Pyar ka Jugaad

Pyar ka Jugaad

Share

Fun Page for everyone @ specially for those, who is in love.....
Like Share and Comment to express your love feeling here......

23/08/2024

फटी सी धोती, और मैला सा कुर्ता पहने एक आदमी भुट्टा। भुज रहा था
अब लकड़ी के कोयले पर भुज रहे भुट्टे की महक ऐसी होती है की जिसके नाक पर जायेगी, उसे खाने पर विवश कर देगी
तो हम इससे कैसे बच सकते थे?

गाड़ी रोक के उतर गए नीचे, और घर के 3 किलो भुट्टा पैक कराया,
लेकिन नाक में जाती भुट्टे की महक सूंघ कर रहा नही गया और मैने चाचा को बोला एक मेरे लिए भी भुज दीजिए
उन्होंने तुरंत जवाब दिया 15 रुपए का एक है हम भी बोल दिए भुजिए

जब तक वो भुजते मैं हिसाब लगता की एक ठेले पर 50 से ज्यादा भुट्टा है तो दिन का कितना कमाते होंगे

गाडित आधा ही लगा था तभी एक लड़का रॉयल एनफील्ड बाइक से आता है, वैसे ही गंदे कपड़े पहने
हाथ में 1 lakah के फोन के साथ

मैने दादा से पुछा पूरा ठेला बिक जाता है ??
उन्होंने कहा सीजन चल रहा इस समय आराम से सब बिक जाता है

मूर्खता पूर्वक मैने बोला की जब 50 बिक जाता है तो और लाइए
जिसपर उन्होंने उस एरिया में खड़े तकरीबन 6 thelo ke ऊपर इशारा किया
और बोला सब मेरा है

फिर मैंने पूछा आप इस सीजन में कमा लेते हैं इसके बाद

उन्होंने बोला 4 बेटे हैं , हमारे गर्मी के महीने में गन्ने का जूस बेचते हैं 20 रुपए ग्लास

बरसात में के भुट्टा बेचते हैं

और सर्दियों में अंडा बेचते हैं।

और 4 बेटे और एक पिता जी मिलकर महीने में लगभग 3 लाख का धंधा करते थे

उन्होंने ये भी बताया की पहले सिर्फ गन्ने के खेत थे और गन्ने को शुगर मिल में भेज देते थे औने पौने दाम पर

फिर मेरी पत्नी की तबीयत खराब हो गई और बच्चे छोटे थे
मैने गन्ने के रस को निकालने की मशीन ली और खुद के खेत के गन्ने को फुटकर बेचना शुरू किया पहले महीने कमाई नहीं हुईं लेकिन धीरे धीरे धंधा बढ़ा
1 से 4 मशीन ली और अब आधा गन्ना मिल में जाता था आधा मशीन पर रस बेचने के लिए

लेकिन फिर ये सीजन सिर्फ 3 4 महीने होता है
उसके बाद काम नहीं था, तो अब हमने सोचा कुछ और करने का
फिर नए सीजन में भुट्टे का कारोबार किया अपने ही खेत में उगाता हूं
मंडी ना लेजाके खुद बेचता हूं

पर जब ये काम एक महीने बाद बंद होगा तब तक सावन भादो खत्म होगा और कुवार लगते ही अंडे का व्यापर शुरू हो जाएगा

4 बेटे हैं 4 को काम करते हैं लेकिन मालिक हम ही है
सबको महीने का जेब खर्च देते हैं , जो ज्यादा माल बेचता है उसको थोड़ा ज्यादा देते हैं

मैने बोला ये तो ऑफिस सिस्टम है, तो वो बोले ऑफिस वाले हम लोग से चुरा के ले गए और हंसने लगे

तभी मैने पूछा और आपकी पत्नी की तबीयत खराब थी वो ठीक हो गई

उन्हें कहा कहां ठीक भईल 2 साल बाद ही चल बसी
पर ना यू बीमार होती ना हम ठेला लगाते,
खुद तो चली गई लेकिन परिवार को समप्पन कर दी

