PRS Blogs
Blogger Govt.Aadrsh Sr.Sec.school Biramsar(Nokha) Bikaner Raj.
06/07/2025
आज 12 मई है और ये 11 और 13 मई के बीच में पङती है....है ना ज्ञान की बात😁
आज बुद्ध पूर्णिमा है। 11 मई 1998 को भी बुद्ध पूर्णिमा थी। बहुत इंटरेस्टिंग संयोग है।
11 मई 1998 को भारत ने न्यूक्लियर टेस्ट किए। उन दिनों अरनब गोसवामी और अंजना ओम कश्यप नहीं होते थे। तो समाचार बङे मैटर आफ फैकटली पढे जाते थे...और नयूज रिडर का फेस ...बिल्कुल एक बुत की तरह...dead pan...ना कोई स्टिकर चलता था और ना किसी नयूज को breaking news कहा जाता।
Exactly नहीं पर माहौल कुछ ऐसा था के नयूज रीडर ने बताया के आज भारत ने न्यूक्लियर Test किए (शायद दो) और उसके बाद ...चलो गोबर गैस बनाना सीखें।
मैं भौचक्का। के मैने सही सुना है के नहीं...सच में न्यूक्लियर ब्लास्ट हुए हैं ये मैं कुछ और समझा ?
ये कुछ 5-6 बजे की घटना है।
रात को नौ बजे तक जिसे कहते हैं...all hell broke loose...तहलका हो गया। दुनियाभर से भारत की कङी निंदा, हिंसा का प्रचार कर रहे ये, nuclear proliferation पर ज्ञान। sanctions लगा देंगे...भारत भूखा मर जाऐगा।
जम कर हल्ला और कोलाहल।
पर एक व्यक्ति कहीं दिखाई सुनाई नहीं दिया।
पंडित जी। अटल बिहारी महाराज, देश के प्रधान मंत्री कहीं सीन पर नहीं। कोई स्टेटमैंट नहीं, कोई फोटो नहीं।
11 मई निकल गई? 12 मई निकल गई.... 13 मई हो गई। पंडित जी का कुछ अता पता नहीं। कोई स्टेटमैंट नहीं ...वहीं अमरीका, रूस, चीन...सब देश पागल कुत्तों की तरह भौंके जा रहे।
13 मई की शाम को लगभग 5-6 बजे फिर वही matter of factly समाचार.....आज भारत ने न्यूक्लियर टेस्ट किए...शायद तीन....मतलब 13 मई को और तीन ठोक दिए....
अब बाहर के देशों को तो छोङो, जनता पागल ...सब बौखलाऐ हुए। सरकार कयों नहीं कुछ कहती ? कयों सस्पैंस बनाया हुआ है? वाजपेई जी कब बोलेंगे?
एक डेङ घंटे बाद पंडित जी का शांत, मुसकुराता हुआ चेहरा टीवी पर देखने को मिला।
पक्का याद नहीं, पर मेरे को लगता नहीं के पांच मिनट भी बोले होंगे...मेरे को बस इतना याद है..."भारत ने न्यूक्लियर टेस्ट किए हैं। हमारी रिसर्च पूरी हो गई and we declare a moratorium on any nuclear tests in future....अब केवल प्रयोग शाला में आगे की रिसर्च होगी।
उन महाशय का नाम था "अटल"
11 मई वे 13 मई तक, निश्चिंत हो कर बैठे रहे। दुनिया भर की sanctions लगीं, दुनियाभर से धमकी आईं, डराया धमकाया गया......पंडित जी
कोलंबिया विश्वविद्यालय में गणित के एक कोर्स के दौरान एक छात्र कक्षा में सो गया। जब उसकी नींद खुली, तो उसने देखा कि प्रोफेसर ने व्हाइटबोर्ड पर दो समस्याएँ लिखी थीं। उसने सोचा कि ये होमवर्क हैं, इसलिए वह उन्हें अपनी नोटबुक में नोट कर के घर ले गया।
जब उसने उन समस्याओं को हल करने की कोशिश की, तो वे उसे बेहद कठिन लगीं। लेकिन उसने हार नहीं मानी। घंटों लाइब्रेरी में बैठकर उसने संदर्भ पुस्तकों की मदद से अध्ययन किया और अंततः वह एक समस्या को हल करने में सफल हो गया, भले ही यह काफी चुनौतीपूर्ण था।
अगली कक्षा में प्रोफेसर ने जब होमवर्क के बारे में कुछ नहीं पूछा, तो वह चकित हुआ और खड़ा होकर पूछा, "सर, आपने पिछले लेक्चर में दिए गए असाइनमेंट के बारे में कुछ क्यों नहीं पूछा?"
प्रोफेसर ने उत्तर दिया, "असाइनमेंट? वो तो मैंने केवल ऐसे उदाहरण के तौर पर लिखी थीं जिन्हें अभी तक वैज्ञानिक हल नहीं कर पाए हैं।"
छात्र चौंक गया और बोला, "लेकिन मैंने उनमें से एक को हल कर लिया है! मैंने इस पर चार पेपर भी लिखे हैं।" उसकी इस उपलब्धि को बाद में मान्यता मिली और कोलंबिया विश्वविद्यालय में उसके लिखे चारों पेपर आज भी प्रदर्शित हैं।
इस कहानी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि छात्र ने यह नहीं सुना था कि "इन समस्याओं का कोई हल नहीं है।" उसने सिर्फ यही माना कि ये कठिन प्रश्न हैं, जिन्हें हल करना ज़रूरी है, और उसने पूरे मन से उन्हें हल करने की कोशिश की – और सफल हुआ।
यह कहानी हमें याद दिलाती है – उन लोगों की बात मत सुनो जो कहते हैं कि तुम कुछ नहीं कर सकते। आज की पीढ़ी अक्सर निराशा और नकारात्मकता से घिरी होती है। कुछ लोग जानबूझकर दूसरों के भीतर असफलता और हार का बीज बोते हैं।
लेकिन तुम्हारे पास अपनी मंज़िल पाने की ताकत है, बाधाओं को पार करने की शक्ति है, और अपने सपनों को साकार करने का साहस है। बस खुद पर विश्वास रखो – और लगातार प्रयास करते रहो।
इस छात्र का नाम था जॉर्ज डैंटज़िग, और यह समस्या Math Stack Exchange से ली गई थी।
"डैंटज़िग ने यह सिद्ध किया कि Student’s t-test के संदर्भ में, एकमात्र तरीका जिससे हम ऐसी hypothesis testing बना सकते हैं जो standard deviation से स्वतंत्र हो, वह है एक निरर्थक परीक्षण, जो हमेशा समान संभावना से रिजेक्ट या एक्सेप्ट करता है – जो व्यावहारिक नहीं है।"
Click here to claim your Sponsored Listing.