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कांग्रेस नेता संजय गांधी की मौत के पीछे का असली रहस्य क्या है? क्या आप जानते हैं?

हां भाई वहीं संजय गांधी जिसने देश पर आपातकाल का कलंक थोपने में अहम भूमिका निभाई थी, जिसने जबरिया कितने लोगों के परिवार नियोजन करा दिए। लाखों लोगों को जेलों में ठूस दिया गया भयंकर यातनाएं भी दी गईं। वहीं संजय जो मेनका गांधी से जबरदस्ती शादी किया। कहा तो ये भी जाता है कि संजय गांधी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री यानी अपनी माँ इंदिरा गांधी को खुले मंच पर थप्पड़ मार दिया था।

एक थ्योरी ये भी आती है कि वो थप्पड़ कहीं न कहीं संजय गांधी की मौत की कारण बनी थी। हालांकि संजय गांधी की ग़द्दार मुस्लिमों को सबक सिखाने की जो सोच थी मुझे अति प्रिय लगता है। लेकिन हां ग़द्दार मुस्लिमों को ना कि वतनपरस्त को।

हां तो 44 साल पहले की बात है ये दिन था 23 जून 1980 का. सुबह का वक्त. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के घर से एक गाड़ी बाहर निकली……

हरे रंग की मेटाडोर चला रहे थे उनके छोटे बेटे संजय गांधी. अमेठी से सांसद. और एक महीने पहले ही कांग्रेस के महासचिव बने. मगर संजय को अपनी सत्ता और शक्ति के लिए इन पदों की दरकार नहीं थी. सब जानते थे कि पिछले पांच बरस से वही कांग्रेस के सर्वेसर्वा थे बहरहाल संजय घर से निकले जल्दी में मां को बाय भी नहीं बोला. बेटा वरुण सो रहा था 3 महीने 10 दिन का बच्चा. पत्नी मेनका उसे संभालने में लगी थी।
संजय पहुंचे एक किलोमीटर दूर सफदरजंग एयरपोर्ट. यहां उनका इंतजार कर रहे थे दिल्ली फ्लाइंग क्लब के चीफ इन्स्ट्रक्टर सुभाष सक्सेना. और एक मशीन. लाल रंग की शोख चिड़िया. एक नया एयरक्राफ्ट. पिट्स एस 2 ए. हल्का इंजन कलाबाजी खाने के लिए मुफीद विंग्स बस एक चीज मुफीद नहीं थी. संजय का रवैया. सियासत की तरह फ्लाइंग में भी वह दुस्साहस की हद तक लापरवाह और जोखिम लेने वाले थे अकसर सुरक्षा नियमों को तोड़ते थे. कहने वाले तो ये भी कहते हैं कि जूतों के बजाय कोल्हापुरी चप्पलों में ही प्लेन उड़ाने लग जाते थे. संजय की मां इंदिरा को तमाम ब्यूरोक्रेट्स और नेताओं ने इस बारे में बताया था. मगर बात संजय की थी. जिसकी जिद के आगे पहले भी एक बार बेबस मां ने पूरे देश को रेहन रख दिया था. यहां तो सिर्फ कुछ नियमों भर की बात थी।

मगर नहीं, बात दो जिंदगियों की थी. जो सुबह 7.15 बजे उड़ान भर चुकी थीं कुछ ही मिनटों में वह अशोका होटल के ऊपर गोल नाच रहे थे एयरक्राफ्ट अपने नाम के मुताबिक काम दे रहा था लेकिन 10 मिनट बीतने के बाद संजय इसे खतरनाक निचाई पर लाकर गोते खिलाने लगे. और उसके भी कुछ मिनटों के बाद उनका नियंत्रण खत्म हो गया और फिर घर्र घर्र की आवाज करता हुआ डिप्लोमैटिक एनक्लेव में संजय गांधी के घर से कुछ ही मिनटों की एरियल दूरी पर पिट्स क्रैश कर गया।

