Manoj Dwivedi

Manoj Dwivedi

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सुविचार

Photos from Manoj Dwivedi's post 20/08/2024

आज दिन बहुत खास है,

बहन के लिए कुछ मेरे पास है।

उसके सुकून के खातिर ओ बहना,

तेरा भाई हमेशा तेरे आस-पास है।

11/07/2024
04/07/2024

Happy First Day Of School
Tata international school sagra rewa

30/05/2024

"पूत कपूत तो का धन संचय, पूत सपूत तो का धन संचय "
अगर आप कभी वृद्धा आश्रम जाएं तो वहां पर उपस्थित वृद्धों से पूछना कि आप के बेटे क्या करते हैं…?
तो उत्तर मिलेगा कि मेरा बेटा अधिकारी है, डाक्टर है, वकील है, इंजीनियर है, मजिस्ट्रेट है, अध्यापक है, विदेश में है……!

पर एक भी वृद्ध आपको नहीं मिलेगा जो कहे कि…
मेरा बेटा गरीब या अनपढ़ हैं, क्योंकि अनपढ़ या गरीब के मां बाप कभी वृद्ध आश्रम तक नहीं पहुंचते…! और सबसे अहम भूमिका इनको वृद्धाश्रम पहुंचाने वाली इनकी बहुएं यानि कि इनके बेटों की पत्नियां होती हैं! यह आधुनिक युग का सत्य है!

कुछ लड़कियों को अपने माता - पिता के वृद्धावस्था की सारी स्थितियां समझ आती है लेकिन अगर बात उनके सास - ससुर की हो तो सब नाटक लगता है ! 😐😐

बच्चो के जीवन में रंग भरते भरते मां बाप के बाल सफेद हो जाते हैं, दुःख तो तब होता है जब सुनने को मिलता है " आपने हमारे लिए किया ही क्या है..? 🤷

आजकल कुछ माता पिता के द्वारा भी अपने बच्चों के साथ भेदभाव की खबरें आ रहीं हैं इसलिए उनसे भी निवेदन है कि अपने बच्चों के साथ भी किसी प्रकार का भेदभाव न करें। ताकि शिष्टाचार, नैतिक मूल्यों और संस्कृति को कोई अभिशाप घोषित न कर पाए।

नोट :- माता पिता की सेवा सर्वोपरि है मित्रों हम माता पिता के सदैव ऋणी रहेगें इसलिए उनकी सेवा में ही हमारी खुशियां हैं। 👏🙋🌼💐 यदि पोस्ट पसंद आए तो फॉलो करें 🙏

28/05/2024

Kyon manushya paapi hai

23/05/2024

**,,आज का समय,,**

*अच्छी थी, पगडंडी अपनी।*
*सड़कों पर तो, जाम बहुत है।।*

*फुर्र हो गई फुर्सत, अब तो।*
*सबके पास, काम बहुत है।।*

*नहीं जरूरत, बूढ़ों की अब।*
*हर बच्चा, बुद्धिमान बहुत है।।*

*उजड़ गए, सब बाग बगीचे।*
*दो गमलों में, शान बहुत है।।*

*मट्ठा, दही, नहीं खाते हैं।*
*कहते हैं, ज़ुकाम बहुत है।।*

*पीते हैं, जब चाय, तब कहीं।*
*कहते हैं, आराम बहुत है।।*

*बंद हो गई, चिट्ठी, पत्री।*
*व्हाट्सएप पर, पैगाम बहुत है।।*

*आदी हैं, ए.सी. के इतने।*
*कहते बाहर, घाम बहुत है।।*

*झुके-झुके, स्कूली बच्चे।*
*बस्तों में, सामान बहुत है।।*

*नही बचे, कोई रिश्तेदार ।*
*अकड़ का, एहसान बहुत है।।*

*सुविधाओं का, ढेर लगा है।*
*पर इंसान, परेशान बहुत है।।*

17/05/2024

सर पे सिंदूर का “फैशन” नही है,
गले मे मंगलसूत्र का “टेंशन” नही है!

माथे पे बिंदी लगने मे शर्म लगती है,
तरह तरह की लिपस्टिक अब होंठो पे सजती है!

आँखो मे काजल और मस्कारा लगाती हैं,
नकली पलकों से आँखो को खूब सजाती हैं!

मूख ऐसा रंग लेती हैं की दूर से चमकता है,
प्रफ्यूम इतना तेज की मीलों से महकता है!

बालो की “स्टाइल” जाने कैसी -कैसी हो गयी,
वो बलखाती लंबी चोटी ना जाने कहाँ खो गयी!

और परिधान तो ऐसे “डिज़ाइन” मे आये हैं,
कम से कम पहनना इन्हे खूब भाये है!

आज अंग प्रदर्शन करना मजबूरी सी लगती है,
सोचती है इसी मे इनकी खूबसूरती झलकती है

पर आज भी जब कोई भारतीय परिधान पहनती है,
सच बताऊं सभी की आँखे उस पे ही अटकती है!

सादगी, भोलापन और शर्म ही भारतीय स्त्री की पहचान है,
मत त्यागो इन्हें यही हमारे देश का स्वाभिमान है....

वन्दे मातरम

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