Devendra Thory
Nothing Everywhere , Everywhere Everything �
12/02/2023
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Devendra Choudhary Public and government service
11/01/2022
वंदे मातरम
भारत के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग चुकी है और विभिन्न राजनीतिक दल अपने मुद्दों के साथ ही नहीं अपितु अन्य सत्ताधारी दलों की दाल का रंग बता रहे हैं चाहे वह रंग हो या कोई अन्य हो। चाहे वह उसकी गुणवत्ता को भी कमियां में ढालकर बता रहे हैं लेकिन विपक्ष ने आजतक यह हिम्मत नहीं की कि वो सत्ता दल के प्रयास जिनसे बदलाव हुआ हो , न केवल वर्तमानकाल के संदर्भ में अपितु भविष्य के लक्ष्यों जैसे भारत सरकार के अंतर्राष्ट्रीय सोलर एनर्जी संगठन संबंधी प्रयास से न केवल भारत को बल्कि सारे विश्व के लिए, आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन स्तर और शुद्ध पर्यावरण के प्रयास में भारत सफल हुआ था। आज जनता की उम्मीदों का भारत जिस जम्मू कश्मीर में धारा 370 को हटाने से अब जम्मू कश्मीर में न केवल भारतीय बल्कि संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश में विश्व की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा बनाने वाली कंपनी श्री नगर में 5 लाख वर्ग फिट का मॉल बनाने जा रही है। इससे साफ नजर आता है की पड़ोसी मुल्क ने केवल धार्मिक आधार पर जम्मू कश्मीर को अपने झगड़े में रखकर हड़पने की कोशिश की हैं लेकिन आज जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था को देखा जाए तो लगता है की वास्तव में यहां कुछ तो बदलाव हुआ है। पूर्व में जम्मू कश्मीर में अर्थव्यवस्था के क्या संसाधन थे वो आप जानते है लेकिन आज वहां 6 लाख से अधिक पर्यटक प्रतिवर्ष आएं तो यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है क्योंकि यह बदलाव उन भारतीयों के वोट का परिवर्तन हैं न की किसी चमत्कारिक उम्मीद का। बहुत से लोग अपने अपने दलों के कारण बड़ी बड़ी घटनाओं में उलझ जाते हैं। वो बिना किसी अपने हित साधे भी केवल अपनी अपनी बात रखने या मनवाने , लोगों को दिखावा करने या परिणाम के बाद खुशी इजहार करने की चाहत से अत्यंत ज्वलंत भाषा के साथ विचार रखते हैं। कभी कभी दो विपक्षी दलों के नेता मंत्रियों के बच्चों की आपस में शादी देखते हैं सुनते हैं तो कहते हैं की ये तो दोनों और से मिले हुए हैं हमारे लिए तीसरा विकल्प होना चाहिए। इसका कारण है की ऐसे विचारक उन नेताओं में परस्पर विरोधी स्वरूप को जीवंत देखना चाहते हैं। लेकिन नेताओं और अमूमन व्यवहारिक रूप से शिक्षित लोगों का विरोधी नजरिया तभी तक रहता है जब तक की प्रक्रियाधीन मुद्दे का इंतकाल ना हो जाए। अगर कोई चिंता का विषय है फिर भी दुखद घटना नहीं होने से पूर्व विपक्षी दलों को साजिश ही लगती हैं लेकिन उन्हें पता है की इतिहास में ऐसा हुआ है चाहे वह प्रधानमंत्री की सुरक्षा का सवाल ही हो। किसी मुद्दे पर देशवासियों का अनावशायक समय खराब न करने के बजाय नेता अपनी धाक जमाने में तो आम लोग उनके साथ हाय हाय में जुटे रहते हैं चाहे घर में ठंड, गर्मी, बरसात के दिन घर परिवार के सदस्यों का हाल क्या ही होता हो। बच्चो को शिक्षा से पहले अपनी नेतागिरी के विचारों से फलीभूत करना ताकि उन्हें लगे मेरी मां , मेरे पापा , दादा आदि ही सत्ता के हकदार है लेकिन अंततः इनका परिणाम घोषित होता है तो वह तीखा होता है। ये चुनाव सत्ता बदलने या सत्ता में आने के लिए नहीं है अपितु जनता के अपने इरादों को सफल करने के लिए एक पथ का नक्शा हैं। और इस पर भारत के सभी मतदाता अपने स्वाभिमान के साथ चलते हैं और अपने गोपनीय विचारों और आशाओं का बटन दबाते हैं।
