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जहाँ हमारा स्वार्थ समाप्त होता है…
वहीं से हमारी इंसानित आरंभ होती है…
यह महत्वपूर्ण नहीं है कि…
कितने बेईमान लोग आपको देखकर ईमानदार बने…
महत्व तो इस बात का है कि…
कितने बेईमान लोगों को देखकर भी …
आप स्वयं ईमानदार बने रहे…
🙏सुप्रभात🙏
महामंडलेश्वर योगी हितेश्वर नाथ
अच्छा इंसान कभी मतलबी नही होता,वह दूर हो जाता है उन लोगो से जो गेम खेलते हैं,अतःसावधान, राम राम
03/10/2024
🗳️मेरा वोट मेरा अधिकार:प्रिय मतदाता, 5 अक्टूबर 2024 को अपने मतदान केंद्र पर जाकर मतदान अवश्य करें तथा लोकतंत्र के महान पर्व के भागीदार बने
📢आपका वोट क्यों ज़रूरी है एक बार पूरा मैसेज पढ़े
(1)मतदान अवश्य करें ......................
वर्ष 2008 में राजस्थान की नाथद्वारा सीट से सी. पी. जोशी मात्र एक वोट से चुनाव हार गय थे मजे़ की बात ये हे कि उनके ड्राइवर को वोट डालने का समय नहीं मिला ।
(2)मतदान अवश्य करें......................क्योंकि
1776 में अमेरिका में एक वोट ज्यादा मिलने से जर्मन भाषा के स्थान पर अंग्रेज़ी राजभाषा बनी ।
(3)मतदान अवश्य करें...................क्योंकि 1998 में वाजपेयी सरकार मात्र एक वोट से गिर गयी थी।
(4)मतदान अवश्य करें......................क्योंकि
1917 में सरदार पटेल अहमदाबाद म्यूनसिपल कारपोरेशन का चुनाव मात्र एक वोट से हार गये थे ।
(5)मतदान अवश्य करें........................क्योंकि
1923 में एक वोट ज्यादा मिलने से हिटलर नाजी़ पार्टी का प्रमुख बना ओर हिटलर युग की शुरुआत हुई ।
(6)मतदान अवश्य करें......................क्योंकि
1875 में फ्रांस में मात्र एक वोट से राजतंत्र के स्थान पर गणतंत्र आया ...
(7)मतदान अवश्य करें......................क्योंकि शायद आपके वोट से ही हार जीत का फैसला हो
🗳️5 अक्टूबर को आप सभी ज्यादा से ज्यादा मतदान अवश्य करे
aage foword jarur kre
एक बार दशहरा बीत चुका था , दीपावली समीप थी , तभी एक दिन कुछ युवक - युवतियों की NGO टाइप टोली एक कॉलेज में आई !
उन्होंने छात्रों से कुछ प्रश्न पूछे ; किन्तु एक प्रश्न पर कॉलेज में सन्नाटा छा गया !
उन्होंने पूछा , " जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्षो के वनवास से अयोध्या लौटने के उत्साह में मनाई जाती है , तो दीपावली पर " लक्ष्मी पूजन " क्यों होता है ? श्री राम की पूजा क्यों नही ?"
प्रश्न पर सन्नाटा छा गया , क्यों कि उस समय कोई सोशल मीडिया तो था नहीं , स्मार्ट फोन भी नहीं थे ! किसी को कुछ नहीं पता ! तब , सन्नाटा चीरते हुए , हममें से ही एक हाथ , प्रश्न का उत्तर देने हेतु ऊपर उठा !
उसने बताया कि " दीपावली " उत्सव दो युग " सतयुग " और " त्रेता युग " से जुड़ा हुआ है !"
" सतयुग में समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी उस दिन प्रगट हुई थी !" इसलिए " लक्ष्मी पूजन " होता है !
भगवान श्री राम भी त्रेता युग मे इसी दिन अयोध्या लौटे थे ! तो अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था ! इसलिए इसका नाम दीपावली है !
