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इस प्रेत युगल को अभी बहुत कुछ देखना है। इन्होंने अपने समय में ऐसे, ऐसे जघन्य कांड किए, और करने वालों को प्रश्रय दिया है, जिसका काल उसका पूरा मूल्य इनसे लेगा। कुछेक घटनाओं पर नज़र डालते हैं।
- बेजुबान जानवरों का चारा खाना।
- अपहरण उद्योग स्थापित कर बिहारियों का जीवन नर्क बनाना।
- रागिनी यादव के मित्र अभिषेक मिश्र की हत्या कर उसे दुर्घटना का रूप देना।
- राबड़ी के भाई साधु यादव द्वारा शिल्पी जैन का ब्रूटल रेप, उसकी और उसके मित्र की हत्या करना, राबड़ी का अपने भाई को बचाना।
- मीसा भारती के विवाह में पटना के शो रूम्स में लूट मचाना।
- चंदा बाबू के बेटों की निर्मम हत्या करने वाले शहाबुद्दीन का सरपरस्त बनना।
- चंपा विश्वास, उनकी भतीजियों, उनकी नौकरानियों का महीनों बलात्कार करने वाले के पक्ष में खड़े होना।
- रेलवे में नौकरी देने के बदले लोगों की जमीन हड़पना।
- राबड़ी द्वारा ऐश्वर्या यादव की पिटाई कर रात में घर से बाहर फेंकना।
ये कुछ ऐसे अमानवीय कृत्य हैं, जो हमने पढ़े हैं हमको याद हैं,आप लोग चाहे तो इसमें योगदान कर सकते हैं।
इन दोनों को हरेक रामद्रोही धर्मद्रोही देश द्रोही को सड़ सड़ कर, तिल तिल मरना चाहिए, यदि ऐसे लोग आसानी से मुक्ति पा जाते हैं तो हम ईश्वरीय न्याय को अधूरा ही समझते हैं...
आर्यन जी की पोस्ट से प्रेरित पोस्ट।
सोनिया जी की नाराजगी तो बस 'ट्रेलर' है—मेन फिल्म तो चाणक्य नीति की है! चाणक्य ने कहा था: "जब जड़ गहरी हो, तो पेड़ मत काटो—तेजाब डालो, धीरे-धीरे सूखने दो।" वाजपेयी जी ने कुल्हाड़ी नहीं चलाई, बल्कि 'महानता' का 'खाद-पानी' डाला—सोनिया का पेड़ और हरा-भरा हो गया। लेकिन चाय वाला? वो चाणक्य का 'असली शागिर्द' निकला! कुल्हाड़ी नहीं, तेजाब की बोतल लिए घूम रहा है। और तेजाब? वो है—गोपनीयता, प्रोटोकॉल, कानून की बराबरी, और सबसे बड़ा—धर्मांतरण पर ब्रेक!
चाणक्य नीति: "शत्रु की शक्ति का स्रोत पहले सूखाओ, फिर वार करो।"सोनिया का 'आभा मंडल' विदेशी मेहमानों से मिलता था। वाजपेयी जी 'राजधर्म' के नाम पर पानी देते रहे। चाय वाले ने पानी बंद कर दिया। विदेश मंत्रालय को सख्त ऑर्डर: "सोनिया से मिलना? नहीं चाहिए!" अब कोई मेहमान 10 जनपथ की 'चाय' तक नहीं पीता। जड़ का पहला हिस्सा सूखा—अंतरराष्ट्रीय वैधता खत्म!
"शत्रु के वारिस को कमजोर करो।"पहले राहुल बोस्टन में पकड़े जाते—to वाजपेयी जी बुश को फोन: "छोड़ दो, हमारा प्रिंस है!" अब? चाय वाला फोन उठाता तक नहीं। "कानून सबके लिए बराबर!" राहुल अब 'आम यात्री' की तरह चेकिंग में खड़े होते हैं। जड़ का दूसरा हिस्सा सूखा—वारिस की 'रॉयल इम्युनिटी' गई!
कतार में महारानी चाणक्य "शत्रु को उसकी औकात दिखाओ—धीरे-धीरे।"51 साल बाद सोनिया धूप में कतार में! पासपोर्ट ऑफिस, राशन कार्ड, बैंक—कहीं VIP नहीं। चाणक्य की तरह चाय वाला ने 'समानता का तेजाब' डाला। जड़ का तीसरा हिस्सा सूखा—'महारानी' से 'आम आदमी' की यात्रा पूरी!
नंबर-4 NSCN संधि—चुपचाप, गोपनीय चाणक्य: "शत्रु को खबर तक न लगे, तब तक वार करो।"NSCN से संधि—बिना शोर, बिना लीक! सोनिया को कानो-कान खबर नहीं। पहले तो 'मनमोहन सरकार से शुरू हुआ' का बहाना बना लेतीं। अब? मुंह बंद। जड़ का चौथा हिस्सा सूखा—गोपनीयता का 'मास्टरस्ट्रोक'!
क्रिश्चियन इवैंजेलिस्ट पर ब्रेकचाणक्य: "शत्रु की विचारधारा की जड़ पर प्रहार करो।"तीन दशक से सोनिया के 'आशीर्वाद' से चर्च को उत्तर-पूर्व में 'फ्री रन' था। 'किंगडम ऑफ क्राइस्ट' का सपना। चाय वाले ने धर्मांतरण कानून, FCRA सख्ती, और NSCN संधि से वेटिकन की जड़ पर तेजाब डाला। पोप साहब रो रहे हैं, सोनिया चिल्ला रही हैं: "ये मेरी धार्मिक भावनाओं का अपमान है!" जड़ का पांचवां हिस्सा सूखा—ईसाई मिशनरी का 'अनाधिकृत साम्राज्य' ढहा!
