Sushil Shekhar

Sushil Shekhar

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Social Worker, Environmentalist

05/21/2026

सवाल तो पूछेंगे, चाहे सरकार किसी की भी हो !!

04/24/2026

भारत को “दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था” बनने का ढिंढोरा पीटने वाले आज चुप क्यों हैं, जब खबर आ रही है कि भारत छठे स्थान पर फिसल गया है? जब रैंकिंग ऊपर जाती है तो इसे अपनी नीतियों की बड़ी उपलब्धि बताया जाता है, लेकिन जैसे ही गिरावट आती है, वही लोग या तो चुप्पी साध लेते हैं या बहाने बनाने लगते हैं। सच्चाई यह है कि अर्थव्यवस्था केवल रैंकिंग से नहीं, बल्कि रोजगार, महंगाई, आम लोगों की आय और जीवन स्तर से आंकी जाती है। अगर देश में बेरोजगारी बढ़ रही है, महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ रही है और छोटे व्यवसाय संघर्ष कर रहे हैं, तो केवल रैंकिंग का जश्न मनाना या गिरावट पर चुप रहना जनता के साथ ईमानदारी नहीं है। जिम्मेदार नेतृत्व का मतलब है अच्छे समय में श्रेय लेना ही नहीं, बल्कि खराब समय में जवाबदेही भी स्वीकार करना।

04/24/2026

हाल ही में Raghav Chadha का Aam Aadmi Party छोड़कर Bharatiya Janata Party में जाना एक बड़ा राजनीतिक संदेश देता है। अपने फैसले के बाद उन्होंने कहा कि AAP “अपने रास्ते से भटक गई है” और वे “गलत कामों का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे।”

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में कई अहम सवाल खड़े होते हैं।

सबसे पहले—अगर वे वास्तव में इतने असंतुष्ट थे, तो क्या उन्हें अपनी अलग राजनीतिक राह नहीं बनानी चाहिए थी? क्या एक नई पार्टी बनाकर या स्वतंत्र रूप से जनता के बीच जाकर अपने सिद्धांतों को साबित करना ज्यादा ईमानदार कदम नहीं होता?

दूसरा बड़ा सवाल यह है कि जब वे AAP में इतने वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका में रहे, तब उन्होंने पार्टी के कितने फैसलों या कामों की खुलकर आलोचना की? अगर पार्टी पहले से ही “भटक” रही थी, तो क्या उस समय उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसका विरोध किया, या फिर सत्ता और पद में रहते हुए चुप्पी बनाए रखी?

तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण विरोधाभास—जिन आरोपों या संकेतों के आधार पर उन्होंने AAP छोड़ी, क्या वही सवाल Bharatiya Janata Party पर भी समय-समय पर नहीं उठते रहे? विपक्ष लगातार BJP पर भी संस्थाओं के दुरुपयोग, राजनीतिक दबाव और पारदर्शिता की कमी जैसे आरोप लगाता रहा है। ऐसे में यह समझना मुश्किल है कि जो बातें AAP में अस्वीकार्य थीं, वे BJP में स्वीकार्य कैसे हो गईं।

यह कदम केवल एक दल बदल नहीं, बल्कि राजनीतिक विचारधारा की लचीलेपन—या कहें अवसरवाद—पर भी रोशनी डालता है। जनता के लिए यह तय करना कठिन हो जाता है कि नेता सिद्धांतों के आधार पर फैसले लेते हैं या परिस्थितियों के अनुसार अपने रुख बदलते हैं।

04/16/2026

76 साल की उम्र में भी वही जुनून और समर्पण—यह पहचान है प्रणय रॉय की। भारतीय पत्रकारिता में उनका नाम विश्वसनीयता और गहराई के साथ जुड़ा हुआ है।

NDTV की स्थापना से लेकर उसे एक भरोसेमंद समाचार मंच बनाने तक उनका सफर प्रेरणादायक रहा है। NDTV के मालिक से यहां तक पहुंचने की यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन पत्रकारिता के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ।

इस उम्र में भी एक हाथ में मोबाइल से विजुअल लेते और दूसरे हाथ में माइक थामे, दिखाता है कि उनके अंदर आज भी वही पत्रकारिता का जुनून जिंदा है।

04/15/2026

बिहार की राजनीति में आज सचमुच एक युग का अंत महसूस होता है। जंगल राज से सुशासन तक का सफर सिर्फ बदलाव नहीं, एक नई पहचान की कहानी है। गड्ढों भरी सड़कों से चमचमाती राहों तक,
अंधेरे घरों से हर घर रोशनी तक, डर और अपराध के माहौल से कानून और व्यवस्था तक—यह परिवर्तन अपने आप नहीं आया, यह दूरदर्शी नेतृत्व और लगातार प्रयासों का परिणाम है।

आपने सिर्फ शासन नहीं किया, बल्कि बिहार को एक नई दिशा दी, एक नई सोच दी। विकास, विश्वास और व्यवस्था—इन तीन स्तंभों पर खड़ा आपका कार्यकाल हमेशा याद किया जाएगा।

आपके इस सफर को आने वाली पीढ़ियाँ प्रेरणा के रूप में देखेंगी।
आपका योगदान इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।

Nitish Kumar

07/11/2025

"So-called Delhi Liquor Scam": A Reflection on Accountability and Institutional Efficiency

From July 2022 to July 2025—three full years—India’s premier investigative agencies, the CBI and the ED, have been unable to bring the Delhi liquor case to a legal conclusion. Such prolonged investigations naturally raise questions about the efficiency and credibility of these institutions.

If a scam did occur, those responsible should have been prosecuted and convicted through the judicial system by now. Conversely, if the case was politically motivated and lacked substantive evidence, the officials involved in perpetuating it must be held accountable for misuse of power and undermining public trust.

No institution should be beyond scrutiny—especially when people's lives and reputations are at stake. Swift, transparent, and just action is the cornerstone of a healthy democracy.

05/24/2025

एक ये भी दौर था !!

05/02/2025

"सरहदों पर बहुत तनाव है क्या, कुछ पता करो कहीं चुनाव है क्या"
Indori

10/10/2024

‘There won’t be another Tata’
In an era when most businessmen focused solely on their own growth, Ratan Tata's vision was entirely different. He prioritised the country above all, making small things like salt to India's first airline, Indian Airlines. His dedication is evident and will always inspire many.

You will always remain in our hearts.

Photos from Sushil Shekhar's post 06/30/2024

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