Dhamma

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Full name Dhammadeep Gautam, from Gothawn, Azamgarh. Founder / President at The Dhamma Global Foundat

31/10/2021

"जब हम अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, तो हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि सबसे ऊँची प्रशंसा शब्दों को बोलना नहीं, बल्कि उनके अनुरूप जीना है।"

जॉन एफ़. केनेडी (1917-1963) अमेरिका के 35वें राष्ट्रपति

31/10/2021

लाओ त्सू ने कहा था कि यदि आप वर्तमान परिस्थितियों में आनंदित रहते हैं, तो पूरा संसार आपके क़दमों में बिछा होगा।

29/08/2021
Photos from Buddhism For World Peace And Humanity's post 16/08/2021
16/08/2021

आर्ये अष्टांगिक मार्ग सुत्त

एक समय भगवान श्रावस्ती में अनाथपिण्डक के बनाये आराम जेतवन में विहार करते थे l
वहाँ भगवान ने भिक्षुओ को आमंत्रित किया ,
भिक्षुओ ! आर्ये अष्टांगिक मार्ग का विभाग कर उपदेश करुँगा l उसे सुनो...
भदन्त ! कह कर उन भिक्षुओ ने भगवान का उत्तर दिया।
भगवान बोले, भिक्षुओ आर्ये अष्टांगिक मार्ग क्या हैं ? यही जो सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प , सम्यक वचन , सम्यक कर्मान्त , सम्यक आजीव , सम्यक व्ययाम , सम्यक स्मृति , सम्यक समाधी।

भिक्षुओ सम्यक दृष्टि क्या हैं ?
भिक्षुओ ! दुःख का ज्ञान, दुःख के समुदय का ज्ञान, दुःख के निरोध का ज्ञान, दुःख के निरोध गामी मार्ग का ज्ञान,यही सम्यक दृष्टि कही जाती हैं।

भिक्षुओ सम्यक संकल्प क्या हैं ?
भिक्षुओ ! जो त्याग का संकल्प तथा वैर और हिंसा से विरत रहने का संकल्प हैं यही सम्यक संकल्प कहा जाता हैं।

भिक्षुओ सम्यक वचन क्या हैं ?
भिक्षुओ ! जो झूठ, चुगली, कटु-भाषण और गप्प हाँकने से विरत रहना है यही सम्यक वचन कहा जाता हैं।

भिक्षुओ सम्यक कर्मान्त क्या हैं ?
भिक्षुओ ! जो जीव हिंसा ,चोरी और अब्रह्म्चर्ये से विरत रहने का संकल्प हैं यही सम्यक कर्मान्त कहा जाता हैं।

भिक्षुओ सम्यक आजीव क्या हैं ?
भिक्षुओ ! आर्ये श्रावक मिथ्या आजीव को छोड़ सम्यक आजीव से अपनी जीवका चलाता है यही सम्यक आजीव कहा जाता हैं।

भिक्षुओ सम्यक व्ययाम क्या हैं ?
भिक्षुओ ! भिक्षु अनुत्पन्न पापमय अकुशल धर्मो के अनुत्पाद के लिए (जिसमे वे उत्पन न हो सके) इच्छा करता हैं, प्रयास करता हैं, उत्साह करता हैं, मन लगता हैं।
उत्पन पापमय अकुशल धर्मो के प्रहाण के लिए इच्छा करता हैं, प्रयास करता हैं, उत्साह करता हैं, मन लगता हैं।
अनुत्पन्न कुशल धर्मो के उत्पाद के लिए (जिसमे वे उत्पन हो सके) इच्छा करता हैं, प्रयास करता हैं, उत्साह करता हैं, मन लगता हैं।
उत्पन कुशल धर्मो की स्थिति, वृद्धि व् पूर्ण करने के लिए इच्छा करता हैं, प्रयास करता हैं, उत्साह करता हैं, मन लगता हैं। इसी को कहते हैं सम्यक व्ययाम।