लेकिन पेड़ काटा क्यों नहीं?चाणक्य: "भारत में भावनाएं जल्दी आहत होती हैं।"पेड़ काटोगे तो 'प्रकृति प्रेमी' लिपट जाएंगे—कहेंगे: "अरे, बेचारी विदेशी बहू! गरीब विधवा!" भले पेड़ ने 10 साल लूटा हो, छांव 'हराम की' हो। चाय वाला चालाक है—तेजाब डाल रहा है, धीरे-धीरे। पत्ते गिर रहे हैं, जड़ सुख रही है—और 'प्रकृति प्रेमी' सो रहे हैं।
अंतिम चाय वाला खुद! चाणक्य का अंतिम सूत्र: "शत्रु की जड़ तब तक न सूखे, जब तक तुम स्वयं मजबूत न बनो।"चाय वाला रोज 'चाय' पी रहा है—लेकिन वो चाय नहीं, सोनिया की जड़ का तेजाब है!सोनिया जी, नाराज मत होइए—ये तो चाणक्य का खेल है।और खेल अभी बाकी है,
जय श्री राम 🚩
प्रायः_मैं दिन में 4-6 चाय पीता हूँ लेकिन न जाने क्यों, कल शाम की चाय के बाद सोचने लगा और फिर ख्याल आया कि....🤔
1. कांग्रेस सरकार जाने के बाद मुंबई में फिर कोई हाजी़ मस्तान, करीम लाला, दाऊद इब्राहिम पैदा क्यों नहीं हुआ ?
2. बसपा सरकार जाने के बाद मायावती के जन्मदिन पर उसे हीरे, ताज, नोटों से क्यों नहीं तौला गया ?
3. यूपी में योगी जी के सीएम बनने के बाद अब अतीक अहमद, आजम खान, मुख्तार अंसारी जैसा बाहुबली क्यों नहीं पैदा हुआ है ?
4. मोदी के आने के बाद , पी.चिदंबरम अपने बंगले के गमलों में 6 करोड़ की गोभी क्यों नहीं उगा पा रहा है ??
5. आजकल सुप्रिया सुले अपनी दस एकड़ जमीन में 670 करोड़ की फसल क्यों नहीं उगा पाती हैं ?
6. हरियाणा में कांग्रेस की सरकार चले जाने के बाद रोबर्ट वाड्रा ने वहाँ कोई जमीन क्यों नहीं खरीदी ?
7. यूपी से सरकार चले जाने के बाद अखिलेश यादव ने सैफई महोत्सव क्यों नहीं मनाया ?
8. यस बैंक के मालिक राणा कपूर को ढाई करोड़ की पेंटिंग बेचने के बाद, प्रियंका गांधी ने फिर कोई पेंटिंग क्यों नहीं बेची ?
9. ए.के.एंटनी ने अपनी पत्नी के हाथ की पेंटिंग सरकार को 28 करोड़ में बेचने के बाद अपनी पत्नी से फिर कोई पेंटिंग क्यों नहीं बनवाई ?
10. यूपीए के दस वर्षीय (2004-14) शासनकाल में सोनिया अपनी "अज्ञात" बीमारी के इलाज के लिये प्रत्येक छ:माह के अन्तराल पर "अज्ञात" देश को नियमित रुप से जाती थी. वह रहती दिल्ली में है, पर उसकी उडा़न हमेशा केरल के एयरपोर्ट से होती थी और उसके लगेज में 4-5 बडे़-बडे़ ट्रंक हमेशा हुआ करते थे. किसी प्रकार की सिक्योरिटी-चेक का सवाल ही नहीं था, क्योंकि वह उस समय भारत की "सुपर पीएम" थी. 2014 में सत्ता परिवत्तॆन के बाद आश्चयॆजनक रुप से सोनिया की "अज्ञात" बीमारी उड़न छू कैसे हो गई ?
कल फिर कडक चाय पिऊंगा और फिर सोंचूँगा!
आप भी एक बार इस बारे में जरूर सोचना!!
प्रश्न वाकई गंभीर हैं
#कुछ_दिन_पहले_की_सच्ची_घटना
पड़ ही लेना कही ये हमारे परिवार के साथ ना हो जॉए बाकी आपकी मर्जी
िल_दहला_देने_वाली_हकीकत
एक घर के मोबाइल नम्बर पर “रॉंग नम्बर” से कॉल आई.. घर की एक औरत ने कॉल रिसीव की तो सामने से किसी अनजान शख्स की आवाज़ सुनकर उसने कहा ‘सॉरी रॉंग नम्बर’ और कॉल डिस्कनेक्ट कर दी.. उधर कॉल करने वाले ने जब आवाज़ सुनी तो वो समझ गया कि ये नम्बर किसी लड़की का है, अब तो कॉल करने वाला लगातार रिडाइल करता रहता है पर वो औरत कॉल रिसीव न करती। फिर मैसेज का सिलसिला शुरू हो गया जानू बात करो न!! मोबाइल क्यूँ रिसीव नहीं करती..?
एक बार बात कर लो यार! उस औरत की सास बहुत मक्कार और झगड़ालू थी.. इस वाक़ये के अगले दिन जब मोबाइल की रिंग टोन बजी तो सास ने रिसीव कर लिया.. सामने से उस लड़के की आवाज़ सुनकर वो शॉक्ड रह गई, लड़का बार बार कहता रहा कि जानू! मुझसे बात क्यूँ नहीं कर रही, मेरी बात तो सुनो प्लीज़, तुम्हारी आवाज़ ने मुझे पागल कर दिया है, वगैरह वगैरह… सास ने ख़ामोशी से सुनकर मोबाइल बंद कर दिया जब रात को उसका बेटा घर आया तो उसे अकेले में बुलाकर बहू पर बदचलनी और अंजान लड़के से फोन पर बात करने का इलज़ाम लगाया..
