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04/03/2026
Happy Holi
होली (पर्व)
* होली भारत का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है
* होली हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है
* होली को खुशियों का त्योहार माना जाता है क्योंकि इस दिन दुश्मन भी गले मिल जाते हैं
* होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है
* होली को दुनिया भर के करोड़ों लोग धूमधाम से मनाते हैं
* हिंदू पंचांग के अनुसार होली फागुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है
* होली के फगुआ धुलेंडी दोल आदि नामों से जाना जाता है
* होली का त्योहार वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है
* वसंत पंचमी से ही गुलाल उड़ने और फागुन गीत प्रारंभ हो जाते हैं
* होली मनाने की प्रथा का उल्लेख करीब ईसा से 300 वर्ष पूर्व का है
* होली का त्यौहार लगभग सभी धर्मों द्वारा मनाया जाता है
* शाहजहां के जमाने में होली को ईद ए गुलाबी या आब ए पाशी (रंगों की बौछार) कहा जाता था
* होली दो दिन का पर्व है पहले दिन होलिका दहन और दूसरे दिन रंग खेला जाता है
* होली को फागुन माह में मनाया जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं
* होली को कवियों और साहित्यकारों ने मस्ती का त्यौहार कहा है
* सुप्रसिद्ध मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने भी अपनी ऐतिहासिक यात्रा संस्मरण में होली उत्सव का वर्णन किया है
* बादशाह अकबर की जोधाबाई के साथ और जहांगीर नूरजहां के साथ होली खेलते थे
* कुछ लोगों का कहना है कि भगवान श्री कृष्ण ने पूतना नामक राक्षसी का वध इसी दिन किया था
* ब्रज में होली की बहुत मान्यता है
* ऐसा माना जाता है कि होली में रंग लगाकर नाच गाकर लोगों को शिव के गुणों का वेश धारण होता है
* होली का पर्व भारत के अलावा अन्य प्रवासी भारतीय देशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है
* भारत में ब्रज मथुरा वृंदावन और बरसाने की लठमार होली व श्रीनाथजी काशी की होली बहुत प्रसिद्ध है
* भारत के कई हिस्सों में आज भी खेले कोने वाली होली 5 दिन तक मनाई जाती है
* संभवत होली ही एकमात्र ऐसा त्यौहार है जो भारत के सभी राज्यों में मनाया जाता है
* होली के दिन ही महर्षि मनु का जन्म हुआ था
* होली का त्योहार उत्तर अमेरिका और यूरोप में भी हर साल धूमधाम से मनाया जाता है
* वैदिक काल में होली के पलों को न्वान्नेष्ठ यज्ञ कहा जाता था
* होली के पीछे हिरणाकश्यप नामक कहानी मानी जाती है जिसमें होलिका जल जाती है और प्रहलाद बच जाते हैं
* महाभारत काल में युधिष्ठिर ने होली का महत्व बताते हुए कहा था कि इस दिन जनता को भयरहित क्रीडा करनी चाहिए
* होली का प्रसिद्ध कहावत है बुरा न मानो होली है
* मध्य प्रदेश के भील आदिवासी होली के बहाने जीवन साथी चुनते हैं जबकी मालवा क्षेत्र में अंगारे फेंक होली खेलते हैं
* राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले के आदिवासी पत्थर फेंक खूनी होली खेलते हैं
* यूपी के हमीरपुर के कुंडरा गांव में सिर्फ महिलाएं होली खेलती है
* राजस्थान के पुष्कर में कपड़ा फाड़ होली का चलन है
* यूपी के शाहजहांपुर में जूता मारकर होली खेली जाती है
* दिल्ली की होली में सुर और संगीत की धुम रहती है
16/02/2026
टेस्टोस्टेरोन
* टेस्टोस्टेरोन एक महत्वपूर्ण एनाबॉलिक-एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड हार्मोन है
