Gautam Kumar Priy Rational
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Ram Mandir में चोरी किसने कि? | चोरी होते समय भगवान राम कहा थे? | Arun Kumar Gupta | Ayodhya News | अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित करोड़ों रुपये की चोरी को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। इस विशेष चर्चा में अरुण कुमार गुप्ता जी से कई तार्किक, वैज्ञानिक और विचारोत्तेजक सवाल पूछे गए हैं। यदि भगवान सर्वशक्तिमान हैं, यदि उनकी इच्छा के बिना पत्ता तक नहीं हिलता, तो फिर उनके ही मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे की चोरी कैसे हो गई? और सबसे बड़ा सवाल — चोरी होते समय भगवान राम कहाँ थे?
हम भगवान से न्याय मांगते हैं, लेकिन जब भगवान राम के मंदिर में ही चोरी हो जाए तो भगवान राम को न्याय कौन देगा? क्या अंततः न्याय, सुरक्षा और जवाबदेही के लिए समाज को संविधान, कानून, पुलिस और न्यायपालिका पर ही निर्भर नहीं होना पड़ता? इस इंटरव्यू में अंधविश्वास, पाखंड, ज्योतिष, ग्रह-दोष, तंत्र-मंत्र, चमत्कार, धार्मिक भय, मंदिर व्यवस्था और धार्मिक कर्मकांडों पर खुलकर चर्चा की गई है। अरुण कुमार गुप्ता जी सवाल उठाते हैं कि यदि ताबीज, पूजा-पाठ, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान सभी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, तो फिर अस्पताल, वैज्ञानिक संस्थान, अदालत और पुलिस व्यवस्था की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
चर्चा के दौरान यह भी प्रश्न उठाया गया कि यदि मंदिरों और देवी-देवताओं के नाम पर लोगों से धन एकत्र किया जाता है, तो उसकी सुरक्षा और जवाबदेही किसकी है? क्या अंधविश्वास केवल आर्थिक शोषण का माध्यम है या यह लोगों की तार्किक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक चेतना को भी प्रभावित करता है? इस वीडियो में वैज्ञानिक सोच, मानवतावाद, तार्किक चिंतन, सामाजिक जागरूकता, संविधान, कानून और न्याय व्यवस्था पर गंभीर चर्चा की गई है। यदि आप धर्म, आस्था, अंधविश्वास, पाखंड, राम मंदिर चोरी, धार्मिक दावों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जुड़े मुद्दों पर खुली बहस में रुचि रखते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए महत्वपूर्ण है।
Golden Das | सत्या सिंह भूमिहार मामले में आलोचकों को कराड़ा जवाब | Bhima Goregaon | Gautam Kumar Priy Rational
Rajput लड़की ने की चमार जाति से शादी | परिवार ने कर दिया जीते जी अंतिम संस्कार | Arun Kumar Gupta | Ajak Sangh | बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मरवान प्रखंड के जियन खुर्द गांव से सामने आई यह घटना पूरे समाज और संविधान पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक बालिग युवक और युवती ने अपनी स्वेच्छा से कोर्ट मैरिज की, लेकिन इस फैसले के बाद गांव में पंचायत बुलाई गई और लड़की के परिवार पर सामाजिक दबाव बनाया गया। आरोप है कि पंचायत ने परिवार से कहा कि अगर गांव में रहना है तो अपनी जीवित बेटी का प्रतीकात्मक दाह संस्कार करना होगा, नहीं तो पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाएगा।
इस विशेष इंटरव्यू में अर्जक संघ प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता जी ने जातिवाद, सामाजिक दबाव, अंतरजातीय विवाह, संविधानिक अधिकार और तथाकथित “इज्जत” के नाम पर होने वाले भेदभाव पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि आखिर क्यों आज भी समाज प्रेम विवाह और अंतरजातीय विवाह को स्वीकार नहीं कर पाता, जबकि संविधान हर बालिग व्यक्ति को अपने जीवन का निर्णय लेने का अधिकार देता है।
इस इंटरव्यू में चर्चा के मुख्य मुद्दे - क्या अंतरजातीय विवाह सामाजिक बदलाव का रास्ता है? क्यों समाज प्रेम विवाह को अपराध की तरह देखता है? पंचायत और सामाजिक बहिष्कार की मानसिकता कहाँ तक सही है? क्या “इज्जत” के नाम पर युवाओं की आज़ादी कुचलना उचित है? संविधान बनाम जातिवादी सोच की लड़ाई। भागकर शादी करने वाले लड़का-लड़की के सामने क्या विकल्प बचते हैं?
