RKSEnglish Classes

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17/08/2025
16/08/2025
16/08/2025

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Rajesh Jawalaji, Nirbhay Singh Rajput, Ashok Parijap Parja Ashok, Pradeep Kumar, गोलू राय गोलू राय, Arman Singh, Binit Kumar, Raj Mal Yadav, Vijay Verma, Babuaan Dipu Singh, Altaf Raja, Paritosh Mandal, Mohan Yogi, Manoj Inwate, Riyansh Raj Riyansh Raj, Mahesh Kumar Agariya, Zahid Sk, Jamsaid Ansari, Vivek Sharma Vivek Sharma, Rafikul Islam

Photos from RKSEnglish Classes's post 15/08/2025
13/08/2025

सोने की अंडे देने वाली मुर्गी की कहानी – Story of the Hen that Lays the Golden Eggs:
रामपुर गाँव में एक किसान रहता था। वह बहुत गरीब था, बहुत मुश्किल से उसके परिवार का भरण-पोषण हो पाता था। एक दिन वह मायूस होकर अपने खेत के पास बैठा था। उसी रास्ते से एक संत महात्मा जा रहे थे। उन्होंने किसान से पूछा आप इतना उदास क्यों बैठे हो? किसान ने सारी बात संत महात्मा को बता दी। उसने अपने पास से कुछ पैसे किसान को दिए और बोले इस पैसे से आप 6 मुर्गियाँ खरीद कर लाओ।
किसान ने उन पैसों से मुर्गियाँ खरीद कर ले आया। अगले दिन उनमें से एक मुर्गी ने एक सोने का अंडा दिया। यह देख किसान और उसकी पत्नी खुशी से भर गए। मुर्गी प्रतिदिन एक सोने का अंडा देने लगी। यह देख किसान की पत्नी के अंदर लालच आ गई। वह बहुत जल्द आमिर बनना चाहती थी।
उसने अपने पति को समझाते हुए कहा, “ऐसे कब तक हम एक एक अंडे इकट्ठे करते रहेंगे। ऐसा करो इसका पेट फाड़ कर सारे अंडे निकाल लो। किसान ने ठीक वैसा ही किया, लेकिन उसके पेट में कुछ नहीं मिला। इस तरह किसान की स्थिति फिर से पहले जैसी हो गई। अब वह अपने किए पर पछताने लगा।

नैतिक सीख:
बिना विचारे जो करे सो पीछे पछताए, किसान को सब्र रखना चाहिए था।

Roar for a cause With a roar that echoes across the plains, lions h

12/08/2025

पंचतंत्र की कहानी: The Wise Monkey and the Deceptive Crocodile
परिचय
एक समय की बात है, एक विशाल जंगल में एक चौड़ी नदी बहती थी। नदी के किनारे एक ऊंचा जामुन का पेड़ था, जिसकी शाखाओं पर काले-बैंगनी रसीले जामुन लटकते थे। इस पेड़ पर एक समझदार बंदर रहता था, जिसका नाम था चिंटू। चिंटू न सिर्फ चतुर था, बल्कि उसकी आंखों में एक खास चमक थी, जो उसकी बुद्धिमानी को दर्शाती थी। वह हर दिन जामुन खाता, नदी के किनारे बैठकर मछलियों को देखता और अपने दिन का आनंद लेता था। लेकिन उस नदी में एक मगरमच्छ रहता था, जिसका नाम था भोलू। भोलू दिखने में भोला-भाला था, लेकिन उसका मन लालच और चालबाजी से भरा था।

चिंटू और भोलू की दोस्ती का आरंभ
एक दिन भोलू ने चिंटू को पेड़ की सबसे ऊंची डाल पर बैठे हुए देखा। चिंटू एक जामुन तोड़कर बड़े मजे से खा रहा था। भोलू की आंखों में लालच की चमक आ गई। उसने सोचा, “अगर मैं इस बंदर से दोस्ती कर लूं, तो मुझे रोज जामुन मिलेंगे।” उसने चिंटू को आवाज लगाई, “ए बंदर भाई, तुम्हारा नाम क्या है? मैं तुम्हारा दोस्त बनना चाहता हूं।” चिंटू ने नीचे देखा और हंसते हुए कहा, “मेरा नाम चिंटू है। और तुम कौन हो, नदी के राजा?” भोलू ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “मैं भोलू हूं, इस नदी का मगरमच्छ। चलो, दोस्ती करते हैं। तुम मुझे जामुन दो, और मैं तुम्हें नदी के उस पार की सैर कराऊंगा।”