* यह मुख्य रूप से पुरुषों के अंडकोष और महिलाओं के अंडाशय में बनता है, और कुछ मात्रा में अधिवृक्क ग्रंथियों से भी बनता है।
* यह पुरुष प्रजनन ऊतकों के विकास, मांसपेशियों/हड्डियों के घनत्व में वृद्धि, बालों के विकास को बढ़ावा देने, कामेच्छा को नियंत्रित करने और मनोदशा में सुधार के लिए आवश्यक है।
* टेस्टोस्टेरोन थेरेपी (टीआरटी) ऊर्जा और यौन क्रिया में सुधार करके इसकी कमी का उपचार करती है, लेकिन इससे मुँहासे, स्लीप एपनिया या प्रोस्टेट ग्रंथि के जोखिम में वृद्धि जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
* प्रमुख पुरुष यौन हार्मोन होने के नाते, यह यौवनारंभ के दौरान विकास (आवाज का गहरा होना, चेहरे पर बाल आना, मांसपेशियों का बढ़ना) को बढ़ावा देता है और शुक्राणु उत्पादन के लिए आवश्यक है।
* यह संज्ञानात्मक कार्य और लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में भी भूमिका निभाता है।
* उच्च स्तर के टेस्टोस्टेरोन से मांसपेशियों का विकास, हड्डियों का घनत्व, बालों का बढ़ना और कामेच्छा में वृद्धि होती है।
* टेस्टोस्टेरोन का निम्न स्तर (हाइपोगोनाडिज्म) थकान, अवसाद, कामेच्छा में कमी और स्तंभन दोष का कारण बन सकता है।
* महिलाएं अंडाशय और अधिवृक्क ग्रंथियों में टेस्टोस्टेरोन का काफी कम, लेकिन आवश्यक स्तर उत्पन्न करती हैं, जो समग्र स्वास्थ्य, हड्डियों की मजबूती और यौन इच्छा के लिए महत्वपूर्ण है।
* पर्याप्त टेस्टोस्टेरोन बेहतर मांसपेशी निर्माण, मजबूत हड्डियों, बेहतर मनोदशा और उच्च ऊर्जा स्तर से जुड़ा हुआ है।
* चिकित्सकीय रूप से कम टेस्टोस्टेरोन स्तर (आमतौर पर 100°C से नीचे 300 ng/dL) के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली यह थेरेपी ऊर्जा, मनोदशा और यौन क्रिया में सुधार कर सकती है।
* सिंथेटिक टेस्टोस्टेरोन के संभावित दुष्प्रभावों में मुंहासे, स्लीप एपनिया, लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि, प्रोस्टेट ग्रंथि का संभावित विकास और बांझपन शामिल हैं।
* उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन का स्तर स्वाभाविक रूप से घटता है, अक्सर 40 से 70 वर्ष की आयु के बीच तक।
* आमतौर पर सुबह के समय किए जाने वाले रक्त परीक्षण से टेस्टोस्टेरोन के निम्न स्तर की पुष्टि होती है।
* इसके इलाज में जैल, इंजेक्शन या क्रीम शामिल हैं।
अस्वीकरण: टेस्टोस्टेरोन थेरेपी का उपयोग केवल स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर के मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिए।
15/02/2026
महाशिवरात्रि
* महाशिवरात्रि भारतीयों का एक प्रमुख त्यौहार है
* यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है
* माघ फागुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है
* माना जाता है कि सृष्टि का प्रारम्भ इसी दिन से हुआ
* पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ
* इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था
* महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव व पत्नी पार्वती की पूजा होती हैं यह पूजा वृत रखने के दौरान की जाती है
* साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है
* भारत सहित पूरी दुनिया में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है
* कश्मीर शैव मत में इस त्यौहार को हर-रात्रि और बोलचाल में 'हेराथ' या 'हेरथ' भी कहा जाता हैं
