Rewa Times Now
REWA TIMES NOW☑
OFFICIAL PAGE☑
✍✍✍ज़िद है, सच दिखाने की? NEWS COMPANY
27/03/2026
उच्च न्यायालय का अंतिम आदेश..........
* चुनौती दी गई कंडिका (Clause 2) को निरस्त (Set aside) कर दिया गया है.
* याचिकाकर्ता अब अपनी परिवीक्षा अवधि (Probation) के दौरान भी 100% वेतन पाने के हकदार हैं।
* अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं के बकाया वेतन (Arrears) और अन्य लाभों की गणना करके 90 दिनों के भीतर भुगतान किया जाए.
यह रहा जबलपुर उच्च न्यायालय द्वारा 20 मार्च, 2026 को पारित आदेश (WP No. 6262 of 2026) का सरल हिन्दी सारांशः
मामला क्या था?
आनंद कुमार लोधी और अन्य याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के एक आदेश (दिनांक 22.04.2024) की कंडिका 2 (Clause 2) को चुनौती दी थी। यह कंडिका सरकार के उस नियम पर आधारित थी, जिसके तहत सरकारी नौकरी में परिवीक्षा अवधि (Probation Period) के दौरान कर्मचारियों को पूरा वेतन न देकर किस्तों में (पहले साल 70%, दूसरे साल 80% और तीसरे साल 90%) वेतन दिया जाता था।
कोर्ट के सामने मुख्य तर्क
* याचिकाकर्ता का पक्षः उनके वकील ने तर्क दिया कि इंदौर की डिवीजन बेंच पहले ही 'राज्य बनाम दिल्लीराज भीलाला' और 'इंदौर नगर निगम बनाम विनीता तिवारी' के मामलों में इस नियम को गलत ठहरा चुकी है। कोर्ट ने माना था कि समान काम के लिए कम वेतन देने का कोई तार्किक आधार नहीं है।
* राज्य सरकार का पक्षः सरकारी वकील ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि विज्ञापन की शर्तें सरकारी सर्कुलर (दिनांक 12.12.2019) के अनुसार थीं, इसलिए इसमें किसी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
न्यायालय का निर्णय
माननीय न्यायमूर्ति मनिंदर एस. भट्टी ने पिछले फैसलों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनायाः
* भेदभाव का अंत: कोर्ट ने कहा कि MPPSC से नियुक्त और अन्य माध्यमों से नियुक्त कर्मचारियों के बीच वेतन को लेकर ऐसा भेदभाव करना अनुचित है।
* समान कार्य, समान वेतनः 'समान कार्य के लिए समान वेतन' के सिद्धांत के तहत, परिवीक्षा अवधि में भी कर्मचारी पूरे न्यूनतम वेतन का हकदार है।
* सर्कुलर रद्दः कोर्ट ने उस सर्कुलर को तर्कहीन मानते हुए याचिकास्वीकार कर ली।
27/03/2026
07/03/2026
परिवीक्षा अवधि में वेतन कटौती के निर्णय के विरुद्ध अपील करना अनुचित.........
हाई कोर्ट ने वरिष्ठता को अहम मानते हुए डॉक्टर आर.बी. चौधरी जी को रीवा CMHO बनाने के निर्देश दिए
08/01/2026
📄 उच्च न्यायालय का आदेश (दिनांक 06-01-2026) – सरल हिंदी में
🔍 यह मामला किस बारे में है?
यह मामला परिवीक्षा अवधि (Probation) के दौरान सरकारी कर्मचारियों के वेतन से की गई रिकवरी (कटौती) से संबंधित है, जो कि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के दिनांक 12-12-2019 के परिपत्र पर आधारित थी।
उस परिपत्र के अनुसार:
पहला वर्ष (Probation) → 70% वेतन
दूसरा वर्ष → 80% वेतन
तीसरा वर्ष → 90% वेतन
बाद में जब कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया गया, तो सरकार ने “अधिक भुगतान” कहकर मासिक वेतन से रिकवरी शुरू कर दी।
⚖️ उच्च न्यायालय ने क्या निर्णय दिया?
