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Miracle watar - YouTube 25/01/2024

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Photos from StudioParth's post 10/02/2020

एक जख्मी सैनिक अपने साथी से कहता है
साथी घर जाकर मत कहना, संकेतों में बतला देना।
यदि हाल मेरी माता पूछें तो, जलता दीप बुझा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, दो आंसू तुम छलका देना।
यदि हाल मेरी बहना पूछे तो, सूनी कलाई दिखा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, राखी तोड़ दिखा देना।
यदि हाल मेरी पत्नी पूछे तो, मस्तक तुम झुका देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, मांग का सिन्दूर मिटा देना।
यदि हाल मेरा पापा पूछे तो, हाथों को सहला देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, लाठी तोड़ दिखा देना।
यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो, सर उसका सहला देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, सीने से उसको लगा देना।
यदि हाल मेरा भाई पूछे तो, खाली राह दिखा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, सैनिक धर्म बता देना।।

06/02/2020

कितना बदल गया इंसान? किसी की मजबूरी का इतना अधिक फायदा नहीं उठाना चाहिए....

Photos from StudioParth's post 06/02/2020

पुलिस भवन निर्माण निगम में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. अंदर ही अंदर कुछ बड़े घोटाले की बात सामने आ रही है. घोटाला के लिए फर्जी बैंक गारंटी का इस्तेमाल किया जा रहा है. बैंक गारंटी का इस्तेमाल टेंडर लेने के लिए किया जाता है. टेंडर लेने वाले कई कांट्रैक्टर अब संदेह के घेरे में आ गए हैं. कई ऐसे कांट्रैक्टर हैं, जिन्होंने बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम का टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी बैंक गारंटी दी.

इस खेल में कांट्रैक्टरों का साथ कई सफेदपोश लोग भी दे रहे हैं. निगम के कुछ अधिकारियों के भी इस खेल में कांट्रैक्टरों के साथ शामिल होने की संभावना है. दरअसल, इस घोटाले की बात तब सामने आई, जब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने 24 जनवरी को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के सहायक सचिव करमलाल को एक लाख रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा था.

सोर्स के जरिए जो बातें अब सामने आ रही है, उसके अनुसार सहायक सचिव करमलाल के पकड़े जाने के मामले को निगम के अंदर चल रहे काली करतूत से जोड़कर देखा जा रहा है. यह सब कुछ एक बड़े घोटाले को दबाने की एक छोटी सी साजिश थी. करोड़ों रुपए के फर्जी बैंक गारंटी का घोटाला चल रहा है और इसे दबाने की कोशिश की जा रही है. सोर्स का दावा है कि इसी वजह से एक चक्रव्यूह रचा गया. जिसमें काली करतूत में शामिल लोगों के निशाने पर रिश्वत लेते हुए पकड़े गए सहायक सचिव करमलाल थे.

करोड़ों रुपए के फर्जी बैंक गारंटी के खेल को पिछले साल ही बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के चीफ इंजीनियर संतोष कुमार ने पकड़ लिया था. इस खेल के आरोपी कंकड़बाग के आरएमएस कॉलोनी के रहने वाले गणेश कुमार हैं. गणेश कुमार बड़े कांट्रैक्टर हैं. निगम के कई कांट्रैक्ट इनकी कंपनी को मिले. लेकिन इन्होंने जो बैंक गारंटी निगम के पास रखी वो फर्जी मिली. इस बात को चीफ इंजीनियर का लिखा हुआ एक पत्रांक साबित करता है. पिछले साल 21 दिसंबर को पत्रांक संख्या—5350 कांट्रैक्टर गणेश कुमार को लिखा गया था. इसके जरिए चीफ इंजीनियर ने गणेश कुमार से स्पष्टीकरण मांगा था. सोर्स बताते हैं कि जब बात उपर तक पहुंची तो इस मामले में कांट्रैक्टर गणेश कुमार के खिलाफ निगम ने इंटरनल जांच शुरु कर दी. जांच चलने के दौरान ही सहायक सचिव करमलाल के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पास गणेश कुमार ने टेंडर की रकम का तीन प्रतिशत रिश्वत मांगने का कंप्लेन कर दिया दिया था.

