Sheetal Singh Rajpoot
Vice-President BJP Varanasi Kisan Morcha.
05/04/2026
केंद्रीय युवा एवं खेल मंत्री, भारत सरकार Rakshatai khadse जी के साथ, काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन।
23/03/2026
Inquilab Zindabad!" still lives in every Indian heart!
On 23rd March, we remember Bhagat Singh,Shivaram Rajguru, and Sukhdev Thapar, three brave sons who smiled before sacrifice. "Azaadi is never free," and "Real heroes live forever."
They gave their today for our tomorrow. Let's respect their sacrifice and serve our nation with pride.
05/03/2026
चैत्र :-
चैत्र की यह सुबह, मानो धरती का नववधू-सा श्रृंगार हो।
पूर्व दिशा में सूरज पेड़ की टहनी से यूँ झांक रहा है, जैसे संकोची बालक अपनी माँ की ओट से संसार को देखता हो। नीचे गेहूँ की हरी चादर ओस की बूँदों से सजी, ऐसे दमक रही है मानो प्रकृति ने अपने आँचल में मोती टाँक दिए हों।
रात की सर्दी, जो जाते-जाते एक बार फिर अकड़ कर खड़ी हो गई थी, अब सूर्य की कोमल किरणों के आगे नतमस्तक हो रही है। हवा में वह हल्की-सी ठंडक शेष है, जो किसान के श्रम से भीगी देह को सुकून देती है और मन में नई फसल के सपने जगा देती है।
चैत्र का आरंभ है—न गर्मी की तपन, न शीत का अत्याचार; बस एक मधुर संधि, जहाँ प्रकृति मुस्कुरा कर कहती है—“मेहनत रंग लाएगी।”
यह दृश्य केवल आँखों को ही नहीं, आत्मा को भी हरियाली से भर देता है, यह आत्मविभोर करने वाले दृष्य आपको शहर के कंक्रीट के जंगल में नहीं मिलेंगें, यह उमंग आपकों गाँव सें जुड़ने पर ही महसूस होगी ।
03/03/2026
फगुआ:-
जोगी जी धीरे धीरे
नदी के तीरे तीरे...
होली के इतने शुद्ध भाव का फिल्मांकन जिस तरह नदिया के पार फिल्म में ताराचंद बड़जात्या ने किया, अन्यत्र उदाहरण मिलना दुर्लभ है। हमारी पीढ़ी वह गीत कभी नही भूल पाएगी। जब जब फागुन आएगा, यह गीत हमें याद दिलाएगा हमारा बचपन, कच्चे घर, ढोल ताशा के साथ स्वांग रचाए काका, परिहास करती भौजाइयां, वह मोड़ जहां से लड़कपन जाने को था और जवानी आने को थी।
नदिया के पार से मेरा जुड़ाव कई वजहों से है। पहली वजह तो इसका कथानक, इसका गीत संगीत। कोहबर की शर्त पर आधारित यह फिल्म गांव की पेंटिंग हैं। यह इकमात्र ऐसी फ़ीचर फ़िल्म है जिससे कि आप अपने आप को जोड़ सकते हैं ।
यह फ़िल्म जौनपुर में बनी। विजयीपुर और राजेपुर गांव में बनी इस फिल्म का जौनपुर में शूटिंग का एक मजेदार किस्सा है। ताराचंद बड़जात्या एक ऐसी ग्रामीण लोकेशन तलाश रहे थे जो नदी के किनारे हो, उनके एसोसिएट बाबू रामजनक सिंह जौनपुर के रहने वाले थे उन्होंने अपने गांव के आस पास के लोकेशन की चर्चा की। जब बड़जात्या उनके गांव पहुंचे तो सई और गोमती के किनारे के आस पास का माहौल उन्हे फिल्म के अनुकूल लगा। उस समय गांव में बाबू रामजनक का मकान पक्का था, उसे ही गुंजा का घर बनाया गया, फिल्म की टीम भी वहीं रुकी। फिल्म में लीला मिश्रा का भी किरदार था, वह अवधी थीं,सुल्तानपुर/ प्रतापगढ़ की थी उनके लिए अवधी फिल्म में काम करना घर में बातचीत जैसे था।
चंदन और गुंजा का रोल इतना स्वाभाविक था कि उस समय हर बालक अपने को चंदन और बालिका गुंजा समझने लगी थी। कौने दिशा में लेके चला रे बटोहिया हर तरुण के हृदय को किंशुक के फूल जैसा बना रहा था, नेह छोह के अबूझ बंधन में बंधने को कह रहा था।
फिल्म से तीसरा जुड़ाव गुंजा की वजह से है। गुंजा यानी साधना सिंह कानपुर में रहती थीं। इन्होंने कानपुर के एएनडी कॉलेज से पढ़ाई की थी और इस फ़िल्म में अपने क़िरदार के साथ बखूब न्याय करती हैं।
नदिया के पार का शहरी संस्करण हम आपके हैं कौन थी पर जो निर्दोषता, जो सौंदर्य, जो भाव नदिया के पार में था उसका कोई जोड़ हो ही नही सकता। ऐसी फिल्में दैव संजोग से बनती हैं।
गांव देस की परंपराओं का दस्तावेज के रूप में जब किसी फिल्म का नाम आयेगा , ग्रामीण भूगोल, धर्म, पारिवारिक रिश्तों के समाजशास्त्र और संबंधो की मर्यादा का सजीव साक्ष्य के रूप में जब किसी फिल्म का नाम आयेगा, प्रेम और त्याग की परिभाषा के रूप में जब किसी फिल्म का नाम आयेगा तो एक ही नाम लिखा जाएगा...
Nadiya Ke Paar Fan's
26/02/2026
फागुन:-
फागुन का चांद, फागुन के फूल, फागुन की हवा, फागुन की धूल, फागुन की गंध, फागुन के रंग, फागुन का रूप, फागुन की धूप, फागुन के गीत, फागुन का संगीत, फागुन का रस, फागुन की अगन, फागुन का जल, फागुन का आकाश, फागुन की धरती, फागुन के बाग, फागुन के खेत, फागुन की रात, फागुन के दिन, फागुन की सुबह, फागुन की सांझ।
तुम फागुन हो
17/02/2026
Heartiest Congratulations & Best Wishes to Dear brother Ritesh Keshari,
May your journey together continue to be filled with love, happiness, joy, good health and countless moment of togetherness.
03/02/2026
Met with Shri Anurag Singh Thakur ji, Chairperson, Parliamentary Committee On Coal & Mines, Member Of Parliament from Hamirpur, H.P. at his residence.
01/02/2026
आन्ध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने कहा कि, UGC
एक्ट का विरोध जिस वर्ग ने किया, वह देश का सबसे सक्षम
और ज़िम्मेदार वर्ग है। इतना व्यापक विरोध होने के बावजूद
कहीं पर भी मारपीट, आगजनी, तोड़फोड़ या अराजकता की
कोई खबर नहीं आई। यह अपने आप में मिसाल है। विरोध
मुखर रहा, लेकिन मर्यादित। किसी को आंदोलन हाईजैक नहीं
करने दिया गया और असामाजिक तत्वों को हर जगह बाहर
किया गया। इसलिए हमारे पूर्वज ऐसे सभ्य समाज की मिसालें
देते हैं।
Pawan Kalyan
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