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मुस्लिम देशों के गले पड़ी नई मुसीबत, ईरान डील के बाद क्या करने जा रहे ट्रंप
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ईरान और अमेरिका की जंग खत्म होने के करीब है. दोनों देश अब एक डील फाइनल करने वाले हैं. इस फैसले से जहां पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है तो वहीं मुस्लिम देशों के लिए एक नई मुसीबत आने वाली है. ट्रंप मुस्लिम और अरब देशों पर इजरायल से संबंध सामान्य करने का दबाव बना रहे हैं. शनिवार को ट्रंप ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं के साथ फोन पर बात की. इसमें ट्रंप ने ऐसी बात कही, जिससे हर देश चौंक गया और कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया. ट्रंप ने कहा कि ईरान जंग खत्म होने के बाद अगला कदम होगा कि अरब और मुस्लिम देश इजरायल से समझौता सामान्य करें और अब्राहम अकॉर्ड में शामिल हों.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, बातचीत का मकसद ईरान के साथ उभरती डील पर चर्चा करना था. इस दौरान यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद जैसे नेताओं ने डील का समर्थन किया. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, ‘सबने ट्रंप से कहा कि हम इस डील में आपके साथ हैं. और अगर यह काम नहीं करती, तब भी हम आपके साथ हैं.’ लेकिन इसी बातचीत में ट्रंप ने अचानक नया मुद्दा उठा दिया. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप ने नेताओं से कहा कि वह अब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन करने जा रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि जल्द ही इजरायल के नेता भी इसी तरह की कॉल में शामिल होंगे.
ट्रंप की नई डिमांड बनी मुस्लिम देशों के गले की हड्डी
इसके बाद ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान युद्ध खत्म होने के बाद जो देश अभी तक अब्राहम समझौते का हिस्सा नहीं हैं या जिनके इजरायल से शांति समझौते नहीं हैं, उन्हें आगे आकर इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने चाहिए. यहीं पर कॉल में माहौल बदल गया. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, खासकर सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान जैसे देशों के नेता, जिनके इजरायल के साथ औपचारिक कूटनीतिक रिश्ते नहीं हैं, ट्रंप की इस मांग से हैरान रह गए. पाकिस्तान जैसे देशों की तो पूरी इंटरनेशनल राजनीति ही इजरायल के खिलाफ जहर उगलने की है, वह तो बुरे फंस गए हैं. पाकिस्तान का इजरायल से नफरत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसके पासपोर्ट पर लिखा है कि पाकिस्तान इजरायल को नहीं मानता. एक अधिकारी ने बताया, ‘लाइन पर कुछ देर खामोशी छा गई. तब ट्रंप ने मजाक में पूछा कि क्या आप लोग अभी भी लाइन पर हैं?’
ईरान भी अब्राहम समझौते में होगा शामिल?
इसके बाद ट्रंप ने कहा कि उनके दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ अगले कुछ हफ्तों में इस मुद्दे पर आगे बातचीत करेंगे. रविवार को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर भी इस बात का जिक्र किया. उन्होंने लिखा, ‘मैं मिडिल ईस्ट के सभी देशों को उनके समर्थन और सहयोग के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं. यह सहयोग और मजबूत होगा अगर वे ऐतिहासिक अब्राहम समझौते में शामिल होते हैं.’ ट्रंप ने यहां तक इशारा किया कि एक दिन ईरान भी अब्राहम समझौते में शामिल हो सकता है. हालांकि इसके लिए तेहरान को इजरायल को मान्यता देनी होगी, जिसे ईरान दशकों से ठुकराता आया है और मौजूदा ईरानी शासन इजरायल को दुश्मन मानता है.
ट्रंप की बात क्या सऊदी मान सकेगा?
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी ट्रंप की इस पहल का समर्थन किया. ग्राहम ने एक्स पर लिखा, ‘अगर ईरान संघर्ष खत्म करने वाली बातचीत के नतीजे में हमारे अरब और मुस्लिम सहयोगी अब्राहम समझौते में शामिल होते हैं, तो यह मिडिल ईस्ट के इतिहास के सबसे बड़े समझौतों में से एक होगा.’ ग्राहम ने सऊदी अरब और दूसरे देशों को सीधी चेतावनी भी दी. उन्होंने लिखा, ‘अगर आप ट्रंप के सुझाए इस रास्ते पर नहीं चलते, तो हमारे भविष्य के रिश्तों पर गंभीर असर पड़ेगा और यह शांति प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं रहेगा. इतिहास इसे बड़ी भूल के तौर पर देखेगा.’ हालांकि सबसे बड़ा सवाल सऊदी अरब को लेकर है. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने की इच्छा जता चुके हैं, लेकिन पिछले एक साल में उनका रुख ठंडा पड़ गया है.
पिछले नवंबर में ओवल ऑफिस में ट्रंप ने मोहम्मद बिन सलमान से अब्राहम समझौते में शामिल होने की बात कही थी, लेकिन सऊदी प्रिंस ने इसका विरोध किया और बातचीत तनावपूर्ण हो गई थी. ईरान युद्ध और यूएई के साथ तनाव के बाद सऊदी अरब का रुख इजरायल की मौजूदा दक्षिणपंथी सरकार को लेकर और सख्त हो गया है. सऊदी अधिकारियों की अब भी साफ मांग है कि इजरायल फिलिस्तीनी राज्य के लिए तय समयसीमा वाला और अपरिवर्तनीय रास्ता दे, तभी वह रिश्ते सामान्य करने पर आगे बढ़ेंगे. लेकिन इजरायली सरकार इसके लिए तैयार नहीं है.