15 मिनट में मौके पर एंबुलैंस और एयरक्राफ्ट पहुंचे. डालियां काटी गईं. प्लेन के मलबे के बीच से संजय और सुभाष की लाश निकाली गई ब्रेन हैमरेज के चलते दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी उन्हें वहीं स्ट्रैचर पर लाल कंबल से ढंक रख दिया गया कुछ ही मिनटों में वहां पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पहुंचीं. अपने सचिव आरके धवन के साथ कार से उतरते ही इंदिरा दौड़ने लगीं. फिर कुछ संभलीं मगर बेटे की शकल देखने के बाद फूट फूट कर रोने लगीं.
इंदिरा को संभालने वाला कोई नहीं था. उनकी ताकत छोटा बेटा और राजनीतिक उत्तराधिकारी संजय एक लाश बन चुका था. संजय की बीवी मेनका घर पर थी. बड़ा बेटा राजीव, बहू सोनिया और उनके बच्चे राहुल और प्रियंका इटली में छुट्टियां मना रहे थे।

पूरा देश सकते में था. सब अपने अपने ढंग से संजय को याद कर रहे थे. विरोधी दलों के लिए वह इमरजेंसी का खलनायक था. जिसकी पहली जिद थी जनता कार बनाना. मारूति के नाम से. और इस सपने के लिए मां इंदिरा ने बैकों की तिजोरियां खुलवा दीं. सरकार की हर मुमकिन मदद दी. कार फिर भी नहीं बनी. मगर बेटा तब तक सरकारें बनाने बिगाड़ने में लग गया था. इमरजेंसी के दौरान उसने कभी सेंसरशिप की आड़ में पत्रकारों को धमकाया. तो कभी पूरी की पूरी फिल्म की रील ही जलवा दी. तुर्कमान गेट पर मलिन बस्ती हटाने के लिए गोलियां चलीं. नसबंदी कार्यक्रम के लिए जबरदस्ती की गई.
मगर पब्लिक जबर थी. मसट्ट मारे बैठी रही. और जब बारी आई. तो ऐसा पलटवार किया कि मां इंदिरा रायबरेली से और बेटा संजय अमेठी से बुरी तरह चुनाव हार गए.
इसके बाद शुरू हुआ ट्रायल का दौर. संजय गांधी पर एक के बाद एक मुकदमे लदने लगे. उनका तमाम वक्त पेशी में बीतता. मगर इसे भी संजय ने शक्ति प्रदर्शन का जरिया बना लिया. अदालतों में उनके बाहुबली युवा समर्थकों का हूजूम जुटता. ऐसा लगता गोया कोर्ट रूम नहीं संजय का दरबार सज रहा हो

एक रोज 11 महीने की सुनवाई के बाद दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के जज वोहरा ने उन्हें किस्सा कुर्सी का मामले में एक महीने की सजा सुना दी और इसके बाद जमानत भी नहीं दी. संजय गांधी, जो एक साल पहले तक देश के हर खड़कते पत्ते को इजाजत देता था, दिल्ली की जेल में था. कुछ रोज बाद उन्हें ऊपरी कोर्ट से जमानत मिली
समय बदला लोग बदले सत्ता बदली और संजय भी बदले।
1980 के चुनाव में उन्होंने मां को वापस पीएम बनाने के लिए सब पत्ते सही फेंके. युवाओं को जमकर टिकट बांटे गए. जनता, सत्तारूढ़ जनता पार्टी के बंटरबांट से तंग थी. कांग्रेस केंद्र में वापस लौटी. और लौटा संजय का रसूख. वह पहला और इकलौता चुनाव भी तभी जीते. अमेठी से ही. जल्द ही उन्होंने मम्मी को एक काम के लिए राजी कर लिया. 9 ऐसे राज्यों में जहां कांग्रेस सत्ता में नहीं थी, विधानसभा भंग करने का फैसला किया गया. कहा गया कि देश ने नया जनादेश दिया है. इन्हें भी नए सिरे से इसे मानना होगा. चुनाव हुए तो 8 राज्यों में कांग्रेस सत्ता में वापस लौटी. इसका श्रेय भी संजय को दिया गया. उन्होंने सभी जगह अपने लोगों को सीएम की कुर्सी पर बैठाया।
संजय के राज्यारोहण की तैयारी शुरू हो चुकी थी. वह अपना राजनीतिक कौशल जाहिर कर चुके थे. ये तय था कि अब कांग्रेस में वही होगा जो संजय चाहेंगे. इसलिए तमाम बूढ़े पुराने नेता भी घुटने मोड़कर दंडवत करने लगे थे. मुख्यमंत्रियों को तो अपनी ऑक्सीजन ही यहीं से मिलती थी