* इस अवसर पर भगवान शिव का अभिषेक अनेकों प्रकार से किया जाता है। जलाभिषेक : जल से और दुग्धाभिषेक : दूध से।
* शिव पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि पूजा में छह वस्तुओं को अवश्य शामिल करना चाहिए:
> शिव लिंग का पानी, दूध और शहद के साथ अभिषेक। बेर या बेल के पत्ते जो आत्मा की शुद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं;
> सिंदूर का पेस्ट स्नान के बाद शिव लिंग को लगाया जाता है। यह पुण्य का प्रतिनिधित्व करता है;
> फल, जो दीर्घायु और इच्छाओं की सन्तुष्टि को दर्शाते हैं;
> जलती धूप, धन, उपज (अनाज);
> दीपक जो ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनुकूल है;
> और पान के पत्ते जो सांसारिक सुखों के साथ सन्तोष अंकन करते हैं।
* शिवपुराण के मुताबिक, शिवलिंग पर कभी भी तुलसी के पत्ते, हल्दी, सिंदूर और कुमकुम अर्पित नहीं करने चाहिए. उन्हें नारियल या नारियल का पानी भी पसंद नहीं है. इसलिए इन चीजों को भूलकर भी महाशिवरात्रि पर उन्हें चढ़ाने की गलती न करें
01/02/2026
संत रविदास
* रविदास, जिन्हें रैदास और गुरू रविदास के नाम से भी जाना जाता है
* इन्हें सिर्फ संत गुरू नहीं बल्कि एक कवि के रूप में भी जाना जाता है
* रविदास भारत में 15वीं शताब्दी के एक महान संत, दर्शनशास्त्री, कवि, समाज-सुधारक और ईश्वर के अनुयायी थे
* मीरा और कबीर भी संत रविदास की महिमा को स्वीकार चुके थे
* गुरू संत रविदास का जन्म काशी में चर्मकार परिवार में हुआ था वे स्वयं भी यही काम किया करते थे, किंतु वे बचपन से ही अद्भुत विचारों से परिपूर्ण थे
* संत रविदास का जन्म उत्तप्रदेश के काशी नगर में मां कालसा देवी और पिता संतोख दास जी के यहां हुआ था
* बताया जाता है कि गुरू रैदास ने साधु संतों की संगति से ज्ञान प्राप्त किया था जिसे उन्होंने बाद में जन-जन तक फैलाया
* उन्होंने कभी भी अपने पैतृक कार्य से मुंह नही मोड़ा अपने परिवार का पोषण करने के लिए वे जूते बनाने का काम करते थे
* परिश्रम से प्राप्त आय के एक सिक्के को उन्होंने मां गंगा को समर्पित किया था जिसे लेने वे साक्षात प्रकट हो गई थीं
* वे अपने वचन के पक्के, दयावान एवं दूसरों की सहायता करने वाले थे
* मेहनत से प्राप्त आय पर ही वे अपने परिवार को पालन करने पर यकीन करते थे
* माता-पिता ने इनका विवाह काफी कम उम्र में ही श्रीमती लोना देवी से कर दिया जिसके बाद रविदास को पुत्र रत्न की प्रति हुयी जिसका नाम विजयदास पड़ा
* शादी के बाद भी संत रविदास सांसारिक मोह की वजह से पूरी तरह से अपने पारिवारिक व्यवसाय के ऊपर ध्यान नहीं दे पा रहे थे
* बाद में रविदास जी भगवान राम के विभिन्न स्वरुप राम, रघुनाथ, राजा राम चन्द्र, कृष्णा, गोविन्द आदि के नामों का इस्तेमाल अपनी भावनाओं को उजागर करने के लिये करने लगे और उनके महान अनुयायी बन गये
* जब धीरे-धीरे उनकी ख्याति फैली तो लोगों ने उनकी महिमा को स्वीकारते हुए विचारों को भी स्वीकारा
* माघ महीने के पूर्ण चन्द्रमा दिन पर माघ पूर्णिमा पर हर साल संत रविदास की जयंती या जन्म दिवस को मनाया जाता है
* रविदास जयंती के अवसर पर लगभग पूरे देश में आयोजन किए जाते हैं
* संत रविदास के गुरु का नाम रामानंद था
* 15वीं सदी में जन्में रविदास जी ने भक्ति आंदोलन को एक नई दिशा दी जिसका उल्लेख उनके द्वारा लिखित काव्यों में साक्षात् मिलता है
* उनके कुछ भक्तों का मानना है कि गुरु जी की मृत्यु प्राकृतिक रुप से 120 या 126 साल में हो गयी थी कुछ का मानना है उनका निधन वाराणसी में 1540 एडी में हुआ था