पेट्रोल-डीजल ने फिर लगाई छलांग, आज ₹2.71 बढ़े दाम
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नई दिल्ली. पेट्रोल और डीजल ने आम आदमी को फिर झटका दिया है. सरकार ने आज एक बार फिर तेल के दाम (Fuel Price Hike) बढ़ा दिए हैं. पेट्रोल ₹2.61 बढ़े तो डीजल 2.71 रुपये महंगा हो गया है. पिछले दस दिनों में ईंधन की कीमतों में चौथी बार इजाफा किया गया है. ईरान संकट की वजह से क्रूड के बढ़े दामों की वजह से तेल कंपनियों को घाटा हा रहा है और इसी की भरपाई के लिए पेट्रोल-डीजल का रेट बढ़ाया गया है. दिल्ली में अब डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर से 2.71 रूपये महंगा होकर 95.20 रुपये प्रति लीटर (Diesel Price) हो गया है. इसी तरह पेट्रोल की कीमत भी अब 2.61 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के साथ 99.51 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर (Petrol Price) हो गई है.
तेल कंपनियों ने शनिवार, 23 मई को भी पेट्रोल और डीजल का रेट बढ़ाया था.
सिर्फ सामान्य पेट्रोल-डीजल ही नहीं प्रीमियम ईंधनों के दाम भी उसी रफ्तार से बढ़े हैं. XP95 जो 106.63 रुपये प्रति लीटर था वह अब 109.24 रुपये हो गया. इसी तरह XG की कीमत 97.81 रुपये से बढ़कर 100.52 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है. इस बढ़ोतरी के बाद कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 2.87 रुपये बढ़कर 113.51 रुपये प्रति लीटर हो गई. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 2.72 रुपये महंगा होकर 111.21 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि चेन्नई में 2.46 रुपये की वद्धि के बाद पेट्रोल का नया दाम 107.77 रुपये प्रति लीटर हो गया है.
तेल कंपनियों ने शनिवार, 23 मई को भी पेट्रोल और डीजल का रेट बढ़ाया था. तब पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. इससे पहले भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी की गई थी. पहली बार 15 मई को पेट्रोल 3 रुपये महंगा हुआ था और फिर 19 मई को भी 90 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाए गए थे.
आज क्रूड ऑयल की कीमत गिरी
कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के कारण सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लुढ़ककर दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया. बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 4.55% की गिरावट के साथ 98.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 4.73% टूटकर 92.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. दोनों ही अनुबंधों के लिए 7 मई के बाद का यह सबसे निचला स्तर है.
विजय सरकार पहली परीक्षा में फेल? 10 वर्षीय मासूम की मां के आरोप से हिला सिस्टम
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तमिलनाडु के कोयंबटूर में 10 वर्षीय बच्ची के साथ कथित यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है. पीड़िता की मां ने एक्टर से मुख्यमंत्री बने थलापति विजय की सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मां का दावा है कि उनकी बेटी का अंतिम संस्कार उनकी जानकारी और सहमति के बिना कर दिया गया, जबकि अधिकारियों ने उन्हें पूरे मामले में चुप रहने के लिए दबाव डाला.
थलापति विजय सरकार पर गंभीर आरोप लगे हैं.
पीड़िता की मां ने आरोप लगाया कि पोस्टमॉर्टम के दौरान अधिकारियों ने परिवार को कंप्रोमाइज करने के लिए मजबूर किया. उनका कहना है कि पोस्टमॉर्टम के बाद बच्ची के शव को बिना किसी सूचना के कोयंबटूर से सलेम ले जाया गया. मां के मुताबिक अधिकारियों ने परिवार को शव वाहन के पास तक नहीं जाने दिया. मां ने कहा कि मेरी बेटी का अंतिम संस्कार मेरी जानकारी के बिना किया गया. पोस्टमॉर्टम के बाद शव को सलेम ले जाया गया और हमें बताया तक नहीं गया. जब तक मैं अपने पति के घर पहुंची, तब तक बच्ची का अंतिम संस्कार हो चुका था.
जल्दबाजी में अंतिम संस्कार के आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि अंतिम संस्कार जल्दबाजी में इसलिए किया गया ताकि मामले को दबाया जा सके. मां का कहना है कि कुछ मंत्री और अधिकारी लगातार उन्हें इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से रोक रहे थे. उन्होंने कहा कि जब मैं सलेम पहुंची तो मंत्रियों और अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में कुछ मत बोलो. पीड़िता की मां ने अपने पति और रिश्तेदारों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की है. उनका आरोप है कि उनकी गैरमौजूदगी में बच्ची का अंतिम संस्कार कराया गया और उन्हें पूरे घटनाक्रम से दूर रखा गया.
इस घटना के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने विजय सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार मामले को दबाने की कोशिश कर रही है और प्रशासन पीड़ित परिवार पर दबाव बना रहा है. कई संगठनों ने इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की है. गौरतलब है कि कोयंबटूर में 10 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे तमिलनाडु को झकझोर दिया है. घटना के बाद राज्यभर में लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला था. अब पीड़िता की मां के नए आरोपों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है. हालांकि, राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से मां के आरोपों पर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाएगी.