जब नेता लोगों का झगड़ा चुनावों तक ही हैं तो आम जन का जो इन वोटों का संबंध अपने क्षेत्र, जिले, राज्य, देश की प्रगति और विकास के लिए देखे या पार्टी , संबंधी , अथवा किसी अन्य राग जगाने वाले घटनाक्रम के लिए मतदान करें।
आज महामारी के समय में भी कार्यकर्ता बनकर ऐसे घूम रहे हैं जैसे पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति में बंधा चांद घूम रहा हो। सभी मतदाताओं, राजनेताओं, राजनीतिक विश्लेषकों, पत्र संपादकों, दल प्रवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं से विनम्र निवेदन है की उस सीमा को पर पहरा रखना जहां मुद्दा हम भारतीयों का हो और उसमें अडंगा किसी पड़ोसी मुल्क के दिशाविहीन लोगों का नहीं हो। पड़ोसी मुल्क के नेता इसने महान है की वो वैज्ञानिकों से कई गुना ज्यादा प्रगती कर गए हैं उनके पास ऐसे हथियार है जो उनके समुदाय को बचा कर लक्षित लोगों को मारता हो वो भी परमाणु हथियार। ऐसा दुनिया में हमारे पड़ोसी मुल्क के अलावा किसी के पास नहीं है। इसलिए गैर जिम्मेदाराना विचार के लोगों और नेताओं के प्रति समर्पण करने से खुद बचे , अपनों को बचाएं। जब तक जीवन हैं जन कल्याण के कार्य करने का अवसर हैं इसमें क्या जाति और क्या धर्म? सभी भारतीय एक हैं और सभी प्रगति के माध्यम से दुनिया को संकेत दें की देश के लिए हम सभी भारतीय हैं इस मकसद से हमारी जाति और धर्म केवल भारतीय हैं।
ये मेरे अपने निजी विचार है आप इन्हें किस तरह से समझते हैं यह आपका मसला है। पाठक का जीवन शुभ हो। ©Devendra Thory
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10/04/2020
#भारत_सरकार_एवम्_सशस्त्र_सेना_बल_से_करबद्ध_निवेदन
विभिन्न प्रकार की सैन्य घटनाए दिन प्रतिदिन हो रही है और भारत के मीडिया के शर्मनाक कार्यों के कारण देश को नुकसान पहुंच रहा है क्योंकि इसमें भारत का मीडिया यह बताता है कि किस वस्तु का इस्तेमाल किया, कब किया , कहां से किया , आक्रमण में कोनसे शास्त्र उपयोग में लिए , आगे की क्या राय है , भारत का मीडिया झूठ से बचे और आपकी विनाशी बुद्घी के कारण देश में कुछ अनचाहे परिणाम आ रहे हैं जिसमे यहां की सारी जानकारी पाकिस्तान में और आतंकी केंद्र में जाती है और इसके कारण हमें नुकसान है
आप लोग बोलकर चले जाते हो लेकिन उन सैनिक भाईयो का भी सोचो जिनकी जिंदगी दांव पर है
आप केवल कह सकते हो कि हम देश के लिए गोली खा सकते है
क्या आज तक ऐसा हुआ है
सभी शहीद बंधुओ को नमन और जिंदगी भर सैनिकों का सम्मान करूंगा लेकिन मीडिया बंधुओ से नादान बालक के नाते इतनी प्रार्थना करता हूं कि आप हमारी सेना की सारी जानकारी को फॉलो नहीं करे, जानकारी की गोपनीयता आवश्यक है
देश के युवाओं से अपील है की कोरोना से बचाव के लिए आप योद्धा के तौर पर कार्य करें जो युवा शक्ति गांव में है किसी बाहरी व्यक्ति को प्रविष्ट नहीं होने देवे और जो योद्धा कोरोना से बचाव के लिए लगे हुए हैं उन्हें सहयोग करें
