YogabyKumar

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Female Yog � and Male Yog � Lessons - in Group or OneOnone

05/27/2026

सर्वांगासन को योग में "आसनों का राजा" कहा जाता है क्योंकि यह सिर से लेकर पैर तक हमारे पूरे शरीर (सर्व-अंग) को प्रभावित करता है और उसे स्वस्थ रखता है। इसके मुख्य लाभ नीचे दिए गए हैं:

1 थायरॉइड ग्रंथि के लिए वरदान: इस आसन में जब ठुड्डी (chin) छाती से लगती है, तो थायरॉइड और पैराथायरॉइड ग्रंथियों पर अच्छा दबाव पड़ता है। इससे वहां रक्त संचार बढ़ता है और हार्मोन का संतुलन बेहतर होता है।

2 दिल के स्वास्थ्य में सुधार: उलटी स्थिति में होने के कारण पैरों और पेट से अशुद्ध रक्त बहुत आसानी से और बिना किसी दबाव के वापस दिल तक पहुंचता है। इससे दिल की कार्यक्षमता सुधरती है और उसे आराम मिलता है।
3 पाचन तंत्र को मजबूती: पेट के अंगों पर विपरीत खिंचाव और दबाव पड़ने से कब्ज (constipation), गैस और अपच जैसी समस्याएं दूर होती हैं। यह मेटाबॉलिज्म को भी दुरुस्त करता है।

4 मानसिक शांति और तनाव से मुक्ति: मस्तिष्क की तरफ शुद्ध रक्त और ऑक्सीजन का बहाव बढ़ने से मानसिक थकान, तनाव, चिंता और अनिद्रा (insomnia) की समस्या में राहत मिलती है।

5 चेहरे पर चमक और बालों का झड़ना कम होना: चेहरे की कोशिकाओं को भरपूर पोषण मिलने से त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है। साथ ही, स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ने से बालों की जड़ों को मजबूती मिलती है।

6 प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाना: यह शरीर के लिम्फेटिक सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे शरीर से टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) बाहर निकलते हैं और बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।

सावधानी: यदि किसी को हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, या गर्दन/कमर में तेज दर्द हो, तो उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। महिलाओं को पीरियड्स के दौरान भी इसे करने से बचना चाहिए।

05/27/2026

अपान वायु मुद्रा (जिसे 'मृत्यु संजीवनी मुद्रा' भी कहा जाता है) हमारे दिल और पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए एक बेहद शक्तिशाली हस्त मुद्रा है। यह मुख्य रूप से शरीर में वायु और आकाश तत्वों को संतुलित करती है और पृथ्वी तत्व को बढ़ाती है।
इसे नियमित रूप से करने से कई बेहतरीन फायदे मिलते हैं:

1. दिल के लिए वरदान (Heart Health)
यह इस मुद्रा का सबसे बड़ा फायदा है। इसे 'हार्ट मुद्रा' भी कहा जाता है क्योंकि यह सीधे हृदय प्रणाली पर काम करती है।
दिल के दौरे से बचाव: यदि किसी को अचानक दिल में तेज दर्द (Angina) या हार्ट अटैक के लक्षण महसूस हों, तो डॉक्टर के पास पहुँचने से पहले तुरंत इस मुद्रा को लगाने से सोर्बिट्रेट (Sorbitrate) टैबलेट जैसा त्वरित आराम मिल सकता है।
ब्लड प्रेशर कंट्रोल: यह बढ़े हुए उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) को सामान्य करने में मदद करती है।
धड़कन सामान्य करना: अगर दिल की धड़कन अचानक बहुत तेज या अनियमित हो जाए, तो यह उसे शांत करती है।

2. पाचन तंत्र को दुरुस्त करना (Improves Digestion)
अपान वायु मुद्रा हमारे पेट के निचले हिस्से की ऊर्जा (अपान वायु) को सक्रिय करती है, जो शरीर के कचरे को बाहर निकालने का काम करती है।
गैस और एसिडिटी से राहत: भारी भोजन के बाद होने वाली गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी को यह तुरंत शांत करती है।
कब्ज (Constipation) दूर करना: यह आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाकर पुरानी से पुरानी कब्ज में आराम देती है।

3. वात और पित्त दोष का संतुलन
यह शरीर में बढ़े हुए वात (वायु) और पित्त (गर्मी) दोष को संतुलित करती है, जिससे इनसे होने वाली बीमारियां जैसे जोड़ों का दर्द, बेचैनी और जलन कम होती है।

