DR.L.Rajput
Dr.L.Rajput M.D.is Sr. Homeopathic Consultant working in this field since 13 years.Having good exper
21/05/2023
जामुन के फायदे
जामुन का सेवन करने से आपका दिल हेल्दी और स्ट्रॉन्ग बनता है|
जामुन खाने से डाइजेशन बेहतर होता है और कब्ज की समस्या से निजात मिलता है| वजन कम करने के लिए भी जामुन काफी फायदेमंद माना जाता है|
ये पेट दर्द, डायबिटीज, गठिया, पेचिस, पाचन संबंधी कई अन्य समस्याओं को ठीक करने में भी फायदेमंद है| खून की कमी को पूरा करता है- विटामिन सी और आयरन से भरपूर जामुन शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता है
जामुन में एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा पाई जाती है जिसके चलते स्किन के लिए यह काफी फायदेमंद साबित होता है|
खाली पेट न खाएं
खाली पेट जामुन खाना भी आपको नुकसान पहुंचा सकता है. दूसरी तरफ, जामुन स्वाद में खट्टा होता है, तो सुबह उठते ही पहली चीज जामुन खाना एसिडिटी और पेट दर्द की वजह बन सकता है. जामुन का सेवन डाइजेशन में मदद करता है इसलिए इसे खाना खाने के बाद ही खाएं |
23/02/2023
https://youtu.be/3mM3u0Db88o
Obesity
Obesity part 2 Obesity A disorder involving excessive body fat that increases the risk of health problems.Obesity occurs when a person's body mass index is 25 or greater. T...
15/02/2023
https://youtu.be/Xgf4hjI1XKg
Obesity in Children
Obesity in Children Obesity in Children As we all know nowadays obesity is a big concern to all in every age group and gender.Causing factor of obesity are many.For better life ...
31/12/2022
23/12/2022
भारत की आजादी के ठीक पहले मुम्बई में रायल इण्डियन नेवी के सैनिकों द्वारा पहले एक पूर्ण हड़ताल की गयी और उसके बाद खुला विद्रोह भी हुआ। इसे ही जलसेना विद्रोह या मुम्बई विद्रोह (बॉम्बे म्युटिनी) के नाम से जाना जाता है। यह विद्रोह १८ फ़रवरी सन् १९४६ को हुआ जो कि जलयान में और समुद्र से बाहर स्थित जलसेना के ठिकानों पर भी हुआ। यद्यपि यह मुम्बई में आरम्भ हुआ किन्तु कराची से लेकर कोलकाता तक इसे पूरे ब्रिटिश भारत में इसे भरपूर समर्थन मिला। कुल मिलाकर ७८ जलयानों, २० स्थलीय ठिकानों एवं २०,००० नाविकों ने इसमें भाग लिया। किन्तु दुर्भाग्य से इस विद्रोह को भारतीय इतिहास मे समुचित महत्व नहीं मिल पाया है।
ऐसे नाजुक समय में उनके तारणहार की भूमिका में कांग्रेस और लीग के नेता आगे आये, क्योंकि सेना के सशस्त्र विद्रोह, मजदूरों द्वारा उसके समर्थन तथा कम्युनिस्टों की सक्रिय भूमिका से राष्ट्रीय आन्दोलन का बुर्जुआ नेतृत्व स्वयं आतंकित हो गया था। जिन्ना की सहायता से पटेल ने काफी कोशिशों के बाद 23 फ़रवरी को नौसैनिकों को समर्पण के लिए तैयार कर लिया। उन्हें आश्वासन दिया गया कि कांग्रेस और लीग उन्हें अन्याय व प्रतिशोध का शिकार नहीं होने देंगे। बाद में सेना के अनुशासन की दुहाई देते हुए पटेल ने अपना वायदा तोड़ दिया और नौसैनिकों के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात किया। मार्च '46 में आन्ध्र के एक कांग्रेसी नेता को लिखे पत्र में सेना के अनुशासन पर बल देने का कारण पटेल ने यह बताया था कि 'स्वतन्त्र भारत में भी हमें सेना की आवश्यकता होगी।' उल्लेखनीय है कि 22 फ़रवरी को कम्युनिस्ट पार्टी ने जब हड़ताल का आह्नान किया था तो कांग्रेसी समाजवादी अच्युत पटवर्धन और अरुणा आसफ अली ने तो उसका समर्थन किया था, लेकिन कांग्रेस के अन्य नेताओं ने विद्रोह की भावना को दबाने वाले वक्तव्य दिए थे। कांग्रेस और लीग के प्रान्तीय नेता एस.