👉 डाक्टर और पुलिस कर्मियों के साथ बुरा बर्ताव नहीं करें प्लीज़ वो भी इस देश के लाल है उनका भी घर परिवार है जैसा आपके यहां है
👉 फिलहाल कई अस्पतालों में रक्त बैंक में रक्त की कमी है इसलिए रक्तदान महादान है रक्तदान करें
👉 देश की इस जीवन रूपी लड़ाई में राजनीति करने और किसी को दोष देने से बचें
👉 देश को सशक्त बनाने के लिए अपनी परियोजनाएं बनाएं और खुद को समृद्ध मानकर ऐसा समय भी लाए की परियोजनाओं को आप स्वयं आगे बढ़ा सकें
👉 युवा वर्ग जो शिक्षा के क्षेत्र में है समय का सदुपयोग करें और यह तय करें की सफलता से पहले कुछ मंजूर ही नहीं है
👉 जो साथी गावों में है अपने माता पिता के साथ घर और खेत के काम में परिवारजनों का सहयोग करें
👉 सोशल डिस्टेंचिंग बनाए रखें और घरों में ही रहे , आवश्यक कार्य हेतु ही सुरक्षित रूप से मास्क इत्यादि पहनकर घर से बाहर निकले
👉 देश में जिन स्थानों पर जल की बहुलता है कृपया पानी को मितव्यवता से उपयोग करें क्योंकि बहुत से हिस्सो में पेयजल की आपूर्ति भी नहीं हो पा रही है एवम् हाथ धोए लेकिन जल व्यर्थ नहीं बहाएं
ये मेरे अपने विचार हैं
Dev Choudhary
किसान की उम्मीद हूं मैं आश हूं मैं
किसान के खेत की किरण हूं मैं
जय जवान जय किसान
जय भारत जय भारत
13/02/2020
14 फ़रवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के शहीदों को विनम्रता पूर्वक श्रद्धांजलि
जय भारत माता
देश के जवान भिगोकर लहू में वर्दी कहानी दे गए अपनी,
मोहब्बत मुल्क की सच्ची निशानी दे गए अपनी,
मनाते रह गए वेलेंटाइन-डे यहां हम तुम,
वहां कश्मीर में सैनिक जवानी दे गए अपनी
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जन्म लिया जिस देश में मैने, हृदय से उसको नमन हो,
ख्वाहिश बस इतनी है मुझको, मरते वक़्त तिरंगा मेरा कफ़न हो।
10/01/2020
ताल्लुक़ कौन रखता है किसी नाकाम से लेकिन,
मिले जो कामयाबी सारे रिश्ते बोल पड़ते हैं,
मेरी खूबी पे रहते हैं यहां, अहल-ए-ज़बां ख़ामोश,
मेरे ऐबों पे चर्चा हो तो, गूंगे बोल पड़ते हैं।
Dev Choudhary
03/01/2020
किसान छात्रावास बाड़मेर में दिल्ली की महाराजा सूरजमल शिक्षण संस्थान के विख्यात शिक्षकजन बाड़मेर आए और बहुत सुंदर अध्यापन कार्य करवाया
आप सबका शुक्रिया
आपकी बाड़मेर से दिल्ली की और वापसी कुछ समय के लिए है
फिर मिलेंगे
आपकी यात्रा मंगलमय हो
डॉ श्याम सिंह तेवतिया
डॉ धरम वीर चौधरी
डॉ मदन मोहन गौड़
प्रणाम
31/12/2019
रफ्ता-रफ्ता वक्त बदल जाएगा।
कल नया साल आएगा, आने वाला साल टवन्टी-टवन्टी कहलाएगा।
आज ही हमारी शुभकामनाएं
लेलो,
वर्ना पहला नम्बर कोई और लें जाएगा।
आपकों और आपके सपरिवार
को
मेरी तरफ से आने वाले
नूतन वर्ष 2020 की
तहे दिल से हार्दिक शुभकामनाएं
🙏आपका शुभचिंतक 🙏
देवेन्द्र चौधरी
आप सभी हमेशा खुश रहे
30/12/2019
Some memories of ending 2019
29/12/2019
I met today with the IAS officer of Gujarat Cadre Ganga Singh, Ganga Singh ji said that there is nothing more than self confidence and with self confidence you can win the world and always live with grin. It is most important to use time. Study well. Thanks for greeting with me.
