YTMiniBlog
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22/12/2024
"Jhopdi ki chaadar mein, duniya ki baatein itni badi nahi lagti"
~ Avinash Bhardwaj
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चैत्र पूर्णिमा मंगलवार को चित्रा नक्षत्र में जन्म लिया
त्रेतायुग में तूने रुद्रावतार से राक्षसों का मर्दन किया.
कलयुग में प्रशिद्ध तेरा हीं नाम पवन पुत्र वीर हनुमान
मन में राम तन में राम प्रभु श्री राम जय सीता राम
जपूँ दिन रात एक ही नाम सीता राम जय हनुमान
कलयुग में प्रशिद्ध तेरा हीं नाम पवन पुत्र वीर हनुमान
भक्तों पे कैसी संकट आयी पीड़ा हरो वीर हनुमान
गन्धमादन पर्वत से आजा भक्त जपें बस तेरा नाम
कलयुग में प्रशिद्ध तेरा हीं नाम पवन पुत्र वीर हनुमान
मंगलवार का सुभ दिन मेरा आके बेड़ापार लगाजा
चारो तरफ मचा हाहाकार भक्त लगाते तेरी पुकार
कलयुग में प्रशिद्ध तेरा हीं नाम पवन पुत्र वीर हनुमान
संकटमोचन केसरीनन्दन महावीर तेरी लीला अपरम्पार
भक्त पुकारे बस एक ही नाम जय सीता राम वीर हनुमान
शरीर अत्यंत मांसल बलशाली स्वर्ण मुकुट लंबी पूँछे
संकट मोचन वीर हनुमान भक्तो में प्रशिद्ध तेरा नाम
महादेव जी कैसी है तेरी माया
भोलेनाथ जी कैसी है तेरी माया
कोई हँसता तो कोई रोता कोई मौन में लीन होता
कोई राजा तो कोई दास कोई हुक्म चलाता होता
पाँच उँगलियाँ बराबर क्यों नहीं
मस्तिष्क एकसमान क्यों नहीं
भोलेनाथ जी कैसी है तेरी माया
शम्भुनाथ जी कैसी है तेरी माया.
बचपन क्यूँ जवानी क्युँ बुढ़ापा क्युँ फिर मौत आता
जन्म मिला जीवनदान बचपन बुढ़ापा में बदल जाता
कोई जीता १०० वर्ष किसी को बचपन में मौत आता
कोई होता पाप में लीन तो कोई क्युँ पूजा पाठ करता
बद्रीनाथ जी कैसी तेरी माया
केदारनाथ जी कैसी तेरी माया
कहीं है रौशनी कहीं अंधकार मौसम क्युँ बदलता है
वायु जल ,थल, पेड़-पौधा , जिव-जंतु कहाँ से आता
कहीं जमिन कहीं उचें पहाड़ कहीं है गहरा पानी क्युँ
सूरज क्युँ चद्र्मा क्युँ बादल क्युँ तारा नज़र आता है
अमरनाथ जी कैसी है तेरी माया
नीलकंठ जी कैसी है तेरी माया
मोह माया का जाल ये कैसा अपनों से बिछड़तें क्युँ
कोई शाकाहारी भोजन करता कोई मांसाहारी क्युँ
कोई उड़ता आशमान में कोई ज़मीन पे रहता क्युँ
शरीर की बनावट सबकी अलग-थलग रहता है क्युँ
शोमनाथ जी कैसी है तेरी माया
शंकर भगवन जी कैसी है तेरी माया
देवो के देव महादेव जी कैसी है तेरी माया
पार्वती माता जी कैसी है प्रभु जी की माया
कार्तिक गणेश जी कैसी है प्रभु जी की माया ....
भूख प्यास की तालमेल में अधमरे के जैसा
टप-टप गिरते पसीना में ऊर्जाहीन के जैसा
उसने कहा उठ जा कहिं और जाके तु मर
सुखा कंठ रेगिस्तान के जैसा कैसे रहूं इधर
होंठ की पपड़ी नाख़ून से नोंचू खुनी जैसा
पैर के छाले पे कपड़ा बांधा कातिल जैसा
आँखे लाल टमाटर मुँह काला कौआ जैसा
पीठ में पेट चिपका किताब के पन्नों जैसा
जला कलेजा अफ़सोस पानी क्यों पिया
छन से लगा होंठ जला रो पड़ा चाय पिया
रोटी खिलाया भगवान था भिखारी जैसा
बोला क्यों रोते हो मैं भी हूँ तुम्हारे जैसा
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