Kanchan Rathore
"हार मत हिम्मत, निरंतर जल दीपक"
Sarpanch at G/p Doonga ji ka gaon
Bhim,Rajsamand
social reformer
कंचन राठौड़
महिलाओ को स्वयं पर विश्वाश कर मानसिक तौर पर सुदृढ़ बनाने में सदैव तत्पर,
एवम हर स्त्री को अपने स्त्रीत्व पर गौरवान्वित महसूस करवाने में सहायक,
बहुत ही साधारण स्त्री,
संस्थापिका _we can सभ्य समाज की ओर एक कदम संस्था
लेखिका,
समाज सुधारिका,
सरपंच
ग्राम पंचायत
डूंगा जी का गांव,
भीम
राजसमंद
**यू ईयर**
(लघु कथा)
कबसे रिंग बजे जा रही थी,मीना ने सोचा की सभी से इत्मीनान से बात करेगी ।
उसे पता था की आज 31 है तो सभी न्यू ईयर विश करने के लिए फ़ोन कर रहे है!इसीलिए पहले काम निपटा लू उसके बाद सभी से बात कर लेगी वापस फ़ोन लगा कर ।
इतने में उसे ये भी याद आया की कल चारू का स्कूल भी है ।तो वह चारू के कपड़े भी इस्त्री करने लग गईं।
चारू बेटा इधर आओ …..
आपका होम वर्क पूरा हो गया क्या?
चारू मीना का 7साल का बेटा था जो फर्स्ट क्लास में पढ़ता है ।
विद्या निकेतन स्कूल में।मीना को पता नहीं क्यो लेकिन हिंदी मीडियम स्कूल ही भाती थी इसीलिए उसने चारू को भी हिंदी मीडियम में भर्ती कराया ।
मम्मी मेरा होमवर्क मैंने कब का कर दिया । साबाश मेरा राजा बेटा,मीना प्यार से उसे निहारते हुए गोद में बिठा लेती है ।
इतने में उसे याद आया की फ़ोन पर बात करनी है ।उसने फ़ोन उठा कर देखा तो कम से कम बारह मिस्ड कॉल थे जिसने से सारे उसकी सहेलियों के ही थे ।
उसने एक एक से बात की और सभी को नए साल की बधाई दी और ली ।
चारु सब देख रहा था।
अगली सुबह न्यू ईयर था । विनोद ऑफिस के लिए तैयार हो रहा था और मीना चारू को तैयार कर रही थी ,उसे चूमते हुए बोली हैप्पी न्यू इयर मेरा बच्चा।
टिफिन में केक रखा है ।
आज अपने सभी दोस्तों को खिलाना।
मैंने सुबह चार बजे उठ कर बनाया है ।आज न्यू ईयर है इसीलिए जल्दी भी उठी ।
इतने में चारु ने सर पर हाथ मारते हुए पापा की तरफ़ देख कर बोला….पापा आप बताओ क्या आज न्यू ईयर है?
पापा ने बोला नहीं !
मीना तुम भूल रही हो की नव वर्ष चेत्र महीने में आता है ।
हम अपने बच्चों को इतना कंफ्यूज कर देते है की वो ख़ुद भ्रमित हो जाते है।हम लोग हमारी ही कही और सिखाई बात पर अडिग नहीं रहते ।
मीना को बहुत ग्लानि हुई सच में ।
मन ही मन सोच रही थी की हम सच मुच कितना दोगला और ढोंगी रवैया अपनाते है हिंदू होने के नाम पर ।
कंचन राठौड़ “कुंदन “
25/12/2024
लघु कथा ( खाद्य सुरक्षा)
फोन की रिंग साइलेंट कर के,
मैने किताब हाथ में ली ही थी,
की हांफते हांफते पड़ोस के
सेठ जी ने बेल बजा दी,
और साथ में चिल्लाए भी जा रहे है...
सरपंच साब।
ओ सरपंच ...ऊंचा हो काई?
पहले तो मैने आना कानी की रहने देती हु,
चले जाएंगे बेल बजा कर बहार नहीं झांकूगी तो अपने आप चले जाएंगे।
लेकिन वो चिल्लाए जा रहे थे,
लगातार ,
सरपंच साब ,ओ सरपंच साब ,
मायने कोनी काई?
यकायक मेरी भी जिज्ञासा जैसे बढ़ गई कि ,इतना क्या जरूरी काम आन पड़ा इन्हें की ये इस तरह से लगातार आवाजे दिए का रहे है।
फोन हाथ में लिया तो,
20 मिस कॉल।
मेरा माथा ठनका की कुछ इमरजेंसी है,मैं फटाफट नीचे गई दरवाजा खोला,और पूछा क्या हुआ बा सा।
आप परेशान क्यों हो??
अरे साब हो अखबार भणयो?
सरकार गरीबा रो गेहूं बंद करी रि है, म्हारा भी गेहूं बंद व्हाई जाई काई?
मुझे मन ही मन इतना गुस्सा आ रहा था,कि ये बात कहने के लिए यहां आए है सेठ जी।
( गरीब का राशन खाने के लिए कितने मरे जा रहे है साले)
मैने बोला हा,
जिनके पास चार पहिया वाहन है,और सरकार का राशन गरीब बन कर उठा रहे है,
उनके गेहूं बंद कर रही है सरकार।
उसने फिर पूछा महका भी वेई काई?
इस बार मुझे गुस्सा आ गया तो मैने बोला हा आपके भी होंगे । और आपके तो सरकार रिकवरी भी निकालेगी आपके पास तो मासिक आय दस लाख से ज्यादा है,आपके पास दो दो चो पहिया वाहन है, आप इतने समृद्ध परिवार से है और तो और आप आयकर भी भरते है,गेहूं तो बंद होंगे लेकिन रिकवरी भी निकालेगी,( मैने तीर में तुक्का फेंका)
उसके चेहरे के हाव भाव पहले लाचार बेचारे वाले थे ,अब डर के मारे ,बोला हम.. हमारा तो नाम कटवा देना आप।
कैसे भी कर के आपको लेना देना हो तो बोल देना लेकिन करवा जरूर देना।
हाथ जोड़ कर सेठ जी वही बैठ गए।
मैने उन्हें चाय पिलाई और सांत्वना दी कि जो होगा देखा जाएगा।
वो शांत होकर चले गए ।
अगले ही दिन अखबार में हेडिंग थी,
"जो खायेगा गरीबों का राशन,
उसे छोड़ेगा नहीं प्रशाशन।"
मैं अचंभे में पड़ गई कि ,मैने तो तुक्के मारे थे और आज ये खबर आ भी गई।
सोच ही रही थी कि सोनी जी फिर दरवाजे के बाहर बेल बजा रहे थे।
सरपंच साब ...
ओ सरपंच साब।
✍️कंचन राठौड़ "कुंदन"
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