27/12/2019
#मिसाइल_मेन को नमन
आज ही के दिन देश रोया था
इसी दिन देश ने कलाम खोया था तो
विनम्र श्रद्धांजलि
Dr Abdul Pakir Jenuul Abdul kalam Aajad
26/12/2019
#सूर्य_ग्रहण एक तरह का ग्रहण है जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है तथा पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूर्ण अथवा आंशिक रूप से चन्द्रमा द्वारा आच्छादित होता है।
#ग्रहण एक खगोलीय अवस्था है जिसमें कोई खगोलिय पिंड जैसे ग्रह या उपग्रह किसी प्रकाश के स्रोत जैसे सूर्य और दूसरे खगोलिय पिंड जैसे पृथ्वी के बीच आ जाता है जिससे प्रकाश का कुछ समय के लिये अवरोध हो जाता है।
इनमें मुख्य रूप से पृथ्वी के साथ होने वाले ग्रहणों में निम्नलिखित उल्लेखनीय हैं:
चंद्रग्रहण - इस ग्रहण में चाँद या [चंद्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी आ जाती है। ऐसी स्थिती में चाँद पृथवी की छाया से होकर गुजरता है। ऐसा सिर्फ पूर्णिमा के दिन संभव होता है।
सूर्यग्रहण - इस ग्रहण में चंद्रमा सूर्य और पृथवी एक ही सीध में होते हैं और चाँद पृथवी और सूर्य के बीच होने की वजह से चंद्रमा की छाया पृथवी पर पड़ती है। ऐसा अक्सर अमावस्या के दिन होता है।
पूर्ण ग्रहण तब होता है जब खगोलिय पिंड जैसे पृथवी पर प्रकाश पूरी तरह अवरुद्ध हो जाये।
आंशिक ग्रहण की स्थिती में प्रकाश का स्रोत पूरी तरह अवरुद्ध नहीं होता
#पूर्ण_ग्रहण
भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चाँद पृथ्वी की। कभी-कभी चाँद, सूरज और धरती के बीच आ जाता है। फिर वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे धरती पर साया फैल जाता है। इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। यह घटना सदा सर्वदा अमावस्या को ही होती है।
ग्रहण प्रकृ्ति का एक अद्भुत चमत्कार है। ज्योतिष के दृष्टिकोण से यदि देखा जाए तो अभूतपूर्व अनोखा, विचित्र ज्योतिष ज्ञान, ग्रह और उपग्रहों की गतिविधियाँ एवं उनका स्वरूप स्पष्ट करता है। सूर्य ग्रहण (सूर्योपराग) तब होता है, जब सूर्य आंशिक अथवा पूर्ण रूप से चन्द्रमा द्वारा आवृ्त (व्यवधान / बाधा) हो जाए। इस प्रकार के ग्रहण के लिए चन्दमा का पृथ्वी और सूर्य के बीच आना आवश्यक है। इससे पृ्थ्वी पर रहने वाले लोगों को सूर्य का आवृ्त भाग नहीं दिखाई देता है।
सूर्यग्रहण होने के लिए निम्न शर्ते पूरी होनी आवश्यक है।
अमावस्या होनी चाहिये।
चन्दमा का रेखांश राहू या केतु के पास होना चाहिये।
चन्द्रमा का अक्षांश शून्य के निकट होना चाहिए।[1]
उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से मिलाने वाली रेखाओं को रेखांश कहा जाता है तथा भूमध्य रेखा के चारो वृ्ताकार में जाने वाली रेखाओं को अंक्षाश के नाम से जाना जाता है। सूर्य ग्रहण सदैव अमावस्या को ही होता है। जब चन्द्रमा क्षीणतम हो और सूर्य पूर्ण क्षमता संपन्न तथा दीप्त हों। चन्द्र और राहू या केतु के रेखांश बहुत निकट होने चाहिए। चन्द्र का अक्षांश लगभग शून्य होना चाहिये और यह तब होगा जब चंद्र रविमार्ग पर या रविमार्ग के निकट हों, सूर्य ग्रहण के दिन सूर्य और चन्द्र के कोणीय व्यास एक समान होते हैं। इस कारण चन्द सूर्य को केवल कुछ मिनट तक ही अपनी छाया में ले पाता है। सूर्य ग्रहण के समय जो क्षेत्र ढक जाता है उसे पूर्ण छाया क्षेत्र कहते हैं।
चन्द्रमा द्वारा सूर्य के बिम्ब के पूरे या कम भाग के ढ़के जाने की वजह से सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं जिन्हें पूर्ण सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण व वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं।
