Ek_Musafir

Ek_Musafir

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कुछ ज्यादा नहीं
बस इतनी सी हमदर्दी दिखलाना.
मैं लिखते जाऊं तुम पढ़ते जाना. Shayari | Poetry | Kavita

बस इतनी सी इल्तजा है, अच्छा लगूं तो अपना लेना... बुरा लगूं तो ठुकरा देना...

10/05/2026

जब कवि मरता है
कविता जीती है।
🫀

27/04/2026

सूकूं किधर है
मिटना जिधर है
आशिकी क्या है
बस एक हवा है
फैली कहाँ है
नहीं पता है

24/03/2026

उछलते हार्मोन्स
और इश्क का नाम
हाय राम‍! 😁

20/03/2026

मैं समझता हूँ तिरे दिल की धड़कन
क्योंकि मेरे सीने में भी एक दिल है 🫀

19/03/2026

ज़मीनी व्यवस्था की उंगली पे
दिन-रात नाच रहा हूँ मैं
पर बेशर्मी तो देखो मेरी
आसमानी ज्ञान बांच रहा हूँ मैं

19/03/2026

वो नजर न पड़े तो बेहतर है
उसे देखकर घाव याद आता है
और दर्द इस तरह बढ़ जाता है
जैसे बढ़ जाता है दर्द
चोट लग जाने के बाद
बहते लहू को देखने पर...

19/03/2026

ये जो सीने में है 🫀
धड़कता है तेजी से
एक अजीब-सी चीज
जिसे बचपन में
माँ के दूर चले जाने पर पाता था
जिसे स्कूल में
अपने इक तरफा प्यार को
देखने पर महसूसता था
महसूसता हूँ आज भी
जब देखता हूँ उसे
और पूछता हूँ खुदसे
क्या है ये‍? 😣

05/03/2026

ऐ दिल
महसूस जरा धड़कन
सीने में ये बेचैनी
पुकार है खुदा की।

05/03/2026

किस बात पर खुश होना?
और किस बात पर रोना?
जो खोया, था पाया यहीं!
मेरा कुछ था ही नहीं।

04/03/2026

तुम्हारा अपराध ये है
कि तुम पैदा हुए हो
अब भुगतो।
बेचैनी झेलो!

02/03/2026

आशिकों के शहर में,
यूँही नहीं बदनाम हूँ मैं।
मासूका बेवफा है मेरी,
चुसा हुआ आम हूँ मैं।

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