चिंटू को भोलू की बातों में कुछ शक हुआ। उसने सोचा, “यह पंचतंत्र की कहानी जैसा लग रहा है, जहां चालाकी और धोखा छिपा होता है।” फिर भी, उसने भोलू को परखने के लिए एक जामुन नीचे फेंक दिया। भोलू ने उसे खाया और जोर से तारीफ की, “वाह! ऐसा स्वादिष्ट जामुन मैंने कभी नहीं खाया। तुम सच में मेरे दोस्त बनने लायक हो।” इस तरह उनकी दोस्ती शुरू हुई। हर दिन चिंटू भोलू को जामुन देता, और भोलू उसे अपनी पीठ पर बिठाकर नदी के उस पार ले जाता। वहां चिंटू को नए-नए फल, रंग-बिरंगे पक्षी, और जंगल की खूबसूरती देखने को मिलती। लेकिन चिंटू हमेशा सतर्क रहता था, क्योंकि उसे पता था कि पंचतंत्र की कहानी में दोस्ती के पीछे अक्सर कोई न कोई चाल होती है।

12/08/2025

कहानी: जंगल का रहस्यमयी खजाना (Bachcho Ki Kahani)
एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में, जो घने जंगल के किनारे बसा था, चार दोस्त रहते थे—अनु, रवि, मीरा और छोटू। ये चारों दोस्त हमेशा एक साथ खेलते, हँसते और नई-नई साहसिक योजनाएँ बनाते। गाँव के लोग अक्सर जंगल के बारे में डरावनी कहानियाँ सुनाते थे, लेकिन इन चारों दोस्तों के लिए जंगल एक रहस्यमयी दुनिया थी, जो रोमांच से भरी थी। एक दिन, गाँव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति, बाबा भैरवनाथ, ने बच्चों को एक पुरानी किताब दिखाई। उस किताब में एक नक्शे का जिक्र था, जो जंगल के बीच छिपे एक प्राचीन खजाने की ओर इशारा करता था। बाबा ने बताया कि यह खजाना सदियों से जंगल में कहीं छिपा है, लेकिन उसे पाने का रास्ता खतरों से भरा है।

“क्या यह सच है, बाबा?” अनु ने उत्साह से पूछा।
“हाँ, मेरी बच्ची,” बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा, “लेकिन खजाने तक पहुँचने के लिए साहस, बुद्धि और दोस्ती की जरूरत होगी।”

बस, चारों दोस्तों ने फैसला किया कि वे इस खजाने को ढूँढने जंगल में जाएँगे। अगली सुबह, सूरज उगने से पहले, वे अपने छोटे-छोटे बैग में रोटी, पानी की बोतल और एक मशाल लेकर जंगल की ओर निकल पड़े। नक्शा पुराना और फटा हुआ था, लेकिन उसमें कुछ निशान और संकेत थे, जो रास्ता दिखाते थे।
जंगल में कदम रखते ही हवा में एक अजीब सी ठंडक थी। पेड़ इतने घने थे कि सूरज की रोशनी भी जमीन तक मुश्किल से पहुँच पाती थी। रवि, जो सबसे नन्हा लेकिन सबसे नटखट था, ने कहा, “यह जंगल तो जादुई लगता है! क्या पता, यहाँ भूत भी हों!” मीरा ने उसे चिढ़ाते हुए कहा, “अरे, भूत-वूत कुछ नहीं होता,