* वाराणसी में श्री गुरु रविदास पार्क है जो नगवा में उनके यादगार के रुप में बनाया गया है जो उनके नाम पर “गुरु रविदास स्मारक और पार्क” बना है
* वाराणसी में पार्क से बिल्कुल सटा हुआ उनके नाम पर गंगा नदी के किनारे लागू करने के लिये गुरु रविदास घाट भी भारतीय सरकार द्वारा प्रस्तावित है
* ज्ञानपुर जिले के निकट संत रविदास नगर है जो कि पहले भदोही नाम से था अब उसका नाम भी संत रविदास नगर है
31/01/2026
एमजी मोटर
* एमजी मोटर (Morris Garages) एक ऐतिहासिक ब्रिटिश ब्रांड है, जो अब चीनी ऑटोमोटिव दिग्गज SAIC मोटर के स्वामित्व में है।
* एमजी एक ब्रिटिश ऑटोमोबाइल ब्रांड है जिसकी स्थापना सेसिल किम्बर ने 1920 के दशक में की थी।
* एमजी कार कंपनी लिमिटेड 1930 से 1972 के बीच अस्तित्व में रही और इसी कंपनी ने एमजी को प्रसिद्ध बनाया।
* 2007 से यह ब्रांड चीनी सरकारी स्वामित्व वाली ऑटोमोबाइल कंपनी एसएआईसी मोटर के नियंत्रण में है ।
* एमजी कारों की शुरुआत 1920 के दशक में विलियम मॉरिस के स्वामित्व वाले ऑक्सफोर्ड स्थित खुदरा बिक्री और सेवा केंद्र, मॉरिस गैराज के बिक्री प्रचार अभियान से हुई थी
* भारत में, यह JSW MG Motor India के रूप में संचालित है, जो 2017 में स्थापित हुई और 2019 में परिचालन शुरू किया।
* यह अपने हलोल, गुजरात स्थित संयंत्र में Hector, Astor, ZS EV, Comet EV और Windsor EV जैसे लोकप्रिय वाहन बनाती है।
* मूल: ब्रिटिश ब्रांड, SAIC मोटर (चीन) द्वारा अधिग्रहित।
* भारत में: 2023 से JSW ग्रुप के साथ एक संयुक्त उद्यम (JV)।
* प्रमुख मॉडल: हेक्टर, एस्टोर, ज़ेडएस ईवी, कॉमेट ईवी, विंडसर ईवी।
* भारत के 50 से अधिक शहरों में 65 से अधिक शोरूम है।
* लखनऊ में, बीआर (Beeaar) ऑटो और अन्य डीलरों के माध्यम से इनके शोरूम हजरतगंज और ट्रांसपोर्ट नगर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में स्थित हैं।
30/01/2026
फॉक्सवैगन
* फॉक्सवैगन (Volkswagen) एक प्रमुख जर्मन कार निर्माता कंपनी है
* इसका मुख्यालय वोल्फ्सबर्ग, जर्मनी में है।
* इसका नाम "लोगों की कार" (People's Car) है, जो अपनी प्रतिष्ठित 'बीटल' और मजबूत इंजीनियरिंग के लिए प्रसिद्ध है।
* यह दुनिया की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों में से एक है
* फॉक्सवैगन का स्थापना 1937 में जर्मन लेबर फ्रंट द्वारा।
* ग्रुप ब्रांड: इसके अंतर्गत ऑडी, पोर्श, स्कोडा, लेम्बोर्गिनी, बेंटले और डुकाटी जैसे ब्रांड आते हैं।
* वैश्विक उपस्थिति: यह 27 से अधिक देशों में विनिर्माण संयंत्र चलाती है।
* भारत में, इसका मुख्यालय पुणे में है और चाकन (महाराष्ट्र) में एक प्लांट है।
* लोकप्रिय मॉडल: पोलो, वेंटो, टाइगन, वर्टस, टिगुआन, पासैट।
* कंपनी 2050 तक पूरी तरह से CO2-तटस्थ बनने का लक्ष्य लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों (ई-मोबिलिटी) पर भारी निवेश कर रही है।
* मूल रूप से एडॉल्फ हिटलर के निर्देश पर किफायती कार के रूप में शुरू हुई, कंपनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जबरदस्त सफलता हासिल की।
* बीटल्स के बाद, फॉक्सवैगन ने गोल्फ और पासैट जैसे आधुनिक वाहनों के साथ अपनी पहचान बनाई।
* फॉक्सवैगन ने 2007 में भारत में कदम रखा। वर्तमान में, कंपनी भारत में अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसमें मुख्य रूप से SUVs (जैसे Taigun) और sedans (जैसे Virtus) शामिल हैं, जो सेफ्टी और परफॉर्मेंस के लिए जानी जाती हैं।