1. पूर्ण सूर्य ग्रहण
उत्तरी अमरीका से लिया गया पूर्ण सुर्य ग्रहण का दृश्य
पूर्ण सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफ़ी पास रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है और चन्द्रमा पूरी तरह से पृ्थ्वी को अपने छाया क्षेत्र में ले ले फलस्वरूप सूर्य का प्रकाश पृ्थ्वी तक पहुँच नहीं पाता है और पृ्थ्वी पर अंधकार जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है तब पृथ्वी पर पूरा सूर्य दिखाई नहीं देता। इस प्रकार बनने वाला ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण कहलाता है।[2]
2. आंशिक सूर्य ग्रहण
आंशिक सूर्यग्रहण में जब चन्द्रमा सूर्य व पृथ्वी के बीच में इस प्रकार आए कि सूर्य का कुछ ही भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है अर्थात चन्दमा, सूर्य के केवल कुछ भाग को ही अपनी छाया में ले पाता है। इससे सूर्य का कुछ भाग ग्रहण ग्रास में तथा कुछ भाग ग्रहण से अप्रभावित रहता है तो पृथ्वी के उस भाग विशेष में लगा ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण कहलाता है।
3. वलयाकार सूर्य ग्रहण
वलयाकार सूर्य ग्रहण में जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफ़ी दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है अर्थात चन्द्र सूर्य को इस प्रकार से ढकता है, कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है और पृथ्वी से देखने पर चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता बल्कि सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता दिखाई देता है। कंगन आकार में बने सूर्यग्रहण को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहलाता है।
#वैज्ञानिक_दृष्टिकोण_ग्रहण_के_संदर्भ_में
चाहे ग्रहण का कोई आध्यात्मिक महत्त्व हो अथवा न हो किन्तु दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए यह अवसर किसी उत्सव से कम नहीं होता। क्यों कि ग्रहण ही वह समय होता है जब ब्राह्मंड में अनेकों विलक्षण एवं अद्भुत घटनाएं घटित होतीं हैं जिससे कि वैज्ञानिकों को नये नये तथ्यों पर कार्य करने का अवसर मिलता है। 1968 में लार्कयर नामक वैज्ञानिक नें सूर्य ग्रहण के अवसर पर की गई खोज के सहारे वर्ण मंडल में हीलियम गैस की उपस्थिति का पता लगाया था। आईन्स्टीन का यह प्रतिपादन भी सूर्य ग्रहण के अवसर पर ही सही सिद्ध हो सका, जिसमें उन्होंने अन्य पिण्डों के गुरुत्वकर्षण से प्रकाश के पडने की बात कही थी। चन्द्रग्रहण तो अपने संपूर्ण तत्कालीन प्रकाश क्षेत्र में देखा जा सकता है किन्तु सूर्यग्रहण अधिकतम 10 हजार किलोमीटर लम्बे और 250 किलोमीटर चौडे क्षेत्र में ही देखा जा सकता है। सम्पूर्ण सूर्यग्रहण की वास्तविक अवधि अधिक से अधिक 11 मिनट ही हो सकती है उससे अधिक नहीं। संसार के समस्त पदार्थों की संरचना सूर्य रश्मियों के माध्यम से ही संभव है। यदि सही प्रकार से सूर्य और उसकी रश्मियों के प्रभावों को समझ लिया जाए तो समस्त धरा पर आश्चर्यजनक परिणाम लाए जा सकते हैं। सूर्य की प्रत्येक रश्मि विशेष अणु का प्रतिनिधित्व करती है और जैसा कि स्पष्ट है, प्रत्येक पदार्थ किसी विशेष परमाणु से ही निर्मित होता है। अब यदि सूर्य की रश्मियों को पूंजीभूत कर एक ही विशेष बिन्दु पर केन्द्रित कर लिया जाए तो पदार्थ परिवर्तन की क्रिया भी संभव हो सकती है।
Dev Choudhary
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