Pyara Gyan
knowledge
05/02/2026
गुरु और शिष्य के संबंध को दर्शाती एक प्रसिद्ध और प्रेरणादायक कहानी नीचे दी गई है:
बहुमूल्य पत्थर की पहचान
एक बार एक शिष्य ने अपने गुरु से पूछा, "गुरुजी, जीवन का मूल्य क्या है?" गुरुजी ने उसे एक चमकता हुआ पत्थर दिया और कहा, "जाओ, इसका मूल्य पता करके आओ, लेकिन इसे बेचना मत।"
सब्जी वाला: शिष्य सबसे पहले एक सब्जी बेचने वाले के पास गया। दुकानदार ने कहा, "यह पत्थर ठोस और वजनदार है, इसके बदले मैं तुम्हें एक पाव (250 ग्राम) सब्जी दे सकता हूँ।"
फल वाला: फिर वह एक फल विक्रेता के पास पहुँचा। उसने पत्थर देखकर कहा, "यह दिखने में अच्छा है, मैं इसके बदले तुम्हें तीन सेब दे सकता हूँ।"
सुनार: इसके बाद शिष्य एक सुनार के पास गया। सुनार ने उसे परखकर ₹50,000 देने का प्रस्ताव रखा। जब शिष्य ने मना किया, तो उसने कीमत बढ़ाकर 1 लाख कर दी।
जौहरी: अंत में शिष्य शहर के सबसे बड़े जौहरी के पास गया। जौहरी ने पत्थर को गौर से देखा, उस पर अपना सिर झुकाया और कहा, "यह एक अमूल्य हीरा है! इसे खरीदने के लिए मेरी पूरी संपत्ति भी कम पड़ जाएगी।"
शिष्य ने वापस आकर गुरुजी को पूरी बात बताई। गुरुजी मुस्कुराए और बोले, "यही जीवन का मूल्य है। तुम कौन हो और तुम्हारी क्या कीमत है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि तुम खुद को किस पारखी की नजरों से देखते हो।"
सीख:
यह कहानी हमें सिखाती है कि हमारी असली कीमत हमारी संगति और हमारे दृष्टिकोण से तय होती है।
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