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06/06/2026

अत्यंत दुःखद समाचार।

हमारे पुराने साथी श्री हरि सिंह बेदी जी की पूजनीय माताजी का स्वर्गवास हो गया है। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।

कल प्रातः जवाला नगर, शाहदरा श्मशान भूमि में उनकी अंतिम क्रिया सम्पन्न होगी। इस क्षेत्र के निकट रहने वाले सभी साथीगणों से विनम्र आग्रह है कि हमारे जिला अध्यक्ष श्री भगवान दास जी के नेतृत्व में प्रातः 10:00 बजे पहुँचकर अंतिम दर्शन करें तथा शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करें।

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः। भावपूर्ण श्रद्धांजलि। 🙏

03/06/2026

✈️ विमानन क्षेत्र को राहत, लेकिन सड़क परिवहन क्षेत्र की अनदेखी क्यों?

देश की अर्थव्यवस्था में ट्रक, बस, टैक्सी और स्कूल ट्रांसपोर्ट संचालकों की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। लाखों परिवार सीधे इस क्षेत्र पर निर्भर हैं, फिर भी परिवहन व्यवसाय लगातार बढ़ती लागत, महंगे डीज़ल-पेट्रोल, टैक्स, सीएनजी, परमिट शुल्क और विभिन्न प्रशासनिक बोझों का सामना कर रहा है।

जब भी किसी बड़े कॉर्पोरेट या विशेष उद्योग को राहत पैकेज, कर छूट या अन्य सरकारी सहायता की खबर आती है, तब सड़क परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के मन में एक सवाल उठना स्वाभाविक है—

~ क्या छोटे और मध्यम परिवहन संचालकों की समस्याएँ सरकार की प्राथमिकता नहीं हैं?

स्कूल वाहन संचालक, टैक्सी चालक, ट्रक मालिक और छोटे परिवहन व्यवसायी वर्षों से मांग कर रहे हैं कि:
✅ ईंधन पर करों में राहत मिले
✅ परमिट और फिटनेस शुल्क को तर्कसंगत बनाया जाए
✅ परिवहन क्षेत्र के लिए विशेष सहायता पैकेज लाया जाए
✅ प्रशासनिक उत्पीड़न और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जाए
देश का परिवहन क्षेत्र केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है।

यदि सरकार बड़े उद्योगों को राहत दे सकती है, तो सड़क परिवहन क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं पर भी समान गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

हम पूछते हैं—क्या नीति निर्माण में सभी क्षेत्रों के साथ समान व्यवहार हो रहा है, या कुछ क्षेत्रों को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है?

RoadTransport

03/06/2026

और चाहिए अच्छे दिन? इंतज़ार करो अभी और भी अच्छे दिन आने वाले हैं!

03/06/2026

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का दवा 2.5 रुपए और बढ़ सकता है डीजल-पेट्रोल!

01/06/2026

इससे कुछ बदलेगा या रिश्वतखोरी और बढ़ जाएगी ❓

30/05/2026

कभी पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का प्रचार, कभी हाइड्रोजन की बात, कभी अब पानी और एथेनॉल से चूल्हा जलाने का दावा...

सवाल यह है कि नितिन गडकरी परिवहन मंत्री हैं या पेट्रोलियम मंत्री?

देश की सड़कें, पुल और एक्सप्रेसवे उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी हैं। लेकिन आज हालत यह है कि जगह-जगह पुल गिरने की खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में भारी लागत से बने गंगा एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त होने की खबरें चर्चा में रहीं, लेकिन जवाबदेही तय करने और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाने के बजाय जनता को नए-नए ईंधन प्रयोगों के सपने दिखाए जा रहे हैं।

याद कीजिए, जब एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर दावा किया गया था कि इससे पेट्रोल सस्ता होगा, देश की ऊर्जा निर्भरता कम होगी और जनता को राहत मिलेगी। लेकिन आम आदमी आज भी महंगे ईंधन का बोझ उठा रहा है।

दूसरी तरफ वाहन मालिकों के बीच एथेनॉल के कारण इंजन और माइलेज को लेकर लगातार चिंताएं उठती रही हैं।

सबसे बड़ा सवाल हितों के टकराव (Conflict of Interest) का है।
जब किसी मंत्री के परिवार का नाम एथेनॉल उद्योग से जुड़ता है और उसी समय सरकार एथेनॉल के उपयोग को लगातार बढ़ावा देती है, तो जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।

लोकतंत्र में पारदर्शिता का मतलब यही है कि ऐसे सवालों का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब दिया जाए।

देश को प्रचार नहीं, जवाबदेही चाहिए।
देश को नए-नए प्रयोगों की घोषणाएं नहीं, मजबूत सड़कें और सुरक्षित पुल चाहिए।

देश को फोटो-ऑप नहीं, जनता के पैसे से बने प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता का हिसाब चाहिए।

कहीं ऐसा तो नहीं कि "ग्रीन फ्यूल" के नाम पर कुछ चुनिंदा कंपनियों का कारोबार चमकाया जा रहा है, जबकि जनता महंगाई, खराब बुनियादी ढांचे और बढ़ते टैक्स का बोझ उठा रही है?

जनता पूछ रही है— सड़कों का मंत्री सड़कों पर कब ध्यान देगा?

28/05/2026

जब देश की सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल के वोटरों से कहती है — “अगली बार वोट दे देना” क्योंकि गलत तरीके से वोटर लिस्ट से नाम काट दिए गए…
और हम डर, सुविधा या चुप्पी के कारण कुछ नहीं बोलते…
तो याद रखिए, कल यही सिस्टम हमारे बच्चों से भी कह सकता है — “पेपर लीक हो गया? CBSE की व्यवस्था फेल हो गई? कोई बात नहीं… अगली बार पेपर दे देना!”

यह सिर्फ एक एग्जाम का मुद्दा नहीं है, यह देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य का सवाल है।

जब बच्चों की मेहनत, माता-पिता के सपने और युवाओं का भविष्य सिस्टम की लापरवाही में कुचला जाता है, तो चुप रहना भी अपराध बन जाता है।

आज अगर छात्र सड़कों पर हैं, तो वजह सिर्फ गुस्सा नहीं… बल्कि टूटा हुआ भरोसा है।

अब सवाल सीधा है — क्या इस देश में जवाबदेही सिर्फ जनता की होगी? या सत्ता में बैठे लोग भी कभी जिम्मेदारी लेंगे?

धर्मेंद्र_प्रधान NarendraModi

26/05/2026

CNG बढने से मेरी गाड़ी की महीने की 2700 रुपए की सीएनजी बड़ गई और बाकी घर की खरीदारी अलग से बड़ी है! आपका खर्चा कितना बड़ा ?

26/05/2026

डीजल बढ़ने से 19 लाख ट्रक बंद हुए और 15% किराया बड़ा! अमेरिका के प्यादे ने हमारे देश को गहरे संकट मे डाल दिया है! अब सब कुछ महंगा होगा!

26/05/2026

CNG पर महामानव ने 6 रुपये बड़ा दिये हैं!!

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