इंटरनल जांच में बहुत सारी चौंकाने वाली बातें सामने आई. इस खेल में गणेश कुमार के साथ कई दूसरे कांट्रैक्टर्स के खिलाफ भी सबूत मिले. इनका साथ देने वालों का भी नाम उजागर हुआ. अकेले कांट्रैक्टर गणेश कुमार के खिलाफ एक—एक कर तीन मामले मिले. जिसमें फर्जी बैंक गारंटी के कागजात जमा किए गए थे. इस कांट्रैक्टर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी निगम की ओर से की जा रही थी. लेकिन उसके पहले 24 जनवरी को निगरानी टीम की कार्रवाई हो गई और रिश्वत लेते हुए सहायक सचिव पकड़े गए. सोर्स की मानें तो इसके बाद से कांट्रैक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने से निगम के अधिकारी अब कतराने लगे हैं. उसकी फाइल को छूने की हिम्मत अब कोई नहीं जुटा रहा है.

वैशाली जिले में होमगार्ड कैंपस में गैर आवासीय बिल्डिंग, पटना जिले के सालिमपुर थाना के लिए ग्रेड—3 की बिल्डिंग, इसके लिए पहुंच पथ और बिल्डिंग के अंदर की बिजली सप्लाई की व्यवस्था सहित और पटना में ही कमांडेंट, एएसपी, डीएसपी सहित कई अधिकारियों के लिए आवासीय परिसर बनाने का एक बड़ा कांट्रैक्ट गणेश कुमार के पास है. इन तीनों कांट्रैक्ट के लिए गणेश कुमार की तरफ से शेखपुरा जिले के घाट कुसुम्भा स्थित ओरिएंटल बैंक आॅफ कॉमर्स ब्रांच की बैंक गारंटी जमा की गई थी. जो चीफ इंजीनियर की जांच में पूरी तरह से फर्जी पाया गया. चीफ इंजीनियर ने कई बार नोटिस भेज कर गणेश कुमार से स्पष्टीकरण मांगा. लेकिन सोर्स की मानें तो गणेश कुमार की तरफ से अब तक किसी प्रकार का कोई जवाब निगम को नहीं मिला है. इस वजह से चीफ इंजीनियर ने सीधे तौर पर गणेश कुमार को कह दिया कि क्यों न आपके रजिस्ट्रेशन को ब्लैक् लिस्ट में डाल दिया जाए?

गौरतलब है कि सरकारी टेंडरों में फर्जी बैंक गारंटी का खेल लगभग हर विभाग में चल रहा है. कुछ दिनों पहले ही मधेपुरा जिले में ऐसा ही एक मामला सामने आया था. जहां फर्जी बैंक गारंटी जमा करके एक कंपनी ने लाखों का टेंडर ले लिया था. लेकिन जांच के दौरान उसके बैंक गारंटी के कागज फर्जी निकले थे. उस मामले में डीएम के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी.

06/02/2020

#बिहार_पुलिस_में_बैंक_गारंटी_फर्जीवाड़ा
सुशासन बाबू के राज में घोटाला को दबाने की कोशिश। हेराफेरी उजागर करने वाले सचिव को ही बनाया गया बलि का बकरा। चुनावी साल में बिहार की राजनीति को एक और फर्जी वाड़े ने उबाल दे दिया है। सत्तारूढ़ एनडीए की परेशानी का कारण इस बार पुलिस महकमा बन रहा है। बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम निगम में करोड़ों रूपए के बैंक गारंटी की हेरा फेरी का मामला उजागर हुआ है। मजेदार पहलू तो यह है कि जिस संवेदक द्वारा यह बैंक गारंटी का फर्जीवाड़ा किया गया उससे स्पष्टीकरण मांगना विभाग के सचिव कर्म लाल को महंगा पड़ गया। संवेदक की हनक और अधिकारियों के पक्षपात के परिणाम स्वरूप सरकार के खजाने की निगहबानी करने की कोशिश में लगे सचिव को ही पुलिस हिरासत में रखा गया है । बिहार सरकार निगरानी विभाग के अधिकारियों ने सचिव को फर्जी वाड़े को उजागर करने की कार्रवाई के कारण निशाने पर ले इतना टॉर्चर किया कि सचिव इंदिरा गांधी ह्रदय रोग संस्थान में जिन्दगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