पति ने तुरन्त बीवी को बुलाकर बुरी तरह मारना शुरू कर दिया, जब वो उसे बुरी तरह पीट चुका तो माँ ने मोबाइल उसके हाथ में दिया और कहा कि इसी में नम्बर है तुम्हारी बीवी के यार का.. पति ने कॉल डिटेल्स चेक की फिर एक एक करके सारे अनरीड मैसेज पढ़े तो वो गुस्से में बौखला गया.. उसने तुरन्त बीवी को रस्सी से बाँधा और फिर से बेतहाशा पीटने लगा और उधर माँ ने लड़की के भाई को फोन किया और कहा कि हमने तुम्हारी बहन को अपने यार से मोबाइल पर बात करते और मैसेज करते हुवे पकड़ लिया है.. जिसने तुम्हारी इज़्ज़त की धज्जियां बिखेर दीं…
खबर सुनकर तुरन्त उस लड़की का भाई और उसकी माँ भी वहां पहुँच गये.. पति और सास ने इल्जाम लगाये और ताने मारे तो लड़की के भाई ने भी उसे बालों से पकड़कर खूब पीटा.. लड़की कसमें खाती रही, झूठे इलज़ाम के लिये चीखती चिल्लाती रही, अपनी सफाई देती रही जाहिल और शैतान सास और पति के आगे बेबस रही… लड़की की माँ ने अपनी बेटी से कहा कि भारतीय होकर गीता पर हाथ रखकर कसम खाओ, तो उसने नहाकर फ़ौरन सबके सामने गीता पर हाथ रखकर कसम भी खाई, मगर शैतान सास ने इसे भी नकार दिया और कहा कि जो अपने पति से गद्दारी कर सकती है तो उसके लिये गीता की कसम भी कोई मुश्किल काम नहीं है..
इसके साथ पति ने वो सारे मैसेजेस उसके भाई को दिखाये जो लड़के ने लड़की को करने के लिये किये थे.. सास ने मक्कार और चालाक कहकर आग पर घी डाल दिया.. लड़की के भाई को गुस्सा आई और उसका पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा, उसने तुरन्त पिस्तौल निकाली और लड़की के सर में चार गोलियां दाग दी और इस तरह एक “रॉंग नंबर” ने एक खानदान उजाड़ दिया.. 3 बच्चों को अनाथ कर दिया.. जब लड़की के दूसरे भाई को खबर हुई तो उसने अपने भाई भाभी और बहन के शौहर और सास के साथ उस अनजान नम्बर पर FIR दर्ज कर दी..
पुलिस साइबर ने जब मोबाइल की जांच की तो मालूम हुवा कि लड़की ने सिर्फ एक बार उस रॉंग नम्बर को रिसीव किया था, इसके बाद उस नम्बर से वो कॉल और मैसेजेस के जरिये लड़की को फंसाने के चक्कर में लगा रहा.. सारी बातें साफ़ होने के बाद जब दूसरे भाई को खबर हुई जिसने बहन को गोली मारी थी तो उसने उसी वक़्त जेल में ख़ुदकुशी कर ली और रॉंग नम्बर मिलाने वाले लड़के को पुलिस ने पकड़कर हवालात में डाल दिया और इस तरह एक “रॉंग नम्बर” ने सिर्फ तीन दिनों में एक भारतीय दामन औरत को उसके 3 बच्चों से पूरी ज़िन्दगी के लिये दूर कर दिया और अगले 13 दिनों के अन्दर 3 बच्चे अनाथ और 2 खानदान तबाह और बर्बाद हो गये
ज़रा सोचिये और बताइये कि कसूरवार कौन..??
1- रॉंग कॉल वाला..
2- मक्कार सास..
3- शक्की और जाहिल पति..
4- गैरतमंद भाई..
5- मोबाइल ..
आप सब लोग गौर से सोच कर जवाब जरूर दीजियेगा और वो पति और भाई लोग से सर्वनीय निवेदन है की किसी भी औरत पर इल्जाम लगाने से पहले सच्चाई जान ले तब फैसला करे क्योंकि पत्निया और बेटिया ऐसे नही होती। और वो लोग जो रांग नंबर जान कर भी किसी महिला के पास फोन बार बार करते है, उन्हें खुद समझना चाहिए की हमारे घर मे भी एक माँ बहन बेटी है। सब का सम्मान करे।
उसके मैसेज अब “Seen” पर रुकने लगे थे,
और मेरे जवाब “Typing…” पर।
रातें पहले हमारी होती थीं,
अब बस मेरी रह गई थीं।
एक दिन मैंने हिम्मत करके फिर पूछा-
मैं:
“तुम पहले जैसी क्यों नहीं रहीं?”
वो (थोड़ा झुंझलाकर):
“तुम हर बात सोच क्यों लेते हो?
सब ठीक है, बस overthink मत करो।”
उसके लिए वो एक साधारण-सी लाइन थी,
पर मेरे लिए वो एक बंद दरवाज़ा।
उसके बाद मैं चुप रहने लगा,
सोचा - शायद चुप्पी से चीज़ें ठीक हो जाएँगी।
पर चुप्पी ने ठीक नहीं किया,
उसने दूरी पक्की कर दी।
दिन में मैं हँसता,
दोस्तों में मज़ाक करता,
स्टेटस भी डालता…
पर सच यह था:
रात होते ही मैं वही बन जाता
जो मैं उससे छुपाता था — टूटा हुआ।
कॉल लॉग में उसका नाम देखकर
उँगली ठहर जाती थी,
पर दिमाग कहता -
“जिसे परवाह होती है,
वो समय पर बात करता है…
बहाने नहीं।”
मैं हर दिन थोड़ा-थोड़ा टूटता गया,
पर हर सुबह खुद को समझाता—
“सब ठीक है।”
“बस फेज़ है।”
“वो लौट आएगी।”
जबकि दिल जानता था -
वो जा चुकी है, बस बोली नहीं है।
मैं चाहता हूँ....
कई महीनो बाद,तुम एक रोज़ मुझे कॉल करो,,
और वो कॉल रिसीव ही न की जाये...
फिर तुम एक और कोशिश करो,,कॉल करने की,,और फिर रिसीव न हो...
फिर एक अरसे बाद,तुम्हे थोड़ी फ़िक्र हो,,
तुम मैसेज करो मुझे,,वो मैसेज...जिसका कोई भी जवाब अब कभी नहीं आएगा...