इसलिए इस पर्व के दो नाम हैं , " लक्ष्मी पूजन " जो सतयुग से जुड़ा है , और दूजा " दीपावली " जो त्रेता युग , प्रभु श्री राम और दीपो से जुड़ा है !
हमारे उत्तर के बाद थोड़ी देर तक सन्नाटा छाया रहा , क्यों कि किसी को भी उत्तर नहीं पता था ! यहां तक कि प्रश्न पूछ रही टोली को भी नहीं !
बाद में पता चला , कि वो टोली आज की शब्दावली अनुसार " लिबरर्ल्स " ( वामपंथियों ) की थी , जो हर कॉलेज में जाकर युवाओं के मस्तिष्क में यह बात डाल रही थी , कि " लक्ष्मी पूजन " का औचित्य क्या है , जब दीपावली श्री राम से जुड़ी है ?" कुल मिलाकर वह छात्रों का ब्रेनवॉश कर रही थी !
लेकिन हमारे उत्तर के बाद , वह टोली गायब हो गई !
एक और प्रश्न भी था , कि लक्ष्मी और श्री गणेश का आपस में क्या रिश्ता है ?
और दीपावली पर इन दोनों की पूजा क्यों होती है ?
सही उत्तर है :
लक्ष्मी जी जब सागर मन्थन में मिलीं , और भगवान विष्णु से विवाह किया , तो उन्हें धन और ऐश्वर्य की देवी बनाया गया, उन्होंने धन को बाँटने के लिए मैनेजर कुबेर को बनाया !
कुबेर कुछ कंजूस वृति के थे ! वे धन बाँटते नहीं थे , स्वयं धन के भंडारी बन कर बैठ गए !
माता लक्ष्मी परेशान हो गई ! उनकी सन्तान को कृपा नहीं मिल रही थी !
उन्होंने अपनी व्यथा भगवान विष्णु को बताई ! भगवान विष्णु ने उन्हें कहा , कि " तुम मैनेजर बदल लो !"
माँ लक्ष्मी बोली : " यक्षों के राजा कुबेर मेरे परम भक्त हैं ! उन्हें बुरा लगेगा !"
तब भगवान विष्णु ने उन्हें श्री गणेश जी की दीर्घ और विशाल बुद्धि को प्रयोग करने की सलाह दी !
माँ लक्ष्मी ने श्री गणेश जी को " धन का डिस्ट्रीब्यूटर " बनने को कहा !
श्री गणेश जी ठहरे महा बुद्धिमान, वे बोले : " माँ, मैं जिसका भी नाम बताऊंगा , उस पर आप कृपा कर देना ! कोई किंतु , परन्तु नहीं !" माँ लक्ष्मी ने हाँ कर दी !
अब श्री गणेश जी लोगों के सौभाग्य के विघ्न / रुकावट को दूर कर उनके लिए धनागमन के द्वार खोलने लगे !
कुबेर भंडारी ही बनकर रह गए ! श्री गणेश जी पैसा प्रदान करने वाले बन गए !
गणेश जी की दरियादिली देख , माँ लक्ष्मी ने अपने मानस पुत्र श्री गणेश को आशीर्वाद दिया , कि जहाँ वे अपने पति नारायण के सँग ना हों , वहाँ उनका पुत्रवत गणेश उनके साथ रहें !
दीपावली आती है कार्तिक अमावस्या को ! भगवान विष्णु उस समय योगनिद्रा में होते हैं ! वे जागते हैं ग्यारह दिन बाद , देव उठावनी एकादशी को !
माँ लक्ष्मी को पृथ्वी भ्रमण करने आना होता है , शरद पूर्णिमा से दीवाली के बीच के पन्द्रह दिनों में , तो वे सँग ले आती हैं श्री गणेश जी को ! इसलिए दीपावली को लक्ष्मी - गणेश की पूजा होती है !
🙏🌹🙏
( यह कैसी विडंबना है , कि देश और हिंदुओ के सबसे बड़े त्यौहार का पाठ्यक्रम में कोई विस्तृत वर्णन नहीं है ? औऱ जो वर्णन है , वह अधूरा है !)
