TanHa
Sher-o-shyeri
22/11/2021
बाद मरने के मसीहा भी बना देते हैं
कितने अच्छे हैं ये सूली पे चढ़ाने वाले....!!
06/09/2021
अपनी अना की जीत में दुनिया की मान कर
महरूम मेरी ज़ात से एक शख्स हो गया
06/09/2021
“यह रोना धोना किस बात का?
जो खोया है...साथ लाये थे क्या?”
05/09/2021
देखा न कोहक़न कोई फ़रहाद के बगैर
आता नहीं है फन कोई उस्ताद़ के बगैर
04/09/2021
दौलत माँगते रहे सब दर पे ख़ुदा के ..!
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मैं माँग कर इश्क़ तेरा, अमीर हो गया ..!!
31/03/2021
गली में खेलते हुए बच्चों पर तरस आता है।
इन्हें भी यार मुहब्बत ने एक दिन घेर लेना है।
30/03/2021
तख़्ते सिकंदरी पे वो थूकते भी नही
बिस्तर जिनका लगा हो यार की बाहों में
29/03/2021
29/03/2021
इस से अंदाज़ा लगा हिज्र की कड़वाहट का
आखरी खत तेरा दीमक से भी खाया न गया
28/03/2021
कभी मेराज, कभी शब-ए-बारात कभी शब-ए-कद्र,
वो रब कितना मेहरबान है बख़्शिश के वसीले देता रहता है
28/03/2021
निकाल कर मेरे जिस्म की चमड़ी ऐ खालिके अकबर,,,
नबी़ के पांव का जूता बना दिया होता
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