अरुण कुमार गुप्ता जी ने इस पूरे मुद्दे पर अपने तर्क, सामाजिक अनुभव और संविधानिक दृष्टिकोण के आधार पर विस्तार से बात की है। यह वीडियो केवल एक घटना नहीं बल्कि भारतीय समाज में मौजूद जातिवाद, छुआछूत, सामाजिक दबाव और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गहरी बहस है। अगर आप सामाजिक न्याय, संविधान, अंतरजातीय विवाह, जातिवाद और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा देखना चाहते हैं, तो इस वीडियो को अंत तक जरूर देखें।
Call Recording | क्या जन्म के आधार पर किसी व्यक्ति को कोई पेशा मिल जाना चाहिए? इसी महत्वपूर्ण सवाल पर आधारित यह कॉल रिकॉर्डिंग सामाजिक न्याय, जातिवाद और अंधविश्वास के खिलाफ चल रही वैचारिक लड़ाई को सामने लाती है।
इस बातचीत में पंकज शुक्ला नामक व्यक्ति दावा करते हैं कि मंदिरों में पूजा-पाठ कराना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। इसके जवाब में Gautam Kumar Priy Rational उनसे सवाल करते हैं कि यदि पूजा-पाठ कराना ही किसी जाति का जन्मसिद्ध अधिकार है, तो फिर उसी तर्क के अनुसार ब्राह्मण समाज के लोग डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, जज, वकील, शिक्षक और अन्य सरकारी नौकरियों में क्यों जाते हैं? क्या उन्हें केवल मंदिरों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए?
इस तीखी और तार्किक बहस में जाति व्यवस्था, वर्ण व्यवस्था, जन्म आधारित पेशों, ब्राह्मणवाद, सामाजिक समानता, वैज्ञानिक सोच और संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर चर्चा की गई है। वीडियो में गौतम कुमार ने जातिवादी मानसिकता से ग्रसित सोच को तार्किक प्रश्नों के माध्यम से चुनौती देने का प्रयास किया है। यदि आप अंधविश्वास, पाखंड, जातिवाद, मनुवाद, सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संविधान आधारित समाज के पक्षधर हैं, तो यह वीडियो अवश्य देखें और अपनी राय कमेंट में साझा करें।
Manusmriti Exposed | मनुस्मृति को मनु ने नहीं लिखा सुमित भार्गव ने लिखा | Dr. B.R Ambedkar | Volume 7 | क्या सच में मनुस्मृति की रचना मनु ने की थी? क्या मनुस्मृति के श्लोक किसी ईश्वर द्वारा लिखे गए थे? या फिर सदियों से लोगों को झूठ और पाखंड के नाम पर गुमराह किया गया? इस वीडियो में हमने डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखित वॉल्यूम 7 (खंड 7) का रेफरेंस देते हुए मनुस्मृति से जुड़े कई दावों की जांच की है। हमने दिखाने का प्रयास किया है कि किस प्रकार मनुवादी विचारधारा के नाम पर लोगों पर एक विशेष सामाजिक व्यवस्था थोपी गई और इसे ईश्वर का आदेश बताकर प्रचारित किया गया।
वीडियो में हमने उन दावों पर चर्चा की है जिनमें कहा जाता है कि मनुस्मृति के श्लोक किसी ईश्वर द्वारा नहीं बल्कि मानवों द्वारा लिखे गए थे। साथ ही डॉ. आंबेडकर के विचारों और उनके शोध का हवाला देते हुए मनुवादी सोच, जातिवाद, ऊँच-नीच और सामाजिक भेदभाव पर सवाल उठाए गए हैं। अगर आप सामाजिक न्याय, इतिहास, जातिवाद, मनुवाद, बाबा साहेब आंबेडकर के विचार और मनुस्मृति से जुड़े तथ्यों को समझना चाहते हैं तो यह वीडियो अंत तक जरूर देखें।
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