से पहले अपने
गिरेबान में झाँक लेना मीलॉर्ड -
AG भी सोचें Dissent का
भी कुछ मतलब होता है -
अजीत भारती का 3 साल में
क्या किया -
निशिकांत दुबे के सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस पर दिए बयान के लिए अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए वक़्फ़ केस का वकील अनस तनवीर उछल कर सुप्रीम कोर्ट जस्टिस बीआर गवई और अगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच के सामने पहुँच गया - जजों ने कहा कि आप अटॉर्नी जनरल से अनुमति लीजिये -
तो अनस तनवीर ने AG से अनुमति मांगी है और एक अन्य वकील नरेंद्र मिश्रा ने चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों से दुबे पर contempt केस चलाने के लिए अनुरोध किया है -
मैं अटॉर्नी जनरल को याद दिला दूं कि उन्होंने 14 सितम्बर 2022 को youtuber अजीत भारती के खिलाफ भी Contempt केस चलाने के लिए कहा था - उसके बाद भारती के खिलाफ उसी मामले में दूसरी बार भी अनुमति दी थी - लेकिन ढाई साल बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जिसका मतलब यह निकलता है कि AG की बात की भी सुप्रीम कोर्ट की नज़रो में कोई वैल्यू नहीं है -
अजीत भारती के खिलाफ कार्रवाई न होने का मतलब साफ़ था कि वह कोर्ट में बहुत कुछ ऐसा कह सकता था जो जजों को सुनना कठिन होता - कुणाल कामरा की अवमानना का केस भी गोल हो गया -
निशिकांत दुबे के बयान का मतलब अदालत की अवमानना नहीं कहा जा सकता - उसने देश की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए जनभावनाओं को उजागर किया जिसे सुप्रीम कोर्ट जानकर भी अनजान बना रहता है - अपने चैम्बर की खिड़कियों से बाहर झाँक कर कान लगा कर सुने कि जनता उनके बारे में क्या सोचती और कहती है -
Urban Naxal गिरोह को 2018 में राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच के एक जज चंद्रचूड़ के शब्द आज सुप्रीम कोर्ट को याद करने चाहिए - 29 अगस्त, 2018 को चंद्रचूड़ ने कहा था -
“Dissent is the safety valve of democracy. If dissent is not allowed, then the pressure cooker may burst,”
फिर 15 फरवरी 2020 को एक समारोह में चंद्रचूड़ ने कहा था - “Suppression of intellect is the suppression of the conscience or the nation”
आप अब निशिकांत दुबे पर मुकदमा दायर कर उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को क्यों कुचल देना चाहते हैं - Urban Naxals को देश के विरोध में काम करने और प्रधानमंत्री की हत्या तक षड़यंत्र रचने को आप “dissent” कहना चाहते हैं, उसे सही मानते है और यह भी कहते हैं कि dissent को दबाया तो प्रेशर कुकर फट जायेगा -
अब निशिकांत दुबे की आवाज़ दबाने से प्रेशर कुकर कैसे नहीं फटेगा - सुप्रीम कोर्ट को याद रहना चाहिए कि जनमानस में आपकी विश्वसनीयता ख़त्म हो चुकी है खासकर जस्टिस यशवंत वर्मा के प्रकरण के बाद -
एक बात और याद दिलाना चाहता हूं कि 27 और 29 अक्टूबर, 2020 को चीफ जस्टिस के खिलाफ प्रशांत भूषण ने दो आपत्तिजनक ट्वीट किए थें लेकिन आपने उसे सजा दी, मात्र एक रुपया जुर्माना - वह कोई न्याय नहीं था बल्कि न्याय के साथ एक घिनौना मजाक था -
प्रशांत भूषण के पिता शांतिभूषण ने 16 में से 8 पूर्व चीफ जस्टिस को भ्रष्टाचार में लिप्त कहा था - उसका कुछ नहीं हुआ - उसके बाद 2009 में प्रशांत भूषण ने हलफनामा देकर तत्कालीन CJIs रंगनाथ मिश्रा, के एन सिंह, ए एम अहमदी, एमएम पुंछी, डॉ ए एस आनंद और वाई के सभरवाल भ्रष्टाचार के सबूत दिए थे - तब भी contempt case चला था लेकिन उसे भी दबा दिया गया -
लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता यदि आपके खिलाफ जा रही है तो उसे सहना सीखिए अन्यथा सम्पूर्ण न्यायपालिका के मुंह पर कालिख का रंग और गाढ़ा हो जाएगा - किस किस को रोकेंगे जनाब, हर व्यक्ति आपका विरोध करता दिखाई देगा - वकील इसलिए नहीं बोलते क्योंकि उन्हें आप ब्लैकलिस्ट कर सकते हैं जिससे वो कोई जीत ही न सके -
अब “सत्यमेव जयते” की जगह “झूठमेव जयते” लिखना पड़ेगा सुप्रीम कोर्ट में ?
(सुभाष चन्द्र)
“मैं वंशज श्री राम का”
20/04/2025
19/04/2025
पवनसुत हनुमान जी की जय!
19/04/2025
🌹🌷🕉 माँ वैष्णो देवी जी के पावन चरणों🌹🌷🕉
🌹🌷🕉 माँमें मैरा दण्डवत प्रणाम 🌷🕉 🌹
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