के. पाटिल और चुन्दरीगर ने तो कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिए स्वयंसेवकों को लगाने तक का प्रस्ताव दिया था। नेहरू ने नौसैनिकों के विद्रोह का यह कहकर विरोध किया कि 'हिंसा के उच्छृंखल उद्रेक को रोकने की आवश्यकता है।' गाँधी ने 22 फ़रवरी को कहा कि 'हिंसात्मक कार्रवाई के लिए हिन्दुओं-मुसलमानों का एकसाथ आना एक अपवित्र बात है।' नौसैनिकों की निन्दा करते हुए उन्होंने कहा कि यदि उन्हें कोई शिकायत है तो वे चुपचाप अपनी नौकरी छोड़ दें। अरुणा आसफ अली ने इसका दोटूक जवाब देते हुए कहा कि नौसैनिकों से नौकरी छोड़ने की बात कहना उन कांग्रेसियों के मुँह से शोभा नहीं देता जो ख़ुद विधायिकाओं में जा रहे हैं।
नौसेना विद्रोह ने कांग्रेस और लीग के वर्ग चरित्र को एकदम उजागर कर दिया। नौसेना विद्रोह और उसके समर्थन में उठ खड़ी हुई जनता की भर्त्सना करने में लीग और कांग्रेस के नेता बढ़-चढ़कर लगे रहे, लेकिन सत्ता की बर्बर दमनात्मक कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने चूँ तक नहीं की। जनता के विद्रोह की स्थिति में वे साम्राज्यवाद के साथ खड़े होने को तैयार थे और स्वातन्त्रयोत्तर भारत में साम्राज्यवादी हितों की रक्षा के लिए वे तैयार थे। जनान्दोलनों की जरूरत उन्हें बस साम्राज्यवाद पर दबाव बनाने के लिए और समझौते की टेबल पर बेहतर शर्तें हासिल करने के लिए थी।
1967 में भारतीय स्वतंत्रता की 20 वीं वर्षगांठ पर एक संगोष्ठी चर्चा के दौरान; यह उस समय के ब्रिटिश उच्चायुक्त जॉन फ्रीमैन ने कहा कि 1946 के विद्रोह ने 1857 के भारतीय विद्रोह की तर्ज पर दूसरे बड़े पैमाने के विद्रोह की आशंका को बढ़ा दिया था। ब्रिटिश को डर था कि अगर 2.5 मिलियन भारतीय सैनिक जिन्होंने विश्व युद्ध में भाग लिया था, विद्रोह करते हैं तो ब्रिटिश में से कोई नहीं बचेगा और उन्हें अंतिम व्यक्ति कतक मार दिया जाएगा"|
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जलसेना विद्रोह (मुम्बई) - विकिपीडिया भारत की आजादी के ठीक पहले मुम्बई में रायल इण्डियन नेवी के सैनिकों द्वारा पहले एक पूर्ण हड़ताल की गयी और उसके बाद खु....
17/11/2022
Dr Lovely Rajput on Instagram Dr Lovely Rajput shared a post on Instagram. Follow their account to see 10 posts.
14/10/2022
Dr Lovely Rajput on Instagram: "❤️❤️" Dr Lovely Rajput shared a post on Instagram: "❤️❤️". Follow their account to see 9 posts.
13/10/2022
https://youtube.com/shorts/qK_KHKERlTg?feature=share
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13/10/2022
https://youtube.com/shorts/cz5IyuqVQcQ?feature=share
Swimsuit, Gajra and Bindi — 1950s' Miss India #shorts #picturethis This photograph from the 1952 Miss Universe pageant depicts Indrani Rahman, the Indian contestant wearing a swimsuit with a bindi and gajra. Does this challe...
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28/02/2023