इस लेख को पढ़ कर स्वयं भी लाभान्वित हों , अपनी अगली पीढी को बतायें और दूसरों के साथ साझा करना ना भूलें !🌹🚩🙏🕉️🙏🚩🌹
जब से मैंने होश संभाला है लगातार सुनता आ रहा हूँ कि-
"बनिया" कंजूस होता है !!
"नाई" चतुर होता है !!
"ब्राह्मण" धर्म के नाम पर सबको बेवकूफ बनाता है !!
"यादव" की बुद्धि कमजोर होती है !!
"राजपूत" अत्याचारी होते हैं !!
"दलित" गंदे होते हैं !!
"जाट", "गड़रिया" और "गुर्जर" बेवजह लड़ने वाले होते हैं !!
"मारवाड़ी" लालची होते हैं !!
और ना जाने ऐसी कितनी "असत्य" परम ज्ञान की बातें सभी हिन्दुओं को आहिस्ते-आहिस्ते सिखाई गयी ...!!
नतीजा!
-- हीन भावना ...!!
-- एक दूसरे की जाति पर "शक" और "द्वेष"। धीरे-धीरे आपस में टकराव होना शुरू हुआ और अंतिम परिणाम हुआ कि "मजबूत", "कर्मयोगी" और "सहिष्णु" हिन्दू समाज आपस में ही लड़कर कमजोर होने लगा .....!!
उनको उनका लक्ष्य प्राप्त हुआ ! हजारों साल से आप साथ थे! आपसे लड़ना मुश्किल था !!
अब आपको मिटाना आसान है !!
आपको पूछना चाहिए था कि "अत्याचारी राजपूतों" ने सभी जातियों की रक्षा के लिए हमेशा अपना "खून" क्यों बहाया?...
आपको पूछना था कि अगर दलित को "ब्राह्मण" इतना ही गन्दा समझते थे तो वाल्मीकि रामायण जो एक दलित ने लिखी, उसकी सभी पूजा क्यों करते हैं?
माता सीता क्यों महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहीं?
आपने नहीं पूछा कि देश को सोने का चिड़िया बनाने में "मारवाड़ियों" और "बनियों" का क्या योगदान था?
मंदिर, स्कूल, हॉस्पिटल बनाने वाले "लोक कल्याण" का काम करने वाले "बनिया" होते हैं! सभी को "रोजगार" देने वाले बनिया होते हैं! सबसे ज्यादा "आयकर" देने वाले बनिया होते हैं..
जिस "डोम" को आपने नीच मान लिया, उसी के हाथ से दी गई अग्नि से आपको "मुक्ति" क्यों मिलती है?
"जाट" ,"गड़रिया" और "गुर्जर" अगर मेहनती - जुझारू नहीं होते तो आपके लिए अन्न का उत्पादन कौन करता? सेना में भर्ती कौन होता।
जैसे ही कोई किसी जाति की, मामूली सी भी बुराई करे, उसे टोकिये और ऐतराज़ कीजिये...
याद रहे!
आप सिर्फ "हिन्दू" हैं। हिन्दू वो जो हिन्दुस्तान में रहते आये हैं ...!!
हमने कभी किसी अन्य धर्म का अपमान नहीं किया तो फिर अपने हिन्दू भाइयों को कैसे अपमानित करते हो और क्यों ...?
अब न अपमानित करेंगे और न होने देंगे! एक रहें - सशक्त रहें ...!!
मिलजुल कर मजबूत भारत का निर्माण करें !!
मैं ब्राम्हण हूँ
जब मै पढ़ता हूँ और पढ़ाता हूँ !!
मैं क्षत्रिय हूँ
जब मैं अपने परिवार की रक्षा करता हूँ !!
मैं वैश्य हूँ
जब मैं अपने घर का प्रबंधन करता हूँ !!
