Haridwar Boxing Academy
हरिद्वार , उत्तराखंड Haridwar Boxing club is running at S.M.Public School, Jagjeetpur, Khankhal (Laksar Road) in Haridwar City.
for further information you can come & contact Mr. Naveen Chauhan (Boxing Coach) at 7895402002.
03/06/2026
Addmission Open.
Naveen Chauhan - 078954 02002
Roshnabad Stadium, Haridwar, Uttarakhand
01/06/2026
Addmision Open.
31/05/2026
Admision Open at Haridwar Boxing Academy.
29/05/2026
बॉक्सिंग से प्यार करना भी अजीब है
यही हमको चोट भी पहुँचाता है और साथ ही ठीक भी करता है
सपने में, जागते हुए , चलते हुए , कोई भी काम करते बस यह ही उमंग जगता हैं
28/05/2026
जीवन में आने वाली चुनौतियों, असफलताओं या दबावों के बावजूद अपने लक्ष्य पर टिके रहना दृढ़ता (Grit) कहलाता है
हमारी शुरुआत कठिन परिस्थितियों से हुई है, जहाँ हार मानना आम बात है और दृढ़ता दुर्लभ।
लेकिन विकास तभी होता है जब आप असुविधाओं का सामना करते हैं, और हर कदम आगे बढ़ने से पता चलता है कि आप दूसरों से अलग हैं।
26/05/2026
आपका हर मुक्का एक कहानी कहता है।
क्या आप जानते है ?
एक अच्छे मुक्केबाज़ और एक महान मुक्केबाज़ में क्या फर्क होता है?
सिर्फ ताकत ही नहीं, खामोशी और एकाग्रता के बिना जीत नहीं होती है।
महान मुक्केबाज़ ने सिर्फ कड़ी मेहनत ही नहीं की, बल्कि समझदारी से अनुभवी कोच से प्रशिक्षण लिया।
23/05/2026
बॉक्सिंग: यह सिर्फ एक खेल नहीं, जीवन जीने का एक तरीका है
हर मुक्केबाज के मुक्कों में सिर्फ ताकत ही नहीं होती, बल्कि दिल, अनुशासन, दर्द, त्याग और जुनून भी होता है।
चैंपियन रातोंरात नहीं बनते; वे अनगिनत मुकाबलों, कड़ी मेहनत और कभी हार न मानने के जज़्बे से बनते हैं।
एक मुक्केबाज का दिल अलग तरह से धड़कता है।
22/05/2026
Boxing is about heart, not just skill. It’s standing in front of pressure and refusing to quit. Life hits the same way. hard, unpredictable, exhausting. But the fighter’s heart keeps going, even when everything says stop 🥊
21/05/2026
एडमिशन ओपन - हरिद्वार बॉक्सिंग अकैडमी
योगस्थली स्टेडियम, रोशनाबाद, हरिद्वार अकादमी में आप सभी का स्वागत है ।
एडमिशन के लिए 10 वर्ष से अधिक बालक बालिका आ सकते हैं ।
Call 7895402002
मिलने का समय दोपहर 2:00 बजे से 6:00 तक
20/05/2026
बॉक्सिंग रिंग में हो या जीवन में, कोई शॉर्टकट नहीं होता...
केवल पसीना, त्याग और शरीर के रुकने के बावजूद डटे रहने का जज़्बा ही काम आता है।
हर दिन, हर समय, हर चोट, पसीने की हर बूँद एक बेहतरीन मुक्केबाज़ को भीतर सँवारती है।
चैंपियन जन्म से नहीं बनते
वे कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से बनते हैं।
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