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर पीठ) ने पूरी तरह से:
❌ सभी वेतन रिकवरी आदेशों को निरस्त कर दिया
❌ GAD का परिपत्र दिनांक 12-12-2019 को अमान्य घोषित कर दिया
न्यायालय ने कहा कि यह परिपत्र: 👉 अवैध (Illegal) और तर्कहीन (Illogical) है।
🧠 न्यायालय का मुख्य तर्क
1️⃣ समान कार्य के लिए समान वेतन
यदि कोई कर्मचारी:
विधिवत चयन प्रक्रिया से नियुक्त हुआ है
पद पर पूर्णकालिक कार्य कर रहा है
👉 तो उसे परिवीक्षा अवधि में भी पूर्ण न्यूनतम वेतनमान (Full Minimum Pay Scale) पाने का अधिकार है।
2️⃣ कोई वैध वर्गीकरण नहीं
MPPSC से नियुक्त कर्मचारियों को पूरा वेतन मिल रहा था
अन्य कर्मचारियों को 70% / 80% / 90% वेतन दिया जा रहा था
❌ यह भेदभाव कानूनी रूप से उचित नहीं है।
3️⃣ पूर्व के निर्णयों का पालन
न्यायालय ने इन मामलों पर भरोसा किया:
State of MP vs. Dilliraj Bhilala (WA 1498/2024)
Indore Municipal Corporation vs. Vinita Tiwari (WA 2977/2025)
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का समान निर्णय
✅ अंतिम आदेश (बहुत महत्वपूर्ण)
उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि:
✔ सभी रिकवरी आदेश रद्द किए जाते हैं
✔ जो राशि पहले वसूल की गई है, वह वापस की जाए
✔ जिन कर्मचारियों को परिवीक्षा में 100% वेतन नहीं मिला, उन्हें उस अवधि का पूरा वेतन व एरियर दिया जाए
📌 इसका आपके लिए व्यावहारिक अर्थ
🔹 यदि परिवीक्षा के कारण वेतन काटा गया → आप रिफंड मांग सकते हैं
🔹 यदि पहले 70% / 80% / 90% वेतन मिला → आप एरियर के हकदार हैं
🔹 यह निर्णय कर्मचारियों के पूरी तरह पक्ष में है
माना की शब्दो का चयन सही नहीं था। लेकिन मीडिया प्लेटफॉर्म में पूरा वीडियो चलाना था। IAS संतोष वर्मा जी का ओरिजिनल वीडियो पूरा जरूर देखें! #रीवा
Birsa Munda Government medical & Hospital Shahdol कि व्यवस्था चिंतनीय विषय है?
23/06/2025
*आखिर पकड़ा गया निवेशकों से करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाला जालसाज नीरज प्रताप सिंह*
जबलपुर में भी लगाया करोड़ों का चूना
आधा सैकड़ा लोगों आ चुके हैं सामने
रीवा से भोपाल तक फैला था कारोबार
कुछ बड़े अफसरों के शामिल होने का संदेह
*रीवा समाचार/Ⓜ️/S✍🏻*
रीवा से लेकर जबलपुर, भोपाल तक कई जिलों में निवेशकों के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाला आरोपी नीरज प्रताप सिंह आखिर पुलिस की पकड़ में आ गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार उसे जबलपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ज्ञात हो कि आरोपी नीरज प्रताप सिंह रीवा जिले के ग्राम टिकुरी का निवासी है जिसके खिलाफ न केवल रीवा में धोखाधड़ी का एफआईआर समान थाने में दर्ज था अपितु उसी तरह के प्रकरण में जबलपुर के बर्गी थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। रीवा में एफआईआर दर्ज होने के बाद वह वर्तमान जबलपुर में पचौरी टावर, संजीवनी नगर, सतपुड़ा एवेन्यू गढ़ा एवं भोपाल से अपना गोरखधंधा संचालित कर रहा था। किन्तु रीवा पुलिस उसे पकड़ने में नाकाम रही। यहां की पुलिस ने उसे पकड़ने के लिये कोई प्रयास ही नहीं किया। बताया जाता है कि वह अपने धनबल के दम पर थाने को ही