पहला संकेत नक्शे में एक विशाल बरगद के पेड़ की ओर इशारा करता था। चारों दोस्त उस पेड़ तक पहुँचे, जो इतना बड़ा था कि उसकी जड़ें किसी किले की दीवारों जैसी लगती थीं। पेड़ के नीचे एक पुराना पत्थर था, जिस पर कुछ प्राचीन अक्षर लिखे थे। अनु, जो पढ़ने में तेज थी, ने अक्षरों को पढ़ने की कोशिश की। “यह लिखा है—’साहस का रास्ता चुनो, डर का नहीं।'”

तभी, पेड़ की जड़ों के बीच से एक गहरा गड्ढा दिखाई दिया। छोटू ने उत्साह में उसमें झाँकने की कोशिश की, लेकिन अचानक एक जोरदार आवाज आई, जैसे कोई भारी चीज जमीन पर गिरी हो। दोस्त डर गए, लेकिन अनु ने कहा, “हमें डरना नहीं है।

वे गड्ढे में उतरे। अंदर एक लंबी, अंधेरी सुरंग थी। मशाल की रोशनी में दीवारों पर चमकते हुए चित्र दिख रहे थे—जादुई जानवरों, उड़ते हुए पक्षियों और एक सुनहरे खजाने की तस्वीरें। सुरंग के अंत में एक बड़ा सा दरवाजा था, जिस पर एक पहेली लिखी थी:
“मैं हूँ वह जो रात में चमकता,
दिन में छिप जाता,
मेरे बिना नक्शा अधूरा,
मुझे ढूँढो, तो खजाना पूरा।”

चारों दोस्त सोच में पड़ गए। “यह क्या हो सकता है?” मीरा ने कहा। रवि ने अचानक चिल्लाकर कहा, “तारा! यह तारा है! रात में चमकता है, दिन में छिप जाता है।” सबने उसकी बात मानी और दरवाजे पर एक तारे के आकार का छेद ढूँढा। छोटू ने अपनी जेब से एक चमकता हुआ पत्थर निकाला, जो उसने रास्ते में पाया था। उसने उसे छेद में फिट किया, और दरवाजा खुल गया।

दरवाजे के पीछे एक विशाल गुफा थी, जिसके बीच में एक सुनहरा संदूक चमक रहा था। दोस्तों की आँखें चमक उठीं। लेकिन जैसे ही वे संदूक की ओर बढ़े, गुफा में अचानक हलचल मच गई। दीवारों से अजीब सी छायाएँ उठने लगीं। ये छायाएँ जादुई प्राणियों की तरह लग रही थीं, जो खजाने की रक्षा कर रही थीं।

“यह क्या है?” छोटू डरते हुए बोला।
“शांत रहो,” अनु ने कहा। “हमें अपनी बच्चों की कहानी (bachcho ki kahani) में साहस दिखाना होगा।”

तभी एक छाया ने मानव रूप लिया और बोली, “तुमने यहाँ तक का रास्ता तय किया, लेकिन खजाना केवल वही ले सकता है, जिसका दिल सच्चा हो।” उसने एक सवाल पूछा, “तुम खजाने का क्या करोगे?”

चारों दोस्त एक-दूसरे की ओर देखने लगे। मीरा ने कहा, “हम यह खजाना गाँव वालों के लिए इस्तेमाल करेंगे। स्कूल बनाएँगे, गरीबों की मदद करेंगे।” बाकी दोस्तों ने भी सहमति जताई। छाया मुस्कुराई और गायब हो गई। संदूक अपने आप खुल गया।

अंदर सोने-चाँदी के सिक्के, हीरे-जवाहरात और एक प्राचीन किताब थी। किताब में लिखा था कि असली खजाना दोस्ती और साहस है। चारों दोस्तों ने खजाना गाँव लाकर बाबा भैरवनाथ को सौंप दिया। गाँव में स्कूल बना, बच्चों के लिए खेल का मैदान बना, और सभी खुशहाल हो गए।

इस बच्चों की कहानी (bachcho ki kahani) से हमें यह सीख मिलती है कि साहस, दोस्ती और सच्चाई से कोई भी मुश्किल रास्ता आसान हो सकता है। चारों दोस्त आज भी गाँव में अपनी इस रोमांचक यात्रा की कहानी सुनाते हैं, और बच्चे उनकी बच्चों की कहानी (bachcho ki kahani) सुनकर रोमांचित हो जाते हैं।

