Akbar Raza
Legal & Social Welfare Work
ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मीं
पांव फैलाऊं तो दीवार पे सर लगता है
बशीर बद्र
अपना दामन पाक रखने की दुआ करना ✍️
हम अहले दीन हैं रब के सिवा मांगा नहीं करते 😊❤️🤲
अहमियत रोशनी की, ना समझा कोई बस्ती में.!
चराग़ छोड़ दिये सारे, आँधियों की सरपरस्ती में.!
क़ातिल ने किस सफ़ाई से धोई है आस्तीं
उस को ख़बर नहीं कि लहू बोलता भी है
रब की अदालत में सिर्फ़ नमाज़, हज,नहीं,लोगों के साथ आपका बर्ताव भी तौला जाएगा। क्योंकि बंदों के हक़, उनकी माफ़ी के बिना माफ़ नहीं होते।
ज़ुल्म को सब्र के तूफ़ान से डर लगता है।
जब अपने पर गरूर आने लगे,सिर्फ मिट्टी से पूछ लेना ,कि आजकल सिकंदर कहाँ है...!!!
नया इतिहास कहता है,
उजालों की विरासत पर अँधेरे राज करते हैं.
किसी ने कम ज़र्फ़ तो किसी ने आला ज़र्फ़ जाना मुझे
जिसका जितना ज़र्फ़ था उसने उतना ही पहचाना मुझे
مرد نظریں جھکانا نہیں چاہتا عورت پرده کرنا نہیں چاہتی مگر تلاش دونوں کو عزت دار کی ہوتی ہے
حیرت ہے ویسے 🤔
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