तब तक मेरा भुट्टा भुज चुका था
और मन में एक ध्वन्द्ध चल रहा था, को पढ़ाई के बाद हम लोग नौकरी के लिए मार करते हैं दिन रात हाय हाय करते हैं
अच्छी नौकरी मिलते ही सबसे पहले परिवार से कटते हैं
और सोचते हैं की अच्छी जिंदगी जी रहे

पर वास्तव में अच्छी जिन्दगी क्या है वो आप को सड़क चलते किसी गैर की कहानी सुन कर के हो समझ आएगी

23/08/2024

जब टीवी मेरे घर आया, तो मैं किताबें पढ़ना भूल गया था। जब कार मेरे दरवाजे पर आई, तो मैं चलना भूल गया।🥲

हाथ में मोबाइल आते ही मैं चिट्ठी लिखना भूल गया। जब मेरे घर में कंप्यूटर आया, तो मैं स्पेलिंग भूल गया। जब मेरे घर में एसी आया, तो मैंने ठंडी हवा के लिए पेड़ के नीचे जाना बंद कर दिया। जब मैं शहर में रहा, तो मैं मिट्टी की मेहक को भूल गया।🫣

मैं बैंकों और कार्डों का लेन-देन करके पैसे की कीमत भूल गया। परफ्यूम की महक से मैं ताजे फूलों की महक भूल गया। फास्ट फूड के आने से मेरे घर की महिलायें पारंपरिक व्यंजन बनाना भूल गई..😅

हमेशा इधर-उधर भागता, मैं भूल गया कि कैसे रुकना है और अंत में जब मुझे सोशल मीडिया मिला, तो मैं बात करना भूल गया..🥲

#यादें #अहमियत #पुरानासमय #किताबे #किताब #समय

23/08/2024

पुरानी य़ादें 90 का #दूरदर्शन और हम लोग :
1.सन्डे को सुबह-2 नहा-धो कर
टीवी के सामने बैठ जाना

2." #रंगोली"में शुरू में पुराने फिर
नए गानों का इंतज़ार करना

3." #जंगल-बुक"देखने के लिए जिन
दोस्तों के पास टीवी नहीं था उनका
घर पर आना

4." #चंद्रकांता"की कास्टिंग से ले कर
अंत तक देखना

5.हर बार सस्पेंस बना कर छोड़ना
चंद्रकांता में और हमारा अगले हफ्ते
तक सोचना

6.शनिवार और रविवार की शाम को
#फिल्मों का इंतजार करना

7.किसी नेता के मरने पर कोई #सीरियल
ना आए तो उस नेता को और गालियाँ देना

8.सचिन के आउट होते ही टीवी बंद
कर के खुद बैट-बॉल ले कर खेलने
निकल जाना

9." #मूक- #बधिर"समाचार में टीवी एंकर
के इशारों की नक़ल करना

10.कभी हवा से #ऐन्टेना घूम जाये तो
छत पर जा कर ठीक करना

बचपन वाला वो ' #रविवार' अब नहीं
आता, दोस्त पर अब वो प्यार नहीं आता।

जब वो कहता था तो निकल पड़ते
थे बिना #घडी देखे,

अब घडी में वो समय वो वार नहीं
आता।

बचपन वाला वो ' #रविवार' अब नहीं
आता...।।।

वो #साईकिल अब भी मुझे बहुत याद
आती है, जिसपे मैं उसके पीछे बैठ
कर खुश हो जाया करता था। अब
कार में भी वो आराम नहीं आता...।।।

#जीवन की राहों में कुछ ऐसी उलझी
है गुथियाँ, उसके घर के सामने से
गुजर कर भी मिलना नहीं हो पाता...।।।

वो ' #मोगली' वो ' #अंकल Scrooz',
' #ये जो है जिंदगी' ' #सुरभि' ' #रंगोली'
और ' #चित्रहार' अब नहीं आता...।।।

#रामायण, #महाभारत, #चाणक्य का वो
चाव अब नहीं आता, बचपन वाला वो
'रविवार' अब नहीं आता...।।।

वो #एक रुपये किराए की साईकिल
लेके, दोस्तों के साथ गलियों में रेस लगाना!