4. श्वसन तंत्र के लिए फायदेमंद (Respiratory Benefits)
अस्थमा में राहत: यह फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाती है। अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से इसका अभ्यास करने से सांस लेने में तकलीफ कम होती है।

5. मानसिक शांति और तनाव से मुक्ति
यह मुद्रा नर्वस सिस्टम को शांत करती है, जिससे मानसिक तनाव, एंग्जायटी (घबराहट) और अनिद्रा (Insomnia) जैसी समस्याओं में बहुत राहत मिलती है।

मुद्रा लगाने की सही विधि (How to do it):
1 अपनी तर्जनी उंगली (Index finger) को मोड़कर अंगूठे के जड़ (Base) से लगा लें।
2 अब मध्यमा (Middle finger) और अनामिका (Ring finger) के पोरों (Tips) को अंगूठे के पोर से छुएं।
3 कनिष्ठिका (Little finger) को बिल्कुल सीधा रखें।

05/20/2026
05/10/2026

मंत्रों से कुंडलिनी जागरण कोई चमत्कार नहीं, ध्वनि से शरीर की बिजली को जगाने की प्रक्रिया है। कुंडलिनी मूलाधार में सोई हुई ऊर्जा है, और मंत्र वह चाबी है जो उसे धीरे-धीरे ऊपर खींचती है, बिना जबरदस्ती के।

मैं इसे तीन हिस्सों में समझाता हूँ : क्या होता है, कैसे होता है, और कौन से मंत्र काम करते हैं।

# # # 1. पहले समझो, मंत्र क्या करता है

कुंडलिनी सुषुम्ना नाड़ी में चलती है, जो रीढ़ के बीच में है। इसके आसपास इड़ा और पिंगला हैं। आम जीवन में हमारी साँस इन्हीं दोनों में बदलती रहती है। जब आप एक ही ध्वनि को लय में बार-बार दोहराते हैं, तो तीन चीज़ें होती हैं :

- **कंपन** : हर बीज मंत्र की एक फ्रीक्वेंसी है। लं 256 Hz के आसपास मूलाधार को हिलाता है, ॐ 432 Hz आज्ञा को। यह कंपन नाड़ी में जमा ठंडी ऊर्जा को गरम करता है।
- **श्वास धीमी** : 108 बार मंत्र जपते-जपते श्वास अपने आप 5 से 6 सेकंड अंदर, 5 से 6 बाहर हो जाती है। इससे पैरासिम्पैथेटिक सिस्टम ऑन होता है, और कुंडलिनी को ऊपर जाने के लिए जगह मिलती है।
- **ध्यान एकाग्र** : मंत्र मन को एक बिंदु पर बांधता है। जब मन भटकता नहीं, तो ऊर्जा लीक नहीं होती, वही ऊर्जा नीचे से ऊपर उठती है।

# # # 2. मंत्रों से जागरण की असली प्रक्रिया

कुंडलिनी एकदम से सिर तक नहीं जाती। मंत्र उसे सीढ़ी दर सीढ़ी खोलते हैं।

**चरण 1 : शुद्धि, 1 से 40 दिन**
मूलाधार और स्वाधिष्ठान। मंत्र : **लं** और **वं**।
रोज सुबह 108 बार लं, फिर 108 बार वं। आवाज़ में, गले से नहीं, नाभि से। इस समय आपको पैरों में गरमी, पेट साफ होना, पुराने डर के सपने आ सकते हैं। यह कुंडलिनी हिल नहीं रही, रास्ता साफ कर रही है।

**चरण 2 : अग्नि जगाना, 41 से 90 दिन**
मणिपुर। मंत्र : **रं**।
रं अग्नि बीज है। इसे नाभि पर ध्यान देकर 108 बार जपें। भूख बढ़ेगी, आलस घटेगा। यहीं से ऊर्जा ऊपर उठने लायक ताकत पाती है। कई लोग यहीं छोड़ देते हैं क्योंकि गुस्सा या पुरानी यादें उठती हैं। यह सामान्य है।

**चरण 3 : हृदय खोलना, 3 से 6 महीने**
अनाहत और विशुद्धि। मंत्र : **यं** और **हं**।
यं जपते समय छाती में स्पंदन, हं जपते समय गले में कंपन। इस स्टेज में कुंडलिनी सुषुम्ना में प्रवेश करती है। आपको बिना कारण रोना, संगीत में डूबना, अकेले बैठने की इच्छा होगी। यह भावनात्मक गांठें खुल रही हैं।

