Arvind Tiwari

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सामाजिक न्याय एवं निःशक्त विभाग म.प्र.शासन द्वारा संचालित योजनाओं का क्रियान्वयन

Photos from Arvind Tiwari's post 30/06/2023
29/06/2023
Photos from Arvind Tiwari's post 29/06/2023

बेटी के ब्याह/निकाह की चिंता हर गरीब/अमीर परिवार को होती है।
हर पिता चाहता है, कि अपनी बेटी को विवाह/निकाह के समय अपनी सारी दौलत उड़ेल दे, पर अपनी घरेलू और पारिवारिक बुराइयों के कारण ऐसा नहीं कर पाता।
यदि वह ऐसा करता है, तो वह सड़क पर आ जाता है।

ऐसे निर्धन परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए मध्यप्रदेश शासन सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना सामूहिक विवाह सम्मेलन के माध्यम से न केवल विवाह आयोजित करवाता है, बल्कि वधू को गृहस्थी बसाने का लिए आर्थिक सहयोग भी देता है।
आइये यह जानकारी किसी परिवार से साझा कर किसी परिवार को उजड़ने से बचाएं।

"बेटी के विवाह के लिए पैसों की चिंता छोड़ना,,.....
गरीब परिवार को सहारा देगी, शासन की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना....,"

शासन के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत जनपद त्योंथर क्षेत्रान्तर्गत दिनांक 28 जून 2023 को शिव सांई मैरिज गार्डन दुअरा में सामूहिक विवाह सम्मलेन का आयोजन किया गया।

01/01/2023

नव वर्ष 2023 की पहली किरण आपके जीवन मे नई ज्योति प्रज्ज्वलित कर आपके पुराने अधंकार को मिटाए।

घर, परिवार सभी को खुशहाल बनाए, जिससे आप हमेशा मुस्कुराएं।

प्रभु से यही हैं, मेरी प्रार्थनाएं 💐💐

आपको सपरिवार नववर्ष 2023 की शुभकामनाएं💐💐

-अरविन्द तिवारी

25/10/2022

कोई हजारों के पटाखे उड़ा कर खुशियाँ मनाता है,,,,, तो कोई सूखा चावल ही आपस मे मिलकर खाता है,,,,, ऐसी है हमारी दीवाली...💐💐

24/10/2022

संदेश गहरा है.....अफसोस आदमी ही बहरा है,,.....

24/10/2022

चंद रिचकारियां मुठ्ठी में लिए,
खड़ा था वो पटाखे की चाह में,
कुछ न बोला कुछ न कहा वो,
अकेला था वो इस राह में,
मेरे पूछने पर न में सिर हिलाया,
बोला कुछ न चाहिए मुझे,
फिर खड़ा देखा उसे पटाखे की चाह में,
फटे पुराने कपड़े थे उसके,
और भूख में तड़पते देखा,
उम्र में तो वो बड़ा ही छोटा था,
हृदय में स्वाभिमान पलते देखा है,
हां मैने उस मासूम की आंखो में,
दीवाली को मरते देखा है।....

मुस्कुराते, हंसते दीप जलाएं,
आपसी भेदभाव मिटाएं,
दुःख दर्द भूलकर आइए, सबको गले लगाएं,
इस दीपावली से समाज को अपना परिवार बनाएं.....

आप सभी को दिवाली की हार्दिक बधाई💐💐💐

23/10/2022

# यादें बचपन की

हमारे जमाने में साइकिल तीन चरणों में सीखी जाती थी ,पहला चरण कैंची और दूसरा चरण डंडा तीसरा चरण गद्दी........

तब साइकिल चलाना इतना आसान नहीं था क्योंकि तब घर में साइकिल बस पिताजी या चाचा चलाया करते थे तब साइकिल की ऊंचाई 40 इंच हुआ करती थी जो खड़े होने पर हमारे कंधे के बराबर आती थी ऐसी साइकिल से गद्दी चलाना संभव नहीं होता था...

"कैंची" वो कला होती थी जहां हम साइकिल के फ़्रेम में बने त्रिकोण के बीच घुस कर दोनो पैरों को दोनो पैडल पर रख कर चलाते थे।

आज की पीढ़ी इस "एडवेंचर" से मरहूम है उन्हे नहीं पता की आठ दस साल की उमर में 40 इंच की साइकिल चलाना "जहाज" उड़ाने जैसा होता था...

हमने ना जाने कितने दफे अपने घुटने और मुंह तोड़वाए हैं और गज़ब की बात ये है कि तब दर्द भी नहीं होता था, गिरने के बाद चारो तरफ देख कर चुपचाप खड़े हो जाते थे अपने हाफ कच्छे को पोंछते हुए।

अब तकनीकी ने बहुत विकास कर लिया है पांच साल के होते ही बच्चे साइकिल चलाने लगते हैं वो भी बिना गिरे। दो दो फिट की साइकिल आ गयी है, और अमीरों के बच्चे तो अब सीधे गाड़ी चलाते हैं छोटी छोटी बाइक उपलब्ध हैं बाज़ार में...

मगर आज के बच्चे कभी नहीं समझ पाएंगे कि उस छोटी सी उम्र में बड़ी साइकिल पर संतुलन बनाना जीवन की पहली सीख होती थी! "जिम्मेदारियों" की पहली कड़ी होती थी जहां आपको यह जिम्मेदारी दे दी जाती थी कि अब आप गेहूं पिसाने लायक हो गये हैं...

इधर से चक्की तक साइकिल लुढकाते हुए जाइए और उधर से कैंची चलाते हुए घर वापस आइए ! इस जिम्मेदारी को निभाने में खुशियां भी बड़ी गजब की होती थी...

और ये भी सच है की हमारे बाद "कैंची" प्रथा विलुप्त हो गयी, हम लोग की दुनिया की आखिरी पीढ़ी हैं जिसने साइकिल चलाना तीन चरणों में सीखा !

पहला चरण कैंची

दूसरा चरण डंडा

तीसरा चरण गद्दी

(फिर बादशाहों वाली फीलिंग्स)

05/10/2022

मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान शिविर के माध्यम से ग्राम पंचायत भ्रमण

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