Vishaaanu

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सूक्ष्मयॊनीनि भूतानि तर्क गम्यानि का

14/06/2020

जीवन में किस बात का मलाल करता है ,
तू क्यों जीवन से इतने सवाल करता है ,
जो नहीं मिला ,वो भी ख्वाहिश थी ,जो मिल गया,वो कभी ख्वाहिश हुआ करती थी ,
तमन्नाओं की गोद बहुत गहरी है ,सपनों की उड़ान बहुत लंबी है ,
थोड़ा ठहर ,थोड़ा तो सबर कर ले ,
दर्द है तो क्या ,कुछ नहीं मिला तो क्या कुछ खो दिया तो क्या ,
अब भी मैँ बाकी हूँ तुझमें ,मौके मिलेंगे तुझे अनेक ,
लेकिन अगर मुझसे मुँह मोड़ेगा ,
तो फिर ना तेरी सुबह होगी,ना शाम होगी ,
ना कोई रात होगी और ना ही कोई बात होगी,
तू अकेला होगा , ना कोई तेरे संग होगा।

आत्महत्या की इस खाई में गिर कर पूछते हो , मेरा वजूद क्या था ,
प्रियजन तू छोड़ गया ,रोने के लिए ,
आत्महत्या तूने किया , लोगो ने मुझपे सवाल उठा दिए कि
क्यों मैंने तुम्हें आकर्षित नहीं किया ,जीने के लिए ,
मैँ क्या कहुँ ,तू डर गया या महान था या नादान था या कोई सैतान था ,
पर जो भी था, तू किसी का संतान था,
दर्द और सवाल उनको दे कर ,तू चला गया।
मौत!!! ,तूने इसके मन में ,मेरी अच्छी तस्वीर उतारी ,
ले गया इसको अपने आगोश में , केह कर की ,'जीवन है एक मिथ्या ',
और इस नादान ने ,दूर करने मन की उलझन ,खोजा एक उत्तर , "बस ! आत्महत्या" ।

08/06/2020

कर्ज

इतनी मोहलत कहाँ, कि घुटनों से
सिर उठाकर, फ़लक को देख सकूं।
अपने तुकडे उठाओ दाँतो से
ज़र्रा-ज़र्रा कुरेदते जाओ
वक़्त जो बैठा हुआ है गर्दन पर
तोड़ता जा रहा है टुकड़ों में
कोई और ख्वाब अब देखोगे क्या!
रात दिन जब एक कर चुके हो।
कर्ज है तुमपे, उनकी दुआओं के भी
जो भूल चुके है तुम्हें, तुम्हारे भूलने के बाद।
हर सांस पे अगली सासें ब्याज जैसी है
ज़िन्दगी देके भी नहीं चुकते
ज़िन्दगी के जो क़र्ज़ देने हों।

04/06/2020

जंगलों से चले जंगली जानवर
शहर में आ बसे जंगली जानवर

आदमी के मुखौटे लगाए हुए
हर कदम पर मिले जंगली जानवर

ऑफिस में बॉस बनकर बरसे अपने कर्मचारियों पे, है कोई ऐसा जंगली जानवर!

एक औरत अकेली मिली जिस जगह
मर्द होने लगे जंगली जानवर

आप पर भी झपटने ही वाला है वो
देखिए…देखिए..जंगली जानवर!

बन्द कमरे के एकान्त में प्रेमिका
आपको क्या कहे-जंगली जानवर!

जानवर मारे भूक मिटाने को, शौक और स्वाद के लिए मारे जो उनको कहिए जंगली जानवर!

इंसान कहां है, ढूंढ लीजिए, मुझको तो दिखते सिर्फ जंगली जानवर।

आजकल जंगलों में भी मिलते नहीं
आदमी से बड़े जंगली जानवर!

30/04/2020

29/04/2020

RIP SIR

24/04/2020

पहचान

“कौन हो तुम?”
“तुम कौन हो”
“हरहर महादेव......हरहर महादेव”
“हरहर महादेव”
“सुबूत क्या है?”
“सुबूत......मेरा नाम धर्मचंद है”
“ये कोई सुबूत नही, कोई ठोस सबूत दो"
“ तो फिर चार वेदों से कोई भी बात मुझ से पूछ लो।”
“ सले हम वेदों को नहीं जानते......कोई जिस्मानी सुबूत दो, जनेयू दिखाओ, तिलक भी तो नहीं लगाया है।"
“क्या? तिलक माथे के पसीने से धूल गया, मजदूर आदमी हूं भाई।"
“ठीक है फिर पाएजामा ढीला करो”
पाएजामा ढीला हुआ तो एक शोर मच गया।
मार डालो......मार डालो”
“ठहरो ठहरो...... मैं तुम्हारा भाई हूँ......
भगवान की क़सम तुम्हारा भाई हूँ।” “तो ये क्या सिलसिला है?”
“जिस इलाक़े से आ रहा हूँ वो हमारे दुश्मनों का था
इस लिए मजबूरन मुझे ऐसा करना पड़ा......
सिर्फ़ अपनी जान बचाने के लिए......
एक यही चीज़ ग़लत होगई है।
बाक़ी बिल्कुल ठीक हूँ।”
“उड़ा दो ग़लती को”
ग़लती उड़ा दी गई.....
धर्मचंद भी साथ ही उड़ गया।
उसकी पहचान भी उसके साथ उड़ गई।

Photos 22/04/2020
Photos 21/04/2020

Photos from Vishaaanu's post 16/04/2020

First web comic- Genesis of Vishaaanu

Episode 1: The Viral

Spawned in the caves of the mysterious friends of night, Fluvion, the hope and prayer of Fluvimaa and Virion, grew stronger to face the ultimate target- MAN!!!
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16/04/2020
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