और तब अचानक संजय चल बसे. सबके समीकऱण हिल गए. मगर जल्द ही समझ आ गया कि संजय के बाद बारी राजीव गांधी की है. जो नहीं समझे, वे संजय की नाराज विधवा मेनका गांधी संग हो लिए. मेनका ने संजय विचार मंच नाम से पार्टी बनाई. अलग चुनाव लड़ा. 1984 में अमेठी से राजीव को चुनौती देने पहुंचीं और खेत रहीं. मगर जनता दल के उदय के साथ उनकी किस्मत भी चमकी. बाद में वह बीजेपी में आ गईं. और बेटा वरुण भी कमल सहारे खिलने की कोशिशों में लगा है

संजय गांधी की मौत भी उनकी जिंदगी की तरह थी. अचानक क्रूर सबको चौंकाने वाली और उनका जनाजा उनके राजनीतिक कद की गवाही दे रहा था. हर राज्य का मुख्यमंत्री चिता के 200 मीटर के दायरे में मौजूद था. दिल्ली में मौजूद हर देश का प्रतिनिधि कतार लगा कर खड़ा था. रेडियो पर प्रोटोकॉल तोड़ते हुए शोक धुन बज रही थी. अगले रोज यानी 24 जून को मद्रास में पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरि का भी निधन हुआ था. मगर उस तरफ किसका ध्यान होता

संजय ने आखिरी बार अपनी तरफ पूरा ध्यान खींचा. और चले गए मारुति बनाने की चाह रखने वाला मारुति नंदन की तरह हवा में उड़ना चाह रहा था. मगर वो ईश्वर थे उन्हें गिरने का भय नहीं होता ये इंसान था जिसके अंत के लिए एक चूक काफी थी
संजय गांधी के मरने की गुत्थी को कोई नही समझ पाया है अभी तक ठीक से।



नोट - यदि आपको ये जानकारी अच्छी लगी तो हमें फॉलो करें। हम आपको और सामयिक विश्लेषण देने का प्रयास करेंगे।

01/08/2025

पढ़िए खुद को विश्व के सबसे बड़े सरपंच की मूर्खता।

25% टैरिफ़ कोई डरने वाली चीज नहीं है बाकि देशो पर भी लग रहे है लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प ने ख़ास भारत के विषय मे लिखा है ये बड़ी सोचने वाली बात है। हमारी प्रतिष्ठा कितनी बढ़ी है वो इससे समझ मे आता है।

जो बाइडन तो अब भी याद नहीं आते क्योंकि उनके समय तो अमेरिका भारत मे तख्तापलट के मूड मे था। ट्रम्प का टैरिफ़ वॉर ज्यादा आसान है बजाय बाइडन के कोल्ड वॉर के।

ट्रम्प की भारत से कुछ मांगे है पहली नोबल पुरुस्कार के लिये उन्हें नामांकित क्यों नहीं किया, दूसरा कि भारत अमेरिका से F-35 विमान खरीदे, तीसरा और सबसे खतरनाक कि भारत अमेरिकी कम्पनियो को क़ृषि बाजार मे घुसने दे।

तीसरा तो यदि हम मान गए तो समझो किसानों की हालत ख़राब हो जायेगी। थोड़ी गलती हमारी भी है जय जवान जय किसान के चक़्कर मे हम किसानो की सिर्फ पेम्परिंग करते रहे उन्हें लड़ने योग्य नहीं बनाया।

जैसे टाटा और महिंद्रा ने विदेशी कारो की छुट्टी कर दी वैसे क़ृषि मे ऐसा कोई बड़ा ब्रांड नहीं दिखता जो विदेशियों की टक्कर मे हो। यदि अमेरिकी कम्पनिया यहाँ घुस आयी तो ये समझ लीजिये चुन चुनकर मारेगी।

वैसे ये आपदा मे अवसर भी हो सकता है कि भारत सरकार मान जाए और ज़ब किसानों के गले पर बात आये तो अमेरिकी उत्पादों को ही धूल चटा दे लेकिन पप्पू राजनीति जरूर खेलेगा।

ट्रम्प जो कर रहे है वो भारत के लिये एक सुअवसर है, यही मौका है ज़ब चीन से संबंध अच्छे हो सकते है और ये हो जाएंगे इसमें कोई शक नहीं है। भारत पर दबाव आएगा तो यूरोपीय संघ और दक्षिणी अमेरिकी देशो से ट्रेड डील हो सकती है।

