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22/03/2026
“Real power is staying calm beside danger.”
01/01/2026
Happy new year 2026 🎊🎉🙏
31/12/2025
“इस साल ने रुलाया भी,
हँसाया भी…
गिराया भी,
और खुद उठना भी सिखाया।
जा रहा है यह साल,
पर यादें छोड़कर… 💫”
28/12/2025
“आख़िरी रोटी”
रात के 11 बज चुके थे…
छोटी सी झोपड़ी में बल्ब टिमटिमा रहा था।
रसोई से रोटी की खुशबू आ रही थी, लेकिन
घर में सन्नाटा था।
रीना ने थाली लगाई —
2 रोटियाँ…
थोड़ी-सी दाल…
और एक खाली प्लेट।
उसका बेटा सोनू पढ़ते-पढ़ते बोला,
“माँ, आज पापा फिर लेट हो गए?”
रीना मुस्कराई…
“हाँ बेटा, काम ज़्यादा होगा।”
असलियत ये थी कि
आज घर में बस दो ही रोटियाँ थीं।
थोड़ी देर बाद दरवाज़ा खुला…
पसीने से भीगा हुआ रमेश अंदर आया।
रीना ने तुरंत थाली बढ़ाई —
“आप खा लो, मैं बाद में खा लूँगी।”
रमेश ने थाली देखी…
दो रोटियाँ।
उसने बिना कुछ बोले एक रोटी तोड़कर
आधी कर दी…
और चुपचाप एक टुकड़ा प्लेट से निकालकर
रसोई में रख दिया।
रीना समझ गई…
पर बोली कुछ नहीं।
रात को जब सब सो गए,
सोनू की नींद खुली।
उसे पानी पीना था…
रसोई में गया तो देखा —
उसकी माँ चुपचाप वही आधी रोटी
नमक के साथ खा रही थी…
और आँखों से आँसू गिर रहे थे।
सोनू दौड़कर आया…
“माँ! आप ये क्यों खा रही हो? आपने खाना नहीं खाया?”
रीना घबरा गई…
फिर धीरे से बोली —
“बेटा… माँ का पेट बच्चों की मुस्कान से भर जाता है।”
सोनू ने कुछ नहीं कहा।
बस जाकर अपनी किताब खोली…
और पहली बार पूरी रात पढ़ता रहा।
20 साल बाद…
एक मंच पर खड़ा IAS अफ़सर
अपने भाषण में बोला —
“मेरी माँ ने ज़िंदगी में कई बार भूखा रहना चुना,
ताकि मैं भूखा न रहूँ।
आज मेरी हर कामयाबी
उस आधी रोटी की क़ीमत है…”
पूरे हॉल में सन्नाटा था…
और पहली पंक्ति में बैठी माँ
आँचल से आँसू पोंछ रही थी।
❤️ अगर ये कहानी दिल तक पहुँची हो
तो इसे शेयर ज़रूर करना…
क्योंकि हर माँ ने कभी न कभी
“आख़िरी रोटी” अपने बच्चों को दी है। 🙏
27/12/2025
अपने बचपन की कोई ऐसी ही याद कमेंट में शेयर करें जब आपने अपने पापा या मम्मी का हाथ बंटाया हो। 🥺
27/12/2025
“बाप का बैग”
सुबह स्कूल की घंटी बज चुकी थी…
सब बच्चे अपनी-अपनी किताबें निकाल रहे थे।
लेकिन 8 साल का अमन चुपचाप बैठा था।
उसके पास बैग तो था…
पर किताबें नहीं थीं।
टीचर ने डाँट दिया —
“रोज़ यही ड्रामा! कल से बिना किताब के मत आना!”
अमन की आँखें झुक गईं…
उसने कुछ नहीं कहा।
शाम को वो घर पहुँचा।
घर क्या था — बस टीन की छत और टूटी दीवारें।
उसका बाप, रघु, रोज़ की तरह मज़दूरी से लौटा था।
हाथ में छाले थे…
पसीने से कपड़े भीगे हुए थे।
अमन धीरे से बोला —
“बाबा… कल से नई किताबें लानी हैं…”
रघु ने कुछ नहीं कहा।
बस सिर हिला दिया।
उस रात रघु देर तक सो नहीं पाया।
क्योंकि अगली सुबह उसे याद आया —
👉 मज़दूरी के पैसे से घर का राशन भी पूरा नहीं हो रहा था।
👉 और बेटे की किताबों के पैसे… दूर की बात थी।
सुबह 4 बजे वो चुपचाप घर से निकला।
दोपहर को जब अमन स्कूल से लौटा…
तो दरवाज़ा खुला था।
अंदर देखा तो
बिस्तर पर पापा लेटे थे —
बहुत थके हुए…
हाथ में पट्टी बँधी हुई।
अमन घबरा गया —
“बाबा ये क्या हुआ?!”