अब हर वार 'सोमवार' है
काम, ऑफिस, बॉस, बीवी, बच्चे;
बस ये जिंदगी है। दोस्त से दिल की
बात का इज़हार नहीं हो पाता।
बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं
आता...।।।

बचपन वाला वो ' #रविवार' अब नही
आता...।।।
यादें बचपन की 📺 📷

🙂 🙏

21/08/2024

बीस की गिनती•

एक राजा की बेटी की शादी होनी थी। बेटी की ये शर्त थी कि जो भी 20 तक की गिनती सुनाएगा उसको राजकुमारी अपना पति चुनेगी ! गिनती ऐसी हो जिसमें सारा संसार समा जाये। जो नहीं सुना सकेगा, उसको 20 कोड़े खाने पड़ेंगे। ये शर्त केवल राजाओं के लिए ही है।

अब एक तरफ राजकुमारी का वरण और दूसरी तरफ कोड़े ! एक-एक करके राजा महाराजा आए। राजा ने दावत भी रखी। मिठाई और सब पकवान तैयार कराए गए। पहले सब दावत का मजा ले रहे होते हैं। फिर सभा में राजकुमारी का स्वयंवर शुरू होता है।

एक से बढ़ कर एक राजा महाराजा आते हैं। सभी गिनती सुनाते हैं जो उन्होंने पढ़ी हुई थी, लेकिन कोई भी वह गिनती नहीं सुना सका जिससे राजकुमारी संतुष्ट हो सके।

अब जो भी आता कोड़े खा कर चला जाता। कुछ राजा तो आगे ही नहीं आए। उनका कहना था कि गिनती तो गिनती होती है। राजकुमारी पागल हो गई है। ये केवल हम सबको पिटवा कर मजे लूट रही है।

ये सब नजारा देख कर एक हलवाई हंसने लगता है। वह कहता है, डूब मरो राजाओं, आप सबको 20 तक गिनती नहीं आती !

ये सुनकर सब राजा उसको दण्ड देने के लिए बोलते हैं। राजा उनसे पूछता है कि क्या तुम गिनती जानते हो, यदि जानते हो तो सुनाओ।

हलवाई कहता है, हे राजन यदि मैंने गिनती सुनाई तो क्या राजकुमारी मुझसे शादी करेगी ? क्योंकि मैं आपके बराबर नहीं हूं और ये स्वयंवर भी केवल राजाओं के लिए है, तो गिनती सुनाने से मुझे क्या फायदा ?

पास खड़ी राजकुमारी बोलती है, ठीक है यदि तुम गिनती सुना सके तो मैं तुमसे शादी करूंगी ! और यदि नहीं सुना सके तो तुम्हें मृत्युदंड दिया जायेगा।

सब देख रहे थे कि आज तो हलवाई की मौत तय है। हलवाई को गिनती बोलने के लिए कहा जाता है।

राजा की आज्ञा लेकर हलवाई गिनती शुरू करता है।

एक भगवान,

दो पक्ष,

तीन लोक,

चार युग,

पांच पांडव,

छह शास्त्र,

सात वार,

आठ खंड,

नौ ग्रह,

दस दिशा,

ग्यारह रुद्र,

बारह महीने,

तेरह रत्न,

चौदह विद्या,

पन्द्रह तिथि,

सोलह श्राद्ध,

सत्रह वनस्पति,

अठारह पुराण,

उन्नीसवीं तुम और

बीसवां मैं...

सब हक्के-बक्के रह जाते हैं। राजकुमारी हलवाई से शादी कर लेती है ! इस गिनती में संसार के सारी वस्तु मौजूद हैं। यहां शिक्षा से बड़ा तजुर्बा है।

21/08/2024

उनकी मार्केटिंग अच्छी है, बाजार में सब कुछ मिलता है, अपनी सहूलियत के हिसाब से खरीद लीजिए। ये बात और है कि आप बाजारवाद से प्रभावित न हो।