मोदी सरकार पर ये तो भरोसा है कि इनकी स्पीड धीमी हो सकती है मगर ये रुकेंगे नहीं। वैसे एक बात ये है कि अमेरिका से कई देशो ने ट्रेड डील कर ली है, बावजूद इसके उन पर 15% टैरिफ़ लग चुके है।

मतलब यदि भारत भी ट्रेड डील कर ले तो टैरिफ़ से मुक्ति नहीं मिलेगी। ये तथ्य इसलिए जान लीजिए क्योंकि ट्रेड डील के बाद भी आउल बाबा भौ भौ करने वाला है।

अब दूसरी बात ट्रम्प ने कही कि भारत और रूस की अर्थव्यवस्था मर चुकी है। इस पर आप अपनी अपनी श्रद्धा से ही हँस लो, क्योंकि हाल ही मे भारत ने 4 ट्रिलियन का आंकड़ा पार किया है।

समस्या अर्थव्यवस्था की नहीं है समस्या आर्थिक असमानता की है। खैर इस पर हमें बोलने की जरूरत नहीं है खुद अमेरिका के इन्वेस्टमेंट बैंक और वित्तीय संस्थान निवेश किये हुए बैठे है।

रूस का पता नहीं हमारी अर्थव्यवस्था तो बेहतरीन है और अमेरिका की सुस्त गति से तो ठीक है। तीसरा अमेरिका चाहता है कि हम F-35 खरीद ले, मना नहीं है लेकिन अमेरिका टैरिफ़ के डर से बेचेगा तो गलतफहमी मे है।

ट्रम्प ने रूस के साथ नाम जोड़कर बचकाना हरकत कर दी। पूरी दुनिया मे ऐसे नाम लेकर हमले करने वाले गधे सिर्फ राहुल गाँधी और जस्टिन ट्रूडो ही देखने को मिले है।

अब रही पाकिस्तान के साथ डील तो खुद पाकिस्तान ही इस समय बेज्जत सा महसूस कर रहा है क्योंकि पाकिस्तान के लोग अब पूछ रहे है कि अमेरिकी कम्पनी को ऑयल क्यों देने वाले हो?

ये गुप्त डील थी मगर ट्रम्प ने बड़बोलेपन मे बोल दिया कि पाकिस्तान से तेल निकालने मे अमेरिकी कंपनी ढूंढ रहे है। वैसे पाकिस्तान मे तेल अब तक मिला ही नहीं है सिर्फ संभावना मिली है।

एक संभावना पर ट्रम्प इतने उतावले हो गए और यही अपरिपक्वता है जिसकी वजह से लग रहा है कि ये पूरे 4 साल भी नहीं टिकेंगे। ट्रम्प व्यक्ति बुरे नहीं है लेकिन आयु एक ऐसा तत्व है जिस पर किसी का बस नहीं है।

भारत को चिंता की जरूरत नहीं है ये 25% टैरिफ़ लगे हम पर है पर चुकाना उनकी जनता को है। चीन पर 145% टैरिफ़ लगे है हमारा एकमात्र प्रतिद्वंदी भी इस प्रकार चित हो गया।

महंगाई अमेरिका मे बढ़ेगी, डॉलर थोड़ा महंगा हो सकता है और थोड़ी सी महंगाई हमारी भी बढ़ जाए। लेकिन भारत अमेरिका के हर व्यापारिक युद्ध का उत्तर देने के लिये प्रस्तुत भी है और सक्षम भी। इसी दिन के लिये ही तो नया इंडिया बनाया था।



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01/08/2025

आदरणीय सरसंघचालक मोहन जी भागवत को गिरफ्तार के दिए गए थे आदेश। तथ्य से उलट भागवत जी पर मालेगांव कांड में फंसाने की हुई थी साजिश। पुलिस जिनके खिलाफ कर रही थी जांच उसको पहले ही फर्जी एनकाउंटर में मार गिराया गया था और उनके खोजने की नाटक चल रही थी। ये थी तत्कालीन सरकार की गंदी राजनीति। मुख्य अभियुक्त के बदले साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित को फर्जी फंसाया गया और असह्य यातनाएं दी गई। यहीं पर कुत्सित मानसिकता के वाहक सरकार ने हिन्दू आतंकवाद के नए शब्द गढ़े थे। ये मैं नहीं कह रहा ये बकौल आई ओ (IO) मालेगांव केस के लिखित पक्ष हैं जो उन्होंने कोर्ट में दिए हैं। परिणामस्वरूप IO मुजावर को ही कई झूठे मामलों में फंसाया गया और निलंबित किया गया। महाराष्ट्र एटीएस और तत्कालीन सरकार पर गंभीर आरोप साबित हुए हैं।
क्या आपको नहीं लगता ऐसे पुलिस वालों और राजनीतिज्ञ को इसकी सजा मिलनी चाहिए।