मैं शूद्र हूँ
जब मैं अपने घर की साफ-सफाई करता हूँ !!
ये सब मेरे भीतर है इन सबके संयोजन से मैं बना हूँ !!
क्या मेरे अस्तित्व से किसी एक क्षण के लिए भी, आप इन्हें अलग कर सकते हैं
क्या किसी भी जाति के "हिन्दू" के भीतर से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र को अलग कर सकते हैं।
वस्तुतः सच यह है कि हम सुबह से रात तक इन चारों वर्णों के बीच बदलते रहते हैं !!
मुझे गर्व है कि मैं एक हिंदू हूं !!
मेरे टुकड़े-टुकड़े करने की कोई कोशिश न करें ...!!
मैं हिन्दू हूं, हिन्दुस्तान का
मैं पहचान हूँ हिन्दुस्तान की .!!!
जय हिंद..🇮🇳
30/07/2024
हरियाणा की छोरी मनु भाकर ने रचा इतिहास
124 साल बाद एक ही ओलंपिक में 2 पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनी
18/07/2024
चेतावनी
एक 36 वर्षीय पुरुष को केन्सर हुआ था जो लास्ट स्टेज पर था। अपनी अब तक की उम्र में इन्होने कभी भी गुटका, सिगरेट और पान व शराब का सेवन नहीं किया था। समय पर काम पर जाना, परिवार के साथ खुश रहना, उसका जीवन था, ना कोई बीमारी थी ना ही कोई चिन्ता।
सिर्फ 2/3 दिन से पेट में दर्द शुरू होने के कारण डॉ. से सम्पर्क कर इलाज शुरू किया, परन्तु कोई फायदा ना होने के कारण बड़े डॉ. से मिले। वहां के डॉ. ने उनकी सभी रिपोर्ट निकलवाई तो पता चला कि पेट के आंतड़ियों में केन्सर हुआ है।
डॉ. द्वारा इलाज की शुरूआत हुई, इलाज के दौरान पूरी जमा पूंजी के साथ घर-बार भी बिक गया, परन्तु परिणाम स्वरूप उनकी मौत हो गई। डॉ. ने परिवार से इनका अग्नि संस्कार ना करके, मानव सेवार्थ बोडी पर रिर्सच करने हेतु हॉस्पीटल में डोनेट करने की सलाह दी। परिवार में आपसी मंथन के बाद बॉडी को हॉस्पीटल में रिर्सच करने हेतु, डोनेट करने का निर्णय लेते हुए बॉडी को हॉस्पीटल में डोनेट की।
रिर्सच के बाद पता चला कि प्लास्टिक में गरम खाना व प्लास्टिक की बॉटल में पानी पीने से, उसमें से निकलने वाले केमिकल के कारण इन्हें केन्सर हुआ था। तब डॉ. द्वारा परिवार व साथियों से सम्पर्क कर उनके खान-पान के बारे में जांच की, तो इस जांच से पता चला कि उन्हें चाय पीने की आदत थी। वे दिन में पाँच से छ: कप चाय पीते थे। यह भी पता चला कि जहाँ से चाय पीते थे वहाँ प्लास्टिक की थैली में चाय आती थी और प्लास्टिक के कप में चाय दी जाती थी।
अक्सर देखा गया है लोग प्लास्टिक की थैलियों में दुकान से गरम चाय गरम सब्जी या अन्य समान मंगवाते हैं और वो ही खा लेते हैं या पी लेते हैं। वो ही धीरे धीरे आपके शरीर में कैन्सर बनाता है।
तब डॉ. द्वारा उनके साथ काम करने वाले साथियों का भी मेडिकल टेस्ट कराया तो पता चला कि उसके कई साथियों को कैन्सर का असर है। तब डॉ. ने उन्हें कैन्सर के इलाज की सलाह दी।
हम सोचते हैं कि सरकार इतनी खराब वस्तु जो कि स्वास्थ्य के साथ- साथ, पर्यावरण के लिए भी खतरनाक ही नहीं घातक है, उसके निर्माण करने की इजाजत कैसे दे देती है।
सरकार प्लास्टिक का उपयोग ना करने के प्रचार पर भी करोडों रू खर्च कर हमें समझाती है, परन्तु हम भी कहाँ समझते हैं। हम स्वंय भी तो अपना व अपने चाहने वालों को मौत की ओर ढकेलने का कार्य निर्भीक होकर कर रहे हैं, ना अपनी और ना ही परिवार की हमें चिन्ता है, बस मौत के गले लगाने के लिए फैशन की अंधी दौड में भाग रहे हैं।