बिहार के विश्वविद्यालयों में एडमिशन से रिजल्ट तक सब ऑनलाइन, राज्यपाल का फैसला
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पटना. बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और सत्रों को नियमित करने के लिए लोकभवन (राजभवन) ने कमर कस ली है. इसी क्रम में बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के लिए कई बड़े और कड़े फैसले लिए हैं. इस नई व्यवस्था के तहत अब बिहार के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘समर्थ पोर्टल’ को मिशन मोड में लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके साथ ही पोर्टल पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालयों को प्रोत्साहन के रूप में 1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी दी जाएगी.
समर्थ पोर्टल से ही होंगे सारे काम
कुलाधिपति कार्यालय की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक अब विश्वविद्यालयों के तमाम प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य केवल समर्थ पोर्टल के माध्यम से ही ऑनलाइन किए जाएंगे. इसमें विद्यार्थियों के नामांकन से लेकर परीक्षा फॉर्म भरने, एडमिट कार्ड जारी करने और परिणाम (रिजल्ट) प्रकाशन तक के सभी कार्य शामिल हैं. इसके अतिरिक्त शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति की निगरानी, उनके अवकाश का प्रबंधन, सेवा संबंधी मामले और मासिक वेतन का भुगतान भी इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निपटाया जाएगा.
मुख्य बदलाव और नई व्यवस्थाएं
समर्थ पोर्टल अनिवार्य: विवि के सभी कार्य अब इसी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित होंगे.
निगरानी अधिकारियों की तैनाती: सतर्कता और पारदर्शिता के लिए हर विवि में मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) नामित होंगे.
अकादमिक कैलेंडर का पालन: नामांकन, परीक्षा और परिणाम का काम अब सख्त समय-सीमा के तहत होगा.
एक लाख का पुरस्कार: समर्थ पोर्टल पर सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालयों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.
मुख्य सतर्कता अधिकारी करेंगे निगरानी
विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने और कामकाज में पूरी सतर्कता बरतने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया गया है. अब राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) नामित किए जाएंगे. ये अधिकारी विश्वविद्यालयों के दैनिक कार्यों और वित्तीय लेन-देन पर कड़ी नजर रखेंगे. कुलाधिपति ने साफ किया है कि विश्वविद्यालय सार्वजनिक धन के उपयोग के लिए पूरी तरह जवाबदेह होंगे और उन्हें सरकार से मिलने वाले अनुदान का समय पर उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) देना होगा.
बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में लेटलतीफी को खत्म करने के लिए शैक्षणिक कैलेंडर का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है. समय पर परीक्षाएं आयोजित कराने और तय समय-सीमा के भीतर परिणाम घोषित करने को प्राथमिकता दी गई है ताकि छात्रों का सत्र देर न हो और उनका भविष्य सुरक्षित रहे.
छात्राओं को समय पर मिलेगी प्रोत्साहन राशि
मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत स्नातक पास करने वाली छात्राओं को मिलने वाली 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अब देरी नहीं होगी. इस प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए साल 2025 तक स्नातक उत्तीर्ण करने वाली सभी योग्य छात्राओं का पूरा डाटा समर्थ पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है. डाटा ऑनलाइन होने से अब छात्राओं के बैंक खातों में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सीधे राशि भेजी जा सकेगी.
छात्राओं के लिए विशेष घोषणा
50-50 हजार रुपए की राशि: स्नातक पास छात्राओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का समय पर भुगतान होगा.
डाटा अपलोड: इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए साल 2025 तक स्नातक पास सभी छात्राओं का डाटा पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है.
बिहार उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव
राज्यपाल के निर्णय से साफ है कि बिहार में पहली बार विश्वविद्यालयों की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश हो रही है. इससे रिकॉर्ड प्रबंधन और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी. ऐसे में लोकभवन के इस चौतरफा डिजिटल रिफॉर्म से बिहार के लाखों छात्र-छात्राओं को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है. शिक्षा व्यवस्था में यह बदलाव आने वाले दिनों में राज्य के विश्वविद्यालयों की सूरत बदलने में मील का पत्थर साबित हो सकता है.
व्हाइट हाउस के बाहर 30 राउंड फायरिंग, हमलावर ढेर, डोनाल्ड ट्रंप अंदर मौजूद
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अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन से शनिवार शाम एक सनसनीखेज खबर सामने आई, व्हाइट हाउस के बाहर अचानक गोलियों की आवाज गूंज उठी और पूरा इलाका हाई अलर्ट पर चला गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीक्रेट सर्विस के साथ मुठभेड़ में दो लोगों को गोली लगी. घटना पेनसिल्वेनिया एवेन्यू और 17वीं स्ट्रीट नॉर्थवेस्ट के पास हुई, जो व्हाइट हाउस परिसर के ठीक बाहर का इलाका है. रिपोर्ट के मुताबिक लगातार कई गोलियों की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद व्हाइट हाउस परिसर में अफरातफरी मच गई. सीक्रेट सर्विस के एजेंट तुरंत एक्टिव हुए और पूरे इलाके को लॉकडाउन कर दिया. व्हाइट हाउस के नॉर्थ लॉन में मौजूद पत्रकारों को भागकर प्रेस ब्रीफिंग रूम में ले जाया गया, जबकि अंदर मौजूद लोगों को कहा गया, ‘नीचे बैठो, गोलियां चल रही हैं.’ यानी सबको जमीन पर झुककर कवर लेने को कहा गया.