फिर तुम सच में थोडे और परेशान हो जाओ...
तुम सोचो मेरे बारे में,मेरी हर बात,,मेरी आवाज़,मेरा चेहरा....
तुम्हारे लिए मेरी फ़िक्र..
मेरे साथ बिताया हर एक लम्हा..
फिर तुम मुझे एक और कॉल करो,,
और फिर कोई रेस्पांस न मिले...
तुम फिर मुझे मैसेज करो..
जिसका कोई जवाब न मिले..
तुम अचानक बहुत बेचैन हो जाओ..
तुम्हें सब कुछ याद आता रहे...
तुम लगातार मेरे बारे में सोचो...
तुम्हे सब कुछ याद आये.
सब कुछ...
और एक दिन जब तुम्हें नींद न आये.. बस मेरी याद आये...
तुम मुझे सोशल मीडिया पर ढूंढो..
फिर मैसेज करो..
फिर कॉल करो.
फिर कोई जवाब न मिले..
तब तुम फोन गैलरी खोलकर..
मेरी तस्वीरें देखो...
तुम्हे गुस्सा आये, चिढ हो,तुम्हे रोना आये..
तुम्हें एहसास हो कि मैं किस हाल में रहा हूँ..
परेशान होना क्या होता है..
टूट जाना क्या होता है...
फिर कुछ अच्छा ही नहीं लगेगा..
तब तुम हर जगह मुझे ही ढूंढो..
बस एक आखिरी बार मुझे देखना चाहो,
मुझे सुनना चाहो..
मेरे सीने से लगना चाहो...
मुझसे लिपटकर रोना चाहो..
तुम पागल हो जाओ उस प्यार के लिए,
जो सिर्फ और सिर्फ मुझसे मिल सकता था..
और उस हाल में,
तुम्हे सुनने वाली
तुम्हारे माथे को चूमने वाला...
तुम्हे सीने से लगाने वाला...
"मैं"...
कहीं दूर...किसी शहर में...
अपने कमरे में...
आधी रात को,,
वो हर एक मैसेज पढ़कर,,
तुम्हे याद करूँ...फिर वो मैसेज डिलीट कर दूँ..
उसका कभी कोई जवाब नहीं आएगा..
तुम महसूस करो दिल का टूटना,
अकेलेपन में रोना..किसी से कुछ न कह पाने की बेबसी..
सारे काम ज़बरदस्ती लगने लगे,
बस हर वक़्त किसी नशे की ज़रूरत लगे,
नींद की गोलियां भी किसी काम की न रह जाएं..
हर वक़्त..
सोते जागते,मुझे याद करो..
बस मैं ही हर वक़्त तुम्हारे दिमाग में रहूँ...
उस वक़्त...जब ये सब हो..
शायद तुम्हे समझ आये..
कि तुम कितने गलत थे...तुमने क्या किया..
और तुम्हे क्या मिला था..
और तुमने क्या खो दिया...
तब तुम्हें समझ आएगा...मैं किस हाल में था...
मैं ये सब चाहता हूँ..
हाँ..सच में..
पर ये सच है..आज भी तुम्हारी हर कॉल और मैसेज को बड़ी मुश्किल से इग्नोर कर पाता हूँ..
आज भी हर whatsapp & facebook dp सेव कर लेता हूँ..
आज भी तुम्हे ऑनलाइन देखने के लिए फोन देखता हूँ.. पर कभी कोई मैसेज नहीं करता हूँ... न ही करूँगा...
क्योंकि मैं चाहता हूँ.. तुम एक बार महसूस कर सको..
वो सब जो मैं करता हूँ...
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म दोपहर के 12:00 बजे है। मुंबई जाने वाली गोदावरी यमुना एक्सप्रेस चलने के लिए तैयार खड़ी है। तभी 28 साल का एक नौजवान 3 टायर एसी डिब्बे में चढ़ता है। मैडम यह 9 नंबर विंडो वाली सीट मेरी है प्लीज आप थोड़ा इधर हट जाए। देखिए यह 10 नंबर मिडिल बर्थ मेरी है। यदि आप बुरा ना माने तो मैं थोड़ी देर के लिए विंडो वाली सीट पर बैठ जाऊं। ठीक है आप बैठ जाएं पर जब मैं कहूं तब आप सीट चेंज कर लेना। चौबीस 25 साल की खूबसूरत सी लड़की जिसने जींस और टी-शर्ट पहनी हुई है, ने हां में सिर हिलाया और बाहर विंडो की तरफ देखने लगी और ट्रेन चल दी।
ट्रेन अपनी स्पीड पकड़ चुकी थी। दोनों पास पास चुपचाप बैठे हैं। लगभग 20 घंटे का सफर है, मतलब की सफर लंबा है। थोड़ी देर बाद लड़की ने अपने बैग में से चिप्स का पैकेट निकाला। और चिप्स खाने लगी। फिर उसने चिप्स का पैकेट बराबर बैठे हुए लड़के की तरफ कर दिया। नहीं नहीं थैंक्स।। अरे ले लीजिए, अभी आपके सामने ही तो खोला है। इसमें कुछ भी नशे वाला नहीं मिलाया हुआ। क्या आपको मैं ऐसी लड़की लगती हूं कि आप को बेहोश करके आप को लूट कर अगले स्टेशन पर उतर जाऊंगी? यह कहकर लड़की जोर से हंसने लगी। लड़के ने भी एक चिप्स उठाया और हंसने लगा। अरे मेरा यह मतलब नहीं था। दोनों की नेचर हंसमुख और बातूनी थी। बस स्टार्ट अप चाहिए था और वह चिप्स के पैकेट ने करवा दिया। फिर दोनों में खूब बातें होने लगी। बातों बातों में दोनों को एक दूसरे का नाम भी पता चल गया, मोहनी और मनीष।। फिर दोनों खाना पीना भी मिल बांट कर खाने लगे।।।
थोड़ी देर बाद मोहिनी ने अपना लैपटॉप निकाला। अरे मनीष टाइमपास के लिए पिक्चर देखोगे? अरे आप कह रही हैं तो जरूर देखें। पर कोई कॉमेडी पिक्चर दिखाना। ठीक है मेरे पास संजीव कुमार की पुरानी फिल्म अंगूर है। हंस-हंसकर पेट फूल जाएगा। मोहनी ने अपना लैपटॉप ऑन करा, मोहनी ने लैपटॉप के कवर पेज पर एक गाना लगा रखा था। मनीष उसे पढ़ने लगा।