अत: आप सभी से पुन: नम्र निवेदन है कि प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करें, जहाँ तक हो सके प्लास्टिक के बर्तन में गरम खाना ना खायें, प्लास्टिक की बॉटल में पानी का उपयोग ना करें। विशेषकर गर्म चाय-कॉफी प्लास्टिक कप में ना पियें।
इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा ग्रुपों व मित्रौं में भेजें व उनसे भी आगे भेजने का आग्रह करें।
किसी बाबा व अन्य फकीर-बाबा के नाम पोस्ट भेजने से चमत्कार नहीं होते परन्तु ऐसे पोस्ट भेजने से कई चमत्कार हो सकते हैं जो प्रकृति के लिए व मानव जीवन के लिए बहुत बड़ा चमत्कार ही है।
🌹🌹🌹🌹
🙏🏻🙏🏻, आर के गोयल सर्राफ, सचिव, कैंसर एंड हार्ट केयर एसोसिएशन, गाजियाबाद।
आगे बढ़ाते रहिए यह भी एक पुण्य कर्म है।
05/06/2024
पर्यावरण प्रेमी ही पूरा पढ़े विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है और बहुत से लोग सोसल मीडिया पर पौधे लगाते हैं और शेयर भी करते है में वेद्य हंसराज स्वामी मेरा मानना कुछ अलग है पोस्ट को पूरा पढ़ना जी 🖍️मैनें पेड़ से फोन कर के पूछा कैसे हो, कहाँ रहते हो, आजकल दिखाई नहीं देते⁉️
पेड़ बोला मात्र चालिस साल पहले तक हम बहुत सारे नीम, पीपल, बड़, कीकर, शीशम, जांडी, आम, जामुन, जाळ, शहतूत व लेसुवे आदि आपके आसपास ही रहते थे।
याद करो तब तक आपके घरों में फर्नीचर के नाम पर खाट, पीढे व मूढ़े ही होते थे। खाट व पीढे के सिर्फ पावे हमारी लकड़ी से बनते थे। सेरू व बाही बाँस की ही होती थी, मूढ़े सरकंडे से बने होते थे।
फिर आप लोगों को पता नहीं क्या हुआ आपने हमें उखाड़ बाढना काटना शुरू कर दिया। हमारी लकड़ी से डबल बैड, सोफे, मेज, अलमारी व कुर्सी आदि बना कर अपने घरों में भर ली। आप स्कूलों में टाट बिछाकर पढ़ा करते थे फिर हमें काट कर बैंच बना डाले। नजर घुमाओ और देखो कोई तीस चालिस साल पुराणा पेड़ आसपास है के‼️‼️
हम पेड़ आजकल आपके घर, दफ्तर व स्कूल कालेजों में ही हैं।
मैनें फिर पेड़ से पूछा कि आज तो विश्व पर्यावरण दिवस है चलो एक पेड़ मैं लगा देता हूँ।
पेड़ भड़क गया और कहा कि जन्मजात मुर्ख हो या पढ़लिख कर हो गये, लगता है हमारी लाश से बणे सोफे या डबल बैड पर बैठकर, ऐ•सी• चलाकर, सोशल मीडिया से प्रभावित हो कर फोन कर रहे हो। बाहर निकल कर देखो इस 48℃ के तापमान में हमारी वृद्धि कैसे होगी। अरे वो पश्चिमी जगत वाले अपने मौसम व मान्यताओं के हिसाब से दिन निर्धारित करते हैं और तुम अक्ल से अंधे भारतीय आँख मिंच कर उन्हें मानने लगते हो।😡😡
पेड़ एक नहीं अनेक लगाना पर मानसून आने पर। जेठ के महीने में पेड़ लगायेगा आड़ू, पाणी तेरा बाप देगा। अषाढ़ से फागुन तक जितने मर्जी लगा लेना😠😠
फिर पेड़ गाणा गाणे लगा "तेरी दुनिया से दूर, चले हो के मजबूर, हमें याद रखना
18/01/2024
बहुत अच्छा मैसेज है इसे आप जरूर पढ़े और शेयर भी जरूर करे
🙏✍️ब्रेन-हेमरेज, ब्रेन-स्ट्रोक (मस्तिष्क आघात) अर्थात दिमाग़ की नस का फटना।✍️
मस्तिष्क आघात के मरीज़ को कैसे पहचानें?
