Cup N Plate
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काटने वाले बिच्छू:
उत्तर प्रदेश के अमरोहा में 13वीं सदी के सूफी संत सैयद हुसैन शर्फुद्दीन शाह विलायत नकवी की मज़ार मौजूद है. माना जाता है कि वो उत्तर भारत के पहले उर्दू कवि थे. उनकी मज़ार के पास कई जहरीले बिच्छू मौजूद रहते हैं लेकिन उन्होंने आजतक आने वाले किसी अनुयायी या भक्त को नुकसान नहीं पहुंचाया. श्रद्धालुओं को एक निश्चित समय के लिए उन बिच्छुओं को घर ले जाने की इजाज़त है लेकिन तय समय के बाद उन्हें वापस मज़ार पर नहीं छोड़ा जाता तो वो इंसानों पर हमला कर देते हैं.
प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया है. इनमें महिलाओं की भी अच्छी ख़ासी संख्या है.
पिछले दिनों लड़कियों और महिलाओं के स्नान करते और कपड़े बदलने की तस्वीरें और वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर शेयर किए गए.
ऐसे वीडियो फ़ेसबुक, एक्स और यूट्यूब पर मौजूद थे. यही नहीं, कई टेलीग्राम चैनल्स पर इन वीडियो को बेचा जा रहा था.
मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात जब सामने आई, तो पुलिस ने इस पर कार्रवाई की. कुछ लोग गिरफ़्तार किए गए. इस पूरे मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर महिलाओं की निजता और उनकी सुरक्षा का मुद्दा उठा दिया है. 27 फ़रवरी यानी गुरुवार को भी पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर जानकारी दी कि इस संबंध में पश्चिम बंगाल के हुगली ज़िले के रहने वाले 27 साल के अमित कुमार झा को ग़िरफ़्तार कर लिया गया है.
इमरजेंसी में जब हुई जबरन नसबंदी
विश्व बैंक के मुताबिक़ जब भारत आज़ाद हुआ तो एक औरत औसतन छह बच्चों को जन्म दे रही थी यानी देश का 'टोटल फर्टिलिटी रेट' (टीएफआर) छह था.
जनसंख्या नियंत्रण पर पहला कदम 1952 की पहली पंचवर्षीय योजना में उठाया गया. 'फर्टिलिटी' और 'परिवार नियोजन' पर शोध और 'जनसंख्या को देश की अर्थव्यवस्था की ज़रूरत के स्तर तक' लाने का लक्ष्य रखा गया.
लेकिन इमरजेंसी के दौरान सरकार ने कहा कि पुराने तरीकों का कोई व्यापक असर नहीं दिखा है सो कुछ नया करने की ज़रूरत है और नसबंदी पर ज़ोर दिया गया.
1976 में लाई गई इस पहली राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के तहत परिवार नियोजन के टार्गेट तय किए गए और राज्यों को इन्हें पूरा करने पर ही केंद्रीय सहायता मिलने जैसी शर्तें लागू की गईं. नसबंदी करवाने के लिए लोगों को प्रलोभन भी दिए गए
देश की ज़्यादा आबादी को कम करने के लिए जब सरकार फ़ैसले लेना चाहती है, तब उससे मची उथल-पुथल में बच्चे पैदा करनेवाली और गर्भनिरोध के तरीके अपनानेवाली औरतें सबसे ज़्यादा प्रभावित होती है.
ये पहली बार नहीं है कि जनसंख्या के नियंत्रण के लिए भारत में प्रलोभन और दंड की नीति अपनाई गई हो. यानी परिवार छोटा रखने पर सरकार इनाम दे और ज़्यादा बच्चे पैदा करने पर सरकारी नीतियों और मदद से वंचित करे.
पहले 1970 के दशक में देश में लगी इमरजेंसी के दौरान नसबंदी के कार्यक्रम से और फिर 1990 के दशक में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए कई राज्यों में बाध्यकारी की गई 'टू-चाइल्ड' पॉलिसी के ज़रिए ऐसा किया जा चुका है.
कुछ सबक़ 'वन-चाइल्ड' और 'टू-चाइल्ड' पॉलिसी लागू करनेवाले पड़ोसी देश चीन से भी लिए जा सकते हैं और कुछ जापान और दक्षिण कोरिया से
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