29/07/2025

तमन्ना फिर मचल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ
ये मौसम भी बदल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

मुझे ग़म है कि मैं ने ज़िंदगी में कुछ नहीं पाया
ये ग़म दिल से निकल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

ये दुनिया-भर के झगड़े घर के क़िस्से काम की बातें
बला हर एक टल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

नहीं मिलते हो मुझ से तुम तो सब हमदर्द हैं मेरे
ज़माना मुझ से जल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

- तुम्हारा ही

29/07/2025

हई देखिए, बाबू -सोना के जन्नत का क्या हाल किया है राम जी ने।

के की आज के बारिश के बाद हुआ बुरा हाल। निम्मा-निम्मियों ने जाने से किया तौबा।

Photos from Web2Koof's post 27/07/2025

अप्रतिम शक्तिपुंज रामभक्त हनुमानजी के 7 पवित्र स्थल

भगवान हनुमान केवल शक्ति और भक्ति के प्रतीक ही नहीं हैं; वे अटूट विश्वास और दिव्य सुरक्षा के प्रतीक हैं। भगवान राम के प्रति अपनी अटूट निष्ठा और अपार शक्ति के लिए जाने जाने वाले हनुमान को आज भी पूरे भारत में एक रक्षक और साहस के स्रोत के रूप में पूजा जाता है। रामायण में वर्णित उनकी वीरता की कहानियाँ केवल कहानियाँ नहीं हैं - वे भारत के आध्यात्मिक हृदय में गहराई से समाई हुई हैं।

आज भी, ऐसे पवित्र मंदिर और स्थल हैं जहाँ भक्तों का मानना है कि हनुमान की दिव्य ऊर्जा अभी भी जीवित है। दिल्ली की व्यस्त सड़कों से लेकर हिमालय की शांत चोटियों तक, ये सात पवित्र स्थान केवल स्थापत्य कला के चमत्कार ही नहीं हैं - ये विश्वास और भक्ति के जीवंत प्रमाण हैं। आइए भारत के उन सात स्थानों के रहस्य और आध्यात्मिक गहराई का पता लगाएं जहाँ हनुमान की शक्ति का सम्मान किया जाता है।

1. हनुमान गढ़ी, अयोध्या, उत्तर प्रदेश
भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या के हृदयस्थल में स्थित, हनुमान गढ़ी, भगवान हनुमान को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि हनुमान ने अयोध्या और भगवान राम की जन्मभूमि की रक्षा के लिए यहीं निवास किया था।
एक पहाड़ी पर स्थित, इस मंदिर तक पहुँचने के लिए 76 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जो आध्यात्मिक ज्ञान की ओर एक प्रतीकात्मक चढ़ाई है। अंदर, हनुमान की एक भव्य मूर्ति है जो युवा भगवान राम को अपनी गोद में लिए हुए है, जो उनके गहरे प्रेम को दर्शाती है। भक्तों का मानना है कि यहाँ प्रार्थना करने से बाधाएँ दूर होती हैं और शक्ति एवं सुरक्षा प्राप्त होती है। मंत्रोच्चार और प्रसाद से भरा मंदिर का जीवंत वातावरण शांति और दिव्य जुड़ाव की अनुभूति कराता है।

2. जाखू मंदिर, शिमला, हिमाचल प्रदेश
शिमला की सबसे ऊँची चोटी पर हनुमान जी को समर्पित जाखू मंदिर स्थित है। पौराणिक कथा के अनुसार, लंका युद्ध के दौरान, लक्ष्मण को ठीक करने के लिए संजीवनी बूटी की खोज में हनुमान जी यहीं रुके थे।
इस मंदिर की खासियत है हनुमान जी की 108 फुट ऊँची विशाल प्रतिमा, जो दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमाओं में से एक है। शिमला के क्षितिज पर इस प्रतिमा की प्रभावशाली उपस्थिति हनुमान जी के सुरक्षात्मक आभामंडल को दर्शाती है। मंदिर का शांत वातावरण और हिमालय का मनोरम दृश्य आध्यात्मिक अनुभव को और भी बढ़ा देता है, जिससे यह तीर्थयात्रियों और पर्यटकों दोनों के लिए एक पवित्र स्थल बन जाता है।