29/01/2026
परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र (Parasympathetic nervous system)
* स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के दो भाग होते हैं। ये हैं-
(i) अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र (Sympathetic nervous system)
(ii) परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र (Parasympathetic nervous system)
यहां हम परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र (Parasympathetic nervous system) के बारे में जानेंगे
* यह युग्मित गैन्गलियोनिक श्रृंखला का बना होता है जो मस्तिष्क से आरम्भ होता है तथा स्पाइनल कॉर्ड के सेक्रल भाग से भी उत्पन्न होती है पेरासिम्पैथेटिक गैन्गलिया सिर, गर्दन और सेक्रल क्षेत्र में रहता है
* यह उन सभी अंगों को नर्व (Nerve) सप्लाई करता है जिन्हें सिम्पैथेटिक सिस्टम सप्लाई करता है
* सिम्पैथेटिक तथा पैरा सिम्पैथेटिक तंत्रिका समान अंगों को नर्व सप्लाई करती है किन्तु इनका असर एक-दूसरे से विपरीत होता है
* परानुकम्पी तंत्रिका-तंत्र के कार्य:
> यह आँख की पुतलियों (Pupil) को सिकोड़ता है
> यह स्वेद ग्रन्थियों से पसीने के स्राव को घटाता है
> यह लार ग्रन्थियों के स्रवण को बढ़ाता है
> यह हृदय स्पन्दन को घटाता है
> यह सभी रुधिर वाहिनियों को फैलाता है
> यह एड्रीनल स्रवण को कम करता है
> यह मूत्राशय की पेशियों को सिकोड़ता है
> यह लैक्राइमल ग्रन्थियों के स्रवण को कम करता है
> यह रक्त में शर्करा के स्तर को कम करता है
> यह आहारनाल के क्रमानुकुंचन को बढ़ाता है
> यह पाचन ग्रन्थियों के स्रवण को बढ़ाता है
> यह गुदा के स्फिक्टर को फैलाता है
> इसकी क्रिया से बाल (रोंगटे) खड़े नहीं होते हैं
> यह श्वसन दर को कम करता है
> यह रक्त दाब (Blood pressure) को कम करता है
> यह रुधिर में RBC की संख्या में कमी करता है
> इस तंत्रिका-तंत्र का प्रभाव सामूहिक रूप से आराम एवं सुख की स्थितियाँ उत्पन्न करता है
28/01/2026
अजित पवार
* विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का आज 28 January 2026 को निधन हो गया
* अजीत पवार महाराष्ट्र के सत्ता में एक ऐसा नाम रहे है जिसने बीते एक दशक में राज्य की राजनीति को नया आकार दिया
* राजनीतिक माहौल उन्हें विरासत में मिला लेकिन पहचान उन्होंने अपनी दम पर बनाई
* राजनीति में आने से पहले वह लंबे समय तक सहकारिता आंदोलन से जुड़े रहे जो महाराष्ट्र के राजनीति की रीढ़ मानी जाती है
* अजीत पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को हुआ था
* वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक शरद पवार के भतीजे हैं
* साल 1991 में पहली बार अजित पवार बारामती से सांसद चुने गए उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा
* गौरतलब है की अजीत पवार 23 साल की उम्र में ही राजनीति में एंट्री ले ली थी इसी उम्र में वह कोऑपरेटिव सूगर फैक्ट्री के बोर्ड के सदस्य बन गए थे
* 1991 में वह पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष चुने गए और 16 साल तक इस पद पर बैठे रहे
* 1995 में वह बारामती विधानसभा सीट से चुनाव जीते फिर बारामती सेट को अपना अवैध किला बना लिया
* सात बार इसी सीट से चुनाव जीत कर राज्य की राजनीति में मजबूती स्थापित की और इसी इलाके में उनका प्लान भी क्रैश हुआ है