भिक्षुओ सम्यक स्मृति क्या हैं ?
भिक्षुओ ! भिक्षु काया में कायानुपश्यी होकर विहार करता हैं, क्लेशो को तपाते हुये, संप्रज्ञ, स्मृतिमान हो संसार में लोभ और दौर्मनस्ये को दबा कर।
भिक्षु वेदना में वेदनानुपश्यी होकर विहार करता हैं, क्लेशो को तपाते हुये, संप्रज्ञ, स्मृतिमान हो संसार में लोभ और दौर्मनस्ये को दबा कर।
भिक्षु चित में चितनुपश्यी होकर विहार करता हैं, क्लेशो को तपाते हुये, संप्रज्ञ, स्मृतिमान हो संसार में लोभ और दौर्मनस्ये को दबा कर।
भिक्षु धर्मो में धर्मोनुपश्यी होकर विहार करता हैं, क्लेशो को तपाते हुये, संप्रज्ञ, स्मृतिमान हो संसार में लोभ और दौर्मनस्ये को दबा कर।

भिक्षुओ सम्यक समाधी क्या हैं ?
भिक्षुओ ! भिक्षु काम और अकुशल धर्मो से हट, वितर्क और विचार वाले, विवेक से उत्पन प्रीतिसुख वाले प्रथम ध्यान को प्राप्त हो विहार करता हैं।
भिक्षु वितर्क और विचार के शांत हो जाने से, अध्यात्म प्रसाद वाले, चित की एकाग्रता वाले, वितर्क और विचार से रहित, समाधी से उत्पन प्रीति सुख वाले दुितीये ध्यान को प्राप्त हो विहार करता हैं।
भिक्षु प्रीति से विरक्त हो उपेक्षा पूर्वक विहार करता हैं, स्मृतिमान और संप्रज्ञ हो शरीर से सुख का अनुभव करता हैं। जिसे पंडित लोग कहते है स्मृतिमान हो उपेक्षा पूर्वक सुख से विहार करना , इसे तृतीय ध्यान कहते है।
भिक्षु सुख और दुःख के प्रहाण हो जाने से, पहले ही सौमनस्ये और दौर्मनस्ये के अस्त हो जाने से सुख और दुःख से रहित, उपेक्षा और स्मृति की परिशुद्धि वाले चतुर्थ ध्यान को प्राप्त कर विहार करता है , भिक्षुओ इसी को कहते है सम्यक समाधी।

८ विभंग सुत्त ४३ १ ८ ,आर्ये अष्टांगिक मार्ग ( संयुक्त निकाय )

11/08/2021

Buddhism in Sri Lanka.

The Theravada Buddhism is the largest and official religion of Sri Lanka, practiced by 70.2 percent of the population as of 2012.

Practitioners of Sri Lankan Buddhism can be found amongst the majority Sinhalese population as well as among the minority ethnic groups.

Buddhism has been given the foremost place under Article 9 of the Sri Lankan Constitution which can be traced back to an attempt to bring the status of Buddhism back to the status it enjoyed prior to the colonial era. However, by virtue of Article 10 of the Sri Lankan constitution, the religious rights of all communities are preserved. Sri Lanka is one of the oldest traditionally Buddhist countries.

The island has been a center of Buddhist scholarship and practices since the introduction of Buddhism in the third century BCE producing eminent scholars such as Buddhaghosa and preserving the vast Pāli Canon. Throughout most of its history, Sri Lankan kings have played a major role in the maintenance and revival of the Buddhist institutions of the island. During the 19th century, a modern Buddhist revival took place on the island which promoted Buddhist education. Due to the island's close ties with India, Sinhalese Buddhism has been in part influenced by Hinduism and indigenous beliefs, and some Buddhists share similar beliefs with Hindus, such as the worship of Hindu deities, the caste system, and Animism. Some traditional Sinhalese Temple layout also includes individual shrines dedicated to Hindu gods. Some of the most important Hindu gods worshiped by some Sinhalese Buddhists include Vishnu, Murugan, Pathini, Nata, Gambara, Dedimunda, Saraswati, Ganesh, Lakshmi, Shiva, and Kali, etc. Demons and spirits are also invoked during Exorcisms and rituals, which seem to be customs passed down from Pre-Buddhist indigenous times. Proselytizing from Buddhism is illegal in Sri Lanka, however, the act of converting into Buddhism is highly encouraged by the government. In 2007, there were around 60,000 Buddhist monasteries in Sri Lanka with approximately 300,000 monks.

02/08/2021

The beautiful Wat Asokaram Monastery in Samuth Prakan Province, Thailand.