3. महावीर मंदिर, पटना, बिहार
पटना स्थित महावीर मंदिर भगवान हनुमान की भक्ति का एक शक्तिशाली केंद्र है। इस मंदिर की उत्पत्ति प्राचीन काल से मानी जाती है, लेकिन 20वीं शताब्दी में इसे एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्धि मिली।
हज़ारों भक्त प्रतिदिन इस मंदिर में आते हैं और शक्ति और कष्टों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यहाँ हनुमान जी की शक्ति विशेष रूप से मनोकामना पूर्ति और व्यक्तिगत कष्टों को दूर करने में प्रबल है। यह मंदिर अस्पतालों और शैक्षिक कार्यक्रमों सहित धर्मार्थ कार्यों के माध्यम से हनुमान जी की निस्वार्थ सेवा की भावना को भी आगे बढ़ाता है।

4. संकट मोचन हनुमान मंदिर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
संत तुलसीदास द्वारा स्थापित, वाराणसी स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। "संकट मोचन" नाम का अर्थ है "संकटों का निवारण करने वाला", और भक्त इस विश्वास के साथ यहाँ आते हैं कि हनुमान का आशीर्वाद उन्हें संकटों से उबार लेगा।
इस मंदिर की एक अनूठी परंपरा है हनुमान को लड्डू चढ़ाना, जो मधुरता और शक्ति का प्रतीक है। मंदिर में एक वार्षिक शास्त्रीय संगीत समारोह भी आयोजित किया जाता है जहाँ कलाकार भक्ति और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का मिश्रण करते हुए, भगवान को अर्पित करते हैं। मंदिर का शांत वातावरण, वाराणसी की जीवंत ऊर्जा के साथ मिलकर, एक गहन आध्यात्मिक अनुभव का निर्माण करता है।

5. कष्टभंजन हनुमान मंदिर, सारंगपुर, गुजरात
सारंगपुर स्थित कष्टभंजन हनुमान मंदिर अपनी चमत्कारी उपचार शक्तियों के लिए पूजनीय है। "कष्टभंजन" नाम का अर्थ है "दुखों का निवारण करने वाला", और भक्तों का मानना है कि यहाँ हनुमान की उपस्थिति नकारात्मक ऊर्जाओं और मानसिक कष्टों को दूर करती है।
इस मंदिर में हनुमान की एक अनोखी मूर्ति है जो भयंकर भाव-भंगिमाओं के साथ खड़ी मुद्रा में है, जो उनके भक्तों को बुरी शक्तियों से बचाने की उनकी तत्परता का प्रतीक है। यह मंदिर अपने भूत-प्रेत भगाने के अनुष्ठानों और आध्यात्मिक उपचार अनुष्ठानों के लिए भी जाना जाता है, जहाँ हज़ारों भक्त मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक चुनौतियों से मुक्ति पाने के लिए आते हैं।

6. नमक्कल अंजनेयार मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु स्थित नमक्कल अंजनेयार मंदिर में हनुमान जी की 18 फुट ऊँची मूर्ति स्थापित है, जो एक ही पत्थर से तराशी गई है। यह मूर्ति बिना छत वाले एक खुले गर्भगृह में स्थापित है - यह एक दुर्लभ विशेषता है जो हनुमान जी के स्वर्ग से जुड़ाव और उनकी असीम शक्ति का प्रतीक है।
इस मंदिर का रामायण से गहरा संबंध है - ऐसा माना जाता है कि संजीवनी पर्वत ले जाते समय हनुमान जी यहीं रुके थे। भक्त साहस और शक्ति की प्राप्ति के लिए इस मंदिर में आते हैं, और कहा जाता है कि यहाँ प्रार्थना करने से मन की शांति और जीवन की चुनौतियों का समाधान मिलता है। मंदिर का शांत वातावरण हनुमान जी की ऊर्जा के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव को बढ़ाता है।

