Amar Rastogi
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एक स्वतंत्र विचारक मेरा विश्वास है कि शिक्षा, समानता और जागरूकता ही एक मजबूत समाज की नींव रखते हैं।
✅ निष्पक्ष और स्वतंत्र विचारधारा
✅ शिक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण
"बदलाव की शुरुआत सोच से होती है, और मैं बदलाव का समर्थक हूँ!"
नमस्कार मेरे मित्रों
गुलामी केवल बेड़ियों से नहीं होती, बल्कि विचारों की जंजीरों से भी होती है। जब कोई समाज अन्याय, शोषण और अत्याचार को अपनी नियति मानकर चुपचाप सहन करता है, तब वह गुलाम हो जाता है। इतिहास गवाह है कि हर युग में कुछ ऐसे लोग उठ खड़े हुए, जिन्होंने कहा – "बस, अब और नहीं!" यही आवाज़ क्रांति की होती है।
क्रांति का अर्थ केवल तलवार उठाना नहीं है, बल्कि वह चेतना है जो हर अन्याय के खिलाफ खड़ी होती है। गुलामी हमें अपमान, भय और निराशा की जंजीरों में जकड़ देती है, जबकि क्रांति हमें स्वाभिमान, स्वतंत्रता और आत्मबल का वरदान देती है।
अगर हम अन्याय के सामने सिर झुका दें, तो आने वाली पीढ़ियां हमें क्षमा नहीं करेंगी। गुलामी में जीवन केवल एक बोझ बन जाता है, जबकि क्रांति में संघर्ष भले कठिन हो, लेकिन उसका हर कदम उम्मीद से भरा होता है।
आज आवश्यकता है कि हम अपने भीतर की नींद तोड़ें, अपनी आत्मा की पुकार सुनें और अन्याय के विरुद्ध संगठित होकर खड़े हों। हर व्यक्ति का जागरण ही क्रांति का आधार है। गुलामी के अंधकार को मिटाने का एक ही मार्ग है – सत्य, साहस और एकता का दीप जलाना।
याद रखें:
“गुलाम रहकर जीने से अच्छा है क्रांति में मर जाना,
क्योंकि क्रांति में मृत्यु भी अमरता देती है।”
आवाज दो हम एक हैं जय हिंद
14/04/2025
भारतरत्न श्रद्धेय डॉ भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन
महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।
वे एक महान समाज सुधारक, विचारक और शिक्षाविद् थे, जिन्होंने शिक्षा, स्त्री अधिकार और जातिवाद के खिलाफ अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनका योगदान आज भी हमें समानता, न्याय और मानवता की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।
महात्मा ज्योतिबा फुले अमर रहें🎉🎉
सभी प्रियजनों को रंगोत्सव (होली) की अग्रिम शुभकामनाएं 🎉
08/03/2025
महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
भारतीय समाज में महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर और सावित्रीबाई फुले का योगदान अविस्मरणीय है।
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए भारतीय संविधान में महत्वपूर्ण प्रावधान किए। उन्होंने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को संपत्ति का अधिकार, विवाह और तलाक में समानता, तथा अन्य कानूनी अधिकार दिलाने का प्रयास किया। वे सशक्त समाज की नींव में महिलाओं की समान भागीदारी के प्रबल समर्थक थे।
सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षिका थीं, जिन्होंने सामाजिक विरोध सहकर भी लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया। उन्होंने अपने पति ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर महिला शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह और सामाजिक सुधारों के लिए संघर्ष किया।
इन महान व्यक्तित्वों की प्रेरणा से हम महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और सशक्तिकरण के लक्ष्य को और मजबूत कर सकते हैं। आइए, इस महिला दिवस पर हम संकल्प लें कि उनके दिखाए मार्ग पर चलकर एक न्यायसंगत और समानता आधारित समाज का निर्माण करेंगे।
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