हमले के वक्त ट्रंप व्हाइट हाउस में थे
घटना के वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस रेजिडेंस के अंदर मौजूद थे. यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत पूरे परिसर को सील कर दिया और भारी हथियारों से लैस सीक्रेट सर्विस एजेंट नॉर्थ लॉन में दौड़ते नजर आए. स्थानीय समय के मुताबिक शाम को करीब 6:45 बजे के बाद लॉकडाउन हटाया गया.
अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक, सीक्रेट सर्विस की यूनिफॉर्म डिवीजन को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति हथियार चला रहा है. जब अधिकारी मौके पर पहुंचे, तो मुठभेड़ हुई और दो लोगों को गोली लगी. हालांकि अभी कुछ सवालों के जवाब नहीं मिले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक एक व्यक्ति संदिग्ध था, वहीं दूसरा व्यक्ति आम नागरिक है. यह भी साफ नहीं है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति को निशाना बनाने की कोशिश हुई थी? अब गोली लगने वालों की हालत क्या है इसकी जानकारी सामने नई आई है. FBI डायरेक्टर काश पटेल ने सोशल मीडिया पर कहा कि एजेंसी मौके पर मौजूद है और सीक्रेट सर्विस की मदद कर रही है. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे जानकारी मिलेगी, जनता को अपडेट दिया जाएगा.
एक महीने पहले भी हुई ऐसी घटना
यह घटना ऐसे समय हुई है जब एक महीने पहले भी व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान गोलियां चलने से हड़कंप मचा था. उस मामले में आरोपी शॉटगन लेकर सिक्योरिटी चेकपॉइंट तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था और उस पर ट्रंप की हत्या की कोशिश का केस चल रहा है.
व्हाइट हाउस पर कब-कब हुए हमले?
24 अगस्त 1814: व्हाइट हाउस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला 210 साल पहले हुआ. जब ब्रिटिश सेना ने वॉर ऑफ 1812 के दौरान इमारत पर कब्जा कर आग लगा दी. राष्ट्रपति जेम्स मैडिसन पहले ही निकल चुके थे. पूरा व्हाइट हाउस जल गया था और बाद में इसे दोबारा बनाया गया.
29 अक्टूबर 1994: फ्रांसिस्को मार्टिन ड्यूरन ने व्हाइट हाउस के बाहर से सेमी ऑटोमैटिक रायफल से 29 गोलियां दाग दीं. माना गया कि उसका निशाना राष्ट्रपति बिल क्लिंटन थे. हालांकि कोई घायल नहीं हुआ और हमलावर तुरंत पकड़ लिया गया.
8 फरवरी 2001: रॉबर्ट डब्ल्यू. पिकेट नाम के शख्स ने व्हाइट हाउस की फेंस के बाहर से फायरिंग की. जवाबी कार्रवाई में सीक्रेट सर्विस ने उसे गोली मारकर काबू किया और गिरफ्तार कर लिया.
11 नवंबर 2011: ऑस्कर ओर्टेगा-हर्नांडेज ने दूर से व्हाइट हाउस पर कई राउंड फायर किए. 7 गोलियां व्हाइट हाउस की दूसरी मंजिल तक जा लगीं, जिसमें ट्रूमैन बालकनी भी शामिल था. राष्ट्रपति ओबामा उस समय वहां नहीं थे. बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर 25 साल की सजा सुनाई गई.
बेटे के लिए सचिन का दिल भर आया, जिगर के टुकड़े के लिए लिखा भावुक पोस्ट
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नई दिल्ली: भारत के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर अपने बेटे अर्जुन को आईपीएल 2026 में मैदान पर देख भावुक हो गए. इस सीजन में वह लखनऊ सुपरजायंट्स की टीम में शामिल थे. सीजन में उन्हें लगातार 13 मैचों तक मौका नहीं मिला था. लीग स्टेज के आखिरी मैच में अर्जुन को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया, जिसमें उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाया. पंजाब किंग्स के खिलाफ अर्जुन ने लखनऊ के लिए चार ओवर की गेंदबाजी की, जिसमें उन्होंने सिर्फ 36 रन देकर 1 विकेट भी हासिल की. अर्जुन अपनी टीम के लिए सबसे किफायती गेंदबाज रहे हैं.
अर्जुन तेंदुलकर के लिए सचिन ने लिखा भावुक पोस्ट
बेटे के इस दमदार प्रदर्शन को देख सचिन तेंदुलकर खुद रोक नहीं पाए और आधी रात को सोशल मीडिया पर अर्जुन तेंदुलकर के लिए एक भावुक पोस्ट लिख डाला. सचिन ने अर्जुन के लिए कहा, “शाबाश, अर्जुन! इस सीजन में आपने जिस तरह से खुद को संभाला, उस पर मुझे गर्व है. आपने हमेशा अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखा, धैर्य बनाए रखा, चुपचाप कड़ी मेहनत की और आखिरी मैच तक मौका मिलने का इंतजार करने के बावजूद सकारात्मक बने रहे. क्रिकेट में कौशल के साथ-साथ धैर्य की भी परीक्षा होती है और आज आपने दोनों को बखूबी निभाया. अपने पैर जमीन पर रखें और हमेशा की तरह खेल के प्रति अपना प्यार बनाए रखें. हमेशा आपके लिए मेरा स्नेह रहेगा.”