21/08/2024

पहले रक्षाबंधन के दिन भी यहां भी उजाला रहता था

गुस्से में अक्सर हर व्यक्ति के मुॅंह से ये शब्द निकल जाता है भाड़ में जाओ। अरे! भाड़ में जाओ का मतलब भाड़ में भुनाने जाओ !
भाड़ के अंदर आग में मत जाओ लेकिन, समझने वाले तो समझ ही जाते हैं।
भाड़ मतलब मिट्टी और मिट्टी के बर्तनों से बना हुआ वो पारम्परिक ओवन होता है जिसमें, भूनने का कार्य होता है। जो भूनने का काम करता है उसे गांव में भड़भूज कहते हैं। भड़भूज जाति के लोगों का भाड़ चलाना, चिवड़ा कूटना जैसे पारंपरिक कार्य ही आय का स्रोत होते हैं।
पहले के समय में लगभग हर गांव में एक भड़भूज होता था जिसके यहाँ गांव के बच्चे बूढ़े अक्सर चना, चावल, मक्का, मटर इत्यादि भुनाने के लिए लाते थे। ताजा गन्ने का रस जिसमें दही डालकर शर्बत बनाया जाता था उसे सिखरन कहते हैं। सिखरन के साथ इन्ही भूने हुए भुजे और तीखे चटपटे मसालेदार नमक के साथ मस्त देशी नाश्ता हर घर में किया जाता था। ताजा ताजा भुने मक्की, चने, मटर के भुजे का स्वाद स्वर्गिक होता था।
गर्मियों में सात प्रकार के मोटे अनाज को लोग भाड़ में भुनवा कर पिसवा लेते हैं इन सातों अनाज के मिश्रण से बने आटे को सत्तू कहा जाता है। सत्तू का क्या उपयोग होता है मेरे ख्याल से मुझे बताने की जरूरत नहीं है भड़भूज इन सब अनाजों को भूनने के बदले में उन्ही अनाजों का कुछ हिस्सा अपने पास अपने मेहनताने के रूप में रख लेता था।
सुबह सुबह भड़भूजे के भाड़ से भुने अनाजों से उठने वाली खुश्बू से जीभ लपलप करने लगती थी, न चाहते हुए भी अनाज लेकर लोग भाड़ में पहुँच जाया करते थे। मेरे प्राइमरी स्कूल के परिसर में एक भाड़ था हम सब घर से रुमाल में बांधकर मक्की के दाने ले जाते थे और भुनाते थे दोपहर की छुट्टी में वही हमारा लंच होता था। जिस दिन अनाज ले जाना भूल जाते थे उस दिन एक रुपया ले जाते थे भुजइन काकी एक कलछुल अनाज भुज देती थी जिससे हम सब का पेट भर जाता था। भाड़ में भूजा भुजाने जाओ तो भुजइन काकी भाड़ में पत्तियां झोंकने का काम करवाती थी जिसके, अनाज को भुजने की बारी होती थी वो तब तक सूखी पत्तियां भाड़ में झोंकता था जिससे आग जलती थी और भूजा बनता था।
अब तो इस पॉपकॉर्न के जमाने में भाड़ लगभग लुप्त प्राय हो रहे हैं लेकिन, जो स्वाद भाड़ में भुने भुजे का होता है वो आजकल के पॉपकॉर्न में कहां मिलेगा?
#भारतीयइतिहास #पुरानीतस्वीर #इतिहास #भारत

21/08/2024

पांच साल ससुराल रहने के बाद बेटी पीहर लौट आई थी ससुराल कभी वापस ना जाने के लिए।

पिता की आँखों में सवाल थे। माँ के पास तमाम सवालों के जवाब।पर पिता बेटी से ही सुनना चाहते थे।

बेटी ने पिता का पर्दा किया और तमाम सवालों के जवाब दिये। "किस तरह ससुराल में दूधमुहि बेटी को छोड़ खेतों में काम करने के बाद भी बेटी को गले नहीं लगा सकती।काम का बोझ, उस पर भी ढोर डंगर की जिम्मेदारी भी उसी की। उस पर भी सासू जी के ताने छलनी करते हैं।
कई बार बेज्जती झेलने के बावजूद भी प्यार के दो बोल के लिए तरस जाती है वो।"

"इसमें नया क्या है बेटा, हमने भी यही सब किया है, हर औरत यही करती है। तुम कोई नवेली तो हो नही जो तुम्हारे साथ कुछ अलग होगा?" माँ ने घूँघट की ओट से कहा।