**चरण 4 : आज्ञा पर स्थिर होना**
मंत्र : **ॐ** या **सो ऽहम्**।
अब जप गिनती से नहीं, साँस से होता है। साँस अंदर सो, बाहर हम। भौंहों के बीच ध्यान। यहाँ कुंडलिनी रुकती है, घूमती है। सिर में हल्का दबाव, आँखों के पीछे रोशनी, नींद कम पर ताजगी, ये संकेत हैं।

**चरण 5 : सहस्रार**
यहाँ कोई मंत्र नहीं। मौन। जब ॐ भी गिर जाता है, तो कुंडलिनी ऊपर छलकती है। इसे आप नहीं करते, यह हो जाता है।

# # # 3. कौन से मंत्र सबसे सुरक्षित हैं

कुंडलिनी के लिए तीन परंपराएँ सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती हैं :

1. **बीज मंत्र सीरीज** : लं वं रं यं हं ॐ। रोज एक माला हर चक्र पर। यह धीमा, स्थिर, घर में करने लायक है।
2. **नवार्ण मंत्र** : ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे। यह शक्ति मंत्र है, कुंडलिनी को तेजी से उठाता है। बिना गुरु के 108 से ज्यादा न करें।
3. **महामृत्युंजय** : ॐ त्र्यम्बकं यजामहे। यह रक्षा के साथ जागरण करता है, इसलिए डर कम लगता है।

शुरुआत के लिए सबसे अच्छा है **सो ऽहम्**। साँस अंदर लेते समय मन में सो, छोड़ते समय हम। कोई गिनती नहीं, 20 मिनट। यह इड़ा पिंगला को बराबर करता है, और कुंडलिनी अपने आप सुषुम्ना में आती है।

# # # 4. जप की संख्या और तरीका

- पहले 21 दिन वाचिक, आवाज़ में
- अगले 21 दिन उपांशु, होंठ हिलें
- फिर मानसिक

संख्या : 108 एक माला। यह मस्तिष्क को अल्फा वेव में ले जाती है। 1008 तब करें जब कोई चक्र अटका लगे, और वह भी महीने में एक बार।

जप के समय रीढ़ सीधी, जीभ तालू पर, आँखें बंद। मंत्र को सुनो, बोलो मत। ध्वनि अंदर गूँजनी चाहिए।

# # # 5. क्या महसूस होगा

- रीढ़ में चींटी चलना, गरमी की लहर
- नींद 6 घंटे में पूरी
- भोजन हल्का, मांसाहार से अरुचि
- अकेले में आनंद
- आभा में लोगों को आपके पास शांति लगना

ये अच्छे संकेत हैं। अगर तेज सिरदर्द, डर, अनिद्रा, शरीर में झटके आएं, तो जप रोक दो। यह ऊर्जा ज्यादा हो गई है। जमीन पर नंगे पैर चलो, लं मंत्र घटाओ, दूध पियो।

# # # 6. सबसे जरूरी सावधानी

मंत्र से कुंडलिनी जागरण बिजली का काम है। नंगे हाथ मत करो।
- खाली पेट जप करो
- गुरु या अनुभवी से बीज लो, किताब से नहीं
- जागरण को लक्ष्य मत बनाओ। शुद्धि को लक्ष्य बनाओ, जागरण अपने आप होगा
- नशा, अत्यधिक संभोग, गुस्सा, इनसे नाड़ियाँ फिर बंद होती हैं

# # # सार

मंत्रों से कुंडलिनी जागरण का मतलब है, ध्वनि से सोई हुई ऊर्जा को जगाना। लं से जड़ मजबूत करो, रं से आग जलाओ, यं से दिल खोलो, ॐ से दरवाजा दिखाओ। फिर चुप हो जाओ।

कुंडलिनी तुम्हें ऊपर नहीं ले जाती, वह तुम्हें तुम्हारे पास लौटाती है। मंत्र सिर्फ सीढ़ी है, मंजिल मौन है।

अगर तुम शुरू करना चाहते हो, तो कल सुबह 108 बार लं करो, और देखो पैरों में क्या होता है। वहीं से यात्रा शुरू होती है।

05/08/2026
Photos from प्रो. अनिल खिगवान's post 04/29/2026
02/26/2026
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