इक प्यार का नगमा है
मौजों की रवानी है
जिंदगी और कुछ भी नहीं
मेरी मेरी कहानी हैं
जीवन को खोना है
मौत को पाना है
आना, बहुत जल्दी जाना है
दो पल के जीवन से
इक उम्र चुरानी है
जिंदगी और कुछ भी नहीं
मेरी मेरी कहानी है
मौत को आना है
मुझे लेकर जाना है
जीवन है मेरा कुछ पल का
आ कर चले जाना है
परछाइयां रह जाती है
रह जाती निशानी है
जिंदगी और कुछ भी नहीं
मेरी मेरी कहानी हैं
अरे मोहनी यह क्या है? तुमने तो पूरे गाने के बोल ही बदल दिए। इतना खूबसूरत गाना तुमने दुख भरा गाना बना दिया। अरे मनीष कुछ नहीं, मुझे गाने तोड़ने फोड़ने की आदत है। इसको भी तोड़फोड़ कर लिख दिया और अपने कवर पेज पर लगा लिया। लो अंगूर फिल्म स्टार्ट हो गई। मजे ले ले कर देखो। खूब मजा आएगा। मोहनी हेडफोन का एक स्पीकर अपने कान में और एक स्पीकर मनीष के कान में लगा देती है। फिल्म अपनी गति से और गाड़ी अपनी गति से चल रही है।
डिनर डिनर किसी को डिनर बुक कराना है, बता दीजिए। मेरा एक डिनर वेज बुक कर लीजिए। डिनर की आवाज सुनकर मोहनी की आंख खुल जाती है। अरे मैं आपके कंधे पर कब सर रखकर सो गई पता ही नहीं चला और आपने मुझे उठाया नहीं। आपको खूब दिक्कत हुई होगी। कैसी दिक्कत मैंने अंगूर पिक्चर देखी नहीं हुई है। मुझे तो पिक्चर देखने में मजा आ रहा था। ऐ डिनर वाले भैया, इनका डिनर कैंसिल कर दो। क्या कर रही हो मोहनी रात भर मुझे भूखा रखोगी। अरे नहीं मेरे पास खूब खाना है, मैं पैक करके लाई हूं।
मोहनी दिल्ली में क्या करती हो और आपके घर में कौन-कौन हैं? एक कंपनी में एचआर मैनेजर हूं। घर पर मम्मी पापा है।। पापा का चावड़ी बाजार में शादी कार्ड का व्यापार है। अकेली औलाद हूं मां बाप की। खूब मस्ती में रखते हैं मुझे मम्मी पापा। तुम भी तो अपना कुछ बताओ मनीष।। मैं तो बिल्कुल ही अकेला रहता हूं दिल्ली में। क्यों अकेले क्यों? केदारनाथ हादसे में मेरा बड़ा भाई और मम्मी पापा, तीनों बाबा के पास चले गए, तब से अकेला ही हूं। कंपनी की मीटिंग में मुंबई जा रहा हूं। इतनी देर में मोहनी खाने का सामान खोल लेती है। दोनों आराम से खाना खाते हैं। 10 बज चुके हैं सोने का टाइम है। मोहनी तुम अपनी बर्थ सोऊगी या नीचे वाली? मनीष यदि तुम्हें दिक्कत ना हो तो मैं नीचे सो जाऊं। दोनों एक दूसरे को गुड नाइट कहते हैं और आराम से सो जाते हैं।
सुबह के 6 बजे है और चाय चाय की आवाजें शुरू हो गई है। मनीष दो चाय ले लेता है। उठो मोहनी सुबह हो गई है, चाय पी लो। दोनों चाय पीते हैं और बातों का सिलसिला शुरू हो जाता है। ठीक 10:00 बजे मुंबई आ जाता है।
दोनों प्लेटफार्म पर उतरते हैं। मोहनी मुझे तो सन एंड सैंड होटल में जाना है। तुम्हें कहां जाना है? मोहनी के मुंह से निकल जाता है टाटा कैंसर हॉस्पिटल।। टाटा कैंसर हॉस्पिटल, क्या कोई रिश्तेदार एडमिट है उसे देखने जाना है? मोहनी चुप हो जाती है। मनीष ने पहली बार उसे उदास देखा है। मनीष मोहनी को पकड़कर पास वाली बेंच पर बिठा देता है। मोहनी चुप क्यों हो बताओ ना? मोहनी का चेहरा जड़ सा हो जाता है। मोहनी तुम्हें रास्ते में बिताए हुए समय की कसम सच सच बताओ। मनीष मुझे कैंसर है, मैं अपने को दिखाने आई हूं। अब मनीष की हवाइयां उड़ रही है। और उसे लैपटॉप पर लिखे हुए गाने का मतलब भी समझ आने लगा है, मेरी मेरी कहानी है।
मोहनी तुम अकेले दिल्ली से मुंबई दिखाने आई हो। मोहनी अब नॉर्मल हो चुकी थी। हां, इसमें क्या दिक्कत है? दिल्ली से इलाज चल ही रहा है। पर किसी ने बताया टाटा कैंसर वाले सही राय देते हैं। मौत का समय भी बता देते हैं। इसलिए समय पूछने ही आई हूं। पापा आने की जिद कर रहे थे। मैंने उन्हें समझाया, 2:00 का मेरा अपॉइंटमेंट है। और रात को 7:00 बजे की फ्लाइट! 9:00 बजे मैं दिल्ली पहुंच जाऊंगी। आप परेशान ना हो।
मनीष रास्ते में मोहनी के बारे में कुछ सपने देख चुका था। अब मनीष सोच रहा था, हकीकत पता चलने के बाद, क्या मैं अपने सपनों से भाग जाऊं? मनीष के दिमाग में कभी हां कभी ना की आवाज आ रही थी। पर मनीष के दिल ने कहा, अपने और मोहनी के सपने पूरे करो। हिम्मत करके मनीष ने मोहनी से कहा, मैडम गाने के दो पैरे आपने लिखे हैं, तीसरा पैरा मैं आपको सुनाना चाहता हूं और आप सुने....
