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01/11/2025

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01/11/2025

किसी गांव में एक देव नाम लड़का रहता था। वह बहुत मेहनती और कर्मठशील था, शरीर में थोड़ा दुबला सा था मगर चेहरा ऐसा जैसे चांद का लेप लगाया हो।
गांव के सभी लोगों का सम्मान करता था,लोग भी उसकी खूब सराहना करते थे।
उसके पिता एक किसान थे और मां घर का काम देखती थी खुद की ज़मीन न होने पर उसके पिता दूसरे लोगों के खेतों में काम करते थे, वह भी अपनी पढाई के साथ साथ पिता के काम में हाथ बटाया करता रहता था।
गांव में स्कूल न होने के कारण उसको 2 मील दूर दूसरे गांव जाकर शिक्षा प्राप्त करनी पड़ती थी उसके गांव का ही उसका एक सहपाठी था जिसका नाम फिरोज था वो दोनों स्कूल से आते वक्त ही अपना गृह कार्य पूर्ण कर लिया करते थे ।
घर आकर देव अपना बस्ता रख कर सीधा अपने खेतों की ओर खेलता हुआ दौड़ा जाता था जिधर बीच में ही फिरोज का घर पड़ता था तो दोनों साथ में ही ठिठोलिया करते खेतों में खेला करते थे।
देव की उम्र लगभग 13 वर्ष की थी और फिरोज उससे 3 माह बड़ा था लेकिन दोनों एक जैसे ही दिखते थे, फिरोज के पिता एक नामी सौदागर थे जो खेतों की फसलों को खरीद बेचा करते थे लेकिन फिरोज की मां नहीं थी पर उसकी एक दादी थी जो दोनों बच्चों को अपना मानती थी, वहीं देव की मां भी फिरोज को अपने बेटे की तरह प्यार करती थी।
दोनों मित्रो को पूरा गांव,बहुत अच्छे ओर सच्चे दोस्त के लिए भी जानता था।
देव पढ़ने में माहिर था जहां दूसरे बच्चे मास्टर जी के अनुपस्थित होने के कारण बातें करते थे वहीं देव चुपचाप कोने में बैठकर पढ़ता रहता था।
देव को कहानियां लिखने ओर कला (चित्रकारी) का उसे बड़ा शौक था। गत वर्ष स्कूल में हुए पर्यावरण दिवस पर उसने पर्यावरण पर बहुत अच्छा निबन्ध लिखा और कला के माध्यम से सबको जागरूक करवाया जिस कारण स्कूल के हेडमास्टर ने उसको इनाम भी दिया।
जहां देव स्कूल जाता था वहां किसी दूसरे गांव से लड़कियां भी आती थीं लेकिन देव सिर्फ अपनी दोस्ती ओर पढाई में मन लगाता था किसी अन्य में नहीं
लेकिन गत महीने एक लड़की का दाखिला हुआ जो देव का मन मोह गई
हिरन सी आंखे सुनहरे बाल मानो परियों की रानी हो
देव उसको देखने मात्र से मंत्रमुग्ध हो गया और वह लड़की पहली नजर में उसकी दिल की गहराई में जा बसी
अब देव रोज उसके आने का इंतजार करता जब वो उसको दिख जाती तो अपने दिल पर हाथ फेरते हुए मुस्कुराता वह बस सोचता था कि वह उससे दोस्ती कर ले किसी तरह उसने अपने घनिष्ठ मित्र को भी उसके बारे में बता दिया था कि वह उसको पसन्द करता है और उससे दोस्ती करना चाहता है
मगर देव को उसका नाम तक मालूम नहीं था कुछ दिनों बाद देव के मित्र ने कही से उस लड़की का नाम सुना तो उसने तुरंत देव को नाम बताया
नाम सुनने के पश्चात् मानो जैसे देव ने उसका नाम अपने कलेजे पर कहीं लिख ही लिया हो वह बार बार मंद मंद उसका नाम पुकारता रहता ओर मुस्कुराता रहता।
लड़की का नाम सुभा था वह एक व्यापारी की बेटी थी, उसके पिता उसके आस पास के गांवों के सबसे बड़े व्यापारी थे सेठ चंद्रदास, स्कूल के हेडमास्टर से उनकी अच्छी जानकारी थी जिस कारण उनकी बेटी को जल्दी से दाखिला मिल गया था क्योंकि पहले जिस स्कूल में उनकी बेटी सुभा पढ़ती थीं वह स्कूल पिछले महीने आई तेज बारिश में डूब गया था जिस कारण उसको बंद करना पड़ा लेकिन बेटी की पढाई को लेकर सेठ जरा भी संकोच नहीं करते थे इसलिए उन्होंने जल्दी से हेडमास्टर से बात करके इस स्कूल में दाखिला दिलवा दिया।
दोनों एक कक्षा में थे लड़कों की पंक्ति में देव तीसरी लाइन के तीसरे नंबर पर बैठता था वहीं सुभा लडकियों की पंक्ति में दूसरी लाइन में पहले नंबर पर बैठने लगी। देव की नज़र जब भी सुभा की ओर पड़ती उसको बस उसकी पीठ दिखाई देती थी और उसकी गुंथी हुई चोटी। देव चाहता था कि किसी कारणवश उसे सुभा से बोलने का मौका मिले,वह उससे बात करके उसके हाव भाव जानना चाहता था। दो महीनों तक ऐसा ही चलता रहा ...........

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