लखनऊ सुपरजायंट्स के लिए आईपीएल 2026 का सीजन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. टीम को उसके आखिरी लीग मैच में भी हार का सामना करना पड़ा. लखनऊ का अंतिम लीग मैच पंजाब किंग्स के खिलाफ था. मैच में टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए जोश इंग्लिस और आयुष बडोनी की दमदार बल्लेबाजी से निर्धारित 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 196 रन का स्कोर खड़ा किया.
लखनऊ के खिलाफ इस स्कोर के जवाब में पंजाब किंग्स की शुरुआत बहुत ही खराब रही. टीम ने पारी की पहली गेंद पर प्रियांश आर्य का विकेट गंवा दिया. हालांकि, इसके बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने प्रभसिमरन सिंह के साथ मिलकर न सिर्फ पारी को संभाला बल्कि शतक पूरा करते हुए टीम जीत दिलाई, जिससे प्लेऑफ में उसके पहुंचने की उम्मीद बनी हुई है.
होर्मुज आखिरकार खुल गया! ईरान-अमेरिका में डील, इजरायल परेशान, मुनीर लौटे
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महीनों से चले आ रहे अमेरिका-ईरान टकराव के बीच अब बड़ी खबर सामने आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता लगभग तय हो चुका है, जिससे न सिर्फ युद्ध खत्म होने की दिशा बन सकती है, बल्कि दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य भी फिर खुल सकता है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका, ईरान और कुछ अन्य देशों के बीच एक बड़ा समझौता काफी हद तक तय हो चुका है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी अंतिम मुहर बाकी है और कुछ शर्तें बदल भी सकती हैं.
क्या है इस डील में?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर बातचीत चल रही है, उसमें 14 बिंदु शामिल हैं. इसमें से कुछ खास ये हैं.
ईरान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो. लेबनान के मोर्चे पर भी.
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति खत्म करने की कोशिश होगी.
होर्मुज जलडमरूमध्य को धीरे-धीरे खोला जाएगा.
ईरानी बंदरगाहों पर लगा अमेरिकी नौसैनिक दबाव कम हो सकता है.
विदेशी बैंकों में फंसी कुछ ईरानी संपत्तियां अनफ्रीज की जा सकती हैं.
इसके बाद कम से कम 30 दिन की नई बातचीत चलेगी, जिसमें सबसे कठिन मुद्दों, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और एनरिच्ड यूरेनियम पर चर्चा होगी.
यानी फिलहाल यह पूरी डील नहीं, बल्कि युद्ध रोकने और आगे की बातचीत शुरू कराने वाला अंतरिम फार्मूला माना जा रहा है.
ईरान ने ट्रंप के दावे पर लगाया ब्रेक
जहां ट्रंप ने कहा कि होर्मुज खुलेगा, वहीं ईरान की सरकारी एजेंसी फार्स न्यूज ने इस दावे को चुनौती दे दी. ईरानी रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज पर नियंत्रण ईरान के हाथ में ही रहेगा और ट्रंप का ‘फ्री पैसेज’ वाला दावा ‘हकीकत से मेल नहीं खाता.’ ईरान का कहना है कि उसने सिर्फ जहाजों की आवाजाही को युद्ध से पहले वाले स्तर तक लौटाने पर सहमति जताई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पहले जैसा पूरी तरह खुला समुद्री रास्ता हो जाएगा. यानी जिस बात को ट्रंप बड़ी सफलता बता रहे हैं, वहीं ईरान उसे अलग तरीके से पेश कर रहा है.
पाकिस्तान फेल तो कतर ने कराई डील
इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान और कतर दोनों बैकचैनल मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं. पाकिस्तान ने पहले भी कोशिश की थी, लेकिन वह डील नहीं करा पाया. शुक्रवार को खबर आई कि कतर की एक टीम भी ईरान पहुंच गई है, जिसके बाद माना जा रहा था कि डील हो जाएगी. क्योंकि कतर पहले भी इस तरह की डील कराता रहा है. वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर भी तेहरान में बातचीत करके लौटे हैं. ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी कहा कि फिलहाल बातचीत का फोकस जंग खत्म कराने पर है, परमाणु मुद्दे पर नहीं.
तेल संकट से भारत-US हथियार डील तक, दिल्ली आते ही मार्को रूबियो के 5 बड़े ऐलान
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नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 4 दिन की यात्रा पर भारत आए हैं. पहले दिन कोलकाता में लैंड होने के बाद वो दिल्ली पहुंचे और यहां पर उन्होंने सेवा तीर्थ जाकर पीएम मोदी के साथ लंबी बातचीत थी. इस दौरान अमेरिका और भारत के रिश्तों पर डीटेल में चर्चा हुई, जिसमें एनर्जी सिक्योरिटी से लेकर ट्रेड यहां तक कि ईरान और चीन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई. इस मीटिंग के बाद उन्होंने 5 बड़े ऐलान किए हैं. पीएम मोदी की तारीफें और भारत के बढ़ते रुतबे का बखान करते हुए उन्होंने ईरान पर भी दिल खोलकर बातें की हैं.
