Anand Mohan

Anand Mohan

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Ex. MLA Candidate, Samajwadi Party , Vidhan Sabha Shivpur,Varanasi.

20/06/2026

युवाओं और खेल के विकास में मील का पत्थर: श्री कमलाकर चौबे आदर्श सेवा इंटर कॉलेज में नई बॉलिंग मशीन का उद्घाटन
वाराणसी, 19 जून 2026:
युवाओं को खेल के क्षेत्र में आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने और उनके उज्ज्वल भविष्य को तराशने के उद्देश्य से आज शुक्रवार को श्री कमलाकर चौबे आदर्श सेवा इंटर कॉलेज के खेल मैदान पर एक नई अत्याधुनिक बॉलिंग मशीन का शुभ उद्घाटन संपन्न हुआ।
यह नई तकनीक न केवल स्थानीय क्रिकेट प्रतिभाओं को निखारेगी, बल्कि ग्रामीण व क्षेत्रीय युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग के लिए एक बेहतरीन मंच भी देगी।
इस खास अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में विद्यालय के प्रबंधक परम आदरणीय श्री रत्नाकर चौबे जी उपस्थित रहे।
इसके साथ ही, विशिष्ट अतिथि के रूप में:
श्री सुरेंद्र कुमार सिंह जी, श्री वीरेंद्र यादव जी, श्री राजकुमार यादव जी, श्री रवि डीडवानिया जी श्री सुजीत सेठ जी
समेत क्षेत्र के कई सम्मानित नागरिक और वरिष्ठ खिलाड़ी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में आदर्श क्रिकेट अकादमी के संचालक व कोच श्री राजकुमार गुप्ता जी ने सभी अतिथियों का माला पहनाकर, बुके और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत और अभिनंदन किया।
अतिथियों ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का युवा देश का भविष्य है। यदि युवा खेल भावना और कड़े अनुशासन के साथ आगे बढ़ेंगे, तो वे न केवल अपना और अपने परिवार का, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे। इस बॉलिंग मशीन जैसी आधुनिक सुविधाओं से युवाओं को अपनी तकनीक सुधारने में बहुत मदद मिलेगी।
कोच श्री राजकुमार गुप्ता जी ने बताया कि इस सुविधा से खिलाड़ियों को तेज गति और स्पिन गेंदबाजी की विभिन्न विविधताओं का सामना करने का अभ्यास मिलेगा, जिससे वे आने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए खुद को तैयार कर सकेंगे।
कार्यक्रम का समापन भविष्य के खिलाड़ियों को उज्ज्वल कल की शुभकामनाएं देने के साथ हुआ।
fans

19/06/2026
19/06/2026

Indian Express Investigative journalism exposes the misuse of EWS reservation. Most of the EWS selected candidates are well to do or so it seems.