मैनेज कर रखा था। किन्तु जबलपुर में ऐसा नहीं कर पाया। लिहाजा उसे पुलिस द्वारा दबोच लिया गया।
*अर्थ विल्डर्स के नाम पर चला रहा था गोरखधंधा*
ज्ञात हो कि नीरज प्रताप सिंह रीवा सहित जबलपुर, भोपाल, सीहोर आदि कई जिलों में अर्थ विल्डर्स एण्ड डेवलपर्स के नाम पर अपना गोरखधंधा संचालित कर रहा था। जहां उसके द्वारा कई निवेशकों को भूखण्ड उपल्ब्ध करवाने, तीन साल में निवेशकों से लिये गये धन को दो गुना वापस करने, बैंक से कर्ज दिलवाकर निवेश करने आदि के माध्यम से ठगी का काम कर रहा था। रीवा में समदड़िया माल की तीसरी मंजिल में अपना कार्यालय बना रखा था। समान थाने में उसके खिलाफ दिनांक 7 फरवरी 2025 को धारा 420 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। जहां निवेशकों के अनुसार 89 लाख की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। रीवा में और भी कई ऐसे निवेशक हैं जिनकी शिकायत थाने तक अभी नहीं पहुंच पाई। अन्यथा लूट का दायरा एक करोड़ से अधिक पहुंच सकता था। फरियादी रामानुज चौधरी पिता रामजियावन चौधरी निवासी अरूण नगर सहित अनुसुईया प्रसाद साकेत, रामकली चौधरी, डा. राकेश कुमार धनकर, डा. आरबी चौधरी, शिवनाथ साकेत, भोलेनाथ शाहनी आदि से कुल 89 लाख का निवेश करवाया गया था और 2-3 साल में दो गुना राशि देने का अनुबंध किया गया था। किन्तु जब ऐसा नहीं हुआ तो सभी ने संयुक्त रूप से शिकायत कर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाया। इसके बाद से आरोपी नीरज प्रताप सिंह रीवा से फरार हो गया और भोपाल व जबलपुर में अपना ठिकान बना लिया। हालांकि वह जबलपुर व भोपाल में भी पहले से ही धोखाधड़ी कर रहा था।
*जबलपुर में भी करोड़ों लूटा*
बताया गया है कि जबलपुर के बरगी थाना क्षेत्र के जोगीहाना और हर्रई में कई निवेशकों को सुनहरे सपने दिखकार एक करोड़ से अधिक की लूट किया। जहां उसके खिलाफ बरगी थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई। जहां आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 0272/2025 एवं दिनांक 20.6.2025 अंतर्गत धारा 406, 420, 467, 468 एवं 471 भादवि के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। जबकि रीवा पुलिस ने केवल 420 के तहत ही प्रकरण दर्ज किया था। बताया गया है कि जबलपुर में भूखण्डों की बुकिंग के नाम पर कई निवेशकों को फसाया और करोड़ो की राशि अनुबंध के तहत इन्वेस्ट भी करवाया। किन्तु पैसा पाने के बाद वह वादों से मुकर गया। निवेश करने के बाद भी कई लोगों की रजिस्ट्री तक नहीं करवाई तो कई लोगों को सरकारी भूमियों की रजिस्ट्री करवा दिया या अनुबंध में लिखे खसरों से भिन्न नम्बर दे दिये। रीवा की तर्ज पर जबलपुर में भी किसी से 10 लाख, 8 लाख तो किसी से और अधिक जितना खींच सकता था उतना खींचने का प्रयास किया। खबर है कि उसके पकड़े जाने तक करीब 50 पीड़ित केवल जबलपुर में ही सामने आ चुके थे। इससे समझा जा सकता है कि नीरज प्रताप सिंह कितना बड़ा जालसाजी का गिरोह संचालित कर रहा था। वर्तमान में वह पुलिस के रिमाण्ड में है।