7. हनुमान मंदिर, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली
दिल्ली की भीड़-भाड़ के बीच कनॉट प्लेस में हनुमान मंदिर स्थित है - जो राजधानी के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है और माना जाता है कि इसका निर्माण महाभारत काल से हुआ है। मंदिर का शिखर अर्धचंद्र और सूर्य के प्रतीकों से सुशोभित है, जो इसकी शाश्वत उपस्थिति का प्रतीक हैं।
हनुमान पूजा के लिए शुभ माने जाने वाले मंगलवार और शनिवार को मंदिर में विशेष रूप से भीड़ होती है। भक्त जीवन की चुनौतियों से शक्ति और सुरक्षा की कामना से यहाँ आते हैं। "जय हनुमान" के लयबद्ध मंत्र और धूपबत्ती की सुगंध आस्था और भक्ति से भरपूर वातावरण का निर्माण करती है।

हनुमान की शक्ति और आस्था की विरासत
ये सात पवित्र स्थल केवल पूजा स्थल ही नहीं हैं - ये हनुमान की अमिट शक्ति और भक्ति के जीवंत प्रतीक हैं। पूरे भारत में, हनुमान की पूजा केवल एक देवता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक रक्षक, शक्ति के स्रोत और विपत्ति में मार्गदर्शक के रूप में भी की जाती है।
इन मंदिरों में जाना केवल एक आध्यात्मिक अनुभव ही नहीं है - यह हनुमान के दृढ़ निश्चय और आस्था का स्मरण कराता है। चाहे आप शक्ति, स्पष्टता या सुरक्षा चाहते हों, इन पवित्र स्थानों में हनुमान की उपस्थिति आपको सांत्वना और आंतरिक शांति का मार्ग प्रदान करती है।

25/07/2025

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Brajesh Jha
to me
0 minutes agoDetails
दिल्ली सरकार की अनूठी पहल, घर बैठे मुफ्त में मंगवाएं पौधे, सजाएं अपना गार्डन

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ममूरपुर नर्सरी
पूठ कलां नर्सरी
कुतुबगढ़ नर्सरी
रेवला खानपुर नर्सरी
टॉल सीडलिंग एंड मेडिसनल प्लांट नर्सरी, तुगलकाबाद

25/07/2025

भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच मुक्त व्यापार संधि (FTA) 6 मई, 2025 को अंतिम रूप दी गई और 24 जुलाई, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंदन यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित हुई। यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 120 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है, जो वर्तमान 60 बिलियन डॉलर के व्यापार को दोगुना करेगा। भारत के लिए इस समझौते के प्रमुख बिंदु और प्रभाव क्या है समझिए...

प्रमुख प्रावधान
1. टैरिफ में कमी:
भारतीय निर्यात: भारत की 99% टैरिफ लाइनों, जो व्यापार मूल्य का लगभग 100% कवर करती हैं, को यूके में शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होगी। इसमें कपड़ा, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, खेल सामान, खिलौने, इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटो पार्ट्स और जैविक रसायन जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्र शामिल हैं।
- यूके निर्यात: यूके की 90% टैरिफ लाइनों पर शुल्क कम किया जाएगा, जिसमें 85% पर 10 वर्षों में शुल्क-मुक्त स्थिति होगी। प्रमुख कटौती:
- व्हिस्की और जिन पर शुल्क 150% से तुरंत 75% और एक दशक में 40% तक कम होगा।
- ऑटोमोटिव पर शुल्क 100% से अधिक से कोटा प्रणाली के तहत 10% तक कम होगा।
- मेडिकल डिवाइस, एयरोस्पेस कंपोनेंट, लैंब, सैल्मन, कॉस्मेटिक्स और चॉकलेट जैसे उत्पादों पर भी कम शुल्क होगा।

2. सेवाएं और पेशेवर गतिशीलता:
- समझौता भारतीय पेशेवरों, जैसे अनुबंध सेवा प्रदाताओं, व्यवसायिक आगंतुकों, निवेशकों, कंपनी-आंतरिक स्थानांतरण और योग प्रशिक्षकों, संगीतकारों, शेफ जैसे स्वतंत्र पेशेवरों की गतिशीलता को सुगम बनाता है। यह भारत की प्रमुख मांग थी, जो यूके के पॉइंट-आधारित आप्रवासन सिस्टम को बदले बिना वैश्विक गतिशीलता को बढ़ाता है।
- भारतीय आईटी, वित्तीय, पेशेवर और शैक्षिक सेवाओं को यूके में बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी।

3. डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन (DCC):
- एक पारस्परिक DCC सुनिश्चित करता है कि अस्थायी रूप से (3 वर्ष तक) दूसरे देश में काम करने वाले कर्मचारी केवल अपने गृह देश में सामाजिक सुरक्षा योगदान देंगे, जिससे नियोक्ताओं और कर्मचारियों की लागत कम होगी। यह यूके के ईयू, स्विट्जरलैंड और अन्य देशों के साथ समान समझौतों के अनुरूप है।

4. अन्य पहलू:
- समझौता 26 अध्यायों को कवर करता है, जिसमें वस्तुएं, सेवाएं, डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा, सरकारी खरीद, श्रम, लिंग और भ्रष्टाचार-निरोधी मानक शामिल हैं।
- भारत ने डिजिटल सेवा वितरण (जैसे वास्तुकला, इंजीनियरिंग, कंप्यूटिंग) और गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने के लिए उपाय सुनिश्चित किए हैं।
- एक अलग द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर बातचीत चल रही है, और कार्बन बॉर्डर टैक्स जैसे मुद्दों को अलग से संबोधित किया जा रहा है।

भारत के लिए आर्थिक लाभ
निर्यात वृद्धि: यूके बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच से भारतीय निर्यात, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, जिससे युवाओं के लिए रोजगार सृजन होगा।
रोजगार सृजन: कपड़ा, चमड़ा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है, जो 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य के अनुरूप है।
उपभोक्ता लाभ: यूके से आयातित व्हिस्की, कार और मेडिकल डिवाइस पर कम शुल्क से भारतीय उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए लागत कम होगी और उत्पाद विविधता बढ़ेगी।
रणनीतिक साझेदारी: यह समझौता भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत करता है और 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उसकी महत्वाकांक्षा को समर्थन देता है। यह यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ चल रही FTA वार्ताओं के लिए भी एक मिसाल कायम करता है।

वार्ता का समयरेखा
- जनवरी 2022 में शुरू हुई वार्ता, तीन वर्षों में 15 दौर तक चली, जिसमें 2024 में दोनों देशों में चुनावों के कारण देरी हुई।
- अप्रैल 2025 तक, समझौते का 90% हिस्सा पूरा हो चुका था, जिसमें वीजा, व्हिस्की, कार और फार्मास्यूटिकल्स प्रमुख बाधाएं थीं। भारत ने अपनी वीजा मांगों को संयमित किया, और 26 में से 25 अध्याय अप्रैल के अंत तक अंतिम रूप ले चुके थे।
- 6 मई, 2025 को भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूके व्यापार सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स के बीच बातचीत के बाद समझौता पूरा हुआ। इसे 24 जुलाई, 2025 को हस्ताक्षरित किया गया, जो अब कानूनी जांच और यूके संसदीय अनुमोदन के लिए लंबित है।

भारत के लिए प्रभाव
आर्थिक विकास: यह FTA द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करेगा और निर्यात-प्रधान विकास रणनीति, विशेष रूप से श्रम-प्रधान और प्रौद्योगिकी-प्रधान क्षेत्रों में भारत का समर्थन करेगा।
वैश्विक स्थिति: यह समझौता भारत की व्यापार वार्ता विश्वसनीयता को बढ़ाता है, जिससे यूरोपीय संघ जैसे बड़े भागीदारों के साथ बातचीत में मदद मिलेगी।
चुनौतियां: भारत को सेवाओं में विदेशी प्रतिस्पर्धा के बारे में घरेलू चिंताओं को संबोधित करना होगा और लाभ को अधिकतम करने के लिए प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना होगा।

वर्तमान स्थिति
- FTA पर 24 जुलाई, 2025 को हस्ताक्षर किए गए, और यह अंतिम कानूनी सत्यापन और यूके संसदीय अनुमोदन के लिए लंबित है। इसे एक वर्ष के भीतर लागू होने की उम्मीद है, तब तक कोई तत्काल बदलाव नहीं होगा।
- भारतीय अधिकारियों द्वारा इसे “परिवर्तनकारी समझौता” माना जा रहा है, जो भारत-यूके सहयोग के लिए 2030 रोडमैप के अनुरूप है।

यह FTA भारत-यूके आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारतीय व्यवसायों और श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है और गहरे रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देता है। अधिक जानकारी के लिए, अंतिम कानूनी पाठ, जो प्रकाशित होने पर उपलब्ध होगा, टैरिफ शेड्यूल और प्रतिबद्धताओं पर व्यापक विवरण प्रदान करेगा।

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