* अजीत पवार पहली बार 2010 में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने थे इसके बाद वह अलग-अलग सरकारों में इस पद पर कई बार रहे
* उपमुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए उनके पास वित्त, सिंचाई और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभाग रहे
* अपने चाचा शरद पवार को वह अपना राजनीतिक गुरु मानते थे यानी राजनीति की ट्रेनिंग उन्हें घर से ही मिली थी
* NCP में अजीत पवार अपने तेज और रणनीतिक फैसले के लिए जाने जाते हैं हालांकि वक्त के साथ अजीत पवार और शरद पवार के सोच में फर्क आने लगा
* चाचा का साथ छोड़ अजीत पवार अलग राह चुने हालांकि शुरुआत में काफी जोखिम भरा कदम लगा लेकिन अजीत पवार की प्रबंधन कला और नेताओं की पकड़ ने साथ दिया
28/01/2026
अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र (sympathetic nervous system)
* स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के दो भाग हैं
> अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र (sympathetic nervous system)
> परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र (Parasympathetic nervous system)
यहां हम अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र के बारे में जानेंगे
* इसे थोरेकोलम्बर आउट फ्लो भी कहते हैं क्योंकि जो प्रोगेन्गलियोनिक तन्तु होते हैं, वह स्पाइनल कॉर्ड को थोरेसिक तथा लम्बर क्षेत्र में ही संलग्न (Join) करते हैं
* यह एक जोड़ा गैन्गलियोनिक श्रृंखला को रखते हैं जो कि स्पाइनल कॉर्ड के दोनों ओर गर्दन से उदर तक रहता है
* तंत्रिका तंतु गैन्गलिया को विसरल अंगों तथा केन्द्रीय तंत्रिका-तंत्र से जोड़ती है
* वे तंत्रिका तन्तु जो गैन्गलिया को केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र से जोड़ते हैं उन्हें मेड्युलेटेड तंत्रिका तंतु कहते हैं
* प्रीगैन्गलियोनिक तंत्रिका तन्तु स्पाइनल कॉर्ड से निकलते हैं तथा स्पाइनल तंत्रिकाओं की अधर मूल के पास होते हैं
* वे तंत्रिका तंतु जो गैन्गिलिया को अंगों से जोड़ते हैं उन्हें नॉन मेड्यूलेटेड तंत्रिका-तंतु या पोस्ट गैन्गलियोनिक तंत्रिका तन्तु कहते हैं
* प्री-गैन्गलियोनिक फाइबर्स एसीटाइलकॉलीन तथा पोस्ट गैन्गलियोनिक फाइबर्स सिम्पेथीन स्रावित करते हैं
* अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र के कार्य:
> यह आँख की पुतलियों को फैलाता है
> यह स्वेद ग्रन्थि से पसीने के स्राव को बढ़ाता है
> यह लार ग्रन्थियों के स्रवण को कम करता है
> यह हृदय स्पन्दन को बढ़ाता है
> यह त्वचीय रुधिर वाहिनियों को सिकोड़ता है, जिससे त्वचा पीली हो जाती है और रक्त दाब बढ़ जाता है
> यह उन रुधिर वाहिनियों को फैलाता है जो हृदय, मस्तिष्क फेफड़ों तथा कंकालीय पेशियों की संवहनित करती है
> यह एड्रीनल स्रवण को बढ़ाता है
> यह मूत्राशय की पेशियों को फैलाता है
> यह लैक्राइमल ग्रन्थियों के स्रवण को बढ़ाता है
> यह रक्त में शर्करा के स्तर को बढ़ाता है
> यह आहारनाल के क्रमानुसंकुचन को कम करता है
> यह पाचन ग्रन्थियों के स्रवण को कम करता है
> यह गुदा के स्फिंक्टर को सिकोड़ता है
> इसकी क्रिया से बाल खड़े हो जाते हैं
> यह शवसन दर को तीव्र करता है
> यह रक्त दाब को बढ़ाता है
> यह रुधिर में RBC की संख्या में वृद्धि करता है
> इसके सामूहिक प्रभाव से भय, पीड़ा तथा क्रोध पर प्रभाव पड़ता है
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