मार्को रूबियो के 5 बड़े ऐलान
तेल पर भारत को दिया ऑफर
भारत अभी तक रूस से अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल खरीदता है लेकिन अब अमेरिका, भारत की तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए खुद सबसे आगे आना चाहता है. इसके लिए रूबियो ने पहले दिन भारत को बड़ा ऑफर दे डाला. होर्मुज में रुकी सप्लाई और तेल की कमी होते देख रूबियो ने भारत को सप्लाई के नए रास्ते खोलने का ऑफर दिया है. इसके लिए रूबियो ने वेनेजुएला को भी आगे किया है. उन्होंने कहा कि वो भारत के लिए एनर्जी सप्लाई डायवर्सीफाई यानी अलग-अलग रास्ते खोलने के लिए बिल्कुल तैयार हैं.
पेट्रोल-CNG के बढ़ते दामों के लिए ईरान जिम्मेदार
दुनिया भर में आम जनता की जेब पर भारी पड़ रहे पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दामों पर रूबियो ने दूसरा सबसे बड़ा ऐलान किया. उन्होंने इसका दोष सीधा ईरान पर मढ़ दिया है. उन्होंने सीधे तौर पर ईरान को घेरते हुए कहा, ‘आज दुनिया भर में तेल की कीमतें सिर्फ इसलिए आसमान छू रही हैं, क्योंकि ईरान ने पूरी तरह से गैरकानूनी और आपराधिक तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना कंट्रोल जमाने का फैसला कर लिया है’.
रूबियो ने आगे कहा कि ‘ईरान अब होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को सरेआम धमका रहा है कि अगर उन्होंने ईरान को मनमाना टैक्स नहीं दिया या उनकी बात नहीं मानी तो वो उन जहाजों को समुद्र में डुबो देंगे. ये अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है और इसकी इजाजत किसी भी कीमत पर नहीं दी जा सकती.’ उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत दोनों ही होर्मुज को फ्री और सुरक्षित रखने पर एक जैसी सोच रखते हैं.
पीस डील पर किया अपडेट का ऐलान
ईरान के साथ चल रही सीक्रेट शांति वार्ता का सस्पेंस खोलते हुए रूबियो ने तीसरा बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा, ‘ईरान के साथ किसी समझौते पर पहुंचना आसान काम नहीं है, क्योंकि वहां का पूरा सिस्टम बिखरा हुआ है और उसे कट्टरपंथी मौलवी चला रहे हैं. फिर भी, हम चाहते हैं कि इसका कोई शांतिपूर्ण समाधान निकले’.
परमाणु खतरे पर बड़ा अपडेट देते हुए रूबियो ने खुलासा किया, ‘ईरान से सबसे बड़ा खतरा उसके परमाणु कार्यक्रम से है और हम प्राथमिकता के तौर पर इसे बातचीत से सुलझाना चाहते हैं. हमारी कोशिशें लगातार जारी हैं और जिस वक्त मैं आपसे बात कर रहा हूं, ठीक इसी समय हमारे लोग ईरान के साथ इस बातचीत की टेबल पर बैठे हुए हैं’.
‘अब भारत में हथियार बनाएंगी अमेरिकी कंपनियां’
भारत की तारीफों के पुल बांधते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने चौथा बड़ा ऐलान डिफेंस सेक्टर को लेकर किया. उन्होंने पीएम मोदी से अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा, ‘आज भारत और अमेरिका के विचार पूरी तरह से एक जैसे हैं. मैंने प्रधानमंत्री से भी बात की है, जो इस मामले को लेकर बेहद गंभीर और कड़क रुख रखते हैं. भारत के पास गजब की क्षमता और बेहद कुशल वर्कफोर्स है’.
रूबियो ने आगे कहा, ‘हमारी अमेरिकी कंपनियां अब भारत में ही हथियारों और डिफेंस इक्विपमेंट्स का प्रोडक्शन करने में बेहद दिलचस्पी ले रही हैं. जैसे-जैसे दुनिया के कई देश अपने डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को मजबूत कर रहे हैं, भारत इस पूरी वैश्विक मुहिम में एक बहुत बड़ा और मुख्य रणनीतिक भागीदार बन सकता है’. उन्होंने ये भी जोड़ा कि भारतीय कंपनियां अमेरिका में भी बड़ा निवेश कर रही हैं.
‘इस साल भारत मिलेंगे चारों देश’
चीन की घेराबंदी के लिए बने ‘क्वॉड’ (Quad) संगठन के भविष्य पर रूबियो ने पांचवां बड़ा ऐलान किया. उन्होंने भारत के नेतृत्व की तारीफों के पुल करते हुए कहा, ‘पूरी दुनिया इस वक्त भारत की तरफ देख रही है क्योंकि भारत ही क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की अगली बैठक की मेजबानी करने जा रहा है’.