Timeline photos 14/06/2021
22/05/2021

आकांक्षाएं ही दुख का कारण!

इच्छाएं दरिद्र बनाती हैं। उनसे ही याचना और दासता पैदा होती है। फिर, उनका कोई अंत भी नहीं है। जितना उन्हें छोड़ो, उतना ही व्यक्ति स्वतंत्र और समृद्ध होता है। जो कुछ भी नहीं चाहता है, उसकी स्वतंत्रता अनंत हो जाती है।
एक संन्यासी के पास कुछ रुपए थे। उसने कहा कि वह उन्हें किसी गरीब आदमी को देना चाहता है। बहुत से गरीब लोगों ने उसे घेर लिया और उससे रुपयों की याचना की। उसने कहा, ''मैं अभी देता हूं- मैं अभी उसे रुपये दिए देता हूं, जो कि इस जगत में सबसे ज्यादा गरीब और भूखा है!'' यह कहकर संन्यासी भीतर गया। तभी, लोगों ने देखा कि राजा की सवारी आ रही है। वे उसे देखने में लग गए। इसी बीच संन्यासी बाहर आया और उसने रुपये हाथी पर बैठे राजा के पास फेंक दिए। राजा ने चकित हो, इसका कारण पूछा। फिर लोगों ने भी कहा कि आप तो कहते थे कि मैं रुपये सर्वाधिक दरिद्र को दूंगा! संन्यासी ने हंसते हुए कहा, ''मैंने उन्हें दरिद्रतम् व्यक्ति को ही दिए हैं। वह जो धन की भूख में सबसे आगे है, क्या वह सर्वाधिक गरीब नहीं है?''
दुख क्या है? कुछ पाने की और कुछ होने की आकांक्षा ही दुख है। दुख कोई नहीं चाहता, लेकिन आकांक्षाएं हों, तो दुख बना ही रहेगा। किंतु, जो आकांक्षाओं के स्वरूप को समझ लेता है, वह दुख से नहीं, वह आकांक्षाओं से ही मुक्ति खोजता है। और, तब दुख के आगमन का द्वार अपने आप ही बंद हो जाता है।

-- सदगुरु ओशो द्वारा लिखित पत्र, ‘पथ के प्रदीप’ नामक पुस्तक से संकलित

07/05/2021

मनोपुब्बंगमा धम्मा - मनोसेट्ठा मनोमया
मनसा चे पदुट्ठेन - भासति वा करोति वा
ततो नं दुक्खमन्वेति - चक्कंव वहतो पदं।

इस जीवन में सभी अकुशल के लिए मन हीं मूल होता है। मन हीं मुख्य होता है। सभी अकुशल विचार मन से हीं उत्पन्न होता है। अगर जो कोई बुरे मन से वाणी से कुछ बोलेगा या शरीर से कुछ कर्म करेगा तो दुख उसके पीछे-पीछे ठिक वैसे हीं आता है जैसे बैलगाड़ी के चक्के, बैल के पीछे-पीछे आता है।

- भगवान गौतम बुद्ध -

Dhammapada Yamaka Vagga Chanting Video on YouTube 👉 https://youtu.be/E5U5EhrNsPY

All actions in this life are preceded by mind. Mind is their chief. They are made by mind. If one speaks or acts with an impure mind, suffering follows one like the wagon wheel that follows the foot of the ox.


👍 Buddha Rashmi - बुद्ध रश्मि

Dhammadeep Gautam on Twitter 07/08/2020

Dhammadeep Gautam on Twitter “अगर आप समय पर अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करते हैं तो आप एक और गलती कर बैठते हैं। आप अपनी गलतियों से तभी सीख सकते ह....

Dhammadeep Gautam on Twitter 07/08/2020

Dhammadeep Gautam on Twitter “भरोसा और आशीर्वाद कभी दिखाई नही देते, लेकिन असम्भव को सम्भव बना देते है। माली प्रतिदिन पौधों को पानी देता है, मगर फ...

