Kavya Rang
"शब्दों में बसी भावनाओं का सफर, जहाँ हर कविता दिल से दिल तक जाती है।"
24/03/2026
उड़ गया वह भी हवा में खाक बनकर ।
क्या गया लेकर अधिक चालाक बनकर ॥
भाग्य में जिसके लिखा था डूबना ही।
फायदा पाया न वह तैराक बनकर ॥
क्या हुआ यदि है नही खत का चलन अब।
तुम चले आते पते पर डाक बनकर ॥
माँ -बहन जिसको सुखातीं ओट में हैं ।
वस्त्र बाहर सज रहा पोशाक बनकर ॥
चापलूसी का जमाना है ' किशन' यह ।
क्या मिला अब तक तुम्हें बेबाक बनकर ॥
कृष्ण कुमार मिश्र ' किशन '
#
Save Nature.
To Future.
29/08/2025
शीर्षक - "कर्ण की वीरता"
आज करता हूं नमन में ,कर्ण की उस वीरता को।
धर्म के प्रति न्याय संगत ,और उसकी धीरता को।
सूर्य की आराधना से , पुत्र कुंती को हुआ था।
साथ में कुंडल कवच थे ,जब प्रथा जी ने छुआ था।
लोक के भय से प्रथा ने , बंद कर उसको पिटारी ।
ले गईं गंगा किनारे , हाय किस्मत क्या हमारी।
आंख से आंसू बहे हैं ,पुत्र का अब त्याग करके।
मैं अभागन जी रही हूं, शर्म से हां भाग करके।
बह नदी उस पार पहुंचा, रो बिलखता चीखता वो।
देख अधिरथ रो रहे थे , उस पहर की मर्मता वो।
तेज मष्तिक पर लिए वह , सूर्य जैसा दिख रहा था।
क्या विधाता और भी कुछ,शेष था जो लिख रहा था।
गोद में उसको उठाकर , चूमते अधिरथ खुशी से।
मिल गई संतान उनको , कह रहे थे वो सभी से।
रणधीर धाकरे की कृति "कर्ण की वीरता" के प्रथम सर्ग से कुछ पंक्तियां ।
11/05/2025
मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
दिवस, जिसे विश्व भर में माँ के प्रति सम्मान और प्रेम व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है, एक ऐसा अवसर है जो हमें अपनी माँ के त्याग, समर्पण और बिना शर्त प्यार को याद करने का मौका देता है। यह दिन हर साल मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। भारत में भी यह दिन विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है, जहाँ माँ को देवी का दर्जा दिया जाता है।माँ वह पहली शिक्षक होती है, जो हमें जीवन के मूल्यों, नैतिकता और प्रेम की शिक्षा देती है। वह न केवल अपने बच्चों की देखभाल करती है, बल्कि परिवार के हर सदस्य को जोड़ने वाली कड़ी भी होती है। माँ का प्यार अनमोल है, जिसकी कोई कीमत नहीं आंकी जा सकती। मातृ दिवस हमें यह अवसर देता है कि हम अपनी माँ को धन्यवाद कहें, उनके साथ समय बिताएँ और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें।
26/04/2025
कविता
23/04/2025
सोचे भी नहीं पाप उतने
जितनों का दण्ड सहा हमने !
जिसके भी साथ न चल पाये
उसने अपनी भाषा बदली
अपने ही मन के शब्द रखे
रिश्तों की परिभाषा बदली
कहने को साथ रहा मेला
लेकिन हमको समझा कम ने!
घटनाओं में हम घटे सदा
सबने केवल अखबार पढ़ा
हर बार ग़लत उच्चारण था
जिसने भी जितनी बार पढ़ा
सबने छोड़ा आधे पथ पर
थककर जब पाँव लगे थमने !
हर शीत सहा पर सूरज से
मुट्ठी भर धूप नहीं माँगी
हमने जग से कोई सुविधा
अपने अनुरूप नहीं माँगी
फिर भी न हमें मुड़कर देखा
हर आते जाते मौसम ने !