रघु मुस्कुरा दिया —
“कुछ नहीं बेटा… बस गिर गया था।”
तभी पड़ोस वाली काकी बोली —
“गिरा नहीं था बेटा…
तेरे बाप ने आज खून बेचा है।”
अमन सन्न रह गया।
शाम को रघु ने चुपचाप एक बैग लाकर दिया।
नया बैग… नई किताबें… नई कॉपियाँ…
और बोला —
“कल से स्कूल मत छोड़ना बेटा…
तेरा बाप पढ़ा-लिखा नहीं है,
पर तुझे मज़दूर नहीं बनने दूँगा।”
अमन ने कांपते हाथों से बैग खोला…
अंदर किताबों के नीचे एक पर्ची थी —
“बेटा,
अगर कभी लगे कि पढ़ाई बेकार है,
तो मेरे ये ज़ख़्मी हाथ याद कर लेना।”
उस रात
अमन ने पहली बार अपने बाप को
सोते हुए रोते देखा।
और वहीं से उसने ठान लिया —
“अब पढ़ूँगा… सिर्फ़ अपने लिए नहीं,
अपने बाप के खून की क़ीमत चुकाने के लिए।”
💔 ये कहानी उन लाखों बापों की है
जो खुद टूट जाते हैं…
लेकिन बच्चों का भविष्य नहीं टूटने देते।
🙏 अगर आपके पापा ज़िंदा हैं —
तो एक बार जाकर बस इतना कह दीजिए…
“पापा… मैं समझ गया हूँ।”
❤️ इस कहानी को शेयर करो…
किसी एक बाप की मेहनत को सलाम मिल जाए,
यही काफी है।
26/12/2025
“माँ कब आएगी पापा…?”😢
बच्चे ने नींद में बुदबुदाया।
उस आदमी का सीना जैसे किसी ने निचोड़ दिया हो।
उसने जवाब नहीं दिया…
बस बच्चे को और ज़ोर से सीने से लगा लिया।
बच्चे को कौन समझाये की
अब इस घर में कभी भी
माँ की चूड़ियों की आवाज़ नहीं आएगी,
रसोई से कोई हँसी नहीं निकलेगी,
और रात को लोरी भी नहीं गूँजेगी।
यह बच्चा नहीं जानता
कि उसकी माँ अब तस्वीरों में ही रहेगी।
और यह भी नहीं जानता
कि जो आदमी दिन भर मज़दूरी करता है,
वही रात को उसे माँ बनकर सुलाता है।
दिन में
वो ईंटें उठाता है,
गालियाँ सुनता है,
थकान ओढ़े चलता है।
और रात को
वही हाथ
उस बच्चे के बाल सहलाते हैं,
वही सीना
माँ की ममता बनने की कोशिश करता है।
उसने माँ का प्यार
कभी सीखा नहीं था,
लेकिन मजबूरी ने उसे
सब कुछ सिखा दिया।
कभी-कभी
बच्चा डरकर उठ जाता है,
और कहता है —
“पापा, मुझे मम्मी चाहिए…”
पिता मुँह मोड़ लेता है,
क्योंकि अगर सामने देख लिया
तो आँसू पकड़ में आ जाएँगे।
वो जानता है
कि वह माँ नहीं बन सकता…
लेकिन यह भी तय है
कि इस बच्चे को
माँ की कमी महसूस नहीं होने देगा।
इस दुनिया में
सबसे मजबूर इंसान
वो बाप होता है
जो खुद टूटकर भी
अपने बच्चे के लिए
दो लोगों की तरह जीता है।
अगर ये कहानी
आपकी आँखें गीली कर गई हो…
तो इसे आगे बढ़ाइए।
शायद कोई और बच्चा
अपने मज़दूर बाप को
थोड़ा और कसकर गले लगा ले।
💔
Share करो… Comment में उस बाप के लिए दुआ लिखो, जो माँ भी है।
26/12/2025
😢 “वह बेंच आज भी खाली है”
हर शाम ठीक छह बजे
वह वृद्ध आदमी पार्क में आता था।
वही पुरानी बेंच…
वही थकी हुई चाल…
और हाथ में एक छोटा सा थैला।
लोग उसे रोज़ देखते थे,
लेकिन कोई यह नहीं जानता था
कि वह वहाँ क्यों आता है।
आज भी वह आया।
धीरे से बेंच पर बैठा
और पास की खाली जगह को देखने लगा।
फिर हल्की मुस्कान के साथ बोला —
“आज फिर देर कर दी तुमने…”
कोई उत्तर नहीं आया।
उसने थैले से एक टॉफ़ी निकाली,
आधी खुद खाई
और आधी बेंच पर रख दी।
आँखों में नमी भर आई।
फिर आसमान की ओर देखते हुए बोला —
“तुझे तो ये बहुत पसंद थी ना…”
हवा चल रही थी,
लेकिन उसके मन के अंदर
एक अजीब-सी खामोशी थी।
तभी पास से एक लड़का गुज़रा।
रुककर बोला —
“बाबा, आप रोज़ यहाँ क्यों आते हो?”
