CPIM Varanasi
Official Page Of Cpim Varanasi District Committee
02/09/2026
हो ची मिन्ह, जिनके नेतृत्व में वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी और वियतनाम की जनता ने अमेरिकी साम्राज्यवाद को पराजित किया, को लाल सलाम!
समाजवाद जिंदाबाद!
साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!
जन्म,19 मई 1890,निधन,2 सितंबर 1969
31/08/2026
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी की बैठक के समापन के पश्चात आमसभा को संबोधित करते पार्टी के महासचिव कामरेड एम ए बेबी।
30/08/2026
शंकर शैलेंद्र के स्मृति को नमन,
जन्म 30 अगस्त 1923
28/08/2026
भाजपा सरकार की तानाशाही के खिलाफ वाम दलों का मऊ में विरोध प्रदर्शन की
सीपीएम, सीपीआई सीपीएम माले
27/08/2026
वाराणसी में संयुक्त विपक्षी दलों कांग्रेस, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा माले, फॉरवर्ड ब्लॉक राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदेश में भाजपा की योगी सरकार द्वारा सरकार के खिलाफ बोलने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के खिलाफ, उनकी निजी जानकारियां जुटाने के लिए बाध्य करने के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया गया। जिलाधिकारी वाराणसी के माध्यम से योगी सरकार द्वारा संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों पर किए जा रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए महामहिम राज्यपाल और महामहिम राष्ट्रपति को जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा गया। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, सतनाम सिंह प्रमोद वर्मा,भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के जिला सचिव अनिल कुमार सिंह, राज्य कमेटी सदस्य नंदलाल पटेल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव लाल बहादुर पटेल, भाकपा माले के मिठाई लाल, राष्ट्रीय जनता दल के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र यादव ने नेतृत्व किया।
26/08/2026
🔴वामपंथी दलों की लखनऊ में बैठक,
🔴उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा वामपंथी कार्यकर्ताओं की व्यक्तिगत निगरानी का विरोध,
🔴29 अगस्त को जिलों में जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल और राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा जाएगा,
🔴 10 सितंबर को वामदलों का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलेगा,
वामपंथी दलों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी, अखिल भारतीय फारवर्ड ब्लॉक के राज्य नेताओं की एक बैठक लखनऊ में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक में उत्तर प्रदेश में वामपंथी कार्यकर्ताओं किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी का आंकड़ा पुलिस द्वारा तैयार करने का कड़ा विरोध किया गया। वामपंथी दलों ने कहा कि आरएसएस उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में बिना रजिस्ट्रेशन के गतिविधियां जारी रखे हुए है। भाजपा की योगी सरकार किसी भी तरह की जवाब देही को नहीं मानती किंतु वामपंथी कार्यकर्ताओं को धमकाया और भयभीत किया जा रहा है। उनके निजता के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। वामपंथी दलों ने इसकी निंदा करते हुए विरोध किया और पुलिस के इस हरकत को फौरन रोकने की मांग की।
माननीय प्रधानमंत्री जी के संसदीय क्षेत्र में विश्व विख्यात यूनिर्वसिटी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में उपस्थित सर सुन्दर लाल हॉस्पिटल की दशा बारिश के बाद देखने लायक है और माननीय प्रधानमंत्री के विकास के ढोल की पोल खोल रही है।
25/08/2026
भारत और RSS का खतरनाक मंसूबा? | सुभाषिनी अली EXCLUSIVE | संघ के मन की बात भारत और RSS का खतरनाक मंसूबा? | सुभाषिनी अली EXCLUSIVEThe Swatant...
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पोलिट ब्यूरो ने यह बयान जारी किया है:
वंदे मातरम के गलत इस्तेमाल पर
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) का पोलिट ब्यूरो इस बात को पूरी तरह से गलत ठहराता है कि BJP और हिंदुत्व की सांप्रदायिक ताकतें पार्लियामेंट द्वारा कानून बनाए गए सभी छह छंदों के साथ ‘वंदे मातरम’ को प्राथमिकता देने के सवाल का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।
CPI(M) ने पहले भी इस सवाल पर अपने विचार बताए हैं कि किस ऐतिहासिक संदर्भ में इस गाने को ऑफिशियली राष्ट्र गीत बनाया गया था। सच तो यह है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के आनंदमठ उपन्यास के साथ तालमेल बिठाने के लिए दशकों बाद छह छंद जोड़े गए थे। इसी ऐतिहासिक तथ्य और इसके मतलब के आधार पर, खुद रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे नेशनल गान के तौर पर नामंज़ूर माना था। ‘वंदे मातरम’ के पहले दो छंदों को पढ़ने को लेकर कोई दिक्कत नहीं है, जैसा कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान और संविधान सभा में हमेशा होता रहा है। लेकिन, सभी छह छंदों को जोड़कर स्टेटस बढ़ाने के बाद, इस वर्जन को देशभक्ति के लिए एक पॉइंट मार्कर के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है। यह साफ तौर पर हिंदुत्व ताकतों के सांप्रदायिक और बांटने वाले मकसदों को दिखाता है। देशभक्ति को अपने ऊपर ओढ़ने का दिखावा करने का यह दिखावा तब सामने आता है जब उत्तर प्रदेश असेंबली स्पीकर राष्ट्रगान गाए जाने के दौरान बीच में ही चले गए।
पोलिट ब्यूरो को लगता है कि यह देश के लोगों की एकता के लिए रुकावट डालने वाला है, मज़े की बात यह है कि इसकी शुरुआत उन लोगों ने की जिनमें आज़ादी की लड़ाई के दौरान ‘वंदे मातरम’ का नारा बोलने की हिम्मत नहीं थी। CPI(M) का पक्का मानना है कि सभी संवैधानिक रूप से माने गए कॉन्सेप्ट का सम्मान किया जाना चाहिए क्योंकि वे भारत के विचार के लिए ऐड-ऑन हैं, जो बहुलतावाद और सबको साथ लेकर चलने को पहचानते हैं।
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