11/08/2025

दूर पहाड़ों के पास नदी के किनारे भेड़िया और ऊँट दो दोस्त रहते थे। ऊँट बहुत सीधा-साधा और भेड़िया बहुत लालची और मतलबी था। एक दिन भेड़िए ने देखा कुछ पंछी और जानवर नदी उस पार से तरबूज खा कर आ रहे थे। उसका मन ललचाया वह अपने दोस्त ऊँट के पास जा कर कहा, “ऊँट भैया! नदी उस पार बहुत सारे तरबूज लगे हैं। चलो हम लोग भी तरबूज खा कर आते हैं।

ऊँट उसकी बातों में आ गया। उसने भेड़िए को अपनी पीठ पर बैठा कर नदी के उस पार तरबूज के खेत के पास ले गया। खेत में लगे तरबूज को देखते ही भेड़िए के मुँह में पानी आ गया। वह जल्दी से खेत में कूद गया और तरबूज खाने लगा। थोड़े समय में ही भेड़िए का पेट भर गया। लेकिन उसका दोस्त ऊँट अभी तरबूज खा ही रहा था। फिर, भेड़िया ने सोचा इसका पेट तो बहुत बड़ा हैं, ये तो एक दिन में सारे तरबूज खा जाएगा फिर हमें नहीं मिलेगा।

उसके दिमाग में शरारत सूझी वह तरबूज को तोड़-तोड़ कर फेंकने लगा और खुशी के कारण नाचने और चिल्लाने लगा। ऊँट ने उसे ऐसा करने से माना किया तो भेड़िया ने कहा, “हमें खाना खाने के बाद चिल्लाने और नाचने की आदत हैं।” तभी भेड़िए की आवाज सुनकर किसान मोटा डंडा लेकर आ गया। उसने ऊँट की पिटाई शुरू कर दी। ऊँट की पिटाई होते देख भेड़िया तेजी से भाग निकला और नदी के किनारे जा कर रुका।

पिटाई खाने के बाद ऊँट किसी तरह नदी के किनारे आ पहुँचा। भेड़िया ऊँट के ऊपर बैठकर नदी पार करने के लिए चल पड़ा। बीच नदी में पहुँचकर ऊँट बैठने लगा। उसके पीठ पर बैठे भेड़िया ने कहा, भैया! ये क्या कर रहे हो? ऊँट ने कहा, “मुझे खाना खाने के बाद पानी में बैठने की आदत हैं। ऊँट पानी में बैठ गया और लेटने लगा। भेड़िया पानी में बहते-बहते बहुत मुश्किल से किनारे लगा और उसको अपने किए पर पछतावा होने लगा।

नैतिक सीख:
हमें किसी को धोखा नहीं देना चाहिए और किसी के सीधेपान का फायदा भी नहीं उठाना चाहिए।सीख की किताबें

11/08/2025

मैं रवि कुमार सिंह फलपुरा, पचरूखी सिवान बिहार यह स्पष्ट करता हूँ कि मैं अपनी निजी जानकारी और तस्वीरों के उपयोग के लिए फेसबुक या मेटा को कोई अनुमति नहीं देता हूँ। आज एक महत्वपूर्ण दिन है जिस पर आधिकारिक मुहर रात 9:20 बजे लगाई गई है और यह समाचार टीवी पर प्रसारित किया गया है। फेसबुक के नए नियम कल से लागू होंगे जो आपकी तस्वीरों के उपयोग की अनुमति देते हैं। समय सीमा आज समाप्त हो रही है। कृपया इस संदेश को कॉपी करें और अपने प्रोफाइल पर एक नया पोस्ट बनाकर पेस्ट करें। जो लोग ऐसा नहीं करते हैं उन्हें अनुमति देने वाला माना जाएगा। गोपनीयता के उल्लंघन पर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। मैं अपनी निजी जानकारी और तस्वीरों के उपयोग के लिए फेसबुक या मेटा को कोई अनुमति नहीं देता हूँ 🙏🏻 se

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