पिता कुछ पल सोचते रहे। फिर बेटी के ससुराल फ़ोन लगाया।

" आपसे बात करनी है, जितनी जल्दी आ सकें जवाई जी के साथ पधारिये।"
बेटी का पति, सास और ससुर हाजिर थे।

"बहू अगर घर का काम न करे, खेत पर न जाए, ढोर डंगर की देखभाल, दूध निकलना ना करे तो क्या उसे आले में बैठा के पूजा करें उसकी।" सास का सवाल था।

"ऐसा तो नहीं कहा उसने कि पूजा कीजिये उसकी। मगर कम से कम उसे इंसान तो समझिए। उसकी बच्ची से पूरा दिन उसे दूर रहना पड़ता है, आखिर दूध पीती बच्ची है अभी उसकी। पर आप लोग उसे बहू कम नौकरानी ज्यादा समझ रहे हैं।"
कमरे में क्षण भर चुप्पी छा गई।
"अब मेरी बेटी आपके साथ नहीं जाएगी। उसके नाम से जमीन का चौथा हिस्सा और मकान कीजिये। और आप चाहें तो दूसरी शादी करने को स्वतंत्र हैं।" पिता ने फैसला सुनाया।

"खाना खाकर पधारें आप..." पिता ने हाथ जोड़े और दरवाजे से निकल गए।

बेटी दरवाजे की ओट से सब सुन रही थी। पिता ने बेटी के सर पर हाथ रखा।

"शादी ही की है, इसका ये मतलब नहीं कि तुझे अकेला छोड़ दिया है। अब भी मेरा गुरुर है तू।" पिता ने बेटी के सर पर हाथ फेरा। आँखे दोनों की छलछला रहीं थी
बेटी पिता के सीने से लिपट गई और दोनों फफक कर रो पड़े ।।

21/08/2024

गर्मी की तपती धूपहरी जब हम आज AC मे सोना पसंद करते है तब एक दौर ये भी था जब सब महिलाएं मिलकर सेवइयाँ बनाती थी और बच्चो की टोली धूप मे फैलाती थी घर घर बुलउआ सेवई बनाने का एक दूसरे के घरो मे बड़ी मुगौड़ी आचार खटाई की तरह सेवईं भी मिलजुल कर बनाई जाती थी कितने खुशी खुशी सब एक दूसरे की मदद करते थे क्या मजाल जो किसी का काम अधूरा रह जाए कौन बच्चा सबसे अच्छे से फैलाएगा उसे इनाम मिलेगा इस लालच मे हम सबमे एक होड रहती थी की सबसे अच्छा मेरा काम होगा आटा को दुपट्टे या किसी महीन कपड़े से छान छान कर सेवई का आटा बनाया जाता फिर मशीन खटिया मे लगाई जाती मशीन कसने से लेकर सिवई बनाने तक कितने लोग अपना अपना हुनर दिखा देते फिर नंबर आता बड़ी अम्मा का जो आटे को टाइट टाइट गूँथ कर मशीन मे डालती जाती और लड़कियों की टोली मशीन चलाने के लिए तैयार रहती सारे बच्चे अपनी थाली प्लेट बेना लेकर मशीन के नीचे लगाने को बेचैन काम करने और करवाने मे भी कितना सामंजस्य होता था की पलक झपकते बड़े बड़े काम हो जाते थे।

21/08/2024

भारत जब से आजाद हुआ है तब से स्कूल वाले फीस लगातार बढ़ा रहे हैं लेकिन 15 अगस्त और 26 जनवरी पर लड्डुओं की संख्या अभी भी 2 से आगे नहीं बढ़ी
कब स्कूल वाले अमीर होंगे कब दो के बजाए चार लड्डू मिलेंगे पूछता है सारा भारत 🇮🇳🌹🙏