एक पार्टी चल रही थी, एक महिला को थोड़ी ठोकर सी लगी और वह गिरते गिरते संभल गई, मगर उसने अपने आसपास के लोगों को यह कह कर आश्वस्त कर दिया कि -"सब कुछ ठीक है, बस नये बूट की वजह से एक ईंट से थोड़ी ठोकर लग गई थी" ।
(यद्यपि आसपास के लोगों ने ऐम्बुलैंस बुलाने की पेशकश भी की...)
साथ में खड़े मित्रों ने उन्हें साफ़ होने में मदद की और एक नई प्लेट भी आ गई! ऐसा लग रहा था कि महिला थोड़ा अपने आप में सहज नहीं है! उस समय तो वह पूरी शाम पार्टी एन्जॉय करती रहीं, पर बाद में उसके पति का लोगों के पास फोन आया कि उसे अस्पताल में ले जाया गया जहाँ उसने उसी शाम दम तोड़ दिया!!
दरअसल उस पार्टी के दौरान महिला को ब्रेन-हैमरेज हुआ था!
अगर वहाँ पर मौजूद लोगों में से कोई इस अवस्था की पहचान कर पाता तो आज वो महिला हमारे बीच जीवित होती..!!
माना कि ब्रेन-हैमरेज से कुछ लोग मरते नहीं है, लेकिन वे सारी उम्र के लिये अपाहिज़ और बेबसी वाला जीवन जीने पर मजबूर तो हो ही जाते हैं!!
स्ट्रोक की पहचान-
बामुश्किल एक मिनट का समय लगेगा, आईए जानते हैं-
न्यूरोलॉजिस्ट कहते हैं-
अगर कोई व्यक्ति ब्रेन में स्ट्रोक लगने के, तीन घंटे के अंदर, अगर उनके पास पहुँच जाए तो स्ट्रोक के प्रभाव को पूरी तरह से समाप्त (reverse) किया जा सकता है।
उनका मानना है कि सारी की सारी ट्रिक बस यही है कि कैसे भी स्ट्रोक के लक्षणों की तुरंत पहचान होकर, मरीज़ को जल्द से जल्द (यानि तीन घंटे के अंदर-अंदर) डाक्टरी चिकित्सा मुहैया हो सके, और बस दुःख इस बात का ही है कि अज्ञानतावश यह सब ही execute नहीं हो पाता है!!!
मस्तिष्क के चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रोक के मरीज़ की पहचान के लिए तीन अतिमहत्वपूर्ण बातें जिन्हें वे STR कहते हैं, सदैव ध्यान में रखनी चाहिए। अगर STR नामक ये तीन बातें हमें मालूम हों तो मरीज़ के बहुमूल्य जीवन को बचाया जा सकता है।
ये 3 बातें इस प्रकार हैं-
1) S = Smile अर्थात उस व्यक्ति को मुस्कुराने के लिये कहिए।
2) T = Talk यानि उस व्यक्ति को कोई भी सीधा सा एक वाक्य बोलने के लिये कहें, जैसे- 'आज मौसम बहुत अच्छा है' आदि।
और तीसरा...