तू धार है नदिया की
मैं तेरा किनारा हूं
तू मेरा सहारा है
मैं तेरा सहारा हूं
आंखों में समंदर है
आशाओं का पानी है
जिंदगी और कुछ भी नहीं
तेरी मेरी कहानी है
इक प्यार का नगमा है
मनीष इसका क्या मतलब? मोहनी इसका मतलब मैं तुम्हें दिल्ली पहुंच कर बताऊंगा। तुम डॉक्टर को दिखाकर दिल्ली पहुंचो। मैं 3 दिन बाद आता हूं तब तक फोन पर बात होती रहेगी। अपना नंबर दो मैं तुम्हें मिस कॉल मारता हूं।
मनीष अगले दिन मोहनी को फोन करके कहता है। दिल्ली आकर मैं तुम्हारे घर पर रहूंगा घर जमाई बनकर। अरे मनीष मैं तो केवल 6 महीने की मेहमान हूं। कोई बात नहीं पगली। मां-बाप तो दोबारा मिलेंगे मुझे। फिर दूसरी शादी कर लूंगा। तुम्हारे मम्मी पापा के लिए बहू ला दूंगा। दूसरी मोहनी ला दूंगा। दोनों जोर जोर से हंसने लगे। मोहनी ने पहली बार ठीक से गाना गाया।
इक प्यार का नगमा है
मौजों की रवानी है
जिंदगी और कुछ भी नहीं
तेरी मेरी कहानी.......
जब “miss you”
धीरे से “take care” हो जाए,
और वो लंबे-लंबे कॉल्स, मैसेज
सिमटकर unseen या फिर
seen without reply में ढल जाए
तो समझ लेना,
रिश्ता वेंटिलेटर पर है
और किसी भी समय हिचकिचाते हुए
सकुचाकर सिमटते आप खुद ही 'आई एम सारी ' कहकर
साईड हटकर उसकी औपचारिक विदाई कर देते हैं।
पहले
हर छोटी बात पर
“तुम बिन सब अधूरा है” कहने वाले
अब हर बात पर
“busy हूँ”, कहने लगते हैं
जैसे प्यार नहीं
कोई meeting schedule तय करना हो।
पहले सुबह के सूरज से पहले
'गुड मार्निंग ' मैसेज देखने वाले की
आज जब सुबह होती है
तो आँखे तो फोन पर होती हैं
लेकिन उंगलियाँ उस चैट पर
क्लिक नहीं करती।
मानो जवाब देने से बेहतर हो कि
धीरे-धीरे मैसेज भेजने वाले की
मैसेजिंग की आदत छुड़वाना।
ये सब
केवल अनदेखे मैसेज नहीं हैं,
ये वो मौन संकेत हैं —
जो loudly whisper करते हैं
कि अब दिल में शायद वो
जगह नहीं रही।
और जब उन्हें किसी दिन
आप चुपचाप goodbye कह देंगें
तो वो पूछेंगें
“अरे ऐसा क्या हो गया…?”
पर सच तो यही है —
जब कोई रिश्ता मरने लगता है
तो सबसे पहले उसकी आदतें बदलती हैं!
मेरा नाम सुशीला है. मेरी एक 14 साल कीं लड़की है जया.मैंने अकेले ही उसे पाल कर बड़ा किया है. जया औऱ मेरी एक छोटी सी दुनियाँ है. लेकिन हमारी ज़िन्दगी में ऐसी कई बाते है जो मैंने जया से छिपायी है. जया अपना स्कूल जाती है. औऱ में अपना छोटा सा पार्लर चलाती हूं. ज़िन्दगी हम दोनों कीं आराम से कट रही है.
हमें एक दूसरे के अलावा कभी किसी कीं जरुरत नहीं पड़ी. लेकिन उस दिन के बाद शायद हमारी ज़िन्दगी में फिर कोई आने वाला था. में पार्लर का समान लाने के लिये शहर गई थी जया को साथ नहीं लें गई थी वो घर पर ही थी. ज़िन्दगी में ऐसा होता है कभी कभी अचानक ही हमें कुछ सरप्राइज दे देती है.मेरे सामने अजय था. एक दम अचानक ही आकर वो मेरा सामने आ गया. उसके लिये भी शायद ऐसा ही था.
हम दोनों एक दूसरे को देखकर एकदम चूप हो गये. इतने सालो के बाद मिलें थे लेकिन बात करने को कुछ नहीं था. अजय वो था जिससे में शादी करना चाहती थी. हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते थे लेकिन हमारी किस्मत कीं वजह से हम दोनों साथ नहीं रह पाये. अजय इसी शहर में आ गया था. अजय नें कहां कीं उसने बहुत मुझे ढूंढा लेकिन में अपना नंबर बार बार बदल देती थी. इस कारण उसकी मुझसे बात या मिलना नहीं हो पाया था.
अजय आज भी मुझसे प्यार करता है. उसकी आँखों में मुझे दिखाई दे रहा था. वो बोला कीं वो आज भी मुझसे शादी करना चाहता है. मेरी बच्ची को भी अपना लेना चाहता है.लेकिन मैंने उसे कुछ भी जवाब नहीं दिया. में जानें लगी तो वो उसने मुझसे बहुत बोला कीं में अपना नंबर उसे दे दू. औऱ में इस बात के लिये उसे मना नहीं कर पायी.मेरे जीवन में इस तरह वापस आयेगा इस बात का मुझे पता नहीं था.