*पुलिस अधिकारियों एवं कई बड़े अफसरों की पूंजी निवेश की भी चर्चा*
खबर तो यह भी है कि नीरज प्रताप सिंह की कारोबार में कुछ बड़े पुलिस अधिकारियों एवं आई आरएस, आईएफएस जैसे पदों वाले बड़े अधिकारियों की पूजी भी लगी होने की चर्चा है। कहा तो यह भी जा रहा है कि ऐसे बड़े अधिकारियों की भूमियों का अनुबंध करके नीरज प्रताप सिंह रीवा से लेकर जबलपुर एवं भोपाल तक अर्थ विल्डर्स के नाम पर भूखण्ड बिक्री करने एवं निवेशकों से मोटी रकम जमा करवाकर दो गुना करने का गोरखधंधा कर रहा था। जांच होगी तो एक बड़ा नेटवर्क भी प्रकाश में आ सकता है जो उसके संरक्षण में सक्रिय रहा।
*क्या रीवा पुलिस आरोपी से पूंछतांछ करने लेगी रिमाण्ड में*
अब सवाल यह उठता है कि जब जालसाजी एवं धोखाधड़ी का आरोपी नीरज प्रताप सिंह पुलिस द्वारा पकड़ा जा चुका है तो क्या रीवा पुलिस उसे पूंछतांछ के लिये रिमाण्ड पर रीवा लाने का प्रयास करेंगी ...? क्या रीवा पुलिस उससे जुड़े गिरोह का पर्दाफास कर पायेगी जो अभी तक न तो नामित हो पाये और न ही उनकी पहचान ही हो पाई है? क्या समदड़िया माल स्थित उसके कार्यालय की भी जांच पड़ताल हो पायेगी? इस तरह के सवाल इसलिये उठ रहे हैं कि धोखाधड़ी के आरोपी नीरज प्रताप सिंह को पकड़ने में यहां की समान पुलिस जिस तरह से निष्क्रिय रही उस तरह से अन्य मामलों में नहीं रही। पुलिस थाने में ऐसा कौन साथ चेहरा था जो उसको संरक्षण दे रहा था?
*अपना नाम तो बदला पिता को भी बदल लिया था*
ज्ञात हो कि नीरज प्रताप सिंह ने जालसाजी में केवल अपने पिता को भी नहीं छोड़ा। उसने जहां अपना नाम बदल कर नीरज प्रताप सिंह कर दिया वहीं पिता का भी नाम बदल दिया। याने अपने बाप को भी बदल डाला। पिता का नाम लल्ली साकेत बताया जाता है किन्तु उसने बदल कर ललित प्रताप सिंह कर लिया और अपना नाम फिर नीरज ललित प्रताप सिंह लिखना शुरू कर दिया। इससे पता चलता है कि वह कितना शातिर दिमाग का था। जिसने धोखाधड़ी व जालसाजी के दम पर बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया था। जांच हो तो यह भी पता चल सकता है कि समदड़िया विल्डर्स के कुछ शातिर कर्मचारियों का भी कनेक्शन निकल सकता है। जो वहां काम करने के साथ बैकडोर से जमीनी कारोबार भी करते हैं।
21/04/2025
शराबखोरी करते पकड़े गए मेडिकल कॉलेज में वाटर सप्लाई के कर्मचारी - HEH ओटी सहित विभिन्न वार्ड व विभागों में आए दिन नहीं पहुंच रहा पानी …..मेडिकल कॉलेज...
10/04/2025
3 साल 70,80,90% वेतन नियम..सरकार विपक्षी पार्टी के बनाये इस नियम कानून को नही बदलेगी..👀
11/01/2025
बुद्धं शरणं गच्छामि , संघं शरणं गच्छामि
Good Morning 🌞 Welcome to Rewa Times Now
Click here to claim your Sponsored Listing.