26/04/2020

ऊंचे कुल का जनमिया, करणी ऊंच न होइ। स्वर्ण कलश सुरा भरा, साधु निंदा सोई।।

Photos from The Land Of Buddha's post 16/04/2020
Photos from 𝐁𝐮𝐝𝐝𝐡𝐢𝐬𝐦 𝐈𝐬 𝐓𝐡𝐞 𝐑𝐞𝐚𝐥 𝐖𝐚𝐲 𝐎𝐟  𝐋𝐢𝐟𝐞's post 06/02/2019
06/02/2019

बहुत सुन्दर लेख है

एक व्यक्ति रोज बौद्ध विहार जाता था ! एक दिन उस व्यक्ति ने भंते से कहा अब मैं बौद्ध विहार नही आया करूँगा !
इस पर भंते ने पूछा -- क्यों ?

तब व्यक्ति बोला -- मैं देखता हूँ लोग बौद्ध विहार परिसर में अपने फोन से अपने व्यापार की बात करते हैं ! कुछ ने तो बौद्ध विहार को ही गपशप करने का स्थान चुन रखा है ! कुछ वंदना कम पाखंड, दिखावा ज्यादा करते हैं !

इस पर भंते कुछ देर तक चुप रहे फिर कहा -- सही है ! परंतु अपना अंतिम निर्णय लेने से पहले क्या आप मेरे कहने से कुछ कर सकते हैं !

वह व्यक्ति बोला - आप बताइए क्या करना है ?

भंते ने कहा -- एक जलती मोमबत्ती लीजिए और 2 बार बौद्ध विहार परिसर के अंदर परिक्रमा लगाइए। शर्त ये है कि मोमबत्ती बुझानी नहीं चाहिये !

वह व्यक्ति बोला -- मैं ऐसा कर सकता हूँ !

फिर थोड़ी ही देर में उस व्यक्ति ने ऐसा ही कर दिखाया ! उसके बाद बौद्ध विहार के भंते ने उस व्यक्ति से 3 सवाल पूछे -

1- क्या आपने किसी को फोन पर बात करते देखा?

2- क्या आपने किसी को विहार में गपशप करते देखा?

3- क्या किसी को पाखंड करते देखा?

व्यक्ति बोला -- नहीं मैंने कुछ भी नहीं देखा !

फिर भंते बोले --- जब आप परिक्रमा लगा रहे थे तो आपका पूरा ध्यान जलती मोमबत्ती पर था कि मोमबत्ती बुझ न जाए इसलिए आपको कुछ दिखाई नहीं दिया।

अब जब भी आप बौद्ध विहार आयें तो अपना पुरा ध्यान सिर्फ़ भगवान गौतम बुद्ध के धम्म में ही लगाना फिर आपको कुछ दिखाई नहीं देगा। सिर्फ धम्म ही सर्वत्र दिखाई देगें।



जीवन मे दुःखो के लिए कौन जिम्मेदार है ?

👉🏻 ना भगवान,
👉🏻 ना गृह-नक्षत्र,
👉🏻 ना भाग्य,
👉🏻 ना रिश्तेदार,
👉🏻 ना पडोसी,
👉🏻 ना सरकार,

जिम्मेदार आप स्वयं है।

1) आपका सरदर्द, फालतू विचार का परिणाम।

2) पेट दर्द, गलत खाने का परिणाम।

3) आपका कर्ज, जरूरत से ज्यादा खर्चे का परिणाम।

4) आपका दुर्बल/मोटा/बीमार शरीर, गलत जीवन शैली का परिणाम।

5) आपके कोर्ट केस, आप के अहंकार का परिणाम।

6) आपके फालतू विवाद, ज्यादा व् व्यर्थ बोलने का परिणाम।

उपरोक्त कारणों के अलावा सैकड़ों कारण है और बेवजह दोषारोपण दूसरों पर करते रहते हैं। इसमें धम्म दोषी नहीं है।
अगर हम इन कष्टों के कारणों पर बारिकी से विचार करें तो पाएंगे की कहीं न कहीं हमारी मूर्खताएं, अशिक्षा, अंधविश्वास, जाति-प्रथा ही इनके मुख्य कारण है।

(Copyright)

जब दुनिया ने ठीक से जीना नहीं सीखा था, तब नालंदा ने पढ़ना सिख लिया था 06/02/2019

जब दुनिया ने ठीक से जीना नहीं सीखा था, तब नालंदा ने पढ़ना सिख लिया था नालंदा यूनिवर्सिटी को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्ज़ा दिया गया। यह दुनिया की सबसे प्राचीन रेज़िडे....

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