नेताओं के शिखर सम्मेलन पर रूबियो ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि क्वॉड लीडर्स समिट एक स्टैंडअलोन कार्यक्रम हो और इसे इसी साल आयोजित किया जाए. हालांकि, हमारे देश समेत कुछ देशों में चुनाव होने हैं, जिससे नेताओं के लिए यात्रा करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन हम इसके लिए हर हाल में मौका ढूंढेंगे. ये पूरी दुनिया को एक बहुत बड़ा और मजबूत संदेश देने के लिए बेहद जरूरी है
भारत को 'महान साझेदार' बताने वाले मार्को रुबियो पहुंचे कोलकाता, अब 4 दिनों तक महामंथन
KASHI MAIL
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) शनिवार 23 मई 2026 को अपने चार दिवसीय भारत दौरे की शुरुआत करते हुए कोलकाता पहुंचे. यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और क्वाड देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने वाली है.
करीब 14 वर्षों बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का कोलकाता दौरा हो रहा है. इससे पहले वर्ष 2012 में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री Hillary Clinton ने शहर का दौरा किया था. ऐसे समय में रुबियो का आगमन राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में पश्चिम बंगाल में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई है. भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर रुबियो के आगमन की जानकारी देते हुए कहा कि यह उनकी पहली भारत यात्रा है. उन्होंने बताया कि दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात होगी, जिसमें व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग और क्वाड समेत कई रणनीतिक विषयों पर चर्चा की जाएगी. रुबियो का भारत दौरा 23 से 26 मई तक प्रस्तावित है. इस दौरान वह कोलकाता के अलावा नई दिल्ली, आगरा और जयपुर भी जाएंगे. माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा.
इन बातों पर रहेगा फोकस
दौरे से पहले मियामी में पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा था कि अमेरिका भारत को जितनी अधिक एनर्जी (तेल, गैस) बेच सकेगा, उतना बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समय रिकॉर्ड स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और निर्यात कर रहा है. भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक तेल आपूर्ति पर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के प्रभाव से जुड़े सवाल पर उन्होंने भारत को महान साझेदार बताया. इस दौरे का सबसे अहम पड़ाव 26 मई को प्रस्तावित क्वाड देशों की बैठक मानी जा रही है. बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे. इसमें भारतीय विदेश मंत्री S. Jaishankar मेजबानी करेंगे, जबकि ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong और जापान के विदेश मंत्री Motegi Toshimitsu भी शामिल होंगे.
सुबह 8:15 बजे (स्थानीय समय): अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो भारत के कोलकाता में मदर हाउस के दौरे में भाग लेंगे.
सुबह 9:25 बजे (स्थानीय समय): विदेश मंत्री रुबियो भारत के कोलकाता में चिल्ड्रन्स होम का दौरा करेंगे.
दोपहर 2:00 बजे (स्थानीय समय): विदेश मंत्री रुबियो नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे.
शाम 5:25 बजे (स्थानीय समय): विदेश मंत्री रुबियो भारत के नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास सपोर्ट एनेक्स भवन के उद्घाटन समारोह में संबोधन देंगे.
शाम 6:45 बजे (स्थानीय समय): विदेश मंत्री रुबियो भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर द्वारा नई दिल्ली में आयोजित रूजवेल्ट हाउस स्वागत समारोह में शामिल होंगे.
बसु-ममता नहीं कर पाए, अब सुवेंदु दादा केरंगे, कोलकाता एयरपोर्ट से हटेगी मस्जिद
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति बदलते ही अब उन मुद्दों पर भी तेजी दिखने लगी है, जो दशकों तक फाइलों और विवादों में दबे रहे. कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के भीतर मौजूद 136 साल पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद को लेकर फिर से हलचल तेज हो गई है. यह वही मस्जिद है, जिसे लेकर पिछले करीब 30 साल से केंद्र सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी लगातार चिंता जताती रही थी. लेकिन हर बार मामला धार्मिक संवेदनशीलता और राजनीतिक टकराव के कारण आगे नहीं बढ़ पाया. अब बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तस्वीर बदलती दिख रही है. सूत्रों के मुताबिक नई सरकार और केंद्र के बीच तालमेल बढ़ने के बाद मस्जिद को एयरपोर्ट परिसर से बाहर शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. यही वजह है कि प्रशासन, एयरपोर्ट अथॉरिटी और जिला अधिकारियों की लगातार बैठकें हो रही हैं. सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं है, बल्कि एयरपोर्ट सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों और बंगाल की नई राजनीतिक दिशा का भी बन चुका है.
कोलकाता एयरपोर्ट के भीतर मौजूद 136 साल पुरानी मस्जिद को शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज हुई.
दिलचस्प बात यह है कि यह मस्जिद एयरपोर्ट बनने से भी पहले की बताई जाती है. स्थानीय लोग इसे बांकड़ा मस्जिद के नाम से जानते हैं. मस्जिद रनवे के बेहद करीब मौजूद है और इसी कारण एयरपोर्ट संचालन में लंबे समय से दिक्कतें आ रही हैं. एविएशन अधिकारियों का दावा है कि मस्जिद की वजह से सेकेंडरी रनवे का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा. बड़े इंटरनेशनल विमानों की लैंडिंग और आधुनिक ILS सिस्टम लगाने में भी रुकावट बनी हुई है. यही कारण है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी लंबे समय से इसे दूसरी जगह शिफ्ट करने का प्रस्ताव देती रही. अब सूत्र बता रहे हैं कि ईद-उल-अजहा के बाद इस मुद्दे पर बड़ा फैसला हो सकता है. हालांकि प्रशासन फिलहाल इसे पूरी तरह आपसी सहमति और शांति के साथ हल करने की रणनीति पर काम कर रहा है. मस्जिद कमेटी से भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है और अगले हफ्ते फिर अहम बैठक होने की संभावना है.
