Sayari
good love bad love What Am what
गीता के इस श्लोक का अनुवाद किसी कवि ने बहुत सुंदर किया है।उनका नाम संभवतः: श्री रामनरेश त्रिपाठी है।
*"मृत्यु एक सरिता है,जिसमें श्रम से कातर जीव नहाकर।*
*फिर नूतन धारण करता है,काया रूपी वस्त्र बहाकर।।"*
इधर कुछ दिनों तक आपने गीता का श्लोक डालना शायद बंद कर दिया था।मैं नित्य आपके नए श्लोक को पढ़ता हूँ , इसलिए खैजता रहता हूँ क्योंकि जगद्गुरु आद्य शंकराचार्य जी ने कहा है-
*"भगवद्गीता किञ्चिदधीता गङ्गाजल लवकणिका पीता।* *तस् यम: नहि कुरुते चर्चा।..."*
अन्यत्र फिर वह कहते हैं कि-
*"गेयं गीतानामसहस्त्रं , ध्येयं श्रीपतिरूपमजस्रम्।..."*
और गीता माहात्म्य में तो बहुत कुछ लिखा गया है जो सर्वविदित है अतः: हम उसका पिष्ट-पेषण नहीं कर रहे हैं।इसी बहाने यदि अधिक नहीं तो कम से कम एक श्लोक तो आँखों के सामने आ ही जाता है। यद्यपि पाठ का फल तो नहीं मिल सकता क्योंकि वह स्नान करके पवित्र हैकर पाठ करने से ही मिलता है-
*"य: पठेत् #प्रयतो पुमान्।"*
फिर भी भगवान् के श्रीमुख से डायरेक्ट निकले हुए शब्दों का साक्षात्कार तो होता ही है।यह सोच सकते हैं कि ठीक है हम पढ़ते हैं,तो पढ़ें किन्तु यह सब बताने की क्या जरूरत है? तो उसका कारण है कि इसकी महत्ता को जानकर शायद अन्य कोई भी इस पथ पर चलकर लाभान्वित हो सकें क्योंकि एक तो *"गतानुगतिको लोक:।"* और दूसरे -
*"संग्रह त्याग न बिनु पहिचाने।*
*ताते मैं अति अलप बखाने।।"*
धन्यवाद।सभी मित्रों को सुप्रभात एवं शुभ दिन।
*"सर्वे भवन्तु सुखिनः।"*
💐🌷🙏🏻🌹🌺🕉️🚩
अच्छा और बुरा ,शुभ और अशुभ आदि द्वंद्वों से होकर गुजरना संसार की फितरत है। इसके बिना संसार का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। परमात्मा की यह रचना कर्म भोगने का क्रीडास्थल है।अशुभ
का अस्तित्व बुरे कर्मों का परिणाम है। फल भोगने के बाद यह स्वतः ही गायब हो जाता है।
संसार को गतिमान करने हेतु कर्म की भूमिका को नकारा नहीं
जा सकता। इस चक्र का अनवरत चलना संसार हेतु परमावश्यक है। जीव को जाग्रत करने के लिए अशुभ आदि नकारात्मक सोच से बचा नहीं जा सकता ।खट्टी मीठी अनुभूतियाँ का पुंज ही संसार को
जीवंत बनाए रखती हैं।
अस्तु सचेत होने के साथ मनुष्य को सबक लेना चाहिए कि वही कर्म संपादित करे जिससे विश्व
में सुख संपदा व्यवस्थित होकर सभी को लाभ प्रदान कर सके। पलायन से पागलपन ही साधक का सिद्ध होगा। सम्मानीय व्यक्ति के लिए अपकीर्ति मृत्यु सदृश्य होती है। ऐसी सोच का उद्गम स्थल गीता है। यह ग्रंथ व्यावहारिक जीवन की गाथा को
बताने के साथ साथ संसार के गूढ़ रहस्यों को भी परत दर परत
खोलता है।व्यक्ति को बौद्धिक विकास के साथ आध्यात्मिक विकास हेतु गीता का अध्ययन,मनन परमावश्यक है। इसमें दक्षता पाकर इन्हे आचरण में उतारना संभव ,सहज और सरल हो जाता है।
हरि
29/06/2025
22/06/2025
Radhey shyam 🙏❤️ Useful Gen जरूरत Club_nessesari
22/06/2025
Heart ❤️ HighHighlightsfe GMA GMA Public AffairssNews18 Hindi
*रिश्ते और पतंग जितनी ऊँचाई पर होते हैं*
*काटने वालों की सँख्या उतनी अधिक होती है*
RAM RAM JI
इन्सान मकान बदलता है वस्त्र बदलता है ,
संबंध बदलता है फिर भी दुखी रहता है ,
क्यूंकि वह अपना स्वभाव नहीं बदलता ! !
🙏🏽सुप्रभात l🤏
"कागज़ रोते नहीं है
रुला देते हैं...
चाहे वह प्रेमपत्र हो,
रिजल्ट हो या
मेडिकल रिपोर्ट।""🥺🤔
20/06/2025
Shree Radhey Life Stories Feelness
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