3) R = Raise अर्थात उस व्यक्ति को उसके दोनों बाजू ऊपर उठाने के लिए कहें।
अगर उस व्यक्ति को उपरोक्त तीन कामों में से एक भी काम करने में दिक्कत है, तो तुरंत ऐम्बुलैंस बुलाकर उसे न्यूरो-चिकित्सक के अस्पताल में शिफ्ट करें और जो आदमी साथ जा रहा है उसे इन लक्षणों के बारे में बता दें ताकि वह पहले से ही डाक्टर को इस बाबत खुलासा कर सके।
इनके अलावा स्ट्रोक का एक लक्षण यह भी है-
उस आदमी को अपनी जीभ बाहर निकालने को कहें। अगर उसकी जीभ सीधी बाहर नहीं आकर, एक तरफ़ मुड़ सी रही है, तो यह भी ब्रेन-स्ट्रोक का एक प्रमुख लक्षण है।
एक सुप्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि अगर इस मैसेज़ को पढ़ने वाला, इसे ज्यादा नही तो आगे, कम से कम अगर दस लोगों को भी भेजे, तो निश्चित तौर पर, कुछ न कुछ बेशकीमती "जानें" तो बचाई ही जा सकती हैं!!!
आवश्यक है कि इस जानकारी को अधिकतम शेयर करें।
जी हाँ मित्रों,
समय गूंगा नहीं, बस मौन है!!
ये तो वक्त ही बताता है, कि किसका कौन है??
11/01/2024
श्री टी.एन. शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त थे। अपनी पत्नी के साथ यूपी की यात्रा पर जाते समय उनकी पत्नी ने सड़क किनारे एक पेड़ पर बया (एक प्रकार की चिड़िया)का घोंसला देखा और कहा,
”यह घोंसला मुझे ला दो; मैं घर को सजाकर रखना चाहतीं हूँ।”
श्री टी एन शेषन ने साथ चल रहे सुरक्षा गार्ड से इस घोंसले को नीचे उतारने को कहा। सुरक्षा गार्ड ने पास ही भेड़-बकरियां चरा रहे एक अनपढ़ लड़के से कहा कि अगर तुम यह घोंसला निकाल दोगे तो मैं तुम्हें बदले में दस रुपये दूंगा।
लेकिन लड़के ने मना कर दिया। श्री शेषन स्वयं गये और लड़के को पचास रुपये देने की पेशकश की, लेकिन लड़के ने घोंसला लाने से इनकार कर दिया और कहा कि
अच्छा लगे तो शेयर कर दे
"सर,इस घोंसले में चिडिया के बच्चे हैं। शाम को जब उस बच्चे की "माँ" खाना लेकर आएगी तो वह बहुत उदास होगी, इसलिए तुम कितना भी पैसा दे दो, मैं घोंसला नहीं उतारूंगा"
इस घटना के बारे में श्री टी.एन. शेषन लिखते हैं कि....
मुझे जीवन भर इस बात का अफ़सोस रहा कि एक पढ़े-लिखे आईएएस में वो विचार और भावनाएँ क्यों नहीं आईं जो एक अनपढ़ लड़का सोचता था?
उन्होंने आगे लिखा कि-
मेरी तमाम डिग्री,आईएएस का पद, प्रतिष्ठा, पैसा सब उस अनपढ़ बच्चे के सामने मिट्टी में मिल गया।
जीवन तभी आनंददायक बनता है जब बुद्धि और धन के साथ संवेदनशीलता भी हो।
🙏🙏 🙏🙏
23/12/2023
JAI SHREE RAM पहले विमान की लैंडिंग, श्रीराम एयरपोर्ट अयोध्या जी
19/10/2023
Share kre taki sabhi ko pata chal sake हरियाणा रोडवेज की तरफ से खुशखबरी जो भी स्टूडेंट्स ग्रुप डी के लिए यात्रा बिल्कुल फ्री है। आने जाने दोनो तरफ से किरया माफ है।...
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