बकौल कर्मलाल, सचिव, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम निगम, उनके संज्ञान में आया कि निगम के कई टेंडर में बैंक गारंटी गलत दिया गया है। जिसके कारण सरकार को करोड़ों रूपए का नुकसान हो रहा था। उन्होंने कहा कि बिहार पुलिस निर्माण निगम के सीएमडी के सचिव होने के नाते मैंने यह संचिका टिप्पणी दी थी कि बैंक गारंटी गलत होने के कारण नियम संगत कारवाई की जाए। इससे क्षुब्ध संवेदक ने निगरानी से मिलकर मेरे ऊपर निगरानी में केस दर्ज करा दिया। कार्रवाई संवेदक पर न हो सचिव पर होने लगी और फर्जी वाड़े के दोषी संवेदक के राजनीतिक रसूख तले दबे निगम के अधिकारी सचिव को बलि का बकरा बना मामले की लीपापोती में लगे हैं। सवाल यह उठता है कि फर्जी वाड़े की जांच की दिशा क्यों बदली जा रही है?

उल्लेखनीय है कि विगत् 24 जनवरी को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के सहायक सचिव कर्म लाल को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने उनके कार्यालय से हिरासत में लिया था। निगरानी द्वारा यह दावा किया गया कि उन्हें रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है जबकि सच्चाई इसके विपरित है। इसके बाद कर्मलाल के सीने पर वार किया गया जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कर्म लाल के बीमार होने की सूचना निगरानी कोर्ट में दिया है । कर्म लाल डीएसपी के पद से सेवा निवृत्त हुए हैं। उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए कई बार राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।फिलहाल वे संविदा के आधार पर बिहार पुलिस निर्माण निगम सहायक सचिव के पद पर अपनी सेवा दे रहे थे।
संवाददाता के पास उपलब्ध साक्ष्यों के मुताबिक कर्मलाल ने बैंक गारंटी फर्जी वाड़े को उजागर करते हुये वरीय अधिकारियों से जब संवेदक के खिलाफ कार्रवाई की टिप्पणी कर रखी थी तो विभाग ने मामले की जांच व कार्रवाई के बजाय अपने ही कर्मचारी कर्म लाल को बलि का बकरा क्यों बनने दिया?

बैंक गारंटी फर्जी वाड़े को अंजाम देना और उस मामले की लीपापोती संदिग्ध तो है ही। क्यों नहीं इस मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच करवा कर सुशासन बाबू ऐसी पहल करें कि सूबे में एक नजीर स्थापित हो?

05/02/2020
03/02/2020

#अमीरों से हाथ जोड़ कर प्रार्थना है की #गरीबो का मजाक न बनाए दरवान रखे अच्छे कपड़े मे लगे की किसी अमीर की शादी का #दरवान है। कुछ चंद रूपयों के खातिर एक मजबूर की मजबूरी देख लें ये गरीब भाई इस #ठण्ड में बिना कपडे के कुछ चंद #रूपयों और रोटी के खातिर एक शादी समारोह में दरबान बना खड़ा थर थर काँप रहा था और इंसानियत के हत्यारे सेल्फी ले रहे थे। इसे ही कहते है मजबूरी का फायदा उठाना। आप सभी से दिल से हाथ जोड़कर विनती है रोकें इसको वरना हमारी आने वाली पीढ़ी #सवेंदनहीन हो जाएगी,

अरे कुछ शर्म करो अपना भारत ऐसा ना था ।।

29/01/2020

बार्सिलोना, स्पेन
अनुशासन और सिस्टम से बसाया गया एक खूबसूरत शहर

29/01/2020

"अम्मा मानता हूँ कि पीने के पानी की जगह कीचड़ आ रहा है., लेकिन है तो मुफ्त ना? इतनी बेशर्म तो ना बन अम्मा . पी ले चुप चाप. बीमार पड़ी तो मोहल्ला क्लिनिक मुफ्त है. और ज़्यादा ही तड़प है साफ पानी की तो मटका लेके हरयाणा बॉर्डर जा. किराया तो मैंने वैसे ही मुफ्त किया हुआ है ."

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