सुवेंदु अधिकारी पहले भी सार्वजनिक रूप से एयरपोर्ट सुरक्षा और ऑपरेशनल दिक्कतों का मुद्दा उठा चुके हैं.
एयरपोर्ट सुरक्षा बनाम धार्मिक ढांचा, अब तेज हुई हलचल
कोलकाता एयरपोर्ट के भीतर मौजूद यह मस्जिद सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एयर ट्रैफिक ऑपरेशन के लिए भी बड़ी चुनौती मानी जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह ढांचा एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल से करीब 150 मीटर अंदर और सेकेंडरी रनवे से सिर्फ 165 मीटर की दूरी पर मौजूद है. अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों के अनुसार सक्रिय रनवे के 240 मीटर के दायरे में कोई स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए. इसी वजह से एयरपोर्ट अधिकारियों को रनवे के टचडाउन पॉइंट को 88 मीटर पीछे शिफ्ट करना पड़ा था.
हालांकि मौजूदा रनवे छोटे और मीडियम साइज के विमानों के लिए पर्याप्त है, लेकिन बोइंग 787 और एयरबस A330 जैसे बड़े विमानों के संचालन में परेशानी आती है. एयरपोर्ट सूत्रों का कहना है कि अगर यह बाधा हटती है तो कोलकाता एयरपोर्ट की इंटरनेशनल क्षमता और बढ़ सकती है. यही नहीं, कोहरे के दौरान इस्तेमाल होने वाला एडवांस ILS सिस्टम भी इस क्षेत्र में पूरी तरह इंस्टॉल नहीं हो पाया है. इससे सर्दियों में फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित होते हैं.
30 साल तक क्यों अटका रहा मामला?
एयरपोर्ट अथॉरिटी ने पहली बार इस मस्जिद को शिफ्ट करने का प्रस्ताव करीब तीन दशक पहले दिया था. उस दौरान ज्योति बसु सरकार थी. इसके बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य और फिर ममता बनर्जी सरकार के समय भी यह मुद्दा उठा, लेकिन हर बार राजनीतिक और धार्मिक संवेदनशीलता के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया. प्रशासन को डर था कि किसी भी जल्दबाजी से तनाव पैदा हो सकता है.
अब सत्ता परिवर्तन के बाद माहौल बदला हुआ दिखाई दे रहा है. नई सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर रही है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहले भी सार्वजनिक रूप से एयरपोर्ट सुरक्षा और ऑपरेशनल दिक्कतों का मुद्दा उठा चुके हैं. सूत्रों का दावा है कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बढ़ने के बाद अब इस प्रोजेक्ट को गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है.
मस्जिद कमेटी ने क्या कहा?
सूत्रों के मुताबिक मस्जिद कमेटी ने भी बातचीत में सहयोग का संकेत दिया है. कमेटी का कहना है कि वे एयरपोर्ट के विकास और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के खिलाफ नहीं हैं. लेकिन वे चाहते हैं कि पूरी प्रक्रिया सम्मानजनक और सहमति के साथ हो. कमेटी ने यह भी मांग रखी है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठनों से भी राय ली जाए.
फिलहाल प्रशासन वैकल्पिक जमीन और नई मस्जिद के ब्लूप्रिंट पर काम कर रहा है. बताया जा रहा है कि नई जगह पहले से ज्यादा बड़ी और सुविधाजनक हो सकती है. अधिकारियों की कोशिश है कि ईद के बाद इस मुद्दे पर सहमति का अंतिम फार्मूला तैयार कर लिया जाए.
हाई सिक्योरिटी के बीच होती है नमाज
मौजूदा समय में इस मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था अपनाई जाती है. नमाजियों को CISF की जांच से गुजरना पड़ता है. इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट के हाई सिक्योरिटी जोन के भीतर बस से मस्जिद तक ले जाया जाता है. रोजाना 10 से 25 लोग यहां नमाज पढ़ने आते हैं, जबकि शुक्रवार को यह संख्या 80 तक पहुंच जाती है.
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि एयरसाइड के भीतर किसी भी सिविलियन मूवमेंट से ऑपरेशन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. यही कारण है कि लंबे समय से इसे सुरक्षा जोखिम भी माना जाता रहा है. एयरपोर्ट प्रशासन चाहता है कि भविष्य में ऐसी स्थिति पूरी तरह खत्म हो और रनवे क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित जोन बना रहे.
क्या बंगाल में अब बदल रही है राजनीति की दिशा?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ एयरपोर्ट या मस्जिद का मुद्दा नहीं है. यह बंगाल की नई राजनीतिक कार्यशैली का संकेत भी माना जा रहा है. भाजपा लंबे समय से इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा के मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात करती रही है. अब जब राज्य और केंद्र की सोच एक दिशा में दिखाई दे रही है, तो कई पुराने विवादित प्रोजेक्ट्स भी तेजी पकड़ सकते हैं.
हालांकि विपक्ष इस पूरे मामले को राजनीतिक नजरिए से भी देख रहा है. उनका कहना है कि धार्मिक मामलों में सरकार को बेहद संतुलन और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ना चाहिए. आने वाले दिनों में यह मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा विषय भी बन सकता है.