19/06/2026

आज द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) की इस विशेष रिपोर्ट में EWS के बहाने UPSC सीटों की लूट पर एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। उसका सार यह है-
प्राइवेट स्कूल, महंगी कोचिंग, पारिवारिक व्यवसाय, MNC की नौकरियां: इन्होंने भी यूपीएससी परीक्षा में EWS सूची में बनाई जगह।
आईआईटी स्नातक व बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) के कर्मचारी तक EWS में शामिल। 8 लाख रुपये की आय सीमा पात्रता की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है।
मुख्य आंकड़े (The Quota Data)
104 EWS उम्मीदवार: साल 2025 की सिविल सेवा परीक्षा में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे के तहत 104 उम्मीदवार चुने गए।
67 उम्मीदवारों ने की महंगी कोचिंग: इनमें से 67 उम्मीदवारों ने दिल्ली और अन्य शहरों के जाने-माने कोचिंग संस्थानों (जैसे Vajiram & Ravi, Vajirao & Reddy, Drishti IAS) से पढ़ाई की, जिनकी सालाना फीस 2.65 लाख रुपये तक है।
28 उम्मीदवारों के माता-पिता का बिजनेस: कम से कम 28 उम्मीदवारों के परिवारों के अपने व्यवसाय हैं—जैसे दुकानें, स्टील फैब्रिकेशन, कपड़ा और कन्फेक्शनरी का व्यापार।
10 उम्मीदवारों के पास कॉर्पोरेट नौकरियां: 10 उम्मीदवार पहले से ही निजी क्षेत्र (MNCs) में अच्छे वेतन पर काम कर रहे थे।
14 आईआईटी (IIT) स्नातक: चयनित उम्मीदवारों में से 14 आईआईटी के स्नातक या स्नातकोत्तर हैं, और कम से कम 3 एनआईटी (NIT) से हैं।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
योजना के उद्देश्य और वास्तविकता में अंतर: EWS कोटे की सूची में ऐसे उम्मीदवार हैं जो संपन्न पृष्ठभूमि (जैसे बड़े बिजनेसमैन के बच्चे, प्राइवेट स्कूलों से पढ़े छात्र) से आते हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की जांच से पता चलता है कि योजना के मूल उद्देश्य और इसका लाभ उठाने वालों के प्रोफाइल में एक बड़ा अंतर है।
प्राइवेट स्कूलों से पढ़ाई: कम से कम 46 उम्मीदवारों ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और राज्यों की राजधानियों (जैसे लखनऊ, रायपुर, जयपुर) के महंगे प्राइवेट स्कूलों से पढ़ाई की है, जिनकी सालाना फीस ₹45,000 से ₹1.5 लाख तक है।
'उद्देश्य ही विफल हो जाएगा': पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त और डीओपीटी (DoPT) के पूर्व सचिव सत्यनारायण मिश्रा ने अखबार को बताया कि EWS कोटा केवल आय और संपत्ति के मानदंडों पर निर्भर करता है। अगर संपन्न लोग इस कोटे का लाभ उठा लेते हैं, तो EWS आरक्षण का पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। अधिकारियों को दावों की जांच करते समय केवल स्व-घोषणा (self-declarations) पर निर्भर न रहकर कड़ी जांच करनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: अक्टूबर 2021 में नीट-पीजी (NEET-PG) दाखिलों से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार से पूछा था कि उसने EWS आरक्षण के लिए 8 लाख रुपये सालाना की आय सीमा किस आधार पर तय की है। कोर्ट ने कहा था कि बिना किसी सामाजिक या जनसांख्यिकीय डेटा (sociological, demographic data) के इस आंकड़े को मनमाने ढंग से नहीं थोपा जा सकता।
मगर सरकारी पक्ष ने जनवरी 2022 में इसे उचित माना था।

Photos from Akhilesh Yadav's post 06/06/2026
05/06/2026

रिसोर्ट में विवाह : एक नई सामाजिक बीमारी?

