Poet Papers
"Kuch khaas nahi bas apne jazbaat likhti hun,Kuch beete kisse kuch mulakaat likhti hun." ✍🏻
29/08/2025
मैंने सोचा था इश्क़ में कोई मुझसा मुझको चाहेगा
जो मुझको मुझसा देखेगा और आँखो में बसाएगा।
जो समझेगा सब बात मेरी दोस्त मेरा बन पाएगा
जो शब्दों के इस जाल में नहीं मुझको फसाएगा।
मैं ग़लत रहा ये सोच कर की इश्क़ तुम्हारा पाक है
तुम में तो है अहम बहुत हाँ इश्क़ तुम्हारा ख़ाक है।
मैं दिल से सोचा करता था बस दिल में तुमको रखता था
मैं सोचे बिना ही तुमसे सब बाते किया करता था।
तुमने मुझको जाना कहाँ अपना कभी माना कहाँ
मुझे समझने में देरी हुई मैं तो था अनजाना यहाँ।
कितनी आसानी से तुमने हर बार मुझे धकेल दिया
नाम दिया इसे इश्क़ का और साथ मेरे एक खेल किया।
✍🏻
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30/08/2024
तनहा पड़ा हूँ कमरे में
सुनाई दे रहा हूँ क्या?
होंठ चटक रहे है सुख कर
सदियों का भूखा हूँ क्या?
धड़क रहा है दिल में कोई
ज़ोरो से सुनाई पड़ रहा है
मुझे कितना कुछ दिखता है
फिर भी कहाँ दिखाई पड़ रहा है।
महसूस हो रहा हूँ मैं तुमको
अभी ज़िंदा हूँ क्या ?
कोई समझ नहीं आता मुझको
यहीं का बाशिंदा हूँ क्या?
कोई देख लो माप कर नब्ज
कितनी बाक़ी है।
कहानी पूरी हो गई कबकी
बस मिटनी बाक़ी है।
✍🏻🌻
28/08/2024
मेरे भीतर दबा दी मैंने हर वो चीख
जिसे चीख चीख कर बाहर आना था।
छुपा दिया गया हर वो आंसू जिसे
बिना ठहरे बस बहे चले जाना था।
कितना दर्द ठहराया सीने में मैंने
कितना ही दर्द मुझे जकड़ता रहा।
मैं सुबकता रहा सुखी पलकों से
और तिल तिल करके मरता रहा।
मैंने खूब कहा सबसे बढ़िया हूँ
और काँच बन तड़कता रहा।
एक दिन दिल फटा और गुज़र गया
जो कुछ था अंदर धड़कता रहा।
✍🏻🌻
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25/08/2024
आ ही गया ना आख़िर सब्र तुम्हें भी
आना ही था कोई और ज़रिया ही कहाँ था।
कब तक लड़ते, कब तक झगड़ते ख़ुद से
कब तक चीखते दिल ही दिल में और
कब तक ख़ुद को ख़ुद ही मनाते रहते।
कोई नहीं आया ना ख्याल पूछने?
कोई नहीं आया ना सवाल पूछने?
सबने पूछा होगा ना कैसे हो तुम?
मगर कोई नहीं आया ना दिल
का हाल पूछने?
जैसे तुम हो गये हो ना मैं भी
ठीक वैसा ही हो गया हूँ।
ख़ुद को अब ख़ुद भी समझ नहीं आता
ना जाने मैं कैसा हो गया हूँ।
आ तो गया है सब्र मगर बहुत कुछ खोना पड़ा है।
मैं जानता ही नहीं कितना अकेले रोना पड़ा है।
✍🏻🌻
23/08/2024
कोई किसी को कितना चाह सकता होगा?
हम्म, तुम्हें ज़हन में उतार कर बताऊ?
मुझे? मुझे ही क्यों।
शायद समझ जाओ तुम।
ठीक है बताओ।
के ज़िंदगी वीरान हो जाये जिसके बिना
मन शमशान हो जाये जिसके बिना।
जिसे देख कर जाग उठे भूख भी
जो वो ना दिखे तो परेशान हो जाये
जिसके बिना।
मेरे मन से नहीं उतरती एक झलक जिसकी
हम अनजान हो जाएँ जिसके बिना।
तुम कहीं वही शख़्स या आरज़ू तो नहीं
दिल में एक टीस जाग उठे जिसके बिना।
तुम्हें बताऊँ क्या हो तुम मेरे लिये?
हाँ क्यों नहीं, बताओ।
तुम्हें बताऊँ के क्या हो तुम मेरे लिये
जीना भी चाहु तो जिया ना जाये जिसके बिना।
के ज़िंदगी वीरान हो जाये जिसके बिना।
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