17/08/2024

हम ने क्या खो दिया इस बदलाव को पाते पाते.…
रक्षाबंधन कृपया ध्यान दें
बहनें 200 से 1500/- की राखियाँ ख़रीद कर भाईयों काे बॉंधती हैं ! जबकि राखी एक तीन रंग की माेली धागे सें प्रारंम्भ हुआ त्याेहार था, जिसकाे राखियाँ बनाने वाले उत्पादक 2000/- की राखी तक ले गये हैं !
और हमारे राखी मार्केट पर लगभग 80% कब्जा हमारे पड़ोसी और प्रतिद्वंद्वी देश चीन का है जो एक दिन मे लाखों करोड़ का पैसा हमारे देश से अपने यहां खींच कर ले जाता है।
आप हम देखते हैं कि यह एक भावनाओं का त्याेहार हैं !
बहनें लंम्बी दूरी सें भाई काे राखी बांधने व सम्मान पाने व भाई के परिवार को खुशियां देने आती हैं !
राखी बांधनें का मतलब है भाई, तुम दीर्घायु हों और मेरी बुरे समय में रक्षा करना !
परन्तु आज के दौर में बहनें भी इस होड में लगी हैं कि मेरी राखी सब से महंगी हो ताकि उसकी भाभीयां ये ताना ना मारें कि ननद दीदी तो ऐसी घटिया राखी लाती हैं कि पूछो मत, पर क्या वह महंगी राखी दिखावा बनकर नहीं रह गई ?
क्या हमने बहन को नीचा दिखाने के लिए घर बुलाया है या उसे यह अहसास दिलवाने कि अभी तेरा भाई है, तु फिक्र ना कर बहना !
रक्षाबंन्धन पर भाई भी अपनी बहनाें काे उपहार रूप में काेई चीज व नगद देते हैं !
लेकिन आजकल 50% ऐसा हाेता हमने देखा हैं कि बहन की राखी लागत ही उपहार में नहीं निकलती हैं ! इसलिए हम कुछ ज़्यादा बहन काे देने की सोचते हैं, हमने इस चकाचौंध की जीवनशैली के कारण भाई-बहन के प्यार को पैसे के तराजू मे ही रख दिया !
सभी भाइयों काे प्रण करना चाहिये कि हम सिर्फ बहन सें माेली धागा ही बंधवायेगें और मिठाई में सिर्फ गुड ! और जाे देना हैं, वह 21, इससे अधिक 51 अथवा 101 हो सकता है इससे ज्यादा देने पर हम परस्पर प्रेम नहीं बल्कि अपने अहंकार को तुष्टि प्रदान करते हैं
आप हम देखते हैं, कि राखियाँ हम सब 2-4 घंटे या सायं तक ही बाँधे रख पा रहे हैं और बहन का सैकडों रूपया उस राखी पर लगा धन था ! जाे कुछ ही घंटे में स्क्रेप हाे गया !

कृपया सुधार करके अपनें पुरानें माेली धागा या रेशम की सुन्दर गुँथी राखी बाँधे ताे आपका भाई साल भर भी बांधे रखेगा !
और यह बहन के लिए गर्व की बात होगी कि मेरा बिरा मेरे रक्षा के सूत्र को सदा बांधे रखता है ।
वहीं भाई को भी सदा बहन का स्मरण रहेगा कि मेरी बहन है मुझे सदा प्यार व दुलार बरसाने वाली...

निवेदन - इसको सकारात्मक लें और युद्ध स्तर पर इसको समाज में प्रचलन में लाकर इसका परिवार सहित पालन करें, वहीं भाई बहन के प्यार को पैसे के तराजू में ना तोलें...।
पोस्ट को अपने भाई बहन और रिश्तेदारों को शेयर जरूर करे ।

17/08/2024

जवानी के दिनों में शारीरिक चाहतें सिर चढ़कर बोलने लगती हैं, और पहले 20 साल तेजी से बीत जाते हैं। इसके बाद नौकरी की खोज शुरू होती है—यह नौकरी नहीं, वह नौकरी नहीं, दूर नहीं, पास नहीं। कई नौकरियाँ बदलने के बाद आखिरकार एक नौकरी स्थिरता की शुरुआत करती है। पहली तनख्वाह का चेक हाथ में आते ही उसे बैंक में जमा किया जाता है, और शून्यों का अंतहीन खेल शुरू हो जाता है। दो-तीन साल और बीत जाते हैं और बैंक में शून्यों की संख्या बढ़ने लगती है।