कुछ समय पहले तक शादियाँ शहर के मैरिज हॉल या लॉन में सम्पन्न होती थीं, लेकिन अब यह चलन तेजी से बदल रहा है। आजकल शहरों से दूर स्थित महंगे रिसोर्ट विवाह समारोहों का नया केंद्र बनते जा रहे हैं। शादी से दो-तीन दिन पहले ही पूरा परिवार रिसोर्ट में शिफ्ट हो जाता है और मेहमान भी सीधे वहीं पहुँचते हैं तथा वहीं से विदा हो जाते हैं।
ऐसे आयोजनों में वही लोग आसानी से शामिल हो पाते हैं जिनके पास चार पहिया वाहन हो। दोपहिया वाहन या सीमित साधनों वाले लोगों के लिए वहाँ पहुँचना कठिन हो जाता है। धीरे-धीरे निमंत्रण भी सामाजिक हैसियत और उपयोगिता के आधार पर दिए जाने लगे हैं। किसी को केवल महिला संगीत में बुलाया जाता है, किसी को सिर्फ रिसेप्शन में, किसी को कॉकटेल पार्टी में और कुछ विशेष परिवारों को हर कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाता है। इस व्यवस्था में आत्मीयता और अपनापन कहीं खोता हुआ दिखाई देता है।
महिला संगीत के लिए महंगे कोरियोग्राफर बुलाए जाते हैं, जो कई दिनों तक परिवार के लोगों को नृत्य का प्रशिक्षण देते हैं। मेहंदी समारोह में एक विशेष रंग की ड्रेस और हल्दी समारोह में दूसरे रंग की पोशाक पहनना लगभग अनिवार्य बना दिया गया है। जो लोग इन व्यवस्थाओं का पालन नहीं कर पाते, उन्हें अक्सर कमतर आँका जाता है।
बारात में भी एक विचित्र विरोधाभास दिखाई देता है। कई लोग धार्मिक कर्मकांडों या पंडित की दक्षिणा पर लंबी चर्चा करते हैं, लेकिन बारात के नृत्य और दिखावे पर हजारों रुपये खर्च करने में संकोच नहीं करते।
वरमाला की रस्म, जो कभी दोनों परिवारों के बीच हँसी-मजाक और आत्मीयता का अवसर होती थी, अब एक फिल्मी दृश्य में बदलती जा रही है। धुआँ, कृत्रिम आतिशबाजी, विशेष प्रकाश व्यवस्था और कैमरों की चमक के बीच दूल्हा-दुल्हन मंच पर अकेले खड़े दिखाई देते हैं, जबकि परिवार के सदस्य दर्शक बनकर रह जाते हैं।
आजकल प्री-वेडिंग शूट भी एक नया चलन बन गया है। विवाह से पहले बनाए गए वीडियो समारोह का प्रमुख आकर्षण बन जाते हैं। कई बार ऐसा लगता है कि विवाह की मूल भावना से अधिक महत्व उसके प्रदर्शन को दिया जा रहा है।
रिसोर्ट संस्कृति का एक और प्रभाव रिश्तों पर पड़ा है। पहले विवाह समारोह दूर-दराज के रिश्तेदारों और मित्रों से मिलने-जुलने का अवसर होते थे। लोग एक साथ बैठते थे, बातचीत करते थे और संबंधों में गर्मजोशी बढ़ती थी। अब अधिकांश परिवार अलग-अलग कमरों में ठहरते हैं और समारोह के दौरान भी अपने सीमित दायरे में ही रहते हैं। परिणामस्वरूप सामाजिक मेल-मिलाप और पारिवारिक निकटता कम होती जा रही है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस दिखावे की होड़ में अनेक परिवार अपनी आर्थिक क्षमता से कहीं अधिक खर्च कर बैठते हैं। कई बार कुछ घंटों के आयोजन के लिए जीवन भर की जमा-पूँजी खर्च हो जाती है या कर्ज लेना पड़ता है।
विवाह जीवन का एक महत्वपूर्ण संस्कार है, प्रदर्शन का मंच नहीं। इसलिए आवश्यक है कि हम अपनी सामर्थ्य के अनुसार खर्च करें, दिखावे की प्रतिस्पर्धा से बचें और विवाह को प्रेम, परिवार, संस्कृति तथा सामाजिक सौहार्द का उत्सव बनाए रखें।
दांपत्य जीवन की शुरुआत स्वाभिमान, आत्मसम्मान और आर्थिक संतुलन के साथ कीजिए। समाज को दिखाने के लिए नहीं, बल्कि परिवार को मजबूत बनाने के लिए विवाह कीजिए।
दिखावे की इस सामाजिक बीमारी को अभिजात्य वर्ग तक ही सीमित रहने दीजिए और अपनी संस्कृति की सादगी, आत्मीयता तथा मानवीय मूल्यों को बचाइए।
धन्यवाद। 🙏
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