बस फिर हम लोगों का मिलना शुरू हो गया. इस तरह से मिलते औऱ बाते करते वो मेरे घर भी आने लगा. मैंने सोचा था कीं उसे घर नहीं लाउ. क्यों कीं घर में जया है. में नहीं चाहती थी कीं जया उसे देखें. उसने कई बार मुझसे कहां कीं वो हमारी ज़िन्दगी का हिस्सा बनना चाहता है. लेकिन जया के लिये हर बार में उसे मना करती रही.
फिर एक दिन वो हुआ जिसका मुझे डर था. अजय औऱ में हमारे घर पर थे में भूल गई थी कीं जया उस दिन हाफ टाइम में ही घर आने वाली है. अजय औऱ में अपनी पुरानी बातो में खोये थे में उसके कंधे पर सर रखी हुई थी. उसने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था. हमें इस तरह से कमरे में जया नें देख लिया.
वो मम्मी कहती अंदर आयी थी औऱ एक दम से चूप हो गई. उसका चेहरा ही बदल गया. अजय वहाँ से चला गया. मुझे पता था कीं अब जया क्या सोच रही है. हमेशा खुश औऱ मस्ती करने वाली मेरी बेटी आज चूप थी. मेरी हिम्मत भी नहीं हो रही थी कीं उसको जाकर समझाऊ. उसे वो सब बताऊ जो आजतक मैंने उसे नहीं बताया है.
मैंने शाम तक का इंतजार किया. जया बहुत ही अच्छी बच्ची है. उसने खुद आकर मुझसे बात कीं उसने पूछा यह कौन थे. अगर आप मुझसे कुछ बात करना चाहती है तो कर सकती है. जया नें फिर मुझसे पूछा आपने जो आजतक कहां वो मैंने माना है. मुझे लगा कीं आप हमेशा मुझे सच बताती है औऱ मुझसे कुछ छिपाती नहीं है.
में चाहती हूं कीं आप मुझे इस बारे में भी बताये आप अपना फैसला लें सकती है. आप दूसरी शादी करना चाहती है तो कर सकती है. हमारी यह बात चल ही रही थी कीं अजय फिर अचानक ही वहाँ आ गया. उसे देखकर इस बार मैंने कहां कीं तुम फिर क्यों आ गये. अजय नें कहां कीं में नहीं चाहता कीं मेरी गलती कीं वजह से तुम्हारी बच्ची तुम्हे गलत समझें.
इसलिये आज मुझे मत रोको आज एक दम सही समय है कीं जया सबकुछ जान लें. मैंने मना किया कहां कीं नहीं. लेकिन जया के कानो तक सच यह शब्द जा चूका था. मुझे पता था कीं अब वो सच सुनें बिना नहीं रह सकेगी. जया नें कहां बताओ आप क्या बोलना चाहते है. औऱ फिर अजय नें जया को सच बता ही दिया. जया मेरी बेटी नहीं है मेरे भाई कीं बेटी है.
एक दुर्घटना में मेरे भाई औऱ भाभी चल बसें तब जया सिर्फ 9 महीने कीं थी.हमारे माँ बाप पहले ही चल बसें थे औऱ वो दोनों भी. मेरी सारी जमीन बेच कर उसे वहाँ से लेकर में यहाँ दूसरे शहर आ गई. अजय नें कहां यह तुम्हारी बुआ है औऱ हम दोनों कीं शादी होने वाली थी सिर्फ तुम्हारे लिये, कीं तुम्हारा प्यार बाटने कोई और नहीं आ जाये.
इसने मुझसे शादी नहीं कीं मैंने बहुत समझाया लेकिन इसे तुम्हारे अलावा औऱ कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था. बहुत सालो बाद मिलें तो हम एक दूसरे से बात करें बिना नहीं रह पाये. में इसे आज भी कह रहा हूं लेकिन अभी भी यह मना करती है.
जया सुनकर मेरी तरफ देखती है औऱ पूछती है यह क्या बोल रहें है. कहो कीं यह झूठ बोल रहें है. मेरी आँखों से आँसू निकलने लगे. मैंने कहां कीं बेटी भले ही तू मेरी जान है लेकिन तुने मेरी कोख से जन्म नहीं लिया. मै चाहती थी कीं तुझे यह बात बता दू. लेकिन इस तरह से आज बताना पड़ेगा मैंने सोचा नहीं था.
जया यह सुनकर मेरी तरफ दौड़ कर आयी. मुझसे लिपट गई. रोते हुऐ बोलने लगी.क्या बोलू बुआ, माँ या भगवान. मैंने कहां तू मेरी बेटी है औऱ में तेरी माँ बस यही सच है औऱ यही रहेगा. औऱ अब शादी कीं होंगी तो तेरी वो भी बड़ी धूमधाम से, जब तू चाहेगी।
मेरे फैसले को अजय ने भी माना। आखिर में अकेली नहीं थी जो बिना शादी उम्र निकाल रही थी उसने भी ऐसा ही किया था। जया ने फिर कई बार कहां की आप लोग शादी कर लों। लेकिन मैंने कहां अब तुने हमें मान लिया और जान लिया बस हमारी तपस्या सफल और कुछ हमें नहीं चाहिए।
मैने एक दिन उससे पूछा कि
क्या हम दोस्त नहीं रह सकते..?
तो उसने कहा कि -
मैं तुझे कभी अपना दोस्त नहीं मान पाऊँगा
तेरी आँखो में वो राते कभी अनदेखी नहीं कर पाऊँगा
जिस चेहरे को लेकर मैंने इतने सपने देखें हैं..
उस चेहरे को किसी और का होता नहीं देख पाऊँगा
ये फैसला तेरा है तुझे मुबारक
मैं तुझसे दूर रहकर भी इश्क निभाऊँगा...
