Dr Rajesh Kumar
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14/02/2026
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DR RAJESH KUMAR
आयुर्वेदिक परामर्श
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30/01/2026
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29/01/2026
निःशुल्क आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर प्रत्येक मंगलवार सरबहदा बाजार गायजी बिहार
21/07/2024
शरीर में यूरिक एसिड का उच्च स्तर कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। यहाँ उच्च यूरिक एसिड स्तर के कुछ संभावित नुकसान बताए गए हैं:
1. *गाउट*: यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर गाउट का कारण बन सकता है, जो गठिया का एक प्रकार है जो अचानक और गंभीर जोड़ों के दर्द, सूजन और सूजन का कारण बनता है।
2. *गुर्दे की पथरी*: उच्च यूरिक एसिड स्तर गुर्दे की पथरी के विकास के जोखिम को बढ़ा सकता है।
3. *गुर्दे की बीमारी*: लंबे समय तक उच्च यूरिक एसिड स्तर गुर्दे की क्षति और क्रोनिक किडनी रोग का कारण बन सकता है।
4. *हृदय रोग*: शोध से पता चलता है कि उच्च यूरिक एसिड स्तर हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है, जिसमें उच्च रक्तचाप, कोरोनरी धमनी रोग और स्ट्रोक जैसी स्थितियाँ शामिल हैं।
5. *मेटाबोलिक सिंड्रोम*: ऊंचा यूरिक एसिड स्तर मेटाबोलिक सिंड्रोम से जुड़ा हुआ है, जो स्थितियों का एक समूह है जो टाइप 2 मधुमेह और हृदय रोग के विकास के जोखिम को बढ़ाता है।
6. *जोड़ों में दर्द और सूजन*: यूरिक एसिड का उच्च स्तर लगातार जोड़ों में दर्द और सूजन का कारण बन सकता है, भले ही गाउट का हमला न हो।
7. *गुर्दे की क्षति*: लंबे समय तक उच्च यूरिक एसिड का स्तर गुर्दे की क्षति और क्रोनिक किडनी रोग का कारण बन सकता है।
8. *चिंता और अवसाद*: कुछ शोध बताते हैं कि उच्च यूरिक एसिड का स्तर चिंता और अवसाद से जुड़ा हो सकता है।
संतुलित आहार, हाइड्रेटेड रहना और यदि आवश्यक हो, तो दवा या सप्लीमेंट के माध्यम से यूरिक एसिड के स्तर को प्रबंधित करना आवश्यक है। यदि आपको यूरिक एसिड के स्तर या संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में चिंता है, तो किसी स्वास्थ्य सेवा पेशेवर से परामर्श लें।
15/07/2024
किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को शुरू करने से पहले आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श लें। संपर्क सूत्र :- 7677030934
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12/07/2024
पक्षाघात (Paralysis) के लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:
1. **हिलने-डुलने में असमर्थता**: प्रभावित अंगों को हिलाने में असमर्थता।
2. **कमजोरी**: शरीर के किसी विशेष हिस्से में कमजोरी या ताकत की कमी।
3. **संवेदनहीनता**: छूने, दर्द, या तापमान को महसूस करने की क्षमता में कमी।
4. **निगलने या बोलने में कठिनाई**: बोलने, चबाने या निगलने में परेशानी।
5. **मांसपेशियों का कठोर हो जाना**: मांसपेशियों का टाइट या कठोर हो जाना।
6. **बैलेंस और कोऑर्डिनेशन में कमी**: चलने-फिरने या संतुलन बनाने में कठिनाई।
7. **सांस लेने में समस्या**: गंभीर मामलों में सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
8. **अनियमित मूत्र या मल त्याग**: ब्लैडर और बाउल नियंत्रण का नुकसान।
9. **सिरदर्द या चक्कर आना**: कभी-कभी सिरदर्द या चक्कर आ सकते हैं।
10. **दृष्टि में समस्या**: देखने में कठिनाई या दृष्टि का धुंधलापन।
अगर ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
11/07/2024
पक्षाघात (Paralysis) के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
1. **मोनोप्लेजिया (Monoplegia)**:
- केवल एक अंग (जैसे एक हाथ या एक पैर) को प्रभावित करता है।
2. **हेमिप्लेजिया (Hemiplegia)**:
- शरीर के एक तरफ के हाथ और पैर को प्रभावित करता है, जैसे कि दाहिना हाथ और दाहिना पैर या बायां हाथ और बायां पैर।
3. **पेराप्लेजिया (Paraplegia)**:
- शरीर के निचले हिस्से के दोनों पैरों को प्रभावित करता है, और कभी-कभी धड़ के निचले हिस्से को भी।
4. **क्वाड्रिप्लेजिया (Quadriplegia)**:
- शरीर के सभी चार अंगों (दोनों हाथ और दोनों पैर) को प्रभावित करता है।
5. **फेसियल प्लेजिया (Facial Paralysis)**:
- केवल चेहरे की मांसपेशियों को प्रभावित करता है, जैसे कि बेल्स पाल्सी।
6. **लोक्ड-इन सिंड्रोम (Locked-In Syndrome)**:
- यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें व्यक्ति पूरी तरह से पक्षाघात ग्रस्त हो सकता है, लेकिन मस्तिष्क के कारण सोचने, समझने और आँखों की गतिविधि करने में सक्षम होता है।
ये प्रकार मुख्य रूप से मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, या नसों में चोट या बीमारी के आधार पर होते हैं।
08/07/2024
जो करें जीवन से प्यार वो कैसे करें आयुर्वेद को इनकार
08/07/2024
आयुर्वेद औषधि ही स्वस्थ जीवन का आधार है
26/06/2024
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