25 की उम्र में विवाह हो जाता है और जीवन की एक नई कहानी शुरू होती है। शुरू के एक-दो साल गुलाबी और सपनीले होते हैं—हाथ में हाथ डालकर घूमना, रंग-बिरंगे सपने देखना। लेकिन यह सब जल्दी ही खत्म हो जाता है। बच्चे के आने की आहट होती है और पालना झूलने लगता है। अब सारा ध्यान बच्चे पर केंद्रित हो जाता है—उठना, बैठना, खाना-पीना, लाड़-दुलार। समय कैसे बीत जाता है, पता ही नहीं चलता।

इस बीच, हाथ एक-दूसरे से छूट जाते हैं, बातें और घूमना-फिरना बंद हो जाता है। बच्चा बड़ा होता जाता है और वह बच्चे में व्यस्त हो जाती है, जबकि मैं अपने काम में व्यस्त रहता हूँ। घर, गाड़ी की किस्त, बच्चे की जिम्मेदारी, शिक्षा, भविष्य की चिंता, और बैंक में शून्यों की बढ़ती संख्या—इन सब में जीवन व्यस्त हो जाता है।

35 साल की उम्र में, घर, गाड़ी, परिवार और बैंक में बढ़ते शून्य सब कुछ होते हुए भी एक कमी महसूस होती है। चिड़चिड़ाहट बढ़ती जाती है और मैं उदासीन हो जाता हूँ। दिन बीतते जाते हैं, बच्चा बड़ा होता जाता है और खुद का संसार तैयार होता जाता है। कब 10वीं कक्षा आई और चली गई, पता ही नहीं चलता। चालीस की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते बैंक में शून्यों की संख्या बढ़ती जाती है।

एक एकांत क्षण में, गुजरे दिनों की यादें ताज़ा होती हैं और मैंने कहा, "जरा यहाँ आओ, पास बैठो। चलो हाथ में हाथ डालकर कहीं घूमने चलते हैं।" उसने अजीब नजरों से देखा और कहा, "तुम्हें बातें सूझ रही हैं, यहाँ ढेर सारा काम पड़ा है।" कमर में पल्लू खोंसकर वह चली जाती है। पैंतालीस की उम्र में, आँखों पर चश्मा चढ़ जाता है, बाल सफेद होने लगते हैं, और दिमाग में उलझनें बढ़ जाती हैं। बेटा कॉलेज में होता है और बैंक में शून्यों की संख्या बढ़ती जाती है। बेटे के कॉलेज खत्म होने और परदेश चले जाने के बाद, घर अब बोझ लगने लगता है।

पचपन की ओर बढ़ते हुए, बैंक के शून्यों की कोई खबर नहीं होती। बाहर जाने-आने के कार्यक्रम बंद हो जाते हैं। दवाइयों का दिन और समय तय हो जाते हैं। बच्चे बड़े हो जाते हैं और अब हमें सोचने की जरूरत होती है कि वे कब लौटेंगे। एक दिन, सोफे पर बैठा ठंडी हवा का आनंद ले रहा था। वह पूजा में व्यस्त थी। तभी फोन की घंटी बजी। बेटे ने बताया कि उसने शादी कर ली है और परदेश में ही रहेगा। उसने यह भी कहा कि बैंक के शून्यों को किसी वृद्धाश्रम में दे देना और खुद भी वहीं रहना।

मैं सोफे पर आकर बैठ गया। उसकी पूजा खत्म होने को आई थी। मैंने उसे आवाज दी, "चलो, आज फिर हाथ में हाथ डालकर बातें करते हैं।" वह तुरंत बोली, "अभी आई।" मुझे विश्वास नहीं हुआ। चेहरा खुशी से चमक उठा। आँखे भर आईं और आँसुओं से गाल भीग गए। लेकिन अचानक आँखों की चमक फीकी पड़ गई और मैं निस्तेज हो गया—हमेशा के लिए।

उसने शेष पूजा की और मेरे पास आकर बैठ गई। "बोलो, क्या बोल रहे थे?" लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा। उसने मेरे शरीर को छूकर देखा—ठंडा पड़ चुका था। मैंने उसकी ओर एकटक देखा। क्षण भर के लिए वह शून्य हो गई। "क्या करूँ?" उसे कुछ समझ में नहीं आया। लेकिन एक-दो मिनट में ही वह चेतन्य हो गई। धीरे से उठी, पूजा घर में गई, एक अगरबत्ती जलाई, ईश्वर को प्रणाम किया और फिर से आकर सोफे पर बैठ गई। मेरा ठंडा हाथ अपने हाथों में लिया और बोली, "चलो, कहाँ घूमने चलना है तुम्हें? क्या बातें करनी हैं तुम्हें?"