अच्छा सुन... तु कहती है दोस्ती करले तो चल मान लिया
पर एक बात बता, तु जो मैं हो चुकी हैं
उसको मुझसे मिलवायेगी... क्या?
तेरी गर्दन पर निशान वो जो अब भी बाकी है.. उसको दिखाएगी... क्या??
कभी मुझसे टकरा जाए तो , मेरे और करीब आने के बहाने नहीं ढूँढेगी.. क्या?
विरह की खुमारी में चाँद को देखते वक़्त, मुझे याद नहीं करेगी.. क्या??
तु ही बता...
तु खुद दोस्ती को दोस्ती तक रख पाएगी क्या ?
रसोई में तवा तप रहा था। आटे की लोई गोल होते-होते रोटी का आकार ले रही थी। लड़का बेलन घुमाते हुए अचानक ठहर गया, जब पीछे से लड़की की धीमी सी आवाज़ आयी—
"सुनो… तुमसे एक बात कहनी थी।"
लड़के ने मुस्कुराते हुए रोटी पलटी और सहजता से बोला—
"बोलो न, जैसे हर दिन 'गुडनाइट' या 'गुड मॉर्निंग' कह देती हो।"
लड़की ने नज़रें नीचे झुका लीं।
"काश ये उतना आसान होता… पर ये बात गले से उतर ही नहीं रही।"
लड़के ने धीमे स्वर में जवाब दिया—
"मेरे लिए तुम्हारी कही हर बात उतनी ही आसान है, जितनी सांस लेना। कह डालो।"
लड़की का गला भर आया। उसने हिम्मत जुटाई—
"अब मैं तुमसे प्यार नहीं करती।"
कुछ देर चुप्पी रही। लड़का रोटी पर घी लगाकर चुपचाप उसे प्लेट में रखता रहा। फिर लड़की की ओर देखा, कंधे पर हाथ रखा और बड़े आराम से कहा—
"ठीक है… इसमें परेशान होने जैसा क्या है? यह भी जिंदगी का हिस्सा है।"
लड़की की आँखों से आँसू ढलक पड़े।
"असल में, मुझे किसी और से प्यार हो गया है। तुम्हें धोखा देने का बोझ मुझे चैन नहीं लेने दे रहा।"
लड़का उसके पास आया, दोनों हथेलियों से उसका चेहरा थामा और हल्के से बोला—
"धोखा तब होता जब तुम मेरे साथ रहते हुए किसी और का नाम छिपाती। सच बोलकर तुमने मुझे सम्मान दिया है। अगर दिल अब कहीं और है, तो वहीं जाओ… क्योंकि खुद से झूठ जीना सबसे बड़ा धोखा है।"
दोनों की आँखें भीग चुकी थीं। लड़की फूटकर रो पड़ी और लड़के ने उसे कसकर गले से लगाया। फिर दरवाज़े तक छोड़ आया। जाते-जाते उसने हाथ हिलाकर आखिरी बार विदा किया।
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बरसों बीत गए। समय ने चेहरों पर झुर्रियां और बालों में सफेदी छोड़ दी, लेकिन भीतर कहीं यादों की धड़कन अब भी जिंदा थी।
लड़की ने जीवन में और रिश्ते बनाए, नए प्रेम किए, नए चेहरों के साथ दिन काटे। मगर हर बार विदाई में टूट-फूट, झगड़े, शिकायतें और कटुता ही रही। कभी कोई उतनी सहजता से बिछड़ना नहीं जान पाया जितना उस लड़के ने।
"किसी का प्यार खत्म हो जाना तो सहा जा सकता है," वह अक्सर सोचती, "लेकिन अहंकार पर लगी चोट… वह किसी को बर्दाश्त नहीं होती।"
और अब, अपने जीवन के ढलते वक्त में, जब कदम भारी और दिल खाली हो चला था—वह अनजाने ही उसी पुराने दरवाजे तक चली आयी।
डोरबेल दबाई। अंदर से धीमी, बूढ़ी आवाज़ आयी—
"कौन?"
उसने कांपते स्वर में कहा—
"मैं हूँ…"
भीतर से आवाज़ आयी—
"दरवाज़ा खुला है, अंदर आ जाओ।"
वह कदम दर कदम बढ़ती हुई रसोई तक पहुँची। वहाँ वही लड़का खड़ा था—अब चश्मा लगाए, दूध उबलने से बचाते हुए चाय बना रहा था। बिना देखे ही मुस्कुराकर बोला—
"आज भी तुम्हें एक ही चम्मच शक्कर चाहिए न?"
लड़की सिसक पड़ी। आँसू छलकते हुए बोले—
"आज मैं तुमसे उतना ही, बल्कि उससे भी ज्यादा प्यार करती हूँ। खुद को रोक नहीं पाई, तुम्हें देखने चली आयी।"
लड़का उसकी ओर मुड़ा, और बिना कुछ कहे उसे अपने सीने से चिपका लिया। माथे पर हल्की चुम्मी रखी और बोला—
"पगली… इतनी सी बात कहने में रोने की क्या ज़रूरत थी? अगर दिल अब भी मेरा है, तो यही काफी है। रहो यहीं, जब तक दिल चाहे।"
लड़की ने रोते-रोते वचन दिया—
"अब कहीं नहीं जाऊँगी।"
लड़के ने उसके आँसू पोंछे और मुस्कराया—
"प्यार को बंधन मत बनाओ। दुआ करो, इस बार मेरा प्यार इतना गहरा हो कि तुम्हें मुझे छोड़ने का मन ही न करे।"
लड़की ने कुछ न कहा। बस उसे और कसकर थाम लिया। दोनों के आंसू मिल गए—एक दूसरे की प्यास बुझाते हुए, जैसे दो अलग नदियाँ मिलकर एक ही सागर बन जाएं।
उनके गालों पर बहते आँसू और होंठों की हल्की मुस्कान… एकदम वैसे ही थे जैसे फिफ्टी-फिफ्टी बिस्किट—मीठे भी, नमकीन भी। बिल्कुल जिंदगी की तरह।