Krishan Singh,Naag Rajput
याद राखिये, सब से बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है 🌷नाग राजपूत🌷
पूरन भगत (पूरनमल) पंजाब के सियालकोट के राजा सालवान के पुत्र थे, जिनकी कहानी त्याग और योग की मिसाल है। सौतेली माँ लूना के झूठे इल्जाम के बाद, राजा ने उनके हाथ-पैर कटवाकर कुएं में फेंक दिया था। गुरु गोरखनाथ ने उन्हें बचाया और बाद में वे एक महान योगी बने, जिन्हें 'बाबा सहज नाथ जी' के रूप में भी पूजा जाता है।
पूरन भगत की पौराणिक कहानी:
जन्म और बचपन: राजा सालवान और रानी इच्छरा के घर जन्मे पूरन को ज्योतिषियों की सलाह पर 12 वर्षों के लिए महल से दूर रखा गया था, ताकि वे राजा का चेहरा न देख सकें।
सौतेली माँ का प्रसंग: जब पूरन वापस आए, तब तक राजा ने लूना नाम की एक युवा महिला से विवाह कर लिया था। लूना की उम्र पूरन के बराबर थी, और उसने पूरन के प्रति आकर्षण दिखाया। पूरन ने इसे अपनी सौतेली माँ होने के नाते अस्वीकार कर दिया।
कुएं में निर्वासन: अपमानित लूना ने राजा से शिकायत की कि पूरन ने उसके साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की। क्रोधित होकर, राजा ने पूरन के हाथ-पैर काटकर उन्हें जंगल के एक कुएँ में फेंकने का आदेश दिया।
योगी बनना: गुरु गोरखनाथ अपने शिष्यों के साथ वहां से गुजरे और उन्होंने पूरन को कुएं से निकाला। अपनी दिव्य शक्ति से उन्होंने पूरन को ठीक किया और अपना शिष्य बना लिया।
बाबा सहज नाथ: तपस्या के बाद पूरन एक महान योगी बने। वे वर्तमान में भी 'बाबा सहज नाथ जी' के रूप में पूजे जाते हैं, विशेषकर जंडियाल (महाजन) बिरादरी द्वारा, जो जम्मू और पंजाब में उनके मंदिर (जैसे हीरानगर के पास जंडी) में पूजा करते हैं।
01/04/2026
एक छोटे से गाँव में एक शरारती पोता और उसके समझदार दादा जी रहते थे। पोते का नाम चिंटू था और दादा जी का नाम रामलाल।
चिंटू बहुत ही नटखट था। एक दिन उसने सोचा कि दादा जी के साथ थोड़ा मज़ाक किया जाए। सुबह-सुबह जब दादा जी अपनी चाय पी रहे थे, तो चिंटू ने चुपके से उनकी चाय में चीनी की जगह नमक डाल दिया।
दादा जी ने जैसे ही चाय का घूंट लिया, उनका चेहरा अजीब सा बन गया। चिंटू पास में छुपकर यह सब देख रहा था और हँसी रोक नहीं पा रहा था। दादा जी समझ गए कि यह जरूर चिंटू की शरारत है, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।
थोड़ी देर बाद दादा जी ने भी एक योजना बनाई। उन्होंने चिंटू को बुलाया और बोले, “बेटा, मैंने तुम्हारे लिए खास मिठाई बनाई है।”
चिंटू खुशी-खुशी दौड़ा आया। जैसे ही उसने मिठाई खाई, उसका चेहरा भी बिगड़ गया—क्योंकि उसमें बहुत ज्यादा मिर्ची थी!
दादा जी हँसते हुए बोले, “शरारत करने से पहले सोचना चाहिए, क्योंकि सामने वाला भी जवाब दे सकता है।”
चिंटू ने शर्माते हुए कहा, “दादा जी, अब मैं ऐसी शरारत नहीं करूँगा।”
दादा जी ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा और बोले, “शरारत करो, लेकिन ऐसी जो किसी को नुकसान न पहुँचाए।”
उस दिन के बाद चिंटू ने अपनी शरारतों में समझदारी जोड़ ली और दोनों की जोड़ी पूरे गाँव में मशहूर हो गई। 🌷🌷🌷
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