वृद्ध ने कुछ पल चुप रहकर कहा —
“यहीं आख़िरी बार मेरा बेटा मेरे साथ बैठा था…
उसने कहा था —
‘कल फिर आएँगे पापा।’”
उसकी आवाज़ भर्रा गई।
“कल कभी आया ही नहीं…
एक हादसे ने सब खत्म कर दिया।”
अब वह रोज़ आता है…
उसी समय…
उसी बेंच पर…
क्योंकि उसे लगता है —
शायद आज देर हो गई हो,
पर बेटा ज़रूर आएगा।
💔 सच यही है…
जो रोज़ साथ होते हैं,
उनकी अहमियत
उनके जाने के बाद ही समझ आती है।
👉 अगर इस कहानी ने दिल छू लिया हो
तो शेयर जरूर करें
क्योंकि कोई न कोई
आज भी किसी का इंतज़ार कर रहा है… 😔
कमेंट में उनका नाम जरूर लिखें
25/12/2025
😢 “माँ का आख़िरी मैसेज”
रात के 11 बजे थे।मोबाइल अचानक बजा।स्क्रीन पर लिखा था — “माँ”
मैंने कॉल काट दी।
सोचा, कल बात कर लूँगा… अभी बहुत थक गया हूँ।
माँ रोज़ यही करती थी।बिना वजह कॉल,बिना बात के मैसेज।
मुझे लगता था,माँ को क्या काम होता है?वो तो घर पर ही रहती है…
सुबह उठा तो मोबाइल में एक मैसेज था:
“बेटा, आज तेरी बहुत याद आ रही है…खाना टाइम से खा लेना।
मैंने तेरे लिए तेरी पसंद की सब्ज़ी बनाई है…
जब आएगा तो खिला दूँगी।”
मैं मुस्कुरा दिया।
सोचा, माँ भी ना…
दोपहर में ऑफिस से कॉल आया —“जल्दी घर आ जाओ…”
घर पहुँचा तोमाँ चुपचाप लेटी हुई थी।
डॉक्टर ने बस इतना कहा —
“हम कुछ नहीं कर पाए…”
मेरे हाथ काँपने लगे।मोबाइल गिर पड़ा।
उसी मोबाइल मेंमाँ का वो आख़िरी मैसेज चमक रहा था…
“खाना टाइम से खा लेना…”
आज भीखाना सामने रखा होता हैलेकिन निगल नहीं पाता।
आज भीमोबाइल बजता हैतो लगता हैमाँ ही होगी…
काश…उस रात कॉल उठा लिया होता।
काश…एक बार बोल दिया होता —“हाँ माँ, मैं ठीक हूँ।”
💔 अगर आपकी माँ ज़िंदा है…
तो आज ही:
उन्हें कॉल करें
उनसे प्यार से बात करें
और कहें — “माँ, मैं आपसे बहुत प्यार करता/करती हूँ”
⏳ समय बहुत बेरहम होता है…ये दोबारा मौका नहीं देता।
👉 अगर ये कहानी दिल को छू गई होतो comment में सिर्फ़ “माँ ❤️” लिख दीजिए।शायद ऊपर कहीं…एक माँ मुस्कुरा दे।
😢
04/09/2025
अब भारत ने वो कर दिखाया जो बड़ी बड़ी महाशक्तियां नहीं कर पाए !
04/09/2025
कोई शेयर नहीं करेगा इसको वरना आईडिया चोरी हो सकता है 😂😂
09/06/2025
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