22/04/2025
हर साल 22 अप्रैल को विश्व भर में धरती दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें हमारे पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों और ग्रह की सुंदरता के प्रति जागरूक होने का अवसर देता है। धरती दिवस की शुरुआत 1970 में हुई थी, जब अमेरिकी सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने पर्यावरण संरक्षण के लिए एक वैश्विक आंदोलन की नींव रखी। आज यह दिन 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है, जिसमें लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते हैं।
धरती हमारा घर है, और यह हमें जीवन के लिए आवश्यक सभी संसाधन प्रदान करती है—हवा, पानी, भोजन और आश्रय। लेकिन जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, प्रदूषण और जैव-विविधता के नुकसान जैसे मुद्दों ने हमारे ग्रह को खतरे में डाल दिया है। धरती दिवस हमें याद दिलाता है कि हमें अपने पर्यावरण की रक्षा के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से कदम उठाने होंगे।
धरती दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह एक संकल्प है कि हम अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनें।
1.पेड़ लगाएँ:
पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। अपने आसपास पेड़ लगाकर आप पर्यावरण की रक्षा में योगदान दे सकते हैं।
2.प्लास्टिक का उपयोग कम करें:
एकल-उपयोग प्लास्टिक को कम करने के लिए कपड़े के थैले, स्टील के बर्तन और पुन: उपयोग योग्य बोतलों का उपयोग करें।
3.ऊर्जा बचाएँ:
बिजली की खपत कम करने के लिए LED बल्ब का उपयोग करें, अनावश्यक बिजली के उपकरण बंद करें और सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों को अपनाएँ।
4.जल संरक्षण:
पानी की बर्बादी रोकें। नल बंद रखें, वर्षा जल संचय करें और पानी का समझदारी से उपयोग करें।
धरती दिवस हमें यह सिखाता है कि छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। यदि हम सभी मिलकर अपने पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी लें, तो हम एक स्वच्छ, हरा-भरा और स्वस्थ ग्रह अपने भविष्य की पीढ़ियों के लिए छोड़ सकते हैं। आइए, इस धरती दिवस पर संकल्प लें कि हम अपने ग्रह की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
#
19/04/2025
सोचता हूँ,
कुछ अधूरे काम कर लूँ,
वक़्त हरदम साथ में चलता नहीं है!
कुछ अधूरे गीत,
व्याकुल पूर्णता को,
कुछ नये संसार रचना शेष अब तक।
भाव कुछ हैं,
शब्द देहों के प्रतीक्षित,
दे रहीं मन में कथायें नित्य दस्तक।।
सोचता हूँ,
लेखनी में ज्योति भर लूँ,
दीप शाश्वत बन कोई जलता नहीं है!
कुछ नये सपने,
सजाने हैं अभी भी,
कुछ नये विश्वास आँखें खोलते हैं।
अनगढ़े कुछ शब्द,
आतुर हैं सृजन को,
कुछ अबोले बोल मुझमें बोलते हैं।।
सोचता हूँ,
कुछ, नदी पर, दीप धर लूँ,
मृत्यु का क्षण देर तक टलता नहीं है!
रेत पर कुछ,
दूर तक पदचाप छोड़ें,
कुछ निराले शिल्प गढ़ने हैं अभी भी।
सागरों की नापनी,
गहराईयाँ हैं,
पर्वतों के शीश चढ़ने हैं अभी भी।।
सोचता हूँ,
कर्म का भवसिंधु तर लूँ,
कौन है जिसको समय छलता नहीं है!
शीत से हारी
हज़ारों देह जिनको,
साँस देकर गुनगुनाना चाहता हूँ।
नैन जिनके हैं
अमावस, मैं उन्हीं में,
ज्योति बन कर जगमगाना चाहता हूँ।।
सोचता हूँ,
फल सरीखा नित्य झर लूँ,
वृक्ष कोई हो, सदा फलता नहीं है!
कुण्डलिया छंद
फौजी हैं हम देश के,हमें देश पर गर्व ।
स्वतंत्रता गणतंत्रता, यही हमारे पर्व।
यही हमारे पर्व, प्रेम से इन्हें मनाते ।
कर वीरों को याद ,पुष्प हम उन्हें चढ़ाते।
संकट में हो देश, जन्म हम लेंगे सौ जी।
सहकर कष्ट अनेक, कहाते हैं हम फौजी।
डरकर के चलना नहीं ,चलना सीना तान।
उठा तिरंगा हाथ में , बढ़ा देश की शान।
बढ़ा देश की शान, कि खुश हो भारत माता।
गौरवमय इतिहास ,कि यहां पर लिखा जाता।
हो जाएं कुर्बान, देश पर अपने मर कर।
देख हमारा शौर्य, भागते दुश्मन डरकर।
रणधीर धाकरे
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Website
Address
Agra