ऐसा कहते हुए उसकी आँखें भर आईं। वह एकटक मुझे देखती रही। आँसुओं की धारा बह निकली। मेरा सिर उसके कंधे पर गिर गया। ठंडी हवा का झोंका अब भी चल रहा था। क्या यही जीवन है?

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन को अपने तरीके से जीना चाहिए। धन और भौतिक सुख-सुविधाएँ महज एक भाग हैं, लेकिन सच्ची खुशी और संतोष प्रेम, समझदारी, और एक-दूसरे के साथ बिताए समय में होता है।
















Thank you for supporting me



#मेरीलेखनी #हिंदी #प्रेमकहानियां

17/08/2024

बहन बेटियाँ , सावधान

जब कोई रिश्तेदार मामा, चाचा, ताऊ, फूफा, मौसा पड़ोसी, कज़िन भैया आदि प्रकार का रिश्ता किनारे रख कर तुमसे कहने लगे "रिश्ते अपनी जगह ,पर मैं तो तुम्हें अपनी फ्रेंड मानता हूँ।
तुम एक मॉर्डन गर्ल हो आज के ज़माने की तो पुराने टाइप के रिश्ते मत मानो।

"तो अपने माता पिता भाई को बता दो" क्योंकि उनकी नियत में खोट है।

फेसबुक के फ्रेंड किसी फ्रेंडशिप के प्रतीक नहीं हैं । फेसबुक फ्रेंड मतलब फालतू के फ्रेंड, सिर्फ ऑनलाइन हैं ये,
इनसे जिंदगी पर तब तक कोई फर्क नही जबतक असल जिंदगी में न मिलो।।।
अतः फेसबुक पर उनकी फ्रेंड रिक्वेस्ट को संदेह से न देखो....
पर इनबॉक्स और व्हाट्सअप में वीडियो कोटेशन शेयर करने लगें तो सावधान।

पुरुषों के हथकंडे -
वे तुमसे ऐसे बातें करेंगे कि दर्द आंखों से छलक पड़े
स्वयं को अपनी पत्नी के पिछड़ेपन से त्रस्त दिखाएंगे
खुद हैंडसम बने रह कर जताएंगे कि बहुत पुराने विचारों की पत्नी मिली है,दर्द किससे कहे...

तुम अगर कह बैठी कि मुझसे कहिये, मै हूँ न तो बस तुम्हारा जीवन उनके हवाले हो गया।

पत्नी को बीमार बता सकते हैं
पत्नी के अवैध संबंधों की झूठी बात बता कर सहानुभूति लूटेंगे..

तुम्हें सुंदर और इंटेलीजेंट बता कर काबू करेंगे,
तुम में उन्हें अचानक ऐश्वर्या, सानिया, कल्पना चावला दिखने लगेगी।
तुम्हारी मम्मी - पापा की ज़्यादा केअर शुरू करेंगे,

तुम्हें वो गिफ्ट करना शुरू करेंगे जो पापा नहीं दे सकते
कोई कुछ कहेगा भी नहीं
उनसे रिश्ता ही ऐसा है अचानक गिफ्ट बढ़ जाएं
कपड़े ज़्यादा प्राप्त होने लगें घर आना जाना बढ़ जाये
तुम्हें एग्जाम दिलाने वे स्वयं जाने लगे।

सावधान

कोई पुरुष रिश्ते की आड़ में तुम्हें लूटने की तैयारी में है।
अच्छी नियत वाले भी अलग दिख जाते हैं, सबसे सुरक्षित रहें।।।
माँ - बाप, सगे भाई- बहन के अलावा कोई हितैषी नही!!....

कॉपी पेस्ट शेयर जरूर करें।।।।
जयतु सनातन संस्कृति 🙏🕉️🚩
जय मातृशक्ति 🚩🚩🙏

Want your public figure to be the top-